चंडीगढ़ नगर निगम में सोमवार को आयोजित जनता दरबार शहरवासियों की समस्याओं के समाधान का एक बड़ा मंच बनकर सामने आया। सेक्टर-17 स्थित नगर निगम कार्यालय में आयोजित इस विशेष जनसुनवाई कार्यक्रम में शहर के अलग-अलग हिस्सों से बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। सुबह से ही निगम भवन में लोगों का आना शुरू हो गया था और कुछ ही समय में मेयर कार्यालय के बाहर लंबी कतारें लग गईं। कार्यक्रम के दौरान करीब 600 लोगों ने अपनी शिकायतें, सुझाव और मांगें सीधे मेयर सौरभ जोशी के सामने रखीं।
लगातार लगभग पांच घंटे तक चले इस जनता दरबार में मेयर ने बिना किसी लंच ब्रेक के लोगों की समस्याएं सुनीं। उन्होंने यह सुनिश्चित किया कि दूर-दराज से पहुंचे प्रत्येक व्यक्ति को अपनी बात रखने का पूरा अवसर मिले। बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी के कारण नगर निगम भवन के गलियारों और प्रतीक्षालयों में पूरे समय चहल-पहल बनी रही। नगर निगम के संयुक्त आयुक्त-3 बलबीर राज सिंह सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी भी जनता दरबार में मौजूद रहे, ताकि मौके पर ही समस्याओं का समाधान किया जा सके और आवश्यक मामलों में तुरंत कार्रवाई शुरू हो सके।
जनता दरबार में शहर के विभिन्न रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन (आरडब्ल्यूए), मार्केट वेलफेयर एसोसिएशन (एमडब्ल्यूए), गांवों की विकास समितियों, व्यापारी संगठनों, सामाजिक संस्थाओं, रेहड़ी-फड़ी विक्रेता संगठनों तथा विभिन्न सेक्टरों और कॉलोनियों के नागरिकों ने भाग लिया। सभी प्रतिनिधिमंडलों ने अपने-अपने क्षेत्रों की समस्याओं और विकास संबंधी मांगों को लेकर ज्ञापन सौंपे। कई लोगों ने व्यक्तिगत शिकायतें भी दर्ज कराईं, जबकि अनेक मामलों में सामूहिक समस्याओं को लेकर प्रतिनिधिमंडल पहुंचे।
सबसे अधिक शिकायतें सफाई व्यवस्था, कचरा संग्रहण, सड़क मरम्मत, स्ट्रीट लाइट, जल निकासी, सीवरेज और पार्कों के रखरखाव से जुड़ी रहीं। आरडब्ल्यूए प्रतिनिधियों ने कहा कि कई क्षेत्रों में घरों से अलग-अलग किए गए सूखे और गीले कचरे का समय पर उठान नहीं हो रहा, जिससे लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। उन्होंने डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण प्रणाली को और अधिक प्रभावी बनाने, नियमित सफाई अभियान चलाने तथा सफाई कर्मचारियों की उपलब्धता बढ़ाने की मांग की।
इसके अलावा कई सेक्टरों की आंतरिक सड़कों की खराब स्थिति, टूटी हुई इंटरलॉकिंग टाइलें और लंबे समय से लंबित मरम्मत कार्य भी प्रमुख मुद्दों में शामिल रहे। लोगों ने बताया कि बरसात के दौरान सड़कें और गलियां जलभराव की वजह से और अधिक खराब हो जाती हैं, जिससे आवागमन प्रभावित होता है। उन्होंने इन विकास कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर पूरा कराने की मांग रखी।
स्ट्रीट लाइटों की खराब स्थिति भी लोगों की प्रमुख चिंताओं में शामिल रही। कई क्षेत्रों के निवासियों ने बताया कि महीनों से खराब पड़ी लाइटों के कारण रात के समय सुरक्षा संबंधी समस्याएं उत्पन्न होती हैं। पार्कों में पर्याप्त रोशनी न होने और नियमित रखरखाव के अभाव की शिकायतें भी सामने आईं। नागरिकों ने पार्कों में टूटी हुई बेंच, खराब जिम उपकरण, सूखे पौधों और सिंचाई व्यवस्था में सुधार की मांग की।
सामुदायिक केंद्रों के रखरखाव और विकास कार्यों को लेकर भी कई सुझाव दिए गए। लोगों ने कहा कि अनेक सामुदायिक भवनों में मरम्मत, साफ-सफाई और बुनियादी सुविधाओं की आवश्यकता है ताकि स्थानीय निवासी उनका बेहतर उपयोग कर सकें। आरडब्ल्यूए प्रतिनिधियों ने इन केंद्रों के नियमित रखरखाव के लिए अलग कार्ययोजना बनाने की भी मांग की।
मार्केट वेलफेयर एसोसिएशन के प्रतिनिधियों ने शहर के बाजारों में पार्किंग व्यवस्था, सफाई, सार्वजनिक शौचालय, फुटपाथों की स्थिति और यातायात प्रबंधन जैसे मुद्दे उठाए। व्यापारियों ने कहा कि कई बाजारों में पार्किंग की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने के कारण ग्राहकों को कठिनाई होती है। इसके साथ ही उन्होंने बाजारों में बेहतर प्रकाश व्यवस्था, नियमित सफाई और बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करने की मांग रखी।
रेहड़ी-फड़ी विक्रेताओं से जुड़े कई मुद्दे भी जनता दरबार में प्रमुखता से सामने आए। सेक्टर-15ए वेंडिंग जोन से जुड़े विक्रेताओं ने मांग की कि उन्हें उनके मूल सर्वेक्षण के अनुसार निर्धारित स्थानों पर भेजा जाए ताकि उनके रोजगार पर किसी प्रकार का असर न पड़े। विक्रेता संगठनों ने वेंडिंग जोन के बेहतर प्रबंधन, सुविधाओं के विस्तार और नियमों के पारदर्शी क्रियान्वयन की मांग भी रखी।
शास्त्री मार्केट, सेक्टर-22सी के व्यापारियों ने पुनर्विकास कार्य के दौरान अस्थायी शेड उपलब्ध कराने का अनुरोध किया ताकि निर्माण कार्य के दौरान उनका व्यापार प्रभावित न हो। इसके अलावा भूमिगत तंदूर, धोबी घाट और अन्य पारंपरिक सुविधाओं के बेहतर प्रबंधन से संबंधित मांगें भी सामने आईं।
गांवों से पहुंचे प्रतिनिधियों ने सफाई, सीवरेज, पेयजल, सड़क, स्ट्रीट लाइट, कचरा संग्रहण और बरसाती नालों की सफाई जैसे मुद्दे उठाए। उन्होंने कहा कि निगम क्षेत्र में शामिल गांवों में शहरी सुविधाओं का विस्तार अपेक्षित गति से नहीं हो रहा है। कई प्रतिनिधियों ने जलभराव की समस्या का स्थायी समाधान करने और नियमित सफाई अभियान चलाने की मांग की।
अतिक्रमण हटाने को लेकर भी कई शिकायतें दर्ज कराई गईं। लोगों ने कहा कि कुछ बाजारों और सार्वजनिक स्थानों पर अवैध कब्जों के कारण यातायात बाधित होता है और पैदल चलने वालों को परेशानी होती है। इसके साथ ही पार्किंग प्रबंधन को बेहतर बनाने और अवैध पार्किंग पर प्रभावी कार्रवाई करने की मांग भी उठाई गई।
बागवानी से जुड़े मुद्दों पर भी नागरिकों ने ध्यान आकर्षित किया। कई लोगों ने पार्कों और ग्रीन बेल्ट में पौधारोपण बढ़ाने, सूखे पेड़ों को हटाने, नियमित घास कटाई और हरित क्षेत्रों की देखभाल के लिए अलग कार्ययोजना तैयार करने की मांग रखी। उन्होंने कहा कि शहर की पहचान उसकी हरियाली है, इसलिए इस दिशा में विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए।
जनता दरबार के दौरान मेयर सौरभ जोशी ने अधिकारियों के साथ कई मामलों की मौके पर ही समीक्षा की। जिन शिकायतों का तत्काल समाधान संभव था, उनके लिए संबंधित अधिकारियों को तुरंत कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए। कई मामलों में अधिकारियों ने शिकायतकर्ताओं से आवश्यक दस्तावेज लेकर उसी समय प्रक्रिया शुरू कर दी। जिन शिकायतों में विस्तृत जांच या अन्य विभागों के समन्वय की आवश्यकता थी, उन्हें निर्धारित समयसीमा के साथ संबंधित विभागों को भेजा गया।
मेयर ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि किसी भी शिकायत को अनावश्यक रूप से लंबित न रखा जाए। उन्होंने कहा कि हर विभाग शिकायतकर्ता से नियमित संपर्क बनाए रखे और कार्रवाई की प्रगति की जानकारी समय-समय पर उपलब्ध कराए। उन्होंने यह भी कहा कि नागरिकों को बार-बार कार्यालयों के चक्कर लगाने की आवश्यकता नहीं पड़नी चाहिए और प्रत्येक विभाग जवाबदेही के साथ कार्य करे।
उन्होंने कहा कि जनता दरबार का उद्देश्य केवल शिकायतें सुनना नहीं, बल्कि समाधान की प्रक्रिया को तेज और प्रभावी बनाना है। इस व्यवस्था से नगर निगम और नागरिकों के बीच सीधा संवाद स्थापित हुआ है, जिससे समस्याओं की वास्तविक स्थिति का पता चलता है और अधिकारियों को भी प्राथमिकताएं तय करने में सहायता मिलती है।
मेयर ने कहा कि शहर के विकास में नागरिकों की भागीदारी अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने सभी आरडब्ल्यूए, एमडब्ल्यूए, गांवों की समितियों, व्यापारिक संगठनों और सामाजिक संस्थाओं से अपील की कि वे स्वच्छता अभियान, कचरा पृथक्करण, जल संरक्षण और सार्वजनिक संपत्तियों की सुरक्षा में नगर निगम का सक्रिय सहयोग करें। उनका कहना था कि केवल प्रशासनिक प्रयासों से शहर को बेहतर नहीं बनाया जा सकता, बल्कि इसके लिए नागरिकों की सहभागिता भी उतनी ही आवश्यक है।
उन्होंने लोगों से गीले और सूखे कचरे को अलग-अलग रखने, सार्वजनिक स्थानों पर कूड़ा न फेंकने, पार्कों और सामुदायिक परिसरों को स्वच्छ रखने तथा शहर की सुविधाओं का जिम्मेदारी से उपयोग करने की अपील की। उन्होंने कहा कि यदि नागरिक और प्रशासन मिलकर काम करें तो चंडीगढ़ को और अधिक स्वच्छ, सुंदर और व्यवस्थित बनाया जा सकता है।
जनता दरबार में पहुंचे कई नागरिकों ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि उन्हें पहली बार अपनी समस्याएं सीधे मेयर और वरिष्ठ अधिकारियों के सामने रखने का अवसर मिला। जिन लोगों की शिकायतों का मौके पर समाधान हुआ, उन्होंने संतोष व्यक्त किया और कहा कि इस तरह की जनसुनवाई नियमित रूप से आयोजित होती रहनी चाहिए ताकि लोगों को अपनी समस्याओं के समाधान के लिए अलग-अलग कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें।
नगर निगम प्रशासन का मानना है कि जनता दरबार जैसी पहल से नागरिकों की शिकायतों के निस्तारण की प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनती है। इसके माध्यम से विभागों की कार्यप्रणाली की समीक्षा भी होती है और विकास कार्यों की प्राथमिकताओं को बेहतर तरीके से तय किया जा सकता है। आने वाले समय में भी इस तरह के कार्यक्रमों के माध्यम से शहरवासियों से सीधा संवाद जारी रखने और उनकी समस्याओं का समयबद्ध समाधान सुनिश्चित करने की दिशा में प्रयास जारी रहेंगे।




