एशियन पैरा गेम्स में भारत का शानदार प्रदर्शन, दूसरे दिन मिले 24 पदक

एशियन पैरा गेम्स में भारत का शानदार प्रदर्शन, दूसरे दिन मिले 24 पदक

जापान के आइची-नागोया में आयोजित एशियन पैरा गेम्स में भारतीय खिलाड़ियों का शानदार प्रदर्शन जारी है। प्रतियोगिता के दूसरे दिन भारत ने कुल 24 पदक अपने नाम किए। इनमें पांच गोल्ड, छह सिल्वर और 13 ब्रॉन्ज मेडल शामिल रहे। इस प्रदर्शन के साथ भारत के कुल पदकों की संख्या 35 तक पहुंच गई है। भारतीय खिलाड़ियों ने अब तक नौ स्वर्ण, 11 रजत और 15 कांस्य पदक जीते हैं।

दूसरे दिन एथलेटिक्स में भारतीय खिलाड़ियों ने कई स्पर्धाओं में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। पुरुषों की डिस्कस थ्रो प्रतियोगिता में भारत ने तीनों पदकों पर कब्जा जमाया। वहीं, निषाद कुमार ने हाई जंप में गोल्ड मेडल हासिल किया। महिलाओं की दौड़ में सिमरन शर्मा और दीप्ति जीवनजी ने भी स्वर्ण पदक जीतकर देश का नाम रोशन किया। शूटिंग, पावरलिफ्टिंग, जैवलिन थ्रो और पैरा टेबल टेनिस में भी भारतीय खिलाड़ियों ने पदक जीतने में सफलता हासिल की।

पैरा टेबल टेनिस में पांच पदक, स्टैंडिंग वर्ग में पहली बार मिली सफलता

भारत के लिए पैरा टेबल टेनिस में भी यह दिन उपलब्धियों से भरा रहा। भारतीय खिलाड़ियों ने इस खेल में पांच कांस्य पदक जीते। रवि बेबी सहाना और प्राची पांडे की उपलब्धि खास रही, क्योंकि उन्होंने एशियन पैरा गेम्स की स्टैंडिंग कैटेगरी में भारत को पहली बार पदक दिलाया।

भाविना पटेल, सोनलबेन पटेल और जहान मदान ने भी कांस्य पदक अपने नाम किए। इन खिलाड़ियों के प्रदर्शन से प्रतियोगिता में भारत का पदक खाता और मजबूत हुआ।

स्टैंडिंग कैटेगरी में खिलाड़ी खड़े होकर मुकाबला करते हैं। इसमें खिलाड़ियों की शारीरिक दिव्यांगता और उनकी खेल संबंधी क्षमताओं के आधार पर अलग-अलग वर्ग निर्धारित किए जाते हैं। सहाना और प्राची की सफलता भारतीय पैरा टेबल टेनिस के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि है, क्योंकि इस प्रतियोगिता में इस श्रेणी के तहत भारत को पहले कोई पदक नहीं मिला था।

निषाद कुमार ने हाई जंप में 2.02 मीटर की छलांग लगाई

भारतीय पैरा एथलीट निषाद कुमार ने पुरुषों की हाई जंप टी47 स्पर्धा में 2.02 मीटर की ऊंचाई पार करके गोल्ड मेडल जीता। इस जीत के साथ उन्होंने प्रतियोगिता में अपना दूसरा स्वर्ण पदक हासिल किया। इससे पहले वह लॉन्ग जंप में भी पहला स्थान प्राप्त कर चुके थे।

निषाद ने हाई जंप में अपने प्रदर्शन से एक बार फिर साबित किया कि वह इस स्पर्धा में पदक के मजबूत दावेदार हैं। हाई जंप प्रतियोगिता में खिलाड़ियों को एक निश्चित ऊंचाई पर लगाई गई बार को बिना गिराए पार करना होता है। प्रत्येक सफल प्रयास के बाद बार की ऊंचाई बढ़ाई जाती है। अंत में सबसे अधिक ऊंचाई पार करने वाला खिलाड़ी विजेता बनता है।

टी47 पैरा एथलेटिक्स की वह श्रेणी है, जिसमें हाथ से संबंधित शारीरिक दिव्यांगता वाले खिलाड़ी हिस्सा लेते हैं। निषाद की लगातार दूसरी स्वर्णिम उपलब्धि ने भारत के पदकों की संख्या बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई।

डिस्कस थ्रो में भारतीय खिलाड़ियों ने तीनों पदक जीते

पुरुषों की डिस्कस थ्रो स्पर्धा में भारत ने स्वर्ण, रजत और कांस्य तीनों पदक हासिल किए। देवेंद्र कुमार ने 781 रजा पॉइंट्स के साथ पहला स्थान प्राप्त किया। राकेश ने 771 अंक लेकर सिल्वर मेडल जीता, जबकि प्रदीप कुमार 669 अंकों के साथ तीसरे स्थान पर रहे।

इस मुकाबले में प्रदीप कुमार का प्रदर्शन भी चर्चा में रहा। उन्होंने 51.15 मीटर का थ्रो किया, जो प्रतियोगिता में सबसे लंबी दूरी थी। इसके बावजूद उन्हें कांस्य पदक से संतोष करना पड़ा। इसकी वजह प्रतियोगिता में लागू रजा पॉइंट्स प्रणाली थी।

इस स्पर्धा में एफ43, एफ44, एफ62 और एफ64 श्रेणियों के खिलाड़ी शामिल थे। इन वर्गों के खिलाड़ियों की शारीरिक स्थिति और थ्रो करने की क्षमता अलग-अलग होती है। इसलिए केवल दूरी के आधार पर पदकों का फैसला नहीं किया जाता। रजा पॉइंट्स के जरिए खिलाड़ी की श्रेणी और उसके प्रदर्शन को ध्यान में रखते हुए परिणाम तय किए जाते हैं। इस व्यवस्था का उद्देश्य अलग-अलग श्रेणियों के खिलाड़ियों के प्रदर्शन की निष्पक्ष तुलना करना है।

प्रणव सूरमा ने डिस्कस थ्रो में जीता स्वर्ण पदक

डिस्कस थ्रो की एक अन्य स्पर्धा में भारत के प्रणव सूरमा ने गोल्ड मेडल हासिल किया। पुरुषों के एफ51, एफ52 और एफ53 संयुक्त वर्ग में उन्होंने 932 रजा पॉइंट्स अर्जित किए। भारत के राम रतन सिंह 809 पॉइंट्स के साथ दूसरे स्थान पर रहे और उन्हें रजत पदक मिला।

प्रणव का सर्वश्रेष्ठ थ्रो 11.66 मीटर रहा। उन्होंने छह प्रयासों के दौरान यह दूरी हासिल की। इस संयुक्त प्रतियोगिता में भी खिलाड़ियों की श्रेणियों के अनुसार प्रदर्शन का मूल्यांकन रजा पॉइंट्स से किया गया। इसलिए केवल थ्रो की दूरी को देखकर अंतिम परिणाम का अंदाजा नहीं लगाया जा सकता।

प्रणव और राम रतन ने अपने प्रदर्शन के आधार पर क्रमशः पहला और दूसरा स्थान हासिल किया। इस तरह डिस्कस थ्रो में भारत को दो अलग-अलग स्पर्धाओं से स्वर्ण पदक मिले और पुरुषों के एक मुकाबले में तीनों पदक भारतीय खिलाड़ियों के नाम रहे।

सिमरन शर्मा ने 200 मीटर में बनाया नया गेम्स रिकॉर्ड

महिलाओं की 200 मीटर टी12 दौड़ में भारतीय एथलीट सिमरन शर्मा ने स्वर्ण पदक जीता। उन्होंने रेस को 24.80 सेकेंड में पूरा किया और एशियन पैरा गेम्स का नया रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया।

इस स्पर्धा में ईरान की हजर सफरजादेह ने 25.02 सेकेंड का समय लेकर रजत पदक जीता। भारत की तेजलबेन डामोर 25.23 सेकेंड में दौड़ पूरी करके तीसरे स्थान पर रहीं और उन्होंने कांस्य पदक हासिल किया।

टी12 श्रेणी दृष्टिबाधित खिलाड़ियों के लिए निर्धारित है। इस वर्ग में खिलाड़ियों की देखने की क्षमता प्रभावित होती है। प्रतियोगिता में समान प्रकार की दृष्टि संबंधी दिव्यांगता वाले खिलाड़ियों को निर्धारित नियमों के अनुसार मुकाबला करने का अवसर मिलता है। सिमरन का रिकॉर्डतोड़ प्रदर्शन भारतीय एथलेटिक्स के लिए दिन की प्रमुख उपलब्धियों में शामिल रहा।

दीप्ति जीवनजी ने लगातार दूसरी बार 400 मीटर में गोल्ड जीता

तेलंगाना की 23 वर्षीय धाविका दीप्ति जीवनजी ने महिलाओं की 400 मीटर टी20 स्पर्धा में स्वर्ण पदक हासिल किया। उन्होंने एक लैप की दौड़ 56.36 सेकेंड में पूरी की। इस प्रदर्शन के साथ दीप्ति ने 2022 में अपने ही नाम दर्ज 56.59 सेकेंड के गेम्स रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया। उन्होंने पुराने रिकॉर्ड में 0.23 सेकेंड का सुधार किया।

जापान की नीना कानो ने रजत और अकारी काटो ने कांस्य पदक जीता। दीप्ति की यह उपलब्धि इसलिए भी उल्लेखनीय रही, क्योंकि उन्होंने लगातार दूसरी बार इस स्पर्धा में एशियन पैरा गेम्स का स्वर्ण पदक हासिल किया।

टी20 वर्ग बौद्धिक दिव्यांगता वाले खिलाड़ियों के लिए होता है। इस श्रेणी में खिलाड़ियों की व्यक्तिगत क्षमताओं के अनुरूप प्रतिस्पर्धा कराई जाती है। दीप्ति ने अपनी गति और प्रदर्शन के दम पर भारत के स्वर्ण पदकों की संख्या बढ़ाई।

मनीष नरवाल ने शूटिंग में जीता सिल्वर, पैरालिंपिक्स का कोटा भी मिला

शूटिंग में भारतीय निशानेबाज मनीष नरवाल ने पुरुषों की 10 मीटर एयर पिस्टल एसएच1 स्पर्धा में रजत पदक जीता। उन्होंने फाइनल में कुल 233.7 अंक हासिल किए। दक्षिण कोरिया के जो जोंगडू 241.3 अंकों के साथ पहले स्थान पर रहे और उन्होंने गेम्स रिकॉर्ड बनाया। चीन के यांग चाओ ने 213.6 अंकों के साथ कांस्य पदक जीता।

इस फाइनल में कुल आठ निशानेबाजों ने हिस्सा लिया। मनीष के लिए यह उपलब्धि इसलिए भी अहम रही, क्योंकि उन्होंने इस प्रदर्शन के साथ 2028 में लॉस एंजिलिस में होने वाले पैरालिंपिक्स के लिए कोटा भी हासिल किया।

10 मीटर एयर पिस्टल में खिलाड़ी निर्धारित दूरी से एयर पिस्टल के जरिए लक्ष्य पर निशाना लगाते हैं। एसएच1 श्रेणी में ऐसे खिलाड़ी भाग लेते हैं, जो पिस्टल को स्वयं संभालकर निशाना लगा सकते हैं और जिन्हें शूटिंग के दौरान विशेष सहारे की आवश्यकता नहीं होती।

जैवलिन थ्रो में भारत को एक सिल्वर और एक ब्रॉन्ज

पुरुषों की जैवलिन थ्रो एफ53/एफ54 स्पर्धा में भी भारतीय खिलाड़ियों ने दो पदक जीते। प्रदीप कुमार ने एफ54 वर्ग में 27.45 मीटर का थ्रो करके रजत पदक हासिल किया। वहीं, आयुष वर्मा ने 17.88 मीटर की दूरी दर्ज करते हुए कांस्य पदक अपने नाम किया।

इस संयुक्त स्पर्धा में अलग-अलग श्रेणियों के खिलाड़ी हिस्सा लेते हैं। ऐसे में उनके प्रदर्शन की तुलना करने के लिए रजा पॉइंट्स प्रणाली का इस्तेमाल किया जाता है। पदकों का क्रम तय करते समय केवल थ्रो की दूरी नहीं, बल्कि संबंधित वर्ग के नियमों के अनुसार प्राप्त अंक भी महत्वपूर्ण होते हैं।

पावरलिफ्टिंग में अशोक को रजत, भारत के मार्गोनो ने जीता कांस्य

पुरुषों के 65 किलोग्राम तक के पैरा पावरलिफ्टिंग वर्ग में अशोक ने 192 किलोग्राम वजन उठाकर सिल्वर मेडल हासिल किया। चीन के झोउ यी ने 216 किलोग्राम वजन उठाकर स्वर्ण पदक जीता। भारत के मार्गोनो ने 177 किलोग्राम वजन उठाकर कांस्य पदक अपने नाम किया।

पैरा पावरलिफ्टिंग में खिलाड़ी बेंच पर लेटकर बारबेल को छाती से ऊपर उठाते हैं। प्रतियोगियों को निर्धारित संख्या में प्रयास दिए जाते हैं और उनके सफल प्रयासों में उठाए गए सर्वश्रेष्ठ वजन के आधार पर अंतिम परिणाम तय होता है।

दूसरे दिन के प्रदर्शन से भारत की पदक तालिका मजबूत

एशियन पैरा गेम्स के दूसरे दिन भारतीय खिलाड़ियों ने एथलेटिक्स से लेकर शूटिंग, पावरलिफ्टिंग और टेबल टेनिस तक अपनी मौजूदगी दर्ज कराई। निषाद कुमार, सिमरन शर्मा और दीप्ति जीवनजी के स्वर्ण पदकों के साथ डिस्कस थ्रो में मिली सफलता ने भारत के अभियान को मजबूती दी। मनीष नरवाल का रजत पदक और पैरालिंपिक्स कोटा भी दिन की अहम उपलब्धियों में शामिल रहा।

दूसरे दिन मिले 24 पदकों के बाद भारत के कुल पदक 35 हो गए हैं। भारतीय दल के खाते में नौ स्वर्ण, 11 रजत और 15 कांस्य पदक दर्ज हैं। प्रतियोगिता में खिलाड़ियों के प्रदर्शन ने भारत की पदक तालिका को मजबूती दी है।