कृति सेनन के एग फ्रीजिंग फैसले ने छेड़ी नई बहस, जानिए किस उम्र में माना जाता है सबसे सही विकल्प

कृति सेनन के एग फ्रीजिंग फैसले ने छेड़ी नई बहस, जानिए किस उम्र में माना जाता है सबसे सही विकल्प

बॉलीवुड अभिनेत्री कृति सेनन ने हाल ही में एक पॉडकास्ट के दौरान अपनी निजी जिंदगी से जुड़ा ऐसा अनुभव साझा किया, जिसने महिलाओं की फर्टिलिटी और फैमिली प्लानिंग को लेकर नई चर्चा शुरू कर दी है। कृति ने बताया कि उन्होंने फिल्म ‘मिमी’ रिलीज होने से भी पहले अपने एग्स फ्रीज करवा लिए थे। उन्होंने इस फैसले को अपनी जिंदगी का सबसे समझदारी भरा और खुद को दिया गया सबसे बेहतरीन उपहार बताया। उनके इस खुलासे के बाद बड़ी संख्या में महिलाएं यह जानना चाहती हैं कि आखिर एग फ्रीजिंग क्या है, यह क्यों कराई जाती है और इसे कराने की सही उम्र क्या मानी जाती है।

विशेषज्ञों के अनुसार यह फैसला केवल एक सेलिब्रिटी की निजी पसंद नहीं है, बल्कि यह महिलाओं के प्रजनन स्वास्थ्य को लेकर समाज में जागरूकता बढ़ाने वाला अहम कदम है। लंबे समय से डॉक्टर चाहते थे कि इस विषय पर खुलकर चर्चा हो, ताकि महिलाएं बिना झिझक सही जानकारी हासिल कर सकें और अपने भविष्य से जुड़े फैसले सोच-समझकर लें।

भारत में लंबे समय तक एग फ्रीजिंग को लेकर कई तरह की गलत धारणाएं बनी रहीं। यदि कोई अविवाहित महिला इस प्रक्रिया के बारे में जानकारी लेने किसी फर्टिलिटी सेंटर पहुंचती थी, तो अक्सर लोग यह मान लेते थे कि वह शादी नहीं करना चाहती या केवल अपने करियर को प्राथमिकता दे रही है। कई मामलों में इसे महिलाओं की निजी असफलता या देर से लिए गए फैसले के रूप में भी देखा जाता था। यही वजह रही कि बहुत-सी महिलाएं चाहकर भी इस विषय पर खुलकर बात नहीं कर पाती थीं।

लेकिन अब हालात धीरे-धीरे बदलते दिखाई दे रहे हैं। कृति सेनन जैसी लोकप्रिय अभिनेत्री ने बिना किसी संकोच के यह स्वीकार किया कि उन्होंने समय रहते अपने एग्स फ्रीज कराए। उन्होंने यह भी बताया कि उस समय उन पर शादी का कोई दबाव नहीं था और न ही वह किसी मजबूरी में थीं। उनका उद्देश्य केवल भविष्य के लिए एक सुरक्षित विकल्प तैयार रखना था। इससे यह संदेश गया कि एग फ्रीजिंग किसी डर या मजबूरी का नहीं, बल्कि बेहतर योजना बनाने का निर्णय भी हो सकता है।

विशेषज्ञों के अनुसार, महिलाओं की उम्र बढ़ने के साथ उनकी फर्टिलिटी स्वाभाविक रूप से कम होने लगती है। खासतौर पर 35 वर्ष के बाद अंडाणुओं की संख्या और गुणवत्ता दोनों में तेजी से गिरावट देखी जाती है। यही कारण है कि मेडिकल साइंस समय रहते फर्टिलिटी प्रिजर्वेशन पर जोर देता है। यदि कोई महिला भविष्य में मां बनने की संभावना सुरक्षित रखना चाहती है, तो एग फ्रीजिंग एक उपयोगी विकल्प साबित हो सकता है।

एग फ्रीजिंग का सबसे अच्छा समय आमतौर पर 28 से 32 वर्ष के बीच माना जाता है। इस दौरान महिलाओं के अंडाणु अपेक्षाकृत अधिक स्वस्थ और बेहतर गुणवत्ता वाले होते हैं। हालांकि यह कोई सख्त नियम नहीं है। यदि किसी महिला को मेडिकल या व्यक्तिगत कारणों से बाद में यह प्रक्रिया करानी पड़े, तब भी विशेषज्ञ उसकी स्थिति के अनुसार सलाह देते हैं। लेकिन कम उम्र में कराए गए एग्स भविष्य में बेहतर परिणाम देने की संभावना रखते हैं।

एग फ्रीजिंग की प्रक्रिया आधुनिक चिकित्सा तकनीक का हिस्सा है। इसमें पहले हार्मोनल दवाओं के माध्यम से अंडाशय को कुछ दिनों तक स्टिम्युलेट किया जाता है ताकि पर्याप्त संख्या में एग्स विकसित हो सकें। इसके बाद एक छोटी मेडिकल प्रक्रिया के जरिए उन एग्स को निकालकर विशेष तकनीक से बेहद कम तापमान पर सुरक्षित रखा जाता है। जरूरत पड़ने पर भविष्य में इन्हें आईवीएफ प्रक्रिया के माध्यम से उपयोग किया जा सकता है। पूरी प्रक्रिया विशेषज्ञ डॉक्टरों की निगरानी में की जाती है।

कृति सेनन ने अपने अनुभव साझा करते हुए यह भी स्वीकार किया कि यह प्रक्रिया पूरी तरह आसान नहीं होती। इसमें शारीरिक और मानसिक दोनों तरह की तैयारियों की जरूरत होती है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि भविष्य को लेकर जो मानसिक सुकून मिलता है, वह इस पूरी प्रक्रिया को सार्थक बना देता है। उनका मानना है कि महिलाओं को अपने स्वास्थ्य और भविष्य से जुड़े फैसले बिना किसी सामाजिक दबाव के लेने चाहिए।

फर्टिलिटी विशेषज्ञों का कहना है कि आज की जीवनशैली पहले से काफी बदल चुकी है। उच्च शिक्षा, करियर, आर्थिक स्थिरता, सही जीवनसाथी की तलाश या अन्य व्यक्तिगत कारणों से कई महिलाएं पहले की तुलना में देर से शादी कर रही हैं। ऐसे में जैविक घड़ी यानी बायोलॉजिकल क्लॉक अपनी गति से चलती रहती है। यही कारण है कि कुछ महिलाएं भविष्य की संभावनाओं को सुरक्षित रखने के लिए एग फ्रीजिंग का विकल्प चुनती हैं।

हालांकि डॉक्टर यह भी स्पष्ट करते हैं कि एग फ्रीजिंग को भविष्य में मां बनने की 100 प्रतिशत गारंटी नहीं माना जा सकता। यह केवल एक अतिरिक्त अवसर प्रदान करता है, जिससे बाद में गर्भधारण की संभावना बढ़ सकती है। सफलता कई अन्य कारकों पर भी निर्भर करती है, जिनमें महिला की उम्र, स्वास्थ्य, एग्स की गुणवत्ता और आईवीएफ प्रक्रिया की सफलता शामिल है। इसलिए इस तकनीक को लेकर वास्तविक जानकारी होना बेहद जरूरी है।

विशेषज्ञों का मानना है कि समाज में अब भी इस विषय पर कई तरह की भ्रांतियां मौजूद हैं। कुछ लोग इसे केवल करियर को प्राथमिकता देने वाली महिलाओं का फैसला मानते हैं, जबकि हकीकत इससे काफी अलग है। कई महिलाएं मेडिकल कारणों से भी एग फ्रीजिंग कराती हैं। उदाहरण के लिए कैंसर के इलाज से पहले कीमोथेरेपी या रेडियोथेरेपी शुरू होने से पहले डॉक्टर कई बार फर्टिलिटी सुरक्षित रखने के लिए यह विकल्प सुझाते हैं। इसके अलावा एंडोमेट्रियोसिस जैसी कुछ स्वास्थ्य समस्याओं में भी यह प्रक्रिया उपयोगी साबित हो सकती है।

एग फ्रीजिंग का सबसे बड़ा उद्देश्य महिलाओं को अपने जीवन के फैसले लेने की स्वतंत्रता देना है। यह तकनीक किसी को मातृत्व से दूर नहीं करती, बल्कि सही समय आने तक उस संभावना को सुरक्षित रखने का माध्यम बनती है। इसलिए इसे करियर और परिवार के बीच चुनाव के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि महिलाओं के प्रजनन अधिकारों और भविष्य की योजना का हिस्सा माना जाना चाहिए।

कृति सेनन के बयान के बाद सोशल मीडिया पर भी इस विषय को लेकर काफी चर्चा देखने को मिली। कई महिलाओं ने माना कि उन्हें पहली बार इस प्रक्रिया के बारे में विस्तार से जानकारी मिली है। वहीं विशेषज्ञों का कहना है कि यदि इस तरह की चर्चाएं बढ़ती हैं, तो महिलाएं समय रहते डॉक्टरों से सलाह लेने में संकोच नहीं करेंगी। सही जानकारी मिलने से वे अपनी जरूरत और स्वास्थ्य के अनुसार बेहतर निर्णय ले सकेंगी।

डॉक्टरों की राय है कि किसी भी महिला को केवल इंटरनेट या सोशल मीडिया की जानकारी के आधार पर निर्णय नहीं लेना चाहिए। यदि कोई महिला भविष्य में एग फ्रीजिंग पर विचार कर रही है, तो उसे पहले फर्टिलिटी विशेषज्ञ से मिलकर अपनी मेडिकल हिस्ट्री, हार्मोन लेवल, ओवरी रिजर्व और अन्य जरूरी जांच करानी चाहिए। इसके बाद ही यह तय किया जा सकता है कि उसके लिए यह प्रक्रिया सही रहेगी या नहीं।

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में भारत में भी एग फ्रीजिंग को लेकर लोगों की सोच और अधिक सकारात्मक हो सकती है। जिस तरह पहले आईवीएफ जैसी तकनीकों को लेकर झिझक थी और आज वे सामान्य होती जा रही हैं, उसी तरह फर्टिलिटी प्रिजर्वेशन को भी धीरे-धीरे स्वीकार किया जा रहा है। इसके लिए सबसे जरूरी है सही जानकारी, मेडिकल सलाह और समाज में खुली बातचीत।

महिलाओं को इस विषय पर तब नहीं सोचना चाहिए जब उम्र काफी आगे निकल जाए, रिश्ता टूट जाए या मातृत्व को लेकर तनाव बढ़ने लगे। यदि सही समय पर जानकारी लेकर विकल्पों पर विचार किया जाए, तो भविष्य में बेहतर फैसले लिए जा सकते हैं। उनका मानना है कि फर्टिलिटी को सुरक्षित रखना किसी मजबूरी का संकेत नहीं, बल्कि दूरदर्शिता और समझदारी का परिचायक है।

कृति सेनन की एक व्यक्तिगत स्वीकारोक्ति ने लाखों महिलाओं के बीच एक ऐसे विषय पर संवाद शुरू कर दिया है, जिस पर पहले अक्सर चुप्पी रहती थी। विशेषज्ञों को उम्मीद है कि इससे अधिक महिलाएं बिना किसी सामाजिक डर या झिझक के फर्टिलिटी से जुड़े सवाल पूछेंगी और जरूरत पड़ने पर समय रहते सही मेडिकल सलाह लेंगी। यही जागरूकता भविष्य में महिलाओं को अपने स्वास्थ्य, करियर और परिवार के बीच संतुलित और आत्मविश्वास से भरे फैसले लेने में मदद कर सकती है।