आज के समय में स्मार्टफोन लोगों की जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है। कॉलिंग, इंटरनेट और मैसेजिंग जैसी सुविधाओं के लिए हम पूरी तरह मोबाइल नेटवर्क पर निर्भर रहते हैं। लेकिन अक्सर ऐसा देखा जाता है कि जैसे ही कोई व्यक्ति लिफ्ट में प्रवेश करता है, फोन के सिग्नल अचानक कम हो जाते हैं या पूरी तरह गायब हो जाते हैं। ऐसे में कॉल करना या इंटरनेट चलाना मुश्किल हो जाता है।
असल में मोबाइल फोन नेटवर्क के लिए रेडियो फ्रीक्वेंसी पर आधारित इलेक्ट्रोमैग्नेटिक सिग्नल का इस्तेमाल करते हैं। ये सिग्नल खुले वातावरण में आसानी से फैलते हैं, लेकिन जब इनके रास्ते में मोटी और धातु से बनी संरचनाएं आती हैं तो इनकी ताकत काफी कम हो जाती है।
लिफ्ट की संरचना ही ऐसी होती है जो मोबाइल सिग्नल को अंदर पहुंचने से रोक देती है। ज्यादातर लिफ्ट मोटी कंक्रीट की दीवारों वाले शाफ्ट में चलती हैं और उनका केबिन स्टेनलेस स्टील या अन्य धातु से बना होता है। धातु की ये परतें रेडियो सिग्नल को अंदर जाने से रोक देती हैं या उन्हें वापस परावर्तित कर देती हैं। इसी वजह से लिफ्ट के अंदर नेटवर्क कमजोर या पूरी तरह बंद हो जाता है।
इसके अलावा लिफ्ट के केबिन में कई बार इंटीरियर डिजाइन के लिए टाइल्स, लैमिनेट, कालीन या अन्य सजावटी सामग्री का इस्तेमाल किया जाता है। ये अतिरिक्त परतें भी सिग्नल को कमजोर करने में भूमिका निभाती हैं। इस तरह लिफ्ट का बंद और धातु से घिरा ढांचा मोबाइल नेटवर्क के लिए एक तरह की बाधा बन जाता है।
कुछ इमारतों में नेटवर्क बूस्टर लगाए जाते हैं, जो सिग्नल को मजबूत करने में मदद कर सकते हैं। हालांकि लिफ्ट शाफ्ट के अंदर सिग्नल पहुंचाना तकनीकी रूप से चुनौतीपूर्ण होता है। यदि लिफ्ट इमारत के बाहरी हिस्से के करीब हो या शाफ्ट में कई लिफ्ट मौजूद हों, तो बूस्टर कुछ हद तक बेहतर काम कर सकता है।
ऐसी स्थिति में अगर लिफ्ट के अंदर मोबाइल सिग्नल न मिलें तो घबराने की जरूरत नहीं है। लिफ्ट से बाहर निकलते ही नेटवर्क सामान्य हो जाता है और आप कॉल या इंटरनेट का उपयोग कर सकते हैं। वहीं किसी आपात स्थिति में लिफ्ट में मौजूद इमरजेंसी इंटरकॉम या अलार्म बटन की मदद से सहायता प्राप्त की जा सकती है।




