हिमाचल प्रदेश में प्राकृतिक आपदाओं के कारण क्षतिग्रस्त हुए सरकारी स्कूलों के पुनर्वास और मरम्मत का कार्य अब तेज़ी पकड़ने जा रहा है। केंद्र सरकार से प्राप्त वित्तीय सहायता के बाद राज्य के हजारों विद्यार्थियों और शिक्षकों को राहत मिलने की उम्मीद जगी है। प्रदेश के 1678 सरकारी स्कूल भवन, जो बीते वर्षों में भूस्खलन, भारी बारिश, बादल फटने और अन्य प्राकृतिक आपदाओं की चपेट में आकर प्रभावित हुए थे, अब जल्द ही फिर से सुरक्षित और व्यवस्थित रूप में दिखाई देंगे।
केंद्र सरकार ने पोस्ट डिजास्टर नीड्स असेसमेंट (PDNA) योजना के तहत हिमाचल प्रदेश को 49 करोड़ रुपये की पहली किस्त जारी की है। इस राशि का उपयोग उन स्कूल भवनों की मरम्मत और पुनर्निर्माण में किया जाएगा, जिन्हें वर्ष 2023 और 2025 के दौरान आई प्राकृतिक आपदाओं में नुकसान पहुंचा था। राज्य सरकार ने इन नुकसानों की भरपाई के लिए केंद्र से आर्थिक सहायता की मांग की थी, जिसके बाद यह बजट स्वीकृत किया गया।
शिक्षा व्यवस्था को पटरी पर लाने की दिशा में अहम कदम
आपदा प्रभावित क्षेत्रों में कई स्कूल ऐसे हैं जहां विद्यार्थियों की पढ़ाई लंबे समय से प्रभावित हो रही है। कहीं कक्षाओं की दीवारें क्षतिग्रस्त हैं तो कहीं छतें असुरक्षित हो चुकी हैं। कुछ स्कूलों में शौचालय, प्रयोगशालाएं और अन्य बुनियादी सुविधाएं भी खराब हो गई थीं। ऐसे में शिक्षा विभाग का मानना है कि मरम्मत कार्य पूरा होने के बाद विद्यार्थियों को बेहतर और सुरक्षित शैक्षणिक वातावरण मिल सकेगा।
केंद्र से राशि प्राप्त होने के तुरंत बाद शिक्षा विभाग ने यह बजट हिमाचल प्रदेश आवास एवं शहरी विकास प्राधिकरण (हिमुडा) को जारी कर दिया है। हिमुडा को सभी मरम्मत और पुनर्निर्माण कार्यों को समयबद्ध तरीके से पूरा करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
प्रभावित स्कूलों का प्राथमिकता के आधार पर होगा आकलन
शिक्षा विभाग ने हिमुडा को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि जिन स्कूलों को सबसे अधिक नुकसान हुआ है, वहां प्राथमिकता के आधार पर काम शुरू किया जाए। इसके लिए प्रभावित भवनों का विस्तृत सर्वेक्षण और तकनीकी मूल्यांकन किया जाएगा, ताकि मरम्मत की वास्तविक आवश्यकता के अनुसार कार्ययोजना तैयार की जा सके।
अधिकारियों का कहना है कि कई स्कूल भवनों में केवल आंशिक मरम्मत की जरूरत है, जबकि कुछ स्थानों पर पुनर्निर्माण की आवश्यकता है। ऐसे मामलों में सुरक्षा मानकों को ध्यान में रखते हुए नए ढांचे तैयार किए जाएंगे, ताकि भविष्य में प्राकृतिक आपदाओं के प्रभाव को कम किया जा सके।
अस्थायी कक्षाओं में पढ़ने को मजबूर हैं विद्यार्थी
प्रदेश के कई जिलों में आपदा प्रभावित स्कूलों के छात्र फिलहाल अस्थायी कक्षाओं, सामुदायिक भवनों या वैकल्पिक व्यवस्थाओं में पढ़ाई कर रहे हैं। कई जगहों पर एक ही कक्षा में अलग-अलग कक्षाओं के विद्यार्थियों को बैठाकर पढ़ाया जा रहा है, जिससे शैक्षणिक गुणवत्ता भी प्रभावित हो रही है।
शिक्षा विभाग का मानना है कि स्कूल भवनों की मरम्मत पूरी होने के बाद विद्यार्थियों को फिर से नियमित और बेहतर शैक्षणिक माहौल मिलेगा। इससे न केवल पढ़ाई की गुणवत्ता सुधरेगी, बल्कि बच्चों की सुरक्षा को लेकर अभिभावकों की चिंताएं भी कम होंगी।
49 करोड़ की राशि से शुरू होगा पहला चरण
राज्य सरकार को फिलहाल केंद्र से 49 करोड़ रुपये की राशि प्राप्त हुई है। यह धनराशि पुनर्वास कार्यों के पहले चरण के लिए उपयोग में लाई जाएगी। विभागीय अधिकारियों के अनुसार, अभी भी लगभग 60 करोड़ रुपये की अतिरिक्त सहायता केंद्र से मिलनी बाकी है।
शेष राशि प्राप्त होने के बाद दूसरे चरण के कार्यों को भी गति दी जाएगी। इसमें उन स्कूलों को शामिल किया जाएगा जिनकी मरम्मत और पुनर्निर्माण के लिए अधिक बजट की आवश्यकता है। सरकार को उम्मीद है कि लंबित राशि भी जल्द जारी हो जाएगी, जिससे सभी प्रभावित स्कूलों में आवश्यक सुधार कार्य पूरे किए जा सकेंगे।
2023 और 2025 की आपदाओं ने पहुंचाया भारी नुकसान
हिमाचल प्रदेश पिछले कुछ वर्षों से लगातार प्राकृतिक आपदाओं का सामना कर रहा है। भारी वर्षा, भूस्खलन और बादल फटने जैसी घटनाओं ने राज्य के बुनियादी ढांचे को व्यापक नुकसान पहुंचाया है। शिक्षा क्षेत्र भी इससे अछूता नहीं रहा।
वर्ष 2023 में आई प्राकृतिक आपदाओं के दौरान 239 स्कूल भवन प्रभावित हुए थे। इसके बाद वर्ष 2025 में आपदाओं ने और अधिक तबाही मचाई, जिसमें 1439 स्कूल भवनों को नुकसान पहुंचा। इस प्रकार दोनों वर्षों को मिलाकर कुल 1678 सरकारी स्कूल प्रभावित हुए।
इन स्कूलों में कक्षाओं की दीवारें दरक गईं, छतों को नुकसान पहुंचा, खेल मैदान प्रभावित हुए और कई स्थानों पर भवनों की संरचनात्मक मजबूती पर भी सवाल खड़े हो गए। कुछ स्कूलों को सुरक्षा कारणों से अस्थायी रूप से बंद तक करना पड़ा था।
सुरक्षित और आधुनिक ढांचे पर रहेगा फोकस
मरम्मत और पुनर्निर्माण के दौरान केवल पुराने ढांचे को ठीक करने तक ही सीमित नहीं रहा जाएगा, बल्कि भवनों को अधिक सुरक्षित और टिकाऊ बनाने पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा। विशेषज्ञों की मदद से ऐसे निर्माण मानकों को अपनाया जाएगा जो भविष्य में संभावित प्राकृतिक आपदाओं का बेहतर सामना कर सकें।
राज्य सरकार चाहती है कि पुनर्निर्मित स्कूल केवल कार्यात्मक ही नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के लिए सुरक्षित और आधुनिक सुविधाओं से युक्त भी हों। इसके तहत कक्षाओं, शौचालयों, पेयजल सुविधाओं और अन्य बुनियादी ढांचों को भी आवश्यकता अनुसार सुधारा जाएगा।
शिक्षा विभाग की निगरानी में होगा कार्य
निदेशक स्कूल शिक्षा आशीष कोहली ने पुष्टि की है कि केंद्र से प्राप्त राशि को संबंधित एजेंसी को जारी कर दिया गया है और जल्द ही विभिन्न जिलों में कार्य शुरू कर दिए जाएंगे। उन्होंने कहा कि विभाग पूरी प्रक्रिया की नियमित निगरानी करेगा ताकि निर्माण कार्य गुणवत्ता मानकों के अनुरूप हो और तय समय सीमा के भीतर पूरा किया जा सके।
अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि प्रत्येक परियोजना की प्रगति पर नजर रखी जाए और किसी भी प्रकार की देरी या तकनीकी समस्या का तत्काल समाधान किया जाए। सरकार का उद्देश्य है कि विद्यार्थियों को जल्द से जल्द सुरक्षित स्कूल भवन उपलब्ध कराए जाएं।
ग्रामीण क्षेत्रों को मिलेगा सबसे अधिक लाभ
आपदा से प्रभावित अधिकांश स्कूल ग्रामीण और पर्वतीय क्षेत्रों में स्थित हैं, जहां पहुंच और संसाधनों की सीमाएं पहले से मौजूद हैं। ऐसे इलाकों में स्कूल भवनों का नुकसान शिक्षा व्यवस्था पर सीधा असर डालता है। इसलिए इन क्षेत्रों को प्राथमिकता देते हुए मरम्मत कार्य किए जाएंगे।
विशेषज्ञों का मानना है कि स्कूलों का पुनर्निर्माण केवल शिक्षा क्षेत्र के लिए ही नहीं, बल्कि स्थानीय समुदायों के लिए भी महत्वपूर्ण है। कई ग्रामीण क्षेत्रों में स्कूल भवन सामाजिक और सामुदायिक गतिविधियों का केंद्र भी होते हैं। ऐसे में इनके पुनर्स्थापन से पूरे क्षेत्र को लाभ मिलेगा।
विद्यार्थियों के बेहतर भविष्य की ओर कदम
राज्य सरकार और शिक्षा विभाग का मानना है कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए सुरक्षित और मजबूत स्कूल भवन अत्यंत आवश्यक हैं। केंद्र से मिली सहायता के माध्यम से अब उन स्कूलों को नई पहचान देने का प्रयास किया जाएगा जो प्राकृतिक आपदाओं के कारण प्रभावित हुए थे।
1678 स्कूल भवनों की मरम्मत और पुनर्निर्माण की यह योजना न केवल बुनियादी ढांचे को मजबूत करेगी, बल्कि हजारों विद्यार्थियों के शैक्षणिक भविष्य को भी सुरक्षित बनाएगी। यदि शेष वित्तीय सहायता भी जल्द मिल जाती है, तो प्रदेश के सभी प्रभावित स्कूलों में व्यापक सुधार कार्य पूरे किए जा सकेंगे और शिक्षा व्यवस्था पूरी तरह सामान्य हो सकेगी।




