आजकल बड़ी संख्या में लोग सोते समय म्यूजिक, मेडिटेशन, व्हाइट नॉइज़ या पॉडकास्ट सुनने के लिए ईयरबड्स का इस्तेमाल करते हैं। कई लोगों की आदत बन चुकी है कि वे पूरी रात कानों में ईयरबड्स लगाकर ही सोते हैं। हालांकि यह आदत आरामदायक जरूर लग सकती है, लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि लंबे समय तक लगातार ईयरबड्स पहनकर सोना कानों की सेहत के लिए पूरी तरह सुरक्षित नहीं माना जा सकता। इससे कानों में वैक्स जमा होने, संक्रमण, त्वचा में जलन और सुनने की क्षमता पर असर जैसी कई समस्याएं पैदा हो सकती हैं।
कानों को भी चाहिए हवा और प्राकृतिक सफाई
हमारे कानों की बनावट ऐसी होती है कि उनमें प्राकृतिक रूप से हवा का प्रवाह बना रहता है। यही कारण है कि कानों के अंदर बनने वाली नमी धीरे-धीरे बाहर निकलती रहती है और अतिरिक्त ईयर वैक्स भी सामान्य प्रक्रिया के तहत बाहर की ओर आता रहता है। लेकिन जब लंबे समय तक कान पूरी तरह बंद रहते हैं, खासकर ऐसे ईयरबड्स से जो इयर कैनाल को सील कर देते हैं, तब यह प्राकृतिक प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।
रातभर ईयरबड्स लगाए रखने से कानों के अंदर नमी फंस सकती है। जब नमी बाहर नहीं निकल पाती तो बैक्टीरिया और फंगस के पनपने के लिए अनुकूल वातावरण तैयार हो जाता है। हालांकि हर व्यक्ति में संक्रमण नहीं होता, लेकिन जिन लोगों की त्वचा संवेदनशील होती है या जिन्हें पहले से कानों से जुड़ी समस्याएं रही हैं, उनमें खतरा अधिक हो सकता है।
किन लोगों में ज्यादा रहता है संक्रमण का जोखिम?
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि किसी व्यक्ति के कान की त्वचा पर पहले से खरोंच है, कान के पर्दे को कभी नुकसान पहुंच चुका है या वह बार-बार कान के संक्रमण से परेशान रहता है, तो उसे रातभर ईयरबड्स पहनने से बचना चाहिए। ऐसे लोगों में हल्की सी नमी भी संक्रमण का कारण बन सकती है।
यदि रात में नहाने के बाद कानों में पानी चला गया हो और उसी स्थिति में ईयरबड्स पहन लिए जाएं, तो संक्रमण की संभावना और बढ़ सकती है। इसलिए सोने से पहले यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि कान पूरी तरह सूखे हों। जरूरत पड़ने पर हल्की गर्म हवा वाले हेयर ड्रायर का सुरक्षित दूरी से उपयोग किया जा सकता है ताकि कानों की अतिरिक्त नमी खत्म हो जाए।
ईयर वैक्स अंदर की ओर धकेल सकते हैं ईयरबड्स
कानों में बनने वाला वैक्स शरीर की एक प्राकृतिक सुरक्षा प्रणाली का हिस्सा है। यह धूल, छोटे कण और बैक्टीरिया को अंदर जाने से रोकता है। सामान्य स्थिति में यह धीरे-धीरे बाहर निकल जाता है, लेकिन लगातार ईयरबड्स लगाने से यह प्रक्रिया बाधित हो सकती है।
ईयरबड्स बार-बार लगाने और निकालने से वैक्स बाहर आने की बजाय कान की नली के अंदर और गहराई तक धकेला जा सकता है। यदि आपको अपने ईयरबड्स की सिलिकॉन टिप पर बार-बार वैक्स चिपका दिखाई देता है, तो यह संकेत हो सकता है कि कान की सफाई की सामान्य प्रक्रिया प्रभावित हो रही है।
वैक्स जमने पर दिखाई दे सकते हैं ये लक्षण
हर व्यक्ति में ईयर वैक्स जमा होने पर परेशानी महसूस हो, यह जरूरी नहीं है। लेकिन यदि वैक्स अधिक मात्रा में जमा हो जाए तो कई तरह के संकेत दिखाई दे सकते हैं। इनमें सुनने की क्षमता कम होना, कान बंद या भरा-भरा महसूस होना, लगातार खुजली रहना, कान में दबाव महसूस होना या घंटी बजने जैसी आवाज सुनाई देना शामिल है।
यदि ऐसे लक्षण लंबे समय तक बने रहें तो स्वयं नुकीली चीजों से कान साफ करने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। डॉक्टर की सलाह लेकर कान की सफाई कराना या मेडिकल स्टोर पर उपलब्ध सुरक्षित ईयर वैक्स रिमूवल किट का उपयोग करना बेहतर विकल्प माना जाता है।
त्वचा में जलन और एलर्जी की भी हो सकती है समस्या
लगातार कई घंटों तक ईयरबड्स पहनने से कानों की बाहरी त्वचा पर दबाव बना रहता है। इससे त्वचा लाल हो सकती है, खुजली हो सकती है या हल्की सूजन भी आ सकती है। कुछ लोगों को ईयरबड्स बनाने में इस्तेमाल होने वाले सिलिकॉन या अन्य पदार्थों से एलर्जी भी हो सकती है।
यदि ईयरबड्स पहनने के बाद कानों में दर्द, जलन, खुजली या बार-बार असहजता महसूस होने लगे तो उन्हें बदल देना चाहिए। कई बार अलग आकार या अलग सामग्री वाले ईयरबड्स उपयोग करने से यह समस्या कम हो जाती है।
तेज आवाज में सुनना पहुंचा सकता है स्थायी नुकसान
डॉक्टरों के अनुसार केवल ईयरबड्स पहनना ही समस्या नहीं है, बल्कि उनमें सुनी जाने वाली आवाज का स्तर भी बेहद महत्वपूर्ण है। यदि लंबे समय तक बहुत तेज आवाज में संगीत या अन्य ऑडियो सुना जाए तो इससे सुनने की क्षमता स्थायी रूप से प्रभावित हो सकती है।
कम आवाज में संगीत सुनकर सोने से सामान्यतः कोई बड़ी परेशानी नहीं होती, लेकिन यदि वॉल्यूम लगातार अधिक रखा जाए तो कानों की नाजुक कोशिकाएं धीरे-धीरे क्षतिग्रस्त होने लगती हैं। एक बार ये कोशिकाएं नष्ट हो जाएं तो इन्हें दोबारा ठीक करना संभव नहीं होता।
विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार सामान्य बातचीत लगभग 60 से 70 डेसिबल के बीच होती है और यह सुरक्षित मानी जाती है। लेकिन यदि कोई व्यक्ति 80 डेसिबल से अधिक की आवाज लंबे समय तक सुनता है, जैसे तेज संगीत या लगातार शोर वाले वातावरण में रहता है, तो उसकी सुनने की क्षमता प्रभावित हो सकती है।
पहले से सुनने में दिक्कत है तो रखें अतिरिक्त सावधानी
जिन लोगों को पहले से कम सुनाई देता है, वे अक्सर ईयरबड्स का वॉल्यूम ज्यादा बढ़ा देते हैं। इससे समस्या और गंभीर हो सकती है। इसलिए यदि पहले से हियरिंग लॉस है तो विशेषज्ञ की सलाह लेकर ही ऑडियो डिवाइस का इस्तेमाल करना चाहिए।
आजकल कई स्मार्टफोन में आवाज की तीव्रता मापने और उसे सीमित करने की सुविधा उपलब्ध है। आईफोन में डेसिबल मॉनिटरिंग फीचर मिलता है, जबकि एंड्रॉयड यूजर्स भी इनबिल्ट टूल्स या डेसिबल मापने वाले ऐप्स की मदद से वॉल्यूम पर नजर रख सकते हैं।
सोते समय अलार्म और सुरक्षा संकेत भी सुनाई देने चाहिए
यदि आप नॉइज़ कैंसिलिंग ईयरबड्स या तेज आवाज में संगीत सुनते हुए सोते हैं, तो यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि कहीं आप अलार्म, डोरबेल या स्मोक डिटेक्टर जैसी महत्वपूर्ण आवाजें सुनने से वंचित न रह जाएं।
विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि यदि आप सोते समय ऑडियो सुनते हैं तो पहले यह जांच लें कि अलार्म या अन्य जरूरी चेतावनी संकेतों की आवाज आपको सुनाई देती है या नहीं। सुरक्षा के लिहाज से यह छोटी सी सावधानी बहुत महत्वपूर्ण हो सकती है।
अगर ईयरबड्स पहनना जरूरी हो तो अपनाएं ये उपाय
यदि आपको बिना ऑडियो सुने नींद नहीं आती और ईयरबड्स पहनना आपकी आदत बन चुका है, तो कुछ सावधानियां अपनाकर जोखिम काफी हद तक कम किया जा सकता है। सबसे पहले ऐसे ईयरबड्स चुनें जो कान की नली को पूरी तरह बंद न करें। कम उभार वाले और मुलायम डिजाइन वाले मॉडल सोते समय अपेक्षाकृत आरामदायक माने जाते हैं।
ईयरबड्स की नियमित सफाई भी बेहद जरूरी है। गंदे ईयरबड्स पर बैक्टीरिया जमा हो सकते हैं, जो बाद में कानों तक पहुंच सकते हैं। साथ ही यदि कान में पहले से दर्द, खुजली या संक्रमण हो तो पूरी तरह ठीक होने तक ईयरबड्स का उपयोग नहीं करना चाहिए।
इन विकल्पों पर भी कर सकते हैं विचार
डॉक्टरों का मानना है कि यदि केवल नींद के दौरान संगीत या पॉडकास्ट सुनना उद्देश्य है, तो इन-ईयर ईयरबड्स की बजाय दूसरे विकल्प ज्यादा सुरक्षित हो सकते हैं। ओवर-द-ईयर हेडफोन, इनबिल्ट स्पीकर वाले स्लीप हेडबैंड या तकिए के अंदर रखे जाने वाले फ्लैट स्पीकर बेहतर विकल्प माने जाते हैं।
इन उपकरणों में हवा का प्रवाह अधिक रहता है, जिससे कानों में नमी कम जमा होती है और संक्रमण का खतरा भी घट जाता है। साथ ही लंबे समय तक कानों पर दबाव भी नहीं पड़ता।
रातभर ईयरबड्स लगाकर सोना हर व्यक्ति के लिए खतरनाक नहीं होता, लेकिन इसे पूरी तरह सुरक्षित भी नहीं माना जा सकता। यदि कान स्वस्थ हैं, त्वचा संवेदनशील नहीं है और ईयरबड्स साफ रखे जाते हैं तो गंभीर समस्या होने की संभावना कम रहती है। फिर भी लगातार कई घंटों तक कान बंद रखना, तेज आवाज में ऑडियो सुनना और गीले कानों में ईयरबड्स पहनना संक्रमण, वैक्स जमने और सुनने की क्षमता पर नकारात्मक असर डाल सकता है। इसलिए बेहतर यही है कि यदि संभव हो तो सुरक्षित विकल्प अपनाएं, आवाज सीमित रखें और कानों की नियमित देखभाल करें।




