एशियन गेम्स में मेडल जीतना किसी भी खिलाड़ी के लिए बेहद बड़ी उपलब्धि मानी जाती है। मैदान पर कई वर्षों की मेहनत, ट्रेनिंग और प्रदर्शन के बाद जब किसी खिलाड़ी के गले में गोल्ड मेडल डाला जाता है तो वह पल उसके करियर के सबसे खास पलों में शामिल हो जाता है। दर्शकों के लिए भी गोल्ड मेडल का मतलब अक्सर सोने से बना हुआ पदक माना जाता है। हालांकि, हकीकत इससे थोड़ी अलग है। एशियन गेम्स में दिया जाने वाला गोल्ड मेडल पूरी तरह सोने का नहीं होता। इसमें मुख्य हिस्सा चांदी का होता है, जबकि ऊपर सोने की परत चढ़ाई जाती है। यही वजह है कि गोल्ड मेडल देखने में सुनहरे रंग का दिखाई देता है, लेकिन उसका पूरा वजन सोने का नहीं होता।
जापान के आइची-नागोया में आयोजित हो रहे एशियन गेम्स 2026 में भारत समेत कई देशों के खिलाड़ी अलग-अलग खेलों में पदक जीत रहे हैं। भारत भी प्रतियोगिता में अपने प्रदर्शन के साथ पदक तालिका में मौजूद है। किसी भी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में गोल्ड मेडल को सबसे प्रतिष्ठित पदक माना जाता है, लेकिन इससे जुड़ी कई ऐसी बातें हैं जिनके बारे में आमतौर पर लोगों को जानकारी नहीं होती। इनमें सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर एक गोल्ड मेडल में कितने ग्राम सोना इस्तेमाल किया जाता है और उसके बाकी हिस्से में कौन-सी धातु होती है।
एशियन गेम्स 2026 के पदकों की आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, गोल्ड मेडल का कुल वजन लगभग 265 ग्राम है। हालांकि, इस पूरे वजन में सोने की मात्रा बहुत कम है। पदक का मुख्य हिस्सा शुद्ध चांदी से तैयार किया गया है और उसके ऊपर सोने की प्लेटिंग की गई है। जानकारी के अनुसार, इसमें करीब 264 ग्राम शुद्ध चांदी का इस्तेमाल हुआ है और इसके ऊपर कम से कम 1 ग्राम सोने की परत चढ़ाई गई है। इस तरह करीब 265 ग्राम वजन वाला यह पदक देखने में पूरी तरह सुनहरा लगता है, लेकिन इसके भीतर सबसे ज्यादा हिस्सा चांदी का है।
यानी अगर आसान भाषा में समझें तो एशियन गेम्स का गोल्ड मेडल असल में चांदी का पदक है, जिस पर सोने की परत चढ़ाकर उसे गोल्ड मेडल का स्वरूप दिया गया है। खिलाड़ी के लिए इसकी असली कीमत केवल इसमें इस्तेमाल हुई धातु की कीमत से नहीं मापी जाती। यह पदक उस खिलाड़ी की उपलब्धि, प्रतियोगिता में उसके प्रदर्शन और देश के लिए हासिल की गई सफलता का प्रतीक होता है। इसलिए इसकी प्रतिष्ठा उसके अंदर मौजूद सोने की मात्रा से कहीं अधिक होती है।
गोल्ड मेडल का डिजाइन और आकार कैसा है?
आइची-नागोया एशियन गेम्स 2026 के लिए तैयार किए गए पदकों को एक खास डिजाइन के तहत बनाया गया है। प्रतियोगिता के अलग-अलग खेलों में स्वर्ण पदक जीतने वाले खिलाड़ियों को आकार और डिजाइन के मामले में एक ही तरह का गोल्ड मेडल दिया जाता है। इसकी बनावट को आधुनिक रूप देने के साथ-साथ इसके निर्माण में पर्यावरण से जुड़े पहलुओं का भी ध्यान रखा गया है।
आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, गोल्ड मेडल का व्यास करीब 80 मिलीमीटर है, जबकि इसकी मोटाई लगभग 5 मिलीमीटर है। यानी मेडल देखने में काफी बड़ा और ठोस नजर आता है। करीब 265 ग्राम वजन होने के कारण यह खिलाड़ी के गले में पहनने पर भी एक भारी और खास पदक जैसा महसूस होता है। इसकी सुनहरी सतह इसे देखने में आकर्षक बनाती है और यही वजह है कि टीवी स्क्रीन या तस्वीरों में इसे देखकर अक्सर यह अनुमान लगाया जाता है कि पूरा पदक सोने से बना होगा।
लेकिन पदक तैयार करने की प्रक्रिया में पूरी तरह सोने का इस्तेमाल करना आवश्यक नहीं होता। अंतरराष्ट्रीय खेल प्रतियोगिताओं में गोल्ड मेडल को सामान्य तौर पर कीमती धातु की एक सीमित परत के साथ तैयार किया जाता है। एशियन गेम्स 2026 में भी इसी तरह चांदी के आधार पर गोल्ड प्लेटिंग की गई है।
पुराने इलेक्ट्रॉनिक सामान से निकली धातुओं का इस्तेमाल
इस बार एशियन गेम्स के पदकों की एक खास बात इनके निर्माण में इस्तेमाल की गई सामग्री भी है। आयोजकों ने पदक तैयार करने में पर्यावरण और रिसाइक्लिंग को ध्यान में रखा है। आधिकारिक जानकारी के अनुसार, पदकों में इस्तेमाल होने वाली धातुओं को इलेक्ट्रॉनिक डिवाइसेज से निकाली गई सामग्री से हासिल किया गया है।
इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में मौजूद विभिन्न धातुओं को दोबारा इस्तेमाल करने की प्रक्रिया को रिसाइक्लिंग का हिस्सा माना जाता है। इस तरह तैयार किए गए पदक केवल खेल उपलब्धियों का प्रतीक नहीं हैं, बल्कि इनके निर्माण में संसाधनों के दोबारा इस्तेमाल और पर्यावरणीय सोच को भी शामिल किया गया है। एशियन गेम्स 2026 के पदकों की यही विशेषता उन्हें सामान्य पदकों से अलग बनाती है।
सिल्वर मेडल में कितना चांदी है?
अब बात करते हैं दूसरे स्थान पर आने वाले खिलाड़ी को मिलने वाले रजत पदक की। गोल्ड मेडल की तरह सिल्वर मेडल को लेकर भी आम लोगों के मन में यह सवाल रहता है कि इसका वजन कितना होता है और इसमें कितनी चांदी इस्तेमाल की जाती है।
एशियन गेम्स 2026 का सिल्वर मेडल करीब 264 ग्राम वजन का है। आधिकारिक जानकारी के अनुसार, यह पदक शुद्ध चांदी से बनाया गया है। इसमें किसी दूसरी धातु को मिलाए जाने की जानकारी नहीं दी गई है। इस लिहाज से गोल्ड और सिल्वर मेडल में एक दिलचस्प अंतर देखने को मिलता है। गोल्ड मेडल का मुख्य हिस्सा भी चांदी का है, लेकिन उसके ऊपर सोने की प्लेटिंग की गई है, जबकि सिल्वर मेडल चांदी का ही रखा गया है।
इसका मतलब यह है कि गोल्ड मेडल और सिल्वर मेडल का बेस मटेरियल लगभग समान है, लेकिन गोल्ड मेडल की बाहरी सतह पर सोने की परत उसे अलग पहचान देती है। यही परत उसे सुनहरा रंग प्रदान करती है और उसे प्रतियोगिता के सर्वोच्च पदक के रूप में अलग करती है।
कांस्य पदक का वजन कितना है?
तीसरे स्थान पर रहने वाले खिलाड़ी को ब्रॉन्ज यानी कांस्य पदक दिया जाता है। एशियन गेम्स 2026 का कांस्य पदक गोल्ड और सिल्वर की तुलना में थोड़ा हल्का है। इसका वजन करीब 222 ग्राम बताया गया है।
यह पदक रेड ब्रॉस से तैयार किया गया है। रेड ब्रॉस एक मिश्र धातु है, जिसमें मुख्य रूप से तांबा और जस्ता शामिल होते हैं। एशियन गेम्स 2026 के कांस्य पदक में करीब 95 प्रतिशत तांबा और 5 प्रतिशत जस्ता इस्तेमाल किया गया है। 222 ग्राम के कुल वजन के आधार पर देखें तो इसमें लगभग 210.9 ग्राम तांबा और करीब 11.1 ग्राम जस्ता होगा।
इस तरह तीनों पदकों की संरचना एक-दूसरे से अलग है। गोल्ड मेडल में करीब 264 ग्राम चांदी और कम से कम 1 ग्राम सोने की प्लेटिंग है, सिल्वर मेडल करीब 264 ग्राम शुद्ध चांदी का है, जबकि ब्रॉन्ज मेडल 222 ग्राम रेड ब्रॉस से बनाया गया है।
मेडल की कीमत से ज्यादा मायने रखती है उपलब्धि
खेलों में मेडल की अहमियत केवल उसमें मौजूद धातु की बाजार कीमत से तय नहीं होती। एक खिलाड़ी के लिए गोल्ड मेडल तक पहुंचने के पीछे वर्षों की तैयारी, फिटनेस, अभ्यास, प्रतियोगिताओं का अनुभव और निर्णायक मुकाबलों में प्रदर्शन शामिल होता है। इसलिए भले ही गोल्ड मेडल पूरी तरह सोने का न हो, लेकिन उसका महत्व किसी खिलाड़ी के लिए बेहद बड़ा होता है।
एशियन गेम्स जैसे बड़े बहु-खेल आयोजन में हजारों खिलाड़ी अलग-अलग देशों का प्रतिनिधित्व करते हैं। इनमें से हर खिलाड़ी अपने देश के लिए पदक जीतने का लक्ष्य लेकर मैदान में उतरता है। ऐसे में पोडियम पर सबसे ऊपर पहुंचना और गोल्ड मेडल हासिल करना किसी भी खिलाड़ी के लिए करियर की महत्वपूर्ण उपलब्धियों में गिना जाता है।
एशियन गेम्स 2026 के पदकों की संरचना यह भी दिखाती है कि किसी खेल प्रतियोगिता में मेडल की पहचान केवल उसमें इस्तेमाल की गई कीमती धातु से नहीं होती। गोल्ड मेडल की चमक के पीछे चांदी का बड़ा हिस्सा है, उस पर सोने की प्लेटिंग है और इसके निर्माण में रिसाइक्लिंग को भी महत्व दिया गया है। वहीं सिल्वर मेडल में शुद्ध चांदी और ब्रॉन्ज मेडल में तांबा-जस्ता मिश्रधातु का इस्तेमाल किया गया है।
इस तरह एशियन गेम्स 2026 के पदकों को देखें तो गोल्ड मेडल करीब 265 ग्राम का है, जिसमें लगभग 264 ग्राम चांदी और कम से कम 1 ग्राम सोने की प्लेटिंग शामिल है। सिल्वर मेडल करीब 264 ग्राम शुद्ध चांदी का है और ब्रॉन्ज मेडल करीब 222 ग्राम रेड ब्रॉस से तैयार किया गया है। तीनों पदक अपने-अपने स्थान पर खिलाड़ियों की उपलब्धि और प्रतियोगिता में उनके प्रदर्शन की पहचान हैं।




