ईरान-इजराइल तनाव से शेयर बाजार में भारी गिरावट, सेंसेक्स 1353 अंक टूटा, निवेशकों की संपत्ति में बड़ी कमी

ईरान-इजराइल तनाव से शेयर बाजार में भारी गिरावट, सेंसेक्स 1353 अंक टूटा, निवेशकों की संपत्ति में बड़ी कमी

मध्य पूर्व (Middle East) में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर वैश्विक वित्तीय बाजारों के साथ-साथ भारतीय शेयर बाजार पर भी साफ दिखाई दिया। अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव तथा संभावित युद्ध जैसे हालात ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। इसी वजह से भारतीय शेयर बाजार में सोमवार को तेज बिकवाली देखने को मिली और प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स तथा निफ्टी दोनों बड़ी गिरावट के साथ बंद हुए।

कारोबार के दौरान लगभग सभी प्रमुख सेक्टरों में बिकवाली का दबाव रहा। बैंकिंग, ऑटोमोबाइल, मेटल, ऊर्जा (एनर्जी) और एफएमसीजी (FMCG) कंपनियों के शेयरों में सबसे अधिक कमजोरी दर्ज की गई। वैश्विक बाजारों से मिले नकारात्मक संकेतों, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और विदेशी निवेशकों की सतर्कता ने भी बाजार की धारणा को प्रभावित किया।

सेंसेक्स 1353 अंक लुढ़का

सप्ताह के पहले कारोबारी दिन बीएसई सेंसेक्स में बड़ी गिरावट दर्ज की गई। कारोबार समाप्त होने तक सेंसेक्स 1,353 अंक यानी लगभग 1.71 प्रतिशत गिरकर 77,566 अंक के स्तर पर बंद हुआ।

दिनभर के कारोबार में अधिकांश समय बाजार दबाव में रहा और बिकवाली का माहौल बना रहा। निवेशकों ने जोखिम वाले निवेश से दूरी बनाते हुए कई प्रमुख कंपनियों के शेयरों में मुनाफावसूली की।

विशेषज्ञों के अनुसार वैश्विक अनिश्चितता बढ़ने पर निवेशक आमतौर पर सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर रुख करते हैं, जिससे इक्विटी बाजारों पर दबाव बढ़ जाता है।

निफ्टी भी 24,028 अंक पर बंद

नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का प्रमुख सूचकांक निफ्टी 50 भी भारी गिरावट के साथ बंद हुआ।

निफ्टी में 422 अंकों यानी लगभग 1.73 प्रतिशत की कमजोरी दर्ज की गई और यह 24,028 अंक के स्तर पर बंद हुआ।

बाजार में व्यापक गिरावट देखने को मिली, जहां लार्ज कैप, मिड कैप और स्मॉल कैप शेयरों पर भी दबाव बना रहा।

किन सेक्टरों में सबसे ज्यादा गिरावट रही?

सोमवार के कारोबार में लगभग सभी प्रमुख सेक्टर लाल निशान में बंद हुए।

सबसे अधिक बिकवाली निम्न क्षेत्रों में देखने को मिली—

  • बैंकिंग सेक्टर
  • ऑटोमोबाइल कंपनियां
  • मेटल सेक्टर
  • ऊर्जा (एनर्जी) कंपनियां
  • एफएमसीजी (FMCG) सेक्टर

इन सेक्टरों की कई बड़ी कंपनियों के शेयरों में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई। निवेशकों ने जोखिम कम करने के उद्देश्य से इन क्षेत्रों में अपनी हिस्सेदारी घटाई।

निवेशकों की संपत्ति में भारी गिरावट

शेयर बाजार में लगातार गिरावट का सीधा असर निवेशकों की कुल संपत्ति पर भी पड़ा है।

उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार 27 फरवरी को बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण (Market Capitalisation) लगभग ₹4.63 लाख करोड़ था।

वहीं 9 मार्च तक यह घटकर लगभग ₹4.41 लाख करोड़ रह गया।

इस अवधि में निवेशकों की कुल संपत्ति में लगभग ₹22 लाख करोड़ की कमी दर्ज की गई। बाजार पूंजीकरण में आई यह गिरावट निवेशकों की कमजोर होती धारणा और लगातार बिकवाली को दर्शाती है।

वैश्विक तनाव का बाजार पर असर

विशेषज्ञों का मानना है कि मध्य पूर्व में बढ़ता तनाव वित्तीय बाजारों के लिए सबसे बड़ी चिंताओं में से एक बन गया है।

यदि क्षेत्र में संघर्ष लंबा चलता है तो वैश्विक व्यापार, ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री परिवहन प्रभावित हो सकते हैं। ऐसी परिस्थितियों में निवेशक जोखिम वाले निवेश से दूरी बनाते हैं और सुरक्षित परिसंपत्तियों की ओर रुख करते हैं।

इसी वजह से शेयर बाजारों में अस्थिरता बढ़ जाती है और बड़े पैमाने पर बिकवाली देखने को मिलती है।

डॉलर के मुकाबले रुपया रिकॉर्ड निचले स्तर पर

वैश्विक दबाव का असर भारतीय मुद्रा पर भी देखने को मिला।

सोमवार को भारतीय रुपया 46 पैसे कमजोर होकर 92.33 रुपये प्रति डॉलर के स्तर पर पहुंच गया।

इसे डॉलर के मुकाबले रुपये का अब तक का सबसे निचला स्तर बताया जा रहा है।

रुपये की कमजोरी के पीछे प्रमुख कारणों में विदेशी निवेशकों की निकासी, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता को माना जा रहा है।

रुपये में गिरावट से आयात महंगा हो सकता है, जिसका असर कई क्षेत्रों पर पड़ सकता है।

कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल

मध्य पूर्व में तनाव बढ़ने का सबसे बड़ा असर अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल के बाजार पर देखा गया।

ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई और यह लगभग 116 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया।

जानकारी के अनुसार पिछले लगभग दस दिनों में कच्चे तेल की कीमतों में करीब 60 प्रतिशत तक की तेजी दर्ज की गई है।

ऊर्जा बाजार के जानकारों का मानना है कि यदि संघर्ष और बढ़ता है तो ब्रेंट क्रूड की कीमत 150 डॉलर प्रति बैरल तक भी पहुंच सकती है।

भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि का सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।

पेट्रोल और डीजल महंगे होने की आशंका

यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बनी रहती हैं तो इसका असर घरेलू ईंधन कीमतों पर भी पड़ सकता है।

विशेषज्ञों का अनुमान है कि ऐसी स्थिति में भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 5 से 6 रुपये प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी संभव हो सकती है।

हालांकि अंतिम निर्णय तेल विपणन कंपनियों और सरकार की मूल्य निर्धारण नीति पर निर्भर करेगा।

सोने और चांदी की कीमतों में तेजी

वैश्विक अनिश्चितता के दौरान निवेशक अक्सर सोने और चांदी जैसे सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर रुख करते हैं।

इसी कारण सोमवार को कीमती धातुओं की कीमतों में भी तेज उछाल दर्ज किया गया।

इंडियन बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के अनुसार—

  • 24 कैरेट सोना लगभग 800 रुपये महंगा होकर 10 ग्राम के लिए 1.60 लाख रुपये के स्तर पर पहुंच गया।
  • चांदी की कीमत में लगभग 2,000 रुपये प्रति किलोग्राम की बढ़ोतरी हुई और यह 2.63 लाख रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई।

सोने और चांदी में आई तेजी यह संकेत देती है कि निवेशक फिलहाल सुरक्षित निवेश को प्राथमिकता दे रहे हैं।

बाजार में गिरावट के प्रमुख कारण

विश्लेषकों के अनुसार भारतीय शेयर बाजार में आई बड़ी गिरावट के पीछे कई प्रमुख कारण रहे—

  • मध्य पूर्व में ईरान और इजराइल के बीच बढ़ता तनाव।
  • वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) प्रभावित होने की आशंका।
  • कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल।
  • आयात लागत और महंगाई बढ़ने की संभावना।
  • विदेशी निवेशकों की सतर्कता।
  • अमेरिका और एशियाई बाजारों से मिले कमजोर संकेत।
  • वैश्विक निवेशकों द्वारा जोखिम वाले निवेश से दूरी बनाना।

इन सभी कारणों ने मिलकर भारतीय बाजार में निवेशकों की धारणा को कमजोर किया।

एशियाई शेयर बाजारों में भी रही कमजोरी

भारतीय बाजार के साथ-साथ एशिया के अधिकांश प्रमुख शेयर बाजार भी गिरावट के साथ बंद हुए।

दक्षिण कोरिया का कोस्पी इंडेक्स लगभग 5.96 प्रतिशत गिरकर 5,251 अंक पर बंद हुआ।

जापान का निक्केई इंडेक्स लगभग 5.20 प्रतिशत टूटकर 52,728 अंक पर पहुंच गया।

हांगकांग का हैंगसेंग इंडेक्स भी लगभग 1.35 प्रतिशत नीचे बंद हुआ, जबकि चीन का शंघाई कंपोजिट इंडेक्स भी हल्की गिरावट के साथ 4,096 अंक पर बंद हुआ।

एशियाई बाजारों में आई यह कमजोरी वैश्विक निवेशकों की बढ़ती चिंता को दर्शाती है।

अमेरिकी बाजारों में भी पहले दिखी थी कमजोरी

भारतीय बाजार खुलने से पहले अमेरिकी शेयर बाजारों में भी कमजोरी देखने को मिली थी।

6 मार्च को अमेरिकी बाजारों में—

  • डाउ जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज लगभग 453 अंक गिरकर 47,501 अंक पर बंद हुआ।
  • नैस्डैक कंपोजिट इंडेक्स में लगभग 1.59 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।
  • एसएंडपी 500 इंडेक्स भी लगभग 1.33 प्रतिशत नीचे बंद हुआ।

अमेरिकी बाजारों की कमजोरी का असर एशियाई और भारतीय बाजारों पर भी दिखाई दिया।

पिछले कारोबारी सत्र में भी आई थी बड़ी गिरावट

भारतीय शेयर बाजार में गिरावट का सिलसिला सोमवार से पहले भी जारी था।

6 मार्च को भी बाजार भारी दबाव में रहा था। उस दिन सेंसेक्स 1,097 अंक गिरकर 78,919 अंक पर बंद हुआ था।

वहीं निफ्टी भी 315 अंक टूटकर 24,450 अंक के स्तर पर बंद हुआ था।

लगातार दो कारोबारी सत्रों में आई बड़ी गिरावट से यह स्पष्ट होता है कि वैश्विक आर्थिक परिस्थितियां और भू-राजनीतिक घटनाक्रम फिलहाल निवेशकों की धारणा को प्रभावित कर रहे हैं। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में मध्य पूर्व की स्थिति, कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव, विदेशी निवेशकों की गतिविधियां और वैश्विक आर्थिक संकेतक भारतीय शेयर बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।