बप्पा के आगमन से शुरू हुआ गणेशोत्सव, पूजा के बाद पढ़ें गणेश चालीसा और पाएं मंगल का आशीर्वाद

बप्पा के आगमन से शुरू हुआ गणेशोत्सव, पूजा के बाद पढ़ें गणेश चालीसा और पाएं मंगल का आशीर्वाद

देशभर में आज यानी 14 सितंबर से गणपति उत्सव का शुभारंभ हो गया है। गणेश चतुर्थी के साथ शुरू होने वाला यह पर्व लगातार दस दिनों तक श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाता है। महाराष्ट्र से लेकर दिल्ली, गुजरात, मध्य प्रदेश, राजस्थान और देश के दूसरे हिस्सों तक घरों और सार्वजनिक पंडालों में भगवान गणेश की प्रतिमाएं स्थापित की जाती हैं। भक्त सुबह से ही पूजा की तैयारियों में जुटे हैं और विधि-विधान के साथ गणपति बप्पा का स्वागत कर रहे हैं।

धार्मिक परंपरा में गणेश जी को प्रथम पूज्य देव माना गया है। किसी भी शुभ काम की शुरुआत से पहले भगवान गणेश की पूजा करने की परंपरा है। मान्यता है कि गणपति की आराधना करने से कार्यों में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं और घर में सुख, शांति तथा समृद्धि का वास होता है। यही वजह है कि गणेश चतुर्थी के दिन विशेष रूप से बप्पा की पूजा-अर्चना की जाती है।

दस दिनों तक चलेगा गणपति उत्सव

गणेशोत्सव की शुरुआत भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि से मानी जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इसी तिथि पर माता पार्वती के पुत्र गणेश का प्राकट्य हुआ था। इसी कारण इस दिन को गणेश चतुर्थी या विनायक चतुर्थी के नाम से जाना जाता है।

पहले दिन गणपति की प्रतिमा स्थापित की जाती है। इसके बाद अगले कई दिनों तक सुबह-शाम पूजा, आरती, भजन और मंत्र जाप का सिलसिला चलता है। दसवें दिन अनंत चतुर्दशी के अवसर पर गणेश प्रतिमा का विसर्जन किया जाता है। इस दौरान श्रद्धालु ‘गणपति बप्पा मोरया’ के जयकारों के साथ बप्पा को विदाई देते हैं और अगले वर्ष फिर उनके आगमन की कामना करते हैं।

हालांकि गणेश उत्सव के दौरान प्रतिदिन पूजा की जाती है, लेकिन पहले दिन की पूजा को विशेष महत्व दिया जाता है। इस दिन भक्त गणेश जी को फूल, दूर्वा, मोदक, फल और अन्य पूजन सामग्री अर्पित करते हैं। इसके बाद गणेश चालीसा का पाठ और आरती की जाती है।

पहले दिन गणेश चालीसा पढ़ना क्यों माना जाता है शुभ?

गणेश चालीसा भगवान गणेश की महिमा, उनके स्वरूप और भक्तों पर उनकी कृपा का वर्णन करती है। धार्मिक आस्था के अनुसार श्रद्धा से इसका पाठ करने से मन को एकाग्रता मिलती है और भक्त भगवान गणेश का स्मरण करते हुए अपनी मनोकामनाएं उनके सामने रखते हैं।

गणेश चालीसा में बप्पा के स्वरूप, उनके माता-पिता भगवान शिव और माता पार्वती से जुड़े प्रसंगों तथा गणेश जी की बुद्धि और प्रथम पूज्य होने की कथा का उल्लेख मिलता है। इसमें भगवान गणेश की आराधना करते हुए उनसे संकट दूर करने और जीवन में शुभता प्रदान करने की प्रार्थना की जाती है।

मान्यता है कि गणेश चतुर्थी के पहले दिन पूजा के बाद शांत मन से गणेश चालीसा का पाठ करना शुभ फल देने वाला होता है। हालांकि धार्मिक अनुष्ठानों का फल व्यक्ति की श्रद्धा और आस्था से जुड़ा माना जाता है।

चालीसा में मिलता है भगवान गणेश के जन्म और स्वरूप का वर्णन

गणेश चालीसा की शुरुआत भगवान गणेश की वंदना से होती है। इसमें उन्हें विघ्नों को दूर करने वाला, मंगल प्रदान करने वाला और बुद्धि का दाता बताया गया है। आगे उनके गजमुख स्वरूप, मुकुट, आभूषण, हाथों में धारण किए गए आयुध और मोदक जैसे प्रिय भोगों का वर्णन किया गया है।

चालीसा में भगवान गणेश के परिवार का भी उल्लेख आता है। उन्हें भगवान शिव और माता पार्वती का पुत्र तथा कार्तिकेय का भाई बताया गया है। उनकी सवारी मूषक को भी भगवान गणेश के स्वरूप का महत्वपूर्ण हिस्सा माना गया है।

इसके बाद गणेश जी के जन्म से जुड़ी कथा का वर्णन किया जाता है। इसमें माता पार्वती द्वारा पुत्र की प्राप्ति के लिए तप किए जाने और भगवान गणेश के प्राकट्य का प्रसंग आता है। आगे भगवान गणेश के जीवन से जुड़े कई प्रसिद्ध धार्मिक प्रसंगों का उल्लेख किया गया है।

भगवान गणेश की बुद्धि की परीक्षा का प्रसंग भी खास

गणेश चालीसा में एक महत्वपूर्ण प्रसंग भगवान गणेश और उनके भाई कार्तिकेय की बुद्धि परीक्षा से जुड़ा है। कथा के अनुसार भगवान शिव ने दोनों भाइयों को पृथ्वी की परिक्रमा करने के लिए कहा। जहां कार्तिकेय पृथ्वी की परिक्रमा के लिए निकल पड़े, वहीं गणेश जी ने अपने माता-पिता को ही संसार का केंद्र मानते हुए उनकी परिक्रमा कर ली।

गणेश जी की इस बुद्धिमत्ता से भगवान शिव प्रसन्न हुए और उन्हें विशेष सम्मान प्रदान किया। इसी प्रसंग के जरिए गणेश जी को बुद्धि, विवेक और समझदारी का प्रतीक माना जाता है।

चालीसा के अंतिम हिस्से में भक्त अपनी कमजोरियों और परेशानियों को दूर करने के लिए भगवान गणेश से प्रार्थना करता है। इसके बाद दोहे के माध्यम से गणेश जी की स्तुति की जाती है और घर-परिवार में मंगल तथा सम्मान की कामना की जाती है।

पूजा के बाद करें गणेश जी की आरती

गणेश चालीसा के पाठ के बाद भक्त भगवान गणेश की आरती कर सकते हैं। गणेश जी की प्रसिद्ध आरती में उनके माता-पिता माता पार्वती और भगवान शिव का स्मरण किया जाता है। आरती में गणपति के एकदंत स्वरूप, चार भुजाओं और मूषक वाहन का वर्णन भी आता है।

आरती के दौरान भगवान गणेश को फूल, फल, मेवा और लड्डू का भोग लगाया जाता है। धार्मिक परंपरा में मोदक और लड्डू गणपति को प्रिय माने जाते हैं। पूजा के अंत में परिवार के सभी सदस्य भगवान गणेश से सुख-समृद्धि और घर से विघ्न-बाधाएं दूर करने की प्रार्थना करते हैं।

गणपति पूजा में इन मंत्रों का कर सकते हैं जाप

गणेश चतुर्थी के दिन चालीसा और आरती के अलावा गणपति मंत्रों का जाप भी किया जाता है। पूजा के दौरान श्रद्धा के अनुसार इनमें से किसी मंत्र का जाप किया जा सकता है।

वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ।
निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥

इस मंत्र में भगवान गणेश से सभी कार्यों को बिना बाधा के पूरा करने की प्रार्थना की जाती है।

इसके अलावा भगवान गणेश का एक सरल और लोकप्रिय मंत्र है—

ॐ गं गणपतये नमः।

गणेश उपासना में इस मंत्र का जाप विशेष रूप से किया जाता है। भक्त इसे अपनी सुविधा और श्रद्धा के अनुसार बार-बार दोहरा सकते हैं।

गणपति गायत्री मंत्र का भी जाप किया जाता है—

ॐ एकदन्ताय विद्महे, वक्रतुण्डाय धीमहि, तन्नो दन्ति प्रचोदयात्॥

इसके साथ ही गणेश जी के अन्य बीज मंत्रों का जाप भी पूजा के दौरान किया जाता है।

घर पर गणेश पूजा करते समय इन बातों का रखें ध्यान

गणेश चतुर्थी के दिन घर में पूजा के लिए सबसे पहले पूजा स्थान को साफ करके भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित की जाती है। इसके बाद गणपति को जल, अक्षत, फूल, दूर्वा, फल और मिठाई अर्पित की जाती है। गणेश पूजा में दूर्वा को विशेष महत्व दिया जाता है।

पूजा के दौरान परिवार के सभी सदस्य भगवान गणेश का ध्यान कर सकते हैं। इसके बाद मंत्र जाप, गणेश चालीसा और आरती की जा सकती है। अंत में भगवान को भोग लगाकर प्रसाद परिवार के सदस्यों में बांटा जाता है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पूजा में सबसे जरूरी चीज श्रद्धा और स्वच्छ मन है। इसलिए गणेशोत्सव के दौरान दिखावे के बजाय भक्ति और सकारात्मक भावना के साथ पूजा करने पर जोर दिया जाता है।

बप्पा से करें सुख-शांति और विघ्नों से मुक्ति की प्रार्थना

गणेश चतुर्थी केवल भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित करने का पर्व नहीं है, बल्कि यह बुद्धि, विवेक और शुभ शुरुआत का प्रतीक भी माना जाता है। दस दिनों तक चलने वाले इस उत्सव में भक्त गणपति के अलग-अलग स्वरूपों की आराधना करते हैं और परिवार की खुशहाली की कामना करते हैं।

आज 14 सितंबर को गणपति स्थापना के साथ शुरू हुए इस पर्व के पहले दिन यदि आप घर पर पूजा कर रहे हैं तो गणेश जी का ध्यान करके चालीसा का पाठ, मंत्र जाप और आरती कर सकते हैं। मान्यता है कि प्रथम पूज्य गणेश का स्मरण शुभ कार्यों में आने वाली बाधाओं को दूर करने और जीवन में मंगल भाव बढ़ाने वाला माना जाता है।

गणपति उत्सव के दौरान भक्तों के बीच सबसे प्रमुख भावना बप्पा के स्वागत और उनकी कृपा प्राप्त करने की होती है। दस दिनों तक पूजा-अर्चना के बाद विसर्जन के समय भक्त भावुक होकर भगवान गणेश से अगले वर्ष फिर आने की प्रार्थना करते हैं। इसी विश्वास के साथ गणेशोत्सव का समापन ‘गणपति बप्पा मोरया’ के जयकारों के बीच किया जाता है।