मुख्यमंत्री बोले- बलिदानियों की स्मृति आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा, देश की रक्षा करने वालों के परिवारों के साथ खड़ी है पंजाब सरकार
न्यू चंडीगढ़ में देश की रक्षा करते हुए सर्वोच्च बलिदान देने वाले कर्नल मनप्रीत सिंह की स्मृति को स्थायी रूप से संजोने की दिशा में पंजाब सरकार ने महत्वपूर्ण कदम उठाया है। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने रविवार को न्यू चंडीगढ़ में 200 फुट चौड़े एचआर-2 मार्ग को बलिदानी कर्नल मनप्रीत सिंह के नाम पर समर्पित किया। इसके बाद मुल्लांपुर चौक से टी-प्वाइंट तक का यह मार्ग अब ‘बलिदानी कर्नल मनप्रीत सिंह मार्ग’ के नाम से जाना जाएगा।
इसी कार्यक्रम के दौरान सेक्टर-5ए ब्लॉक में स्थित पार्क का नाम भी कर्नल मनप्रीत सिंह की स्मृति में ‘बलिदानी कर्नल मनप्रीत सिंह पार्क’ रखा गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी सैनिक की शहादत को केवल एक घटना के रूप में नहीं देखा जा सकता। देश के लिए अपने प्राण न्योछावर करने वाले सैनिक राष्ट्र की अमूल्य विरासत हैं और उनकी वीरता को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना समाज और सरकार दोनों की जिम्मेदारी है।
मुख्यमंत्री ने कर्नल मनप्रीत सिंह को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उन्होंने देश की रक्षा करते हुए 13 सितंबर 2023 को जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग में आतंकवादियों के साथ हुई मुठभेड़ में अपना जीवन बलिदान कर दिया था। उस समय वह 19 राष्ट्रीय राइफल्स के कमांडिंग ऑफिसर के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे थे।
अनंतनाग मुठभेड़ में दिया सर्वोच्च बलिदान
कर्नल मनप्रीत सिंह की सैन्य सेवा और उनके बलिदान का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने देश की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी। अनंतनाग में आतंकियों के खिलाफ अभियान के दौरान उन्होंने अदम्य साहस का परिचय दिया और अपने कर्तव्य का निर्वहन करते हुए वीरगति प्राप्त की।
उनकी असाधारण वीरता और राष्ट्र के प्रति समर्पण को देखते हुए भारत सरकार ने उन्हें मरणोपरांत 15 अगस्त 2024 को कीर्ति चक्र से सम्मानित किया। यह सम्मान उनकी वीरता और सर्वोच्च बलिदान की राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि कर्नल मनप्रीत सिंह की कहानी पंजाब के युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उन्होंने न केवल सेना में अधिकारी के रूप में अपनी जिम्मेदारी निभाई, बल्कि कठिन परिस्थितियों में नेतृत्व और साहस का उदाहरण भी प्रस्तुत किया।
गांव भरोजियां से सेना की सेवा तक का सफर
कर्नल मनप्रीत सिंह का जन्म वर्ष 1982 में गांव भरोजियां में हुआ था। उनकी शिक्षा मोहाली और चंडीगढ़ में हुई। परिवार में देशसेवा की भावना पहले से मौजूद थी और उन्होंने अपने पिता के पदचिह्नों पर चलते हुए भारतीय सेना को अपना करियर चुना।
वर्ष 2005 में उन्होंने भारतीय सेना में कमीशंड अधिकारी के तौर पर अपनी सैन्य सेवा शुरू की। वर्षों की सेवा के दौरान उन्होंने विभिन्न जिम्मेदारियां निभाईं और आगे बढ़ते हुए 19 राष्ट्रीय राइफल्स के कमांडिंग ऑफिसर के पद तक पहुंचे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि कर्नल मनप्रीत सिंह की जीवन यात्रा यह दिखाती है कि छोटे शहरों और गांवों से निकलने वाले युवा भी देश की सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। उनके नाम पर सार्वजनिक स्थानों का नामकरण उनकी स्मृति को जीवित रखने के साथ-साथ युवाओं को सेना और राष्ट्रसेवा की ओर प्रेरित करने का माध्यम भी बनेगा।
सड़क और पार्क का नामकरण केवल औपचारिकता नहीं : मान
मुख्यमंत्री ने कहा कि सड़क और पार्क का नाम कर्नल मनप्रीत सिंह के नाम पर रखा जाना महज एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं है। इसका उद्देश्य नई पीढ़ी को उन वीर सैनिकों के बारे में बताना है जिन्होंने देश की सुरक्षा के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया।
उन्होंने कहा कि जब लोग रोजमर्रा के जीवन में इस सड़क और पार्क का नाम देखेंगे, तो उन्हें उस सैनिक की याद आएगी जिसने देश की रक्षा के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया। इससे समाज में देशभक्ति और राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी की भावना मजबूत होगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब की धरती ने देश को बड़ी संख्या में बहादुर सैनिक दिए हैं। राज्य के युवाओं में देशसेवा की भावना हमेशा मजबूत रही है और सरकार का प्रयास है कि बलिदानियों की स्मृति को सम्मान के साथ संरक्षित किया जाए।
शहीद परिवारों के लिए एक करोड़ रुपये की सहायता
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री भगवंत मान ने राज्य सरकार की शहीद परिवारों के प्रति नीति का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि देश की रक्षा करते हुए जान गंवाने वाले सशस्त्र बलों, अर्धसैनिक बलों, पुलिस कर्मियों और अग्निवीरों के परिवारों को पंजाब सरकार की ओर से एक करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी परिवार के लिए अपने प्रियजन को खोने की भरपाई किसी आर्थिक सहायता से संभव नहीं है, लेकिन सरकार का दायित्व है कि संकट की घड़ी में परिवार को आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा उपलब्ध कराई जाए। उन्होंने कहा कि सरकार सैनिकों और उनके परिवारों के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है।
उन्होंने यह भी कहा कि जो युवा अग्निवीर के रूप में अपनी सेवा पूरी करके वापस लौटते हैं, उनके भविष्य को लेकर भी सरकार गंभीरता से काम कर रही है। ऐसे युवाओं के लिए पुलिस, बैंकिंग और वन विभाग सहित विभिन्न क्षेत्रों में रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं।
सैनिकों के सम्मान को समाज की जिम्मेदारी बताया
मुख्यमंत्री ने कहा कि सैनिकों का सम्मान केवल सरकारी कार्यक्रमों तक सीमित नहीं होना चाहिए। समाज को भी अपने बलिदानियों की स्मृति को संजोकर रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि जिस समाज में अपने शहीदों और बलिदानियों को याद रखने की परंपरा मजबूत होती है, वह समाज अपनी आने वाली पीढ़ियों को बेहतर मूल्य और जिम्मेदारी की भावना दे सकता है।
उन्होंने कहा कि देश के लिए बलिदान देने वाले सैनिक किसी एक परिवार या क्षेत्र के नहीं होते, बल्कि पूरे राष्ट्र की धरोहर होते हैं। इसलिए उनके जीवन, वीरता और बलिदान से युवाओं को परिचित करवाना जरूरी है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि कर्नल मनप्रीत सिंह के नाम पर सड़क और पार्क का नामकरण भी इसी सोच का हिस्सा है। इन सार्वजनिक स्थलों का नाम उनके जीवन और शहादत की याद को लंबे समय तक लोगों के बीच बनाए रखेगा।
शिक्षा और युवाओं के विकास पर भी जोर
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने राज्य में शिक्षा के क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार सरकारी स्कूलों के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने पर विशेष ध्यान दे रही है। स्कूलों में बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने का उद्देश्य विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए बेहतर वातावरण देना है।
उन्होंने कहा कि पंजाब के विद्यार्थी अब जेईई और नीट जैसी राष्ट्रीय स्तर की प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं में बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने इसे राज्य के शिक्षा क्षेत्र में हो रहे बदलावों का महत्वपूर्ण संकेत बताया।
उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य युवाओं को केवल शिक्षा उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि उन्हें आगे बढ़ने के लिए आवश्यक अवसर भी देना है। एक तरफ शिक्षा व्यवस्था को मजबूत किया जा रहा है और दूसरी तरफ युवाओं को रोजगार तथा प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए बेहतर अवसर उपलब्ध कराने पर जोर दिया जा रहा है।
परिवार के सदस्यों की मौजूदगी ने कार्यक्रम को बनाया भावुक
कर्नल मनप्रीत सिंह की स्मृति में आयोजित कार्यक्रम में उनके परिवार के सदस्यों की मौजूदगी भी रही। उनकी पत्नी जगमीत ग्रेवाल, माता मनजीत कौर, बेटे कबीर सिंह और बेटी बानी कौर कार्यक्रम में उपस्थित रहे। परिवार के लिए यह अवसर भावनात्मक होने के साथ-साथ गर्व का भी था कि उनके प्रियजन के बलिदान को सार्वजनिक रूप से सम्मान दिया जा रहा है।
कार्यक्रम में लोकसभा सांसद मलविंदर सिंह कंग, पंजाब यूथ डेवलपमेंट बोर्ड के चेयरमैन परमिंदर सिंह गोल्डी सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति भी मौजूद रहे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि कर्नल मनप्रीत सिंह का बलिदान पंजाब और देश के लोगों के लिए हमेशा प्रेरणा बना रहेगा। उनके नाम पर सड़क और पार्क का नामकरण आने वाली पीढ़ियों को यह याद दिलाता रहेगा कि देश की सुरक्षा के लिए सैनिक किस तरह अपने जीवन की परवाह किए बिना कर्तव्य निभाते हैं।
उन्होंने कहा कि देश की सीमाओं और आंतरिक सुरक्षा की रक्षा करने वाले जवानों के कारण ही नागरिक सुरक्षित वातावरण में अपना जीवन जी पाते हैं। इसलिए उनके त्याग और समर्पण के प्रति सम्मान व्यक्त करना पूरे समाज की जिम्मेदारी है।
न्यू चंडीगढ़ में अब मुल्लांपुर चौक से टी-प्वाइंट तक जाने वाला मार्ग जब भी लोग इस्तेमाल करेंगे, उन्हें कर्नल मनप्रीत सिंह की वीरता और बलिदान की याद दिलाएगा। इसी तरह सेक्टर-5ए का पार्क भी उनके नाम के जरिए उनकी स्मृति को नई पीढ़ियों तक पहुंचाने का माध्यम बनेगा। पंजाब सरकार की ओर से किया गया यह नामकरण उनके सर्वोच्च बलिदान को सार्वजनिक जीवन में स्थायी सम्मान देने की पहल के रूप में देखा जा रहा है।




