चंडीगढ़ के शहरी विकास की नई रूपरेखा पर मंथन शुरू, मास्टर प्लान संशोधनों की जांच के लिए विशेषज्ञ पैनल गठित

चंडीगढ़ के शहरी विकास की नई रूपरेखा पर मंथन शुरू, मास्टर प्लान संशोधनों की जांच के लिए विशेषज्ञ पैनल गठित

चंडीगढ़ के भविष्य के विकास को नई दिशा देने की तैयारी शुरू हो गई है। शहर के मास्टर प्लान-2031 में प्रस्तावित बदलावों को लेकर प्रशासन ने समीक्षा प्रक्रिया को आगे बढ़ाते हुए एक उच्चस्तरीय विशेषज्ञ समिति का गठन किया है। यह समिति नागरिकों, संस्थाओं और विभिन्न संगठनों से प्राप्त सुझावों एवं आपत्तियों का परीक्षण कर अपनी विस्तृत रिपोर्ट प्रशासन को सौंपेगी, जिसके आधार पर मास्टर प्लान में अंतिम संशोधनों पर निर्णय लिया जाएगा।

शहर के विकास, आवासीय ढांचे, परिवहन व्यवस्था, पर्यावरणीय संतुलन और भूमि उपयोग से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों को लेकर पिछले कुछ समय से व्यापक चर्चा चल रही है। ऐसे में प्रशासन ने यह सुनिश्चित करने की दिशा में कदम बढ़ाया है कि संशोधनों पर प्राप्त हर प्रतिक्रिया का तकनीकी और व्यावहारिक दृष्टि से मूल्यांकन किया जाए।

नौ विशेषज्ञों की समिति करेगी प्रस्तावों की समीक्षा

यूटी प्रशासन की ओर से जारी आदेशों के अनुसार, मास्टर प्लान-2031 के ड्राफ्ट संशोधनों पर प्राप्त सभी सुझावों और आपत्तियों की जांच के लिए नौ सदस्यीय स्क्रीनिंग कमेटी बनाई गई है। इस समिति का नेतृत्व इंजीनियरिंग सचिव प्रेमा पुरी करेंगी।

समिति में शहरी नियोजन, वास्तुकला, इंजीनियरिंग और प्रशासन से जुड़े अनुभवी अधिकारियों एवं विशेषज्ञों को शामिल किया गया है। इनमें चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डी. कार्तिकेयन, मुख्य वास्तुकार, यूटी के मुख्य अभियंता, नगर निगम के मुख्य अभियंता, पूर्व टाउन एंड कंट्री प्लानर आर. श्रीनिवास, स्कूल ऑफ प्लानिंग एंड आर्किटेक्चर (नई दिल्ली) के प्रोफेसर सेवा राम, पूर्व मुख्य वास्तुकार कपिल सेतिया और पंजाब के पूर्व मुख्य नगर योजनाकार के.के. कौल शामिल हैं।

प्रशासन का मानना है कि विविध क्षेत्रों के विशेषज्ञों की मौजूदगी से प्रस्तावित संशोधनों का बहुआयामी मूल्यांकन संभव होगा और शहर के दीर्घकालिक हितों को ध्यान में रखते हुए सुझाव दिए जा सकेंगे।

लोगों को मिलेगा अपना पक्ष रखने का अवसर

मास्टर प्लान में बदलावों को लेकर नागरिकों की राय को भी अहम माना जा रहा है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि आपत्तियां और सुझाव देने वाले लोगों को व्यक्तिगत रूप से अपनी बात रखने का अवसर दिया जाएगा। स्क्रीनिंग कमेटी सुनवाई के दौरान संबंधित पक्षों की दलीलें सुनेगी और उनके आधार पर अपनी सिफारिशें तैयार करेगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह प्रक्रिया महत्वपूर्ण है क्योंकि मास्टर प्लान केवल निर्माण गतिविधियों का दस्तावेज नहीं होता, बल्कि यह शहर के आने वाले दशकों के विकास की दिशा तय करता है। इसलिए नागरिकों, विशेषज्ञों और संस्थाओं की भागीदारी को संतुलित तरीके से शामिल करना आवश्यक है।

एक महीने में प्रशासन को सौंपी जाएगी रिपोर्ट

प्रशासन ने समिति को निर्धारित समयसीमा के भीतर काम पूरा करने के निर्देश दिए हैं। आदेशों के अनुसार स्क्रीनिंग कमेटी को अपनी समीक्षा रिपोर्ट एक माह के भीतर प्रशासन को सौंपनी होगी। इसके बाद रिपोर्ट के आधार पर अंतिम निर्णय लेने की प्रक्रिया शुरू होगी।

रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया जाएगा कि किन सुझावों को स्वीकार किया जाना चाहिए, किन पर पुनर्विचार की आवश्यकता है और किन प्रस्तावों को मौजूदा स्वरूप में लागू किया जा सकता है।

समिति के गठन पर उठे प्रतिनिधित्व के सवाल

हालांकि विशेषज्ञ समिति के गठन के साथ ही कुछ सामाजिक संगठनों और रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशनों (आरडब्ल्यूए) ने इस पर सवाल भी खड़े किए हैं। उनका कहना है कि समिति में तकनीकी विशेषज्ञों और प्रशासनिक अधिकारियों को तो शामिल किया गया है, लेकिन शहर के निवासियों या स्थानीय प्रतिनिधियों को स्थान नहीं दिया गया।

इन संगठनों का तर्क है कि मास्टर प्लान के तहत लिए जाने वाले फैसले सीधे तौर पर नागरिकों के दैनिक जीवन, यातायात, आवास, हरित क्षेत्रों और सार्वजनिक सुविधाओं को प्रभावित करेंगे। इसलिए स्थानीय समुदाय की भागीदारी केवल जनसुनवाई तक सीमित न रहकर निर्णय प्रक्रिया में भी दिखाई देनी चाहिए।

कुछ नागरिक समूहों का मानना है कि यदि आरडब्ल्यूए प्रतिनिधियों या सामाजिक संगठनों को समिति में शामिल किया जाता तो स्थानीय स्तर की समस्याओं और अपेक्षाओं को अधिक प्रभावी ढंग से सामने रखा जा सकता था।

सामाजिक संगठनों ने मांगी व्यापक भागीदारी

सोशल इम्पैक्ट एसोसिएशन (एसआईए) सहित कई संगठनों ने कहा है कि चंडीगढ़ देश के सबसे नियोजित शहरों में गिना जाता है और यहां किसी भी बड़े शहरी बदलाव का प्रभाव लंबे समय तक दिखाई देता है। इसलिए योजना निर्माण प्रक्रिया में नागरिक सहभागिता को और अधिक मजबूत बनाया जाना चाहिए।

इन संगठनों का कहना है कि शहर की आबादी, वाहनों की संख्या और आवासीय जरूरतों में लगातार वृद्धि हो रही है। ऐसे में मास्टर प्लान में किए जाने वाले बदलावों का असर केवल वर्तमान पीढ़ी पर नहीं बल्कि भविष्य की पीढ़ियों पर भी पड़ेगा। इसलिए निर्णय प्रक्रिया अधिक समावेशी होनी चाहिए।

25 जून को होगी महत्वपूर्ण जनसुनवाई

प्रशासन ने प्रस्तावित संशोधनों पर जनसुनवाई की तारीख 25 जून निर्धारित की है। इस दौरान नागरिक, व्यापारिक संगठन, पेशेवर संस्थाएं, आरडब्ल्यूए और अन्य हितधारक अपने सुझाव एवं आपत्तियां दर्ज करा सकेंगे।

जनसुनवाई को लेकर शहर में खासा उत्साह देखा जा रहा है, क्योंकि कई प्रस्ताव ऐसे हैं जो चंडीगढ़ के विकास मॉडल में बड़ा बदलाव ला सकते हैं। विभिन्न समूह अपने-अपने पक्ष को मजबूती से रखने की तैयारी कर रहे हैं।

किन प्रस्तावों पर सबसे ज्यादा चर्चा?

मास्टर प्लान-2031 में शामिल कुछ प्रस्ताव शहर में बहस का प्रमुख विषय बने हुए हैं। इनमें भवनों की अधिकतम ऊंचाई बढ़ाने, फ्लोर एरिया रेशियो (एफएआर) में वृद्धि, मिश्रित भूमि उपयोग क्षेत्रों के विस्तार और नए हाईराइज डेवलपमेंट जोन विकसित करने जैसे सुझाव शामिल हैं।

समर्थकों का कहना है कि बढ़ती आबादी और सीमित भूमि संसाधनों को देखते हुए ऊंची इमारतें और बेहतर भूमि उपयोग भविष्य की आवश्यकता हैं। इससे आवासीय और व्यावसायिक जरूरतों को पूरा करने में मदद मिलेगी।

वहीं विरोध करने वाले समूहों का तर्क है कि अत्यधिक घनत्व वाले विकास मॉडल से यातायात दबाव बढ़ सकता है, पार्किंग संकट गहरा सकता है और शहर की मूल पहचान प्रभावित हो सकती है। उनका कहना है कि चंडीगढ़ की खासियत उसकी खुली जगहें, संतुलित सेक्टर योजना और हरित क्षेत्र हैं, जिन्हें संरक्षित रखना आवश्यक है।

शहर के भविष्य से जुड़ा है मास्टर प्लान

विशेषज्ञों के अनुसार मास्टर प्लान किसी भी शहर के विकास का मूल दस्तावेज होता है। यह तय करता है कि आने वाले वर्षों में आवासीय, व्यावसायिक, संस्थागत और सार्वजनिक उपयोग की भूमि का वितरण किस प्रकार होगा। साथ ही यह परिवहन, पर्यावरण संरक्षण, बुनियादी ढांचे और शहरी विस्तार की दिशा भी निर्धारित करता है।

चंडीगढ़ जैसे योजनाबद्ध शहर में मास्टर प्लान में होने वाले संशोधन विशेष महत्व रखते हैं क्योंकि यहां विकास और संरक्षण के बीच संतुलन बनाए रखना सबसे बड़ी चुनौती है।

अंतिम फैसले पर टिकी सबकी नजर

अब शहरवासियों, विशेषज्ञों और विभिन्न संगठनों की निगाहें 25 जून की जनसुनवाई और उसके बाद स्क्रीनिंग कमेटी की रिपोर्ट पर टिकी हैं। आने वाले हफ्तों में यह स्पष्ट होगा कि प्रशासन किन सुझावों को स्वीकार करता है और मास्टर प्लान-2031 में किस प्रकार के बदलाव लागू किए जाते हैं।

इन निर्णयों का प्रभाव केवल मौजूदा विकास परियोजनाओं तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह तय करेगा कि आने वाले वर्षों में चंडीगढ़ का शहरी स्वरूप, बुनियादी ढांचा और जीवनशैली किस दिशा में आगे बढ़ेगी।