डिजिटल दौर ने हमारी जिंदगी को पहले से कहीं ज्यादा आसान बना दिया है। ऑफिस का काम हो, ऑनलाइन पढ़ाई, मनोरंजन, सोशल मीडिया या फिर दोस्तों से बातचीत, ज्यादातर समय अब मोबाइल और लैपटॉप की स्क्रीन के सामने ही बीतता है। हालांकि तकनीक ने सुविधाएं बढ़ाई हैं, लेकिन इसके साथ कुछ ऐसी स्वास्थ्य समस्याएं भी तेजी से सामने आ रही हैं, जिन पर अक्सर लोग तब तक ध्यान नहीं देते जब तक परेशानी गंभीर न हो जाए। ऐसी ही एक समस्या है सर्वाइकल पेन यानी गर्दन में लगातार रहने वाला दर्द और अकड़न।
कुछ साल पहले तक यह समस्या बढ़ती उम्र के लोगों में ज्यादा देखी जाती थी, लेकिन अब तस्वीर पूरी तरह बदल चुकी है। आज 20 से 30 साल की उम्र के युवाओं में भी सर्वाइकल पेन के मामले तेजी से सामने आ रहे हैं। लंबे समय तक एक ही पोजिशन में बैठकर काम करना, बार-बार मोबाइल की स्क्रीन पर नजरें टिकाए रखना और गलत पोश्चर अपनाना इसकी सबसे बड़ी वजह मानी जा रही है।
बदलती लाइफस्टाइल बना रही है बड़ा कारण
वर्क फ्रॉम होम, हाइब्रिड जॉब और डिजिटल ऑफिस कल्चर के कारण लाखों लोग रोजाना 8 से 9 घंटे या उससे भी ज्यादा समय कंप्यूटर के सामने बिताते हैं। काम खत्म होने के बाद भी मोबाइल पर सोशल मीडिया, वीडियो देखने या गेम खेलने में कई घंटे निकल जाते हैं। लगातार स्क्रीन देखने की यह आदत गर्दन और रीढ़ की हड्डी पर अतिरिक्त दबाव डालती है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि शरीर को लंबे समय तक एक ही मुद्रा में रखने से गर्दन की मांसपेशियां धीरे-धीरे कमजोर होने लगती हैं। शुरुआत में हल्का दर्द या अकड़न महसूस होती है, लेकिन समय रहते ध्यान न दिया जाए तो यह समस्या लगातार बढ़ सकती है और रोजमर्रा की गतिविधियों को भी प्रभावित कर सकती है।
युवाओं में तेजी से बढ़ रहे हैं मामले
पहले सर्वाइकल पेन को उम्र बढ़ने से जुड़ी समस्या माना जाता था, लेकिन अब यह धारणा बदल रही है। अस्पतालों और फिजियोथेरेपी सेंटरों में बड़ी संख्या में ऐसे युवा पहुंच रहे हैं जिन्हें गर्दन, कंधे और ऊपरी पीठ में दर्द की शिकायत रहती है।
कई लोगों को सुबह उठते ही गर्दन घुमाने में परेशानी होती है, जबकि कुछ लोगों को लंबे समय तक बैठने के बाद सिरदर्द, कंधों में जकड़न और हाथों में भारीपन महसूस होने लगता है। कई बार यह दर्द कुछ दिनों में ठीक हो जाता है, लेकिन लगातार गलत आदतें अपनाने पर यह बार-बार लौट सकता है।
दुनिया भर में बढ़ रही है परेशानी
स्वास्थ्य से जुड़े अंतरराष्ट्रीय शोध भी इस बढ़ती समस्या की पुष्टि करते हैं। प्रतिष्ठित मेडिकल जर्नल द लांसेट में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, वर्ष 2020 में दुनिया भर में लगभग 20 करोड़ लोग सर्वाइकल पेन से प्रभावित थे। विशेषज्ञों का अनुमान है कि यदि लोगों की जीवनशैली और स्क्रीन टाइम में बदलाव नहीं आया तो वर्ष 2050 तक यह संख्या लगभग 27 करोड़ तक पहुंच सकती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि डिजिटल उपकरणों का बढ़ता उपयोग और शारीरिक गतिविधियों में कमी इस बढ़ते आंकड़े के प्रमुख कारणों में शामिल हैं।
आखिर क्यों होता है सर्वाइकल पेन?
मानव सिर का सामान्य वजन लगभग 4.5 से 5 किलोग्राम के आसपास होता है। जब व्यक्ति सीधे बैठता है तो उसका वजन गर्दन की हड्डियों पर सामान्य रूप से संतुलित रहता है। लेकिन जैसे ही मोबाइल देखने या लैपटॉप पर काम करने के लिए सिर आगे की ओर झुकता है, गर्दन पर पड़ने वाला दबाव कई गुना बढ़ जाता है।
यदि यही स्थिति लंबे समय तक बनी रहे तो गर्दन की मांसपेशियां, लिगामेंट्स और सर्वाइकल स्पाइन लगातार तनाव में रहते हैं। धीरे-धीरे यह तनाव दर्द, अकड़न और सूजन का रूप ले सकता है। कई मामलों में व्यक्ति को गर्दन घुमाने में भी कठिनाई महसूस होने लगती है।
ये आदतें बढ़ा सकती हैं जोखिम
विशेषज्ञों के अनुसार कई रोजमर्रा की छोटी-छोटी आदतें सर्वाइकल पेन का खतरा बढ़ा देती हैं।
- घंटों तक बिना ब्रेक लिए लैपटॉप या कंप्यूटर पर काम करना।
- मोबाइल का इस्तेमाल करते समय लगातार सिर नीचे झुकाकर रखना।
- खराब पोश्चर में बैठकर काम करना।
- ऐसी कुर्सी का उपयोग जिसमें कमर और गर्दन को पर्याप्त सहारा न मिले।
- लैपटॉप को बहुत नीचे रखकर काम करना, जिससे बार-बार गर्दन झुकानी पड़े।
- लंबे समय तक ड्राइविंग करना और बीच में आराम न लेना।
- भारी बैग को हमेशा एक ही कंधे पर टांगना।
- नियमित व्यायाम और स्ट्रेचिंग से दूरी बनाए रखना।
इन आदतों के कारण गर्दन की मांसपेशियों पर लगातार दबाव बना रहता है और समय के साथ दर्द बढ़ने लगता है।
शुरुआती संकेतों को नजरअंदाज न करें
सर्वाइकल पेन की शुरुआत अक्सर हल्के लक्षणों से होती है। कई लोग इसे सामान्य थकान समझकर अनदेखा कर देते हैं। हालांकि, यदि समय रहते इन संकेतों पर ध्यान दिया जाए तो समस्या की वृद्धि से रोका जा सकता है।
सामान्य लक्षणों में गर्दन में दर्द, अकड़न, सिर घुमाने में दिक्कत, कंधों में जकड़न, सिरदर्द, लंबे समय तक बैठने के बाद असहज महसूस होना और कभी-कभी हाथों तक दर्द या झुनझुनी पहुंचना शामिल हो सकता है।
यदि दर्द लगातार बना रहे, बार-बार लौटे या हाथों में कमजोरी महसूस होने लगे तो डॉक्टर से जांच कराना जरूरी माना जाता है।
काम करते समय रखें इन बातों का ध्यान
सर्वाइकल पेन से बचाव के लिए सबसे पहले अपने कार्यस्थल को सही तरीके से व्यवस्थित करना जरूरी है। लैपटॉप या कंप्यूटर की स्क्रीन ऐसी ऊंचाई पर होनी चाहिए कि गर्दन को नीचे झुकाने की जरूरत न पड़े। यदि लैपटॉप का इस्तेमाल कर रहे हैं तो जरूरत पड़ने पर लैपटॉप स्टैंड और अलग कीबोर्ड का उपयोग किया जा सकता है।
कुर्सी ऐसी होनी चाहिए जो कमर और गर्दन को पर्याप्त सपोर्ट दे। बैठते समय दोनों पैर जमीन पर टिके होने चाहिए और पीठ सीधी रखनी चाहिए। लगातार कई घंटे बैठने के बजाय हर 30 मिनट बाद कम से कम 1 से 2 मिनट का ब्रेक लेना फायदेमंद माना जाता है।
नियमित स्ट्रेचिंग भी है जरूरी
काम के दौरान छोटे-छोटे ब्रेक लेकर गर्दन, कंधों और पीठ की हल्की स्ट्रेचिंग करने से मांसपेशियों का तनाव कम किया जा सकता है। इसके अलावा रोजाना कुछ समय वॉक, योग या हल्की एक्सरसाइज करने से भी सर्वाइकल क्षेत्र मजबूत बना रहता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि शरीर जितना सक्रिय रहेगा, गर्दन और रीढ़ पर उतना ही कम दबाव पड़ेगा। इसलिए लंबे समय तक बैठे रहने की आदत को बदलना बेहद जरूरी है।
मोबाइल इस्तेमाल करते समय रखें सावधानी
आज अधिकांश लोग मोबाइल का उपयोग करते समय उसे गोद में रखकर देखते हैं, जिससे गर्दन काफी नीचे झुक जाती है। बेहतर होगा कि मोबाइल को आंखों के स्तर के करीब लाकर इस्तेमाल किया जाए। साथ ही लगातार कई घंटे स्क्रीन देखने से बचें और समय-समय पर आंखों तथा गर्दन दोनों को आराम दें।
सोने से पहले लंबे समय तक मोबाइल चलाने की आदत भी गर्दन की मांसपेशियों पर अतिरिक्त दबाव डाल सकती है। इसलिए रात में स्क्रीन टाइम सीमित रखना भी फायदेमंद हो सकता है।
समय रहते बदलें आदतें
सर्वाइकल पेन ऐसी समस्या नहीं है जिसे केवल दवाओं के भरोसे नियंत्रित किया जा सके। इसकी सबसे प्रभावी रोकथाम सही पोश्चर, नियमित शारीरिक गतिविधि और स्क्रीन के इस्तेमाल में संतुलन बनाए रखने से होती है। यदि शुरुआत से ही बैठने का तरीका सुधारा जाए, समय-समय पर ब्रेक लिया जाए और गर्दन की एक्सरसाइज को दिनचर्या का हिस्सा बनाया जाए, तो इस परेशानी के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
डिजिटल उपकरण आज हमारी जरूरत बन चुके हैं, लेकिन उनका सही तरीके से इस्तेमाल करना भी उतना ही जरूरी है। छोटी-छोटी सावधानियां अपनाकर न केवल गर्दन के दर्द से बचा जा सकता है, बल्कि लंबे समय तक रीढ़ की सेहत भी बेहतर रखी जा सकती है।




