गगल: पूर्व केंद्रीय मंत्री और हमीरपुर से सांसद अनुराग ठाकुर ने किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना को लेकर मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू के दावों पर पलटवार किया है। उन्होंने कहा कि किशाऊ परियोजना किसी एक मुख्यमंत्री या एक राज्य सरकार की उपलब्धि नहीं है, बल्कि केंद्र सरकार और परियोजना में शामिल छह राज्यों के बीच लंबे समय तक चले प्रयासों और आपसी सहमति का परिणाम है।
गगल हवाई अड्डे पर बुधवार को पत्रकारों से बातचीत करते हुए अनुराग ठाकुर ने कहा कि किशाऊ परियोजना को लेकर 15 सितंबर को हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान और दिल्ली के मुख्यमंत्रियों ने समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। उनके अनुसार, यह परियोजना लंबे समय से लंबित थी और इसे आगे बढ़ाने के लिए केंद्र तथा संबंधित राज्यों के बीच लगातार बातचीत और समन्वय की आवश्यकता थी।
अनुराग ठाकुर ने मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू पर निशाना साधते हुए कहा कि किसी बड़े प्रोजेक्ट की सफलता का श्रेय अकेले लेने के बजाय इसमें शामिल सभी पक्षों के योगदान को स्वीकार किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि किशाऊ परियोजना को लेकर बनी सहमति केंद्र सरकार और सभी संबंधित राज्यों के संयुक्त प्रयासों का परिणाम है।
‘क्रेडिट की राजनीति से बाहर आने की जरूरत’
अनुराग ठाकुर ने कहा कि राजनीतिक दलों को केवल तस्वीर खिंचवाने और किसी परियोजना का श्रेय अपने खाते में डालने की राजनीति से आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि जनता यह देख रही है कि किस सरकार और किस स्तर पर क्या काम किया जा रहा है।
उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि परियोजनाओं पर काम होने के बाद उसका श्रेय लेने की जल्दबाजी करने के बजाय यह देखना चाहिए कि लंबे समय से अटके मुद्दों को किस तरह आपसी सहमति से आगे बढ़ाया गया। उनके मुताबिक, किशाऊ परियोजना इसी प्रकार के सहयोग और समन्वय का उदाहरण है।
भाजपा सांसद ने कहा कि इस परियोजना से यह भी साबित होता है कि केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर लंबे समय से लंबित विषयों का समाधान निकाल सकती हैं। उन्होंने इसे सहकारी संघवाद की भावना से जुड़ा उदाहरण बताया और कहा कि जब विभिन्न सरकारें अपने मतभेदों से ऊपर उठकर किसी साझा परियोजना पर सहमत होती हैं तो उसका लाभ कई राज्यों के लोगों को मिल सकता है।
छह राज्यों के बीच हुआ समझौता
अनुराग ठाकुर ने बताया कि किशाऊ परियोजना को लेकर 15 सितंबर को छह राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने समझौते पर हस्ताक्षर किए। इसमें हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान और दिल्ली शामिल हैं।
किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना टौंस नदी पर प्रस्तावित है। टौंस नदी यमुना की प्रमुख सहायक नदियों में से एक है। परियोजना का उद्देश्य जल संसाधनों के बहुउद्देशीय उपयोग को बढ़ावा देना है। इसमें सिंचाई, पेयजल उपलब्धता और जलविद्युत उत्पादन जैसे प्रमुख घटक शामिल हैं।
अनुराग ठाकुर के अनुसार, परियोजना के जल घटक की कुल वित्तीय लागत का करीब 90 प्रतिशत हिस्सा केंद्र सरकार द्वारा वहन किया जाएगा। शेष लगभग 10 प्रतिशत लागत सहभागी राज्यों के बीच साझा की जाएगी।
उन्होंने कहा कि केंद्र की ओर से परियोजना के लिए इतनी बड़ी वित्तीय भागीदारी किए जाने से राज्यों पर वित्तीय बोझ को कम करने में मदद मिलेगी और लंबे समय से लंबित परियोजना को आगे बढ़ाने में सुविधा होगी।
97 हजार हेक्टेयर भूमि को सिंचाई का लक्ष्य
किशाऊ परियोजना से जुड़े आंकड़ों का उल्लेख करते हुए अनुराग ठाकुर ने कहा कि समझौते के तहत करीब 97 हजार हेक्टेयर भूमि को सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है। इसके अलावा परियोजना से 1476 मिलियन यूनिट स्वच्छ जलविद्युत उत्पादन का भी लक्ष्य है।
परियोजना के बहुउद्देशीय स्वरूप के कारण इसका लाभ केवल बिजली उत्पादन तक सीमित नहीं रहेगा। सिंचाई सुविधा में विस्तार से कृषि क्षेत्र को लाभ मिलने की संभावना है, जबकि पेयजल से जुड़े प्रावधानों से संबंधित क्षेत्रों की जल जरूरतों को पूरा करने में मदद मिल सकती है।
उन्होंने कहा कि ऐसी बड़ी अंतरराज्यीय परियोजनाओं को जमीन पर उतारने के लिए कई स्तरों पर सहमति और समन्वय की जरूरत होती है। इसलिए इसे किसी एक सरकार या एक नेता की उपलब्धि के तौर पर पेश करने के बजाय इसमें शामिल सभी पक्षों के सामूहिक प्रयास के रूप में देखा जाना चाहिए।
डिजिटल भुगतान पर भी अनुराग ने रखी बात
पत्रकारों से बातचीत के दौरान अनुराग ठाकुर ने डिजिटल भुगतान और यूपीआई से जुड़े मुद्दे पर भी अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि डिजिटल लेनदेन ने आम लोगों के लिए भुगतान की प्रक्रिया को काफी सरल बनाया है। यूपीआई के माध्यम से छोटे-बड़े भुगतान तेजी से किए जा सकते हैं और डिजिटल लेनदेन के बढ़ते इस्तेमाल ने आर्थिक गतिविधियों में भी सुविधा पैदा की है।
उन्होंने कांग्रेस पर डिजिटल भुगतान व्यवस्था को लेकर आलोचना करने का आरोप लगाया। अनुराग ने कहा कि सरकार की नीतियों और डिजिटल व्यवस्था को लेकर लोगों के बीच भ्रम पैदा करने के बजाय इसकी कार्यप्रणाली और लाभ को स्पष्ट रूप से समझने की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि भारत में यूपीआई और डिजिटल भुगतान का जिस बड़े स्तर पर इस्तेमाल हो रहा है, वह देश की तकनीकी क्षमता और डिजिटल बुनियादी ढांचे के विस्तार को दर्शाता है। उनके मुताबिक, देश में डिजिटल भुगतान को लेकर लोगों की स्वीकार्यता लगातार बढ़ी है और इसे सकारात्मक बदलाव के तौर पर देखा जाना चाहिए।
राहुल गांधी के बयानों पर भी निशाना
कांग्रेस नेता राहुल गांधी के बयानों को लेकर पूछे गए सवाल पर भी अनुराग ठाकुर ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने राहुल गांधी की राजनीतिक टिप्पणियों को लेकर उन पर निशाना साधा और उनके बयानों को अपरिपक्वता से जोड़ा।
अनुराग ठाकुर ने आरोप लगाया कि कांग्रेस पहले भारतीय जनता पार्टी और उसके नेताओं को निशाना बनाती थी, लेकिन अब उसके निशाने पर देश भी आ गया है। उन्होंने कहा कि राजनीतिक दलों को सरकार की नीतियों की आलोचना करते समय तथ्यों और मुद्दों पर बात करनी चाहिए।
उन्होंने कांग्रेस की ओर से सरकार की विभिन्न नीतियों को लेकर की जा रही आलोचना पर भी सवाल उठाए। अनुराग के मुताबिक, विपक्ष को केवल विरोध करने के बजाय यह भी बताना चाहिए कि किसी नीति में क्या खामी है और उसका वैकल्पिक समाधान क्या हो सकता है।
किशाऊ परियोजना को लेकर आगे बढ़ी प्रक्रिया
किशाऊ परियोजना लंबे समय से विभिन्न स्तरों पर चर्चा में रही है। अब छह राज्यों के बीच समझौते के बाद इसके आगे बढ़ने का रास्ता साफ होने की उम्मीद है। परियोजना में केंद्र की बड़ी वित्तीय भागीदारी और राज्यों के बीच सहमति को इसके क्रियान्वयन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
अनुराग ठाकुर ने कहा कि इस तरह की परियोजनाओं में केंद्र और राज्यों की भूमिका अलग-अलग हो सकती है, लेकिन अंतिम लक्ष्य लोगों को बेहतर सिंचाई, पेयजल और बिजली सुविधाएं उपलब्ध कराना होना चाहिए। उन्होंने कहा कि किशाऊ परियोजना इसी सामूहिक प्रयास का उदाहरण है।
उन्होंने एक बार फिर मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू पर निशाना साधते हुए कहा कि परियोजना के लिए हुए समझौते को किसी एक सरकार की उपलब्धि बताना उचित नहीं है। उनके अनुसार, इसमें केंद्र सरकार के साथ-साथ सभी छह सहभागी राज्यों की भूमिका रही है।
अनुराग ने कहा कि लंबे समय से लंबित परियोजना पर सहमति बनने से अंतरराज्यीय सहयोग की एक मिसाल सामने आई है। उनके मुताबिक, केंद्र और राज्यों के बीच संवाद और सहमति के जरिए जटिल मुद्दों का समाधान निकाला जा सकता है और किशाऊ परियोजना इसी प्रक्रिया का परिणाम है।
गगल में पत्रकारों से बातचीत के दौरान अनुराग ठाकुर ने हिमाचल की राजनीति से लेकर राष्ट्रीय स्तर के मुद्दों तक कई विषयों पर अपनी बात रखी। हालांकि किशाऊ परियोजना को लेकर उनके बयान का मुख्य केंद्र परियोजना के श्रेय को लेकर चल रही राजनीतिक बहस रही। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस परियोजना को आगे बढ़ाने में केंद्र और सभी सहभागी राज्यों की संयुक्त भूमिका को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।




