आपदा से निपटने के लिए चंडीगढ़ में बनेगा 128 जवानों का विशेष राहत बल, आईजीपी संभालेंगे कमान

आपदा से निपटने के लिए चंडीगढ़ में बनेगा 128 जवानों का विशेष राहत बल, आईजीपी संभालेंगे कमान

प्रशासन ने यूटी चंडीगढ़ डिजास्टर रिस्पॉन्स फोर्स के गठन की अधिसूचना की जारी, 110 जवान सीधे बचाव अभियान में उतरेंगे; एनडीआरएफ की तर्ज पर मिलेगी ट्रेनिंग, वीआईपी सुरक्षा और कानून-व्यवस्था की ड्यूटी से रखा जाएगा अलग

चंडीगढ़। बाढ़, इमारत ढहने, आगजनी, जलभराव और अन्य प्राकृतिक एवं मानवजनित आपदाओं के दौरान लोगों को तत्काल राहत पहुंचाने के लिए चंडीगढ़ प्रशासन ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। अब शहर में आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने के लिए अपना विशेष आपदा राहत बल होगा। प्रशासन के गृह विभाग ने यूनियन टेरिटरी ऑफ चंडीगढ़ डिजास्टर रिस्पॉन्स फोर्स (यूटीसीडीआरएफ) के गठन की अधिसूचना जारी कर दी है। इस विशेष बल के गठन से चंडीगढ़ को आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में एक स्वतंत्र और प्रशिक्षित व्यवस्था उपलब्ध होगी। इसका उद्देश्य आपातकालीन परिस्थितियों में राहत एवं बचाव कार्यों को तेजी से अंजाम देना और बाहरी एजेंसियों पर निर्भरता कम करना है।

शुरुआती चरण में इस बल में कुल 128 अधिकारी और जवान शामिल किए जाएंगे। चंडीगढ़ पुलिस के पुलिस महानिरीक्षक (आईजीपी) को बल का प्रमुख नियुक्त किया जाएगा, जबकि इसका मुख्यालय चंडीगढ़ में स्थापित होगा। प्रशासन की योजना है कि विभिन्न विभागों और पुलिस व्यवस्था से प्रतिनियुक्ति के आधार पर कर्मचारियों को इस बल में शामिल किया जाए। इसके बाद उन्हें विशेष प्रशिक्षण देकर आपदा के दौरान तत्काल कार्रवाई के लिए तैयार किया जाएगा।

चंडीगढ़ जैसे तेजी से विकसित हो रहे शहरी क्षेत्र में ऊंची इमारतों, घनी आबादी वाले इलाकों, औद्योगिक क्षेत्रों और प्रमुख संस्थानों की मौजूदगी के कारण आपातकालीन परिस्थितियों में त्वरित बचाव व्यवस्था की जरूरत लंबे समय से महसूस की जा रही थी। विशेष रूप से भारी बारिश, बाढ़ जैसी स्थिति, भवन गिरने और आग लगने की घटनाओं में प्रशिक्षित बचाव दल की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है। अब यूटीसीडीआरएफ के गठन से ऐसी परिस्थितियों में स्थानीय स्तर पर विशेष प्रशिक्षित टीम उपलब्ध हो सकेगी।

केंद्र के नए कानून के तहत हुआ बल का गठन

प्रशासन की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार, यूटीसीडीआरएफ का गठन केंद्र सरकार के आपदा प्रबंधन (संशोधन) अधिनियम, 2025 के प्रावधानों के तहत किया गया है। इस व्यवस्था के माध्यम से चंडीगढ़ में आपदा प्रबंधन के लिए एक समर्पित बल तैयार किया जाएगा, जो जरूरत पड़ने पर प्रभावित क्षेत्रों में तुरंत पहुंचकर राहत और बचाव अभियान शुरू कर सकेगा।

अब तक बड़ी आपदाओं या जटिल बचाव अभियानों के दौरान स्थानीय प्रशासन को कई बार दूसरे राज्यों या केंद्रीय एजेंसियों की सहायता लेनी पड़ती थी। ऐसी स्थिति में संबंधित एजेंसी की उपलब्धता और उसके घटनास्थल तक पहुंचने में लगने वाला समय राहत कार्यों को प्रभावित कर सकता है। नए बल के गठन के बाद चंडीगढ़ के पास अपनी प्रशिक्षित टीम होगी, जो शुरुआती स्तर पर बचाव कार्यों की जिम्मेदारी संभाल सकेगी।

हालांकि, जरूरत पड़ने पर राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) और अन्य केंद्रीय एजेंसियों के साथ समन्वय भी किया जाएगा। स्थानीय बल के पास तत्काल कार्रवाई की क्षमता होने से बड़े अभियानों में बाहरी एजेंसियों को भी सहयोग मिल सकेगा।

110 जवान संभालेंगे सीधे राहत और बचाव की जिम्मेदारी

यूटीसीडीआरएफ में कुल 128 कर्मियों की व्यवस्था की गई है। इनमें से 110 ऑपरेशनल फ्रंटलाइन जवान होंगे, जिन्हें सीधे आपदा प्रभावित क्षेत्रों में भेजा जाएगा। ये जवान घटनास्थल पर पहुंचकर लोगों को सुरक्षित निकालने, मलबे में फंसे लोगों की तलाश करने, बाढ़ और जलभराव में फंसे नागरिकों को बाहर निकालने तथा अन्य आपातकालीन बचाव गतिविधियों को अंजाम देंगे।

फ्रंटलाइन जवानों को अलग-अलग प्रकार की आपदाओं के अनुरूप प्रशिक्षित किया जाएगा। उनकी जिम्मेदारी केवल प्रभावित लोगों को सुरक्षित निकालने तक सीमित नहीं होगी, बल्कि जरूरत के अनुसार प्राथमिक राहत उपलब्ध कराने और अन्य संबंधित एजेंसियों के साथ मिलकर अभियान चलाने की भी होगी।

इनके अलावा 18 तकनीकी, चिकित्सा और इंजीनियरिंग विशेषज्ञ भी बल का हिस्सा होंगे। इन विशेषज्ञों की भूमिका बचाव अभियानों को अधिक प्रभावी और सुरक्षित बनाने में महत्वपूर्ण होगी। किसी इमारत के ढहने की स्थिति में इंजीनियरिंग विशेषज्ञ भवन की संरचनात्मक स्थिति का आकलन करने में सहायता करेंगे। इससे बचाव दल को यह समझने में मदद मिलेगी कि मलबे के भीतर प्रवेश करना कितना सुरक्षित है और किस तकनीक से फंसे लोगों को बाहर निकाला जा सकता है।

चिकित्सा विशेषज्ञ आपदा प्रभावित लोगों को प्राथमिक चिकित्सा और जरूरी स्वास्थ्य सहायता उपलब्ध कराने में सहयोग करेंगे। वहीं तकनीकी विशेषज्ञ आधुनिक बचाव उपकरणों के संचालन, उनकी उपयोगिता और अभियान के दौरान आने वाली तकनीकी चुनौतियों से निपटने में मदद करेंगे।

एनडीआरएफ की तर्ज पर दिया जाएगा विशेष प्रशिक्षण

यूटीसीडीआरएफ के जवानों को राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) या अन्य मान्यता प्राप्त प्रशिक्षण संस्थानों के माध्यम से विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य जवानों को अलग-अलग प्रकार की आपातकालीन परिस्थितियों में तेजी और सुरक्षित तरीके से काम करने के योग्य बनाना होगा।

इसके तहत बाढ़ और जलभराव के दौरान फंसे लोगों को निकालने के तरीके सिखाए जाएंगे। तेज बहाव वाले पानी में बचाव अभियान चलाने, नावों और अन्य उपकरणों के इस्तेमाल तथा प्रभावित इलाकों में सुरक्षित पहुंच बनाने की तकनीक पर भी ध्यान दिया जाएगा।

इसी तरह इमारतों के ढहने की स्थिति में मलबे के भीतर फंसे लोगों की तलाश करना, विशेष उपकरणों की मदद से मलबा हटाना और घायलों को सुरक्षित बाहर निकालने का प्रशिक्षण दिया जाएगा। इस तरह के अभियानों में समय बेहद महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि मलबे में दबे लोगों को जल्द से जल्द बाहर निकालना उनकी जान बचाने के लिए जरूरी होता है।

इसके अलावा ऊंची इमारतों और दुर्गम स्थानों पर फंसे लोगों को सुरक्षित निकालने के लिए हाई-एंगल रेस्क्यू तकनीक का प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। इस तकनीक में रस्सियों, सुरक्षा उपकरणों और विशेष बचाव प्रणालियों की सहायता से ऊंचाई पर फंसे लोगों तक पहुंच बनाई जाती है।

प्रशिक्षण के दौरान जवानों को आधुनिक उपकरणों के संचालन, व्यक्तिगत सुरक्षा, टीम समन्वय और आपदा के समय तेजी से निर्णय लेने की क्षमता विकसित करने पर भी जोर दिया जाएगा। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि वास्तविक आपातकाल के दौरान जवान बिना किसी अनावश्यक देरी के प्रभावी तरीके से अभियान चला सकें।

स्थानीय स्वयंसेवकों और आपदा मित्रों को भी मिलेगा सहयोग

विशेष आपदा राहत बल की भूमिका केवल सरकारी बचाव अभियानों तक सीमित नहीं रहेगी। यूटीसीडीआरएफ स्थानीय स्तर पर काम करने वाले आपदा मित्रों और स्वयंसेवकों को भी तकनीकी मार्गदर्शन और प्रशिक्षण उपलब्ध कराने में सहयोग करेगा।

आपदा के दौरान कई बार स्थानीय लोग और स्वयंसेवक सबसे पहले प्रभावित स्थान पर पहुंचते हैं। ऐसे में यदि उन्हें बुनियादी बचाव तकनीकों, प्राथमिक चिकित्सा और सुरक्षा उपायों की जानकारी हो तो शुरुआती राहत कार्यों में महत्वपूर्ण मदद मिल सकती है।

इसी उद्देश्य से स्थानीय स्वयंसेवकों को आवश्यक प्रशिक्षण और तकनीकी जानकारी उपलब्ध कराने में बल सहयोग करेगा। इससे प्रशासन और स्थानीय समुदाय के बीच बेहतर तालमेल विकसित होगा। आपदा के समय प्रशिक्षित स्वयंसेवकों की उपलब्धता राहत कार्यों का दायरा बढ़ाने में सहायक हो सकती है।

विशेषज्ञों की सहायता से स्वयंसेवकों को यह समझने में मदद मिलेगी कि किसी आपातकालीन स्थिति में किस प्रकार प्रतिक्रिया देनी है, प्रभावित लोगों की सहायता कैसे करनी है और किन परिस्थितियों में स्वयं की सुरक्षा को प्राथमिकता देना जरूरी है।

कानून-व्यवस्था और वीआईपी सुरक्षा से पूरी तरह अलग रहेगा बल

प्रशासन की अधिसूचना में यूटीसीडीआरएफ के कार्यक्षेत्र और जिम्मेदारियों को स्पष्ट रूप से निर्धारित किया गया है। इसके अनुसार, इस विशेष बल का इस्तेमाल केवल आपदा प्रबंधन, राहत और बचाव अभियानों के लिए किया जाएगा। इसे सामान्य पुलिसिंग या अन्य नियमित प्रशासनिक ड्यूटी में नहीं लगाया जा सकेगा।

बल के जवानों को कानून-व्यवस्था बनाए रखने, वीआईपी सुरक्षा, भीड़ नियंत्रण और चुनावी ड्यूटी से अलग रखा जाएगा। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आपदा राहत बल की उपलब्धता और प्रशिक्षण केवल आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने के लिए सुरक्षित रहे।

आमतौर पर पुलिस और प्रशासनिक बलों के कर्मचारियों को विभिन्न प्रकार की नियमित और विशेष ड्यूटी में लगाया जाता है। ऐसे में आपदा के समय प्रशिक्षित कर्मचारियों की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है। यूटीसीडीआरएफ को अलग कार्यक्षेत्र देने से इस समस्या को कम करने में मदद मिलेगी।

इस व्यवस्था के तहत बल के जवानों को आपदा से संबंधित जिम्मेदारियों के लिए तैयार रखा जाएगा, ताकि किसी भी आपातकालीन सूचना पर उन्हें तुरंत घटनास्थल पर भेजा जा सके। इससे राहत एवं बचाव अभियानों की तैयारी और प्रतिक्रिया क्षमता में सुधार होने की उम्मीद है।

चंडीगढ़ की आपदा प्रबंधन व्यवस्था को मिलेगी मजबूती

चंडीगढ़ में पिछले कुछ वर्षों के दौरान शहरी विस्तार, बढ़ती आबादी और निर्माण गतिविधियों के साथ आपातकालीन प्रबंधन की चुनौतियां भी बढ़ी हैं। भारी बारिश के दौरान जलभराव, इमारतों में आग लगने, निर्माण स्थलों पर दुर्घटनाओं और भवनों के कमजोर होने जैसी घटनाओं में विशेष प्रशिक्षण प्राप्त बचाव दल की आवश्यकता रहती है।

ऐसी परिस्थितियों में केवल सामान्य राहत व्यवस्था पर्याप्त नहीं होती। कई बार प्रभावित लोगों तक पहुंचने के लिए विशेष उपकरणों, तकनीकी विशेषज्ञता और प्रशिक्षित कर्मियों की जरूरत होती है। यूटीसीडीआरएफ का गठन इसी आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए किया गया है।

प्रशासन की इस पहल से शहर में आपदा के दौरान प्रतिक्रिया देने की क्षमता बढ़ने की उम्मीद है। 128 कर्मियों की प्रारंभिक टीम में ऑपरेशनल जवानों के साथ तकनीकी, चिकित्सा और इंजीनियरिंग विशेषज्ञों को शामिल करने से राहत अभियानों को बहुआयामी सहायता मिल सकेगी।

अब इस बल के गठन के बाद सबसे महत्वपूर्ण चरण कर्मियों की तैनाती, प्रशिक्षण, आवश्यक उपकरणों की उपलब्धता और विभिन्न विभागों के साथ समन्वय स्थापित करने का होगा। इन व्यवस्थाओं के प्रभावी ढंग से लागू होने पर चंडीगढ़ आपदा के समय स्थानीय स्तर पर अधिक सक्षम और त्वरित राहत व्यवस्था विकसित कर सकेगा।

कुल मिलाकर, यूटी चंडीगढ़ डिजास्टर रिस्पॉन्स फोर्स का गठन शहर की सुरक्षा और आपदा प्रबंधन व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। 110 फ्रंटलाइन जवानों और 18 विशेषज्ञों की टीम को विशेष प्रशिक्षण देकर तैयार करने की योजना से आपातकालीन परिस्थितियों में लोगों को समय पर सहायता मिलने की उम्मीद है। खास बात यह है कि इस बल को सामान्य पुलिस ड्यूटी से अलग रखा जाएगा, ताकि इसकी पूरी क्षमता बाढ़, आगजनी, इमारत ढहने और अन्य आपदाओं के दौरान लोगों की जान बचाने में इस्तेमाल हो सके।