मुंबई में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आयकर विभाग के अधिकारियों को स्पष्ट संदेश दिया कि उनकी प्राथमिक जिम्मेदारी केवल कर संग्रह करना नहीं, बल्कि नागरिकों के साथ संवेदनशील और जवाबदेह व्यवहार करना भी है। उन्होंने कहा कि सरकारी तंत्र का उद्देश्य लोगों को सुविधा देना होना चाहिए, न कि उन्हें दफ्तरों के चक्कर लगवाकर परेशान करना। उन्होंने अधिकारियों से अपील की कि वे अपनी शक्तियों का उपयोग लोगों में डर पैदा करने के बजाय उनकी समस्याओं का समाधान करने के लिए करें।
वित्त मंत्री रविवार को मुंबई के नरीमन पॉइंट स्थित नव-निर्मित ‘आयकर सिंधु’ भवन के उद्घाटन समारोह में मौजूद थीं। इस आधुनिक 13 मंजिला इमारत के उद्घाटन के अवसर पर उन्होंने आयकर विभाग के अधिकारियों को प्रशासनिक व्यवस्था, जवाबदेही और ईमानदारी से जुड़ी कई महत्वपूर्ण बातें कहीं। उन्होंने कहा कि यदि सरकारी संस्थान नागरिकों के लिए काम नहीं करेंगे, तो जनता का भरोसा धीरे-धीरे कमजोर होता जाएगा।
अपने संबोधन के दौरान सीतारमण ने एक दिलचस्प अनुभव साझा किया। उन्होंने बताया कि जिस भवन का उद्घाटन किया जा रहा है, उसके निर्माण की प्रक्रिया में स्वयं आयकर विभाग के अधिकारियों को कई स्तरों पर मंजूरियां लेने के लिए काफी संघर्ष करना पड़ा। उन्होंने कहा कि जब एक प्रभावशाली सरकारी विभाग के अधिकारी खुद विभिन्न कार्यालयों में अनुमति लेने के लिए परेशान हुए, तब उन्हें यह महसूस होना चाहिए कि आम नागरिकों को सरकारी काम करवाने में कितनी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता होगा।
उन्होंने अधिकारियों से कहा कि जब कोई व्यक्ति किसी वैध काम के लिए विभाग के पास आता है, तो उसे अनावश्यक रूप से इधर-उधर न भेजा जाए। यदि नियमों के दायरे में रहकर उसकी मदद की जा सकती है, तो विभाग को सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए। उनका कहना था कि सरकारी पद का अर्थ अधिकार जरूर है, लेकिन उससे भी बड़ी जिम्मेदारी लोगों की समस्याओं को समझना और उनका समाधान करना है।
वित्त मंत्री ने यह भी कहा कि आयकर विभाग का नाम सुनते ही अधिकांश लोगों के मन में एक अलग तरह की गंभीरता और भय का भाव पैदा हो जाता है। ऐसे में अधिकारियों को यह ध्यान रखना चाहिए कि उनके व्यवहार से विभाग की छवि बनती है। उन्होंने कहा कि शक्ति का इस्तेमाल डर पैदा करने के लिए नहीं बल्कि विश्वास कायम करने के लिए होना चाहिए। यदि अधिकारी संवेदनशीलता से काम करेंगे तो लोगों का सरकारी संस्थानों पर भरोसा और मजबूत होगा।
अपने भाषण में उन्होंने सरकारी संपत्तियों के प्रबंधन पर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने बताया कि जिस भूमि पर आज ‘आयकर सिंधु’ भवन खड़ा है, वह कई दशक पहले आयकर विभाग को आवंटित कर दी गई थी। इसके बावजूद वर्षों तक उस जमीन का समुचित उपयोग नहीं हो पाया और समय के साथ उस पर अवैध कब्जे होने लगे। उन्होंने कहा कि यह स्थिति सरकारी विभागों की लापरवाही और धीमी कार्यप्रणाली को दर्शाती है।
सीतारमण ने अधिकारियों से कहा कि सरकारी जमीन और अन्य संपत्तियां सार्वजनिक संसाधन हैं, जिनकी सुरक्षा और उचित उपयोग सुनिश्चित करना विभाग की जिम्मेदारी है। यदि समय रहते इन परिसंपत्तियों पर ध्यान नहीं दिया जाता, तो अतिक्रमण जैसी समस्याएं पैदा होती हैं और बाद में उन्हें हटाने में काफी समय और संसाधन खर्च करने पड़ते हैं। उन्होंने इस पूरे मामले को प्रशासनिक सुधार की आवश्यकता से जोड़ते हुए अधिकारियों को भविष्य में अधिक सतर्क रहने की सलाह दी।
कार्यक्रम में उन्होंने मुंबई और नवी मुंबई में कार्यरत आयकर अधिकारियों की आवास संबंधी समस्याओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में अधिकारियों को सरकारी आवास उपलब्ध नहीं हो पाते, जिसके कारण उन्हें शहर के दूरदराज इलाकों से लंबी दूरी तय करके दफ्तर पहुंचना पड़ता है। इससे न केवल समय की बर्बादी होती है, बल्कि कार्यक्षमता पर भी असर पड़ता है।
उन्होंने आश्वासन दिया कि केंद्र सरकार इस विषय पर गंभीरता से विचार करेगी और विभिन्न सरकारी विभागों के बीच भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया को अधिक सरल और तेज बनाने का प्रयास किया जाएगा। उनका मानना है कि यदि विभागों को समय पर जमीन उपलब्ध हो जाए तो कर्मचारियों के लिए बेहतर आवास और कार्यालय सुविधाएं विकसित की जा सकती हैं।
वित्त मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार यदि भूमि उपलब्ध कराने में सहायता करती है, तो उसके बाद निर्माण कार्य में अनावश्यक देरी नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि भवन निर्माण, टेंडर प्रक्रिया, अनुबंध, तकनीकी मंजूरियां और अन्य प्रशासनिक कार्य निर्धारित समयसीमा में पूरे किए जाने चाहिए। परियोजनाओं में वर्षों तक देरी होना किसी भी दृष्टि से उचित नहीं माना जा सकता।
उन्होंने केंद्रीय लोक निर्माण विभाग (CPWD) सहित अन्य एजेंसियों के साथ बेहतर समन्वय पर भी जोर दिया। उनका कहना था कि यदि सभी विभाग मिलकर समयबद्ध तरीके से काम करें तो सरकारी परियोजनाएं तय समय में पूरी हो सकती हैं। उन्होंने अधिकारियों से यह भी कहा कि जहां आवश्यकता हो, वहां विभिन्न मंत्रालयों और विभागों के साथ बेहतर तालमेल बनाकर कार्यों को आगे बढ़ाया जाए।
अपने संबोधन में सीतारमण ने सरकारी दूरसंचार कंपनी BSNL की भूमि का भी उल्लेख किया। उन्होंने अधिकारियों को सुझाव दिया कि यदि विभागीय आवश्यकताओं के लिए उपयुक्त जमीन उपलब्ध हो सकती है तो संबंधित विभागों से समन्वय स्थापित किया जाए। उन्होंने भरोसा दिलाया कि आवश्यकता पड़ने पर वे स्वयं संबंधित मंत्रालयों से बातचीत कर आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराने का प्रयास करेंगी ताकि परियोजनाएं अनावश्यक बाधाओं में न फंसें।
हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट कर दिया कि नागरिकों की सहायता करने का अर्थ नियमों की अनदेखी करना नहीं है। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि वे कानून और नियमों का पूरी तरह पालन करें, लेकिन जहां किसी व्यक्ति का वैध अधिकार बनता हो, वहां उसे अनावश्यक देरी या जटिल प्रक्रिया का सामना न करना पड़े। उन्होंने कहा कि कई बार लोग अपने उचित अधिकार प्राप्त करने के लिए भी लंबे समय तक संघर्ष करते हैं, जो एक प्रभावी प्रशासन की पहचान नहीं हो सकती।
वित्त मंत्री ने कहा कि आधुनिक प्रशासन की पहचान केवल कठोर नियमों से नहीं बल्कि पारदर्शिता, संवेदनशीलता और दक्षता से होती है। उन्होंने अधिकारियों को प्रेरित किया कि वे अपने व्यवहार और कार्यशैली में ऐसे बदलाव लाएं जिससे विभाग की छवि अधिक जनहितैषी बने। उनके अनुसार, यदि किसी नागरिक का कार्य निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार पूरा किया जा सकता है, तो उसे टालना या बार-बार दस्तावेज मांगना उचित नहीं है।
उन्होंने यह भी कहा कि आयकर विभाग देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है क्योंकि टैक्स संग्रह से ही सरकार विभिन्न विकास योजनाओं और जनकल्याणकारी कार्यक्रमों को लागू कर पाती है। इसलिए विभाग के अधिकारियों पर दोहरी जिम्मेदारी होती है—एक ओर राजस्व संग्रह सुनिश्चित करना और दूसरी ओर नागरिकों का विश्वास बनाए रखना।
अपने संबोधन के अंतिम हिस्से में सीतारमण ने अधिकारियों को ईमानदारी और नैतिक मूल्यों का महत्व समझाया। उन्होंने कहा कि किसी भी सरकारी अधिकारी की सबसे बड़ी पूंजी उसकी निष्ठा और सत्यनिष्ठा होती है। यदि प्रशासनिक व्यवस्था में ईमानदारी बनी रहती है तो जनता का भरोसा अपने आप मजबूत होता है और विभाग की कार्यप्रणाली भी अधिक प्रभावी बनती है।
उन्होंने अधिकारियों से अपील की कि वे हर निर्णय लेते समय यह सोचें कि उसका प्रभाव एक आम नागरिक पर क्या पड़ेगा। यदि प्रशासन लोगों की समस्याओं को समझकर समाधान की दिशा में काम करेगा तो सरकारी संस्थानों की विश्वसनीयता और सम्मान दोनों बढ़ेंगे। उन्होंने भरोसा जताया कि आयकर विभाग भविष्य में ऐसी कार्यशैली अपनाएगा जिसमें कानून का पालन भी पूरी सख्ती से हो और नागरिकों को अनावश्यक परेशानियों से भी बचाया जा सके।
कार्यक्रम का समापन इसी संदेश के साथ हुआ कि एक प्रभावी प्रशासन वही है जो अधिकारों के साथ-साथ अपनी जिम्मेदारियों को भी समान महत्व दे। वित्त मंत्री ने अधिकारियों से अपेक्षा जताई कि वे जनता की सुविधा, पारदर्शिता, समयबद्ध कार्यप्रणाली और ईमानदारी को अपने काम का आधार बनाएंगे, जिससे आयकर विभाग केवल राजस्व संग्रह करने वाली संस्था ही नहीं बल्कि नागरिकों का भरोसा जीतने वाला विभाग भी बन सके।




