त्योहारों से पहले हिमाचल में खाद्य सुरक्षा का बड़ा अभियान, मोबाइल लैब करेगी बाजारों में दूध-पनीर की जांच

त्योहारों से पहले हिमाचल में खाद्य सुरक्षा का बड़ा अभियान, मोबाइल लैब करेगी बाजारों में दूध-पनीर की जांच

हिमाचल प्रदेश में आगामी त्योहारी सीजन को देखते हुए खाद्य पदार्थों में मिलावट के खिलाफ स्वास्थ्य विभाग ने निगरानी तेज करने की तैयारी कर ली है। दूध, पनीर, खोया, घी, मसाले और रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाली दूसरी खाद्य वस्तुओं की गुणवत्ता पर नजर रखने के लिए स्वास्थ्य सुरक्षा एवं विनियमन निदेशालय ने मोबाइल फूड टेस्टिंग लेबोरेटरी वैन के संचालन का विशेष कार्यक्रम जारी किया है।

विभाग की यह मोबाइल टेस्टिंग लैब अगस्त से प्रदेश के अलग-अलग इलाकों के बाजारों में पहुंचकर खाद्य पदार्थों की औचक जांच करेगी। इसका उद्देश्य उन खाद्य वस्तुओं की मौके पर ही प्राथमिक जांच करना है, जिनकी गुणवत्ता को लेकर संदेह हो। जांच के दौरान यदि किसी उत्पाद में मिलावट या खाद्य सुरक्षा से जुड़े नियमों के उल्लंघन का संदेह सामने आता है तो विभाग आगे की कार्रवाई के लिए संबंधित नमूने भी एकत्र कर सकेगा।

त्योहारों के दौरान दूध और दूध से बने उत्पादों की खपत सामान्य दिनों की तुलना में काफी बढ़ जाती है। विशेष रूप से खोया, पनीर, घी, दूध और उनसे तैयार होने वाली मिठाइयों की मांग बढ़ने के कारण मिलावट की आशंका भी बढ़ जाती है। इसी को ध्यान में रखते हुए विभाग ने त्योहारी सीजन शुरू होने से पहले ही खाद्य सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने का फैसला लिया है।

स्वास्थ्य विभाग की मोबाइल फूड टेस्टिंग लेबोरेटरी वैन का फायदा यह होगा कि खाद्य सुरक्षा अधिकारियों को हर संदिग्ध उत्पाद की प्रारंभिक जांच के लिए नमूने प्रयोगशाला तक भेजने का इंतजार नहीं करना पड़ेगा। मोबाइल सुविधा के माध्यम से कई प्रकार की प्राथमिक जांच मौके पर ही की जा सकेगी। इससे संदिग्ध खाद्य पदार्थों की पहचान में तेजी आएगी और अधिकारियों को यह तय करने में मदद मिलेगी कि किन उत्पादों के विस्तृत परीक्षण की आवश्यकता है।

विभाग की योजना के तहत मोबाइल लैब को केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं रखा जाएगा। इसे ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों के बाजारों में भेजा जाएगा। इससे छोटे कस्बों, स्थानीय बाजारों और ग्रामीण इलाकों में खाद्य पदार्थ बेचने वाले दुकानदारों तथा डेयरी संचालकों की भी निगरानी हो सकेगी।

खाद्य सुरक्षा अधिकारियों की औचक कार्रवाई का एक प्रमुख उद्देश्य मिलावट करने वाले कारोबारियों को पहले से तैयारी का मौका नहीं देना है। सामान्य निरीक्षण की जानकारी पहले से होने पर संदिग्ध कारोबारी अपने उत्पाद या स्टॉक को बदलने की कोशिश कर सकते हैं। मोबाइल वैन के माध्यम से अचानक बाजारों में पहुंचकर जांच किए जाने से ऐसी गतिविधियों पर रोक लगाने में मदद मिलने की उम्मीद है।

विभाग विशेष रूप से उन दुकानदारों और डेयरी संचालकों पर नजर रखेगा, जिनके उत्पादों की गुणवत्ता को लेकर शिकायतें मिलती रही हैं या जिनके खिलाफ पहले भी नियमों के उल्लंघन के मामले सामने आए हैं। संदिग्ध खाद्य पदार्थ मिलने पर अधिकारियों की ओर से आवश्यक नमूने लिए जा सकते हैं और उन्हें विस्तृत परीक्षण के लिए अधिकृत प्रयोगशाला भेजा जा सकता है।

दूध और उससे बने उत्पादों को अभियान में विशेष प्राथमिकता दी जा रही है। त्योहारों के समय मिठाइयों और अन्य खाद्य पदार्थों में दूध, खोया, पनीर और घी की खपत बढ़ जाती है। ऐसे में इन उत्पादों की गुणवत्ता सुनिश्चित करना स्वास्थ्य विभाग के लिए महत्वपूर्ण चुनौती बन जाता है। विभाग का प्रयास है कि बाजार में पहुंचने वाले खाद्य पदार्थ निर्धारित गुणवत्ता मानकों पर खरे उतरें और उपभोक्ताओं को सुरक्षित खाद्य सामग्री उपलब्ध हो।

मोबाइल लैब के जरिए बाजार में उपलब्ध खाद्य पदार्थों की प्राथमिक जांच होने से उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करने में भी मदद मिलेगी। यदि किसी उत्पाद के संदिग्ध होने की पुष्टि होती है तो विभाग उसके खिलाफ आगे की प्रक्रिया शुरू कर सकता है। इस तरह मोबाइल टेस्टिंग व्यवस्था को खाद्य सुरक्षा निगरानी तंत्र का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया जा रहा है।

स्वास्थ्य विभाग ने खाद्य पदार्थों की निगरानी के साथ-साथ दुधारू पशुओं में ऑक्सीटोसिन के अनधिकृत इस्तेमाल को लेकर भी अपनी निगरानी व्यवस्था मजबूत की है। पशुपालकों द्वारा अधिक दूध प्राप्त करने के लिए ऑक्सीटोसिन के गलत या गैरकानूनी इस्तेमाल की शिकायतें समय-समय पर सामने आती रही हैं। विभाग अब इस दवा के उत्पादन, भंडारण और आपूर्ति की गतिविधियों पर भी नजर रखने की तैयारी कर रहा है।

स्वास्थ्य सुरक्षा एवं विनियमन निदेशालय ने प्रदेश में ऑक्सीटोसिन के अधिकृत निर्माताओं की सूची जारी की है। इस सूची के माध्यम से यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि राज्य में दवा का निर्माण और उसकी आपूर्ति किन अधिकृत संस्थानों के माध्यम से हो रही है। विभाग का उद्देश्य अनधिकृत स्रोतों से ऑक्सीटोसिन की बिक्री और आपूर्ति पर नियंत्रण रखना है।

अधिकारियों के अनुसार ऑक्सीटोसिन की बिक्री या इस्तेमाल निर्धारित नियमों के विपरीत पाए जाने पर संबंधित व्यक्ति या प्रतिष्ठान के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है। विभाग की निगरानी व्यवस्था का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि दवा का इस्तेमाल केवल अधिकृत और निर्धारित परिस्थितियों में ही हो।

खाद्य सुरक्षा अभियान के तहत दुकानों, डेयरी प्रतिष्ठानों और खाद्य कारोबार से जुड़े अन्य स्थानों पर निरीक्षण किया जा सकता है। जांच के दौरान दूध, पनीर, घी, मसालों और अन्य सामान्य खाद्य पदार्थों के नमूने लिए जाएंगे। प्राथमिक जांच में किसी तरह की गड़बड़ी सामने आने पर संबंधित खाद्य पदार्थ का विस्तृत परीक्षण कराया जा सकता है।

विभाग की ओर से मोबाइल वैन का रोस्टर जारी किए जाने के बाद अब अलग-अलग क्षेत्रों में इसकी आवाजाही तय कार्यक्रम के अनुसार होगी। इससे खाद्य सुरक्षा अधिकारियों को बाजारों में नियमित और व्यवस्थित निगरानी करने में मदद मिलेगी। साथ ही त्योहारी सीजन के दौरान बढ़ने वाली खाद्य मांग के बीच मिलावट के मामलों पर तुरंत प्रतिक्रिया देने की क्षमता भी मजबूत होगी।

स्वास्थ्य विभाग का फोकस केवल कार्रवाई करने तक सीमित नहीं है, बल्कि खाद्य कारोबारियों को निर्धारित गुणवत्ता मानकों का पालन कराने पर भी रहेगा। खाद्य पदार्थों की बिक्री करने वाले दुकानदारों और डेयरी संचालकों को खाद्य सुरक्षा से जुड़े नियमों का पालन करना होगा। किसी भी प्रकार की मिलावट, घटिया गुणवत्ता या नियमों की अनदेखी पाए जाने पर संबंधित कारोबारी के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।

त्योहारी सीजन में मिठाइयों और डेयरी उत्पादों की मांग बढ़ने के साथ बाजार में नकली या मिलावटी सामग्री पहुंचने का जोखिम भी बढ़ जाता है। ऐसे में मोबाइल लैब के माध्यम से मौके पर जांच की सुविधा विभाग के लिए अहम साबित हो सकती है। इससे संदिग्ध उत्पादों को शुरुआती स्तर पर चिन्हित करने और जरूरत पड़ने पर उन्हें विस्तृत जांच के लिए भेजने में समय की बचत होगी।

ग्रामीण क्षेत्रों में मोबाइल फूड टेस्टिंग वैन की पहुंच विशेष रूप से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। कई ग्रामीण और छोटे कस्बाई बाजारों में उपभोक्ताओं को खाद्य गुणवत्ता की जांच संबंधी सुविधाएं सीमित रूप से उपलब्ध होती हैं। मोबाइल लैब ऐसे क्षेत्रों तक सीधे पहुंचकर खाद्य सुरक्षा व्यवस्था को व्यापक बनाने में मदद करेगी।

विभाग की ओर से की जाने वाली औचक जांच से खाद्य कारोबारियों में नियमों के प्रति सतर्कता बढ़ने की उम्मीद है। बाजार में अचानक होने वाली जांच के कारण कारोबारियों को अपने स्टॉक, उत्पादन प्रक्रिया और खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता को लेकर लगातार सावधानी बरतनी होगी। इससे लंबे समय में खाद्य सुरक्षा मानकों के पालन को बढ़ावा मिल सकता है।

ऑक्सीटोसिन को लेकर भी विभाग की नई निगरानी व्यवस्था इसी व्यापक खाद्य सुरक्षा अभियान का हिस्सा है। अधिक दूध उत्पादन के लिए दुधारू पशुओं में दवा के गलत इस्तेमाल से जुड़े मामलों को रोकने के लिए अधिकृत निर्माताओं की जानकारी और सप्लाई चेन पर नजर रखना जरूरी माना जा रहा है। विभाग इसी दिशा में निगरानी तंत्र को मजबूत कर रहा है।

स्वास्थ्य विभाग का यह अभियान ऐसे समय में शुरू हो रहा है जब बाजारों में त्योहारी खरीदारी धीरे-धीरे बढ़ने लगती है। त्योहारों के दौरान बड़ी मात्रा में मिठाइयां, डेयरी उत्पाद, मसाले और अन्य खाद्य सामग्री बाजार में आती हैं। ऐसे में खाद्य सुरक्षा अधिकारियों के सामने यह सुनिश्चित करने की चुनौती होती है कि उपभोक्ताओं तक मानकों के अनुरूप सुरक्षित खाद्य सामग्री ही पहुंचे।

मोबाइल फूड टेस्टिंग लेबोरेटरी वैन के जरिए विभाग अब इस चुनौती से निपटने के लिए अधिक सक्रिय निगरानी व्यवस्था अपनाएगा। मौके पर प्राथमिक जांच, संदिग्ध नमूनों का संग्रह, विस्तृत परीक्षण और नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई—इन सभी स्तरों पर व्यवस्था को मजबूत करने की कोशिश की जा रही है।

स्वास्थ्य विभाग की इस पहल से उपभोक्ताओं को भी राहत मिलने की उम्मीद है। खासकर त्योहारों के दौरान दूध, पनीर, खोया और घी जैसे उत्पाद खरीदने वाले लोगों के लिए खाद्य गुणवत्ता की निगरानी महत्वपूर्ण है। विभाग की औचक जांच से बाजार में मिलावट करने वालों पर दबाव बढ़ेगा और नियमों का पालन करने वाले कारोबारियों को भी प्रतिस्पर्धा में उचित माहौल मिलेगा।

कुल मिलाकर, हिमाचल प्रदेश में त्योहारी सीजन से पहले खाद्य सुरक्षा को लेकर निगरानी का दायरा बढ़ाया जा रहा है। अगस्त से मोबाइल फूड टेस्टिंग लैब बाजारों में उतरकर संदिग्ध खाद्य पदार्थों की मौके पर जांच करेगी, जबकि ऑक्सीटोसिन के अधिकृत निर्माताओं और उसकी सप्लाई पर भी विभाग की नजर रहेगी। स्वास्थ्य विभाग का लक्ष्य स्पष्ट है कि मिलावटी और घटिया खाद्य पदार्थों को बाजार में पहुंचने से रोका जाए और लोगों की सेहत से खिलवाड़ करने वाले कारोबारियों के खिलाफ नियमों के तहत सख्त कार्रवाई की जाए।