चंडीगढ़ नगर निगम की बैठकों में करोड़ों रुपये के महत्वपूर्ण प्रस्तावों को नियमित मुख्य एजेंडे के बजाय बैठक से ठीक पहले टेबल या सप्लीमेंट्री एजेंडे के माध्यम से मंजूरी दिए जाने को लेकर आम आदमी पार्टी ने आपत्ति जताई है। पार्टी ने इसे पारदर्शिता और निर्धारित कानूनी प्रक्रिया से जुड़ा गंभीर मामला बताते हुए मांग की है कि बड़े वित्तीय और बुनियादी ढांचा संबंधी प्रस्तावों पर पार्षदों को पर्याप्त समय पहले पूरी जानकारी उपलब्ध करवाई जाए।
मंगलवार को आप की चंडीगढ़ इकाई के अध्यक्ष विजयपाल सिंह के नेतृत्व में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं और पार्षदों का एक प्रतिनिधिमंडल नगर निगम आयुक्त अमित कुमार से मिला। प्रतिनिधिमंडल ने आयुक्त को तीन पन्नों का विस्तृत ज्ञापन सौंपा और 31 जुलाई को हुई जनरल हाउस की बैठक में अपनाई गई कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। पार्टी के मुताबिक यह ज्ञापन 11 अगस्त को दर्ज करवाई गई उसकी पिछली आपत्ति की निरंतरता में दिया गया है।
आप नेताओं ने नगर निगम की बैठकों में एजेंडा रखने की प्रक्रिया को लेकर पंजाब नगर निगम अधिनियम, 1976 की धारा 57 का हवाला दिया। पार्टी का कहना है कि चंडीगढ़ पर लागू इस प्रावधान के तहत पार्षदों को जनरल हाउस की बैठक से कम से कम 72 घंटे पहले बैठक की कार्यसूची उपलब्ध कराई जानी चाहिए, ताकि वे प्रस्तावों का अध्ययन कर सकें और सदन में उनके पक्ष या विपक्ष में तर्कपूर्ण ढंग से अपनी बात रख सकें।
प्रतिनिधिमंडल ने आरोप लगाया कि यदि महत्वपूर्ण प्रस्तावों को बैठक के अंतिम समय में टेबल एजेंडे या सप्लीमेंट्री एजेंडे के रूप में लाया जाता है तो पार्षदों को संबंधित दस्तावेजों और प्रस्तावों की जांच का पर्याप्त अवसर नहीं मिलता। पार्टी ने कहा कि यह व्यवस्था विशेष रूप से उन मामलों में उचित नहीं है, जिनमें सार्वजनिक धन के करोड़ों रुपये खर्च होने हैं।
आप नेताओं ने कहा कि सप्लीमेंट्री एजेंडे का उद्देश्य ऐसे वास्तविक और तत्काल मामलों को सदन के सामने रखना होना चाहिए, जिन पर अगली नियमित बैठक तक इंतजार करना व्यावहारिक न हो। उनके अनुसार करोड़ों रुपये के नियमित इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट, कचरा प्रबंधन से जुड़े बड़े ठेके या व्यावसायिक संपत्तियों की ई-नीलामी जैसे प्रस्तावों को अंतिम समय में पेश करना उचित प्रक्रिया नहीं मानी जा सकती।
पार्टी ने विशेष रूप से तीन प्रस्तावों को लेकर अपनी आपत्ति दर्ज कराई। इनमें कजौली वॉटर वर्क्स से सेक्टर-39 तक पानी पहुंचाने वाली मौजूदा पाइपलाइन को बदलकर नई एमएस पाइपलाइन डालने का करीब 227 करोड़ रुपये का प्रस्ताव शामिल है। यह प्रस्ताव जनरल हाउस के एजेंडा आइटम 13 के तहत रखा गया था।
आप पार्षदों ने कहा कि 227 करोड़ रुपये जैसे बड़े सार्वजनिक निवेश से जुड़े प्रस्ताव को जल्दबाजी में मंजूरी देना उचित नहीं है। उनका कहना है कि इतने बड़े प्रोजेक्ट पर निर्णय लेने से पहले पार्षदों को परियोजना की तकनीकी जरूरतों, पाइपलाइन की क्षमता, लागत का अनुमान, कार्य की समयसीमा, टेंडर की शर्तों और अन्य संबंधित दस्तावेजों का विस्तृत अध्ययन करने का अवसर मिलना चाहिए।
पार्टी ने कहा कि पानी जैसी बुनियादी सेवा से जुड़े इस प्रोजेक्ट का सीधा प्रभाव शहर के हजारों लोगों पर पड़ सकता है। इसलिए इसके तकनीकी और वित्तीय पहलुओं की गहन समीक्षा आवश्यक है। आप नेताओं ने निगम प्रशासन से पूछा कि यदि परियोजना इतनी महत्वपूर्ण है तो इसे पहले से मुख्य एजेंडे में शामिल कर पार्षदों को समय पर दस्तावेज उपलब्ध क्यों नहीं करवाए गए।
दूसरा मामला सेक्टर-25 स्थित वेस्ट प्रोसेसिंग प्लांट में कचरा निस्तारण से संबंधित रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल यानी आरएफपी का है। इसे एजेंडा आइटम 10 के रूप में सदन के सामने रखा गया था। आप ने इस प्रस्ताव को भी महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि शहर के ठोस कचरा प्रबंधन से जुड़ी किसी भी बड़ी प्रक्रिया में पार्षदों और जनता के हितों को ध्यान में रखते हुए पूरी पारदर्शिता जरूरी है।
पार्टी के अनुसार कचरा निस्तारण का विषय केवल एक प्रशासनिक या तकनीकी प्रस्ताव नहीं है, बल्कि इसका सीधा संबंध शहर की स्वच्छता, पर्यावरण और सार्वजनिक स्वास्थ्य से है। ऐसे में आरएफपी की शर्तों, प्रस्तावित व्यवस्था, वित्तीय दायित्व और संबंधित ठेके की शर्तों की पर्याप्त समीक्षा के बाद ही निर्णय लिया जाना चाहिए।
तीसरा मुद्दा तीन कमर्शियल मैदानों की नई ई-नीलामी से संबंधित है। यह प्रस्ताव सप्लीमेंट्री एजेंडा के आइटम 19 के रूप में लाया गया था। आप नेताओं ने इस पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि नगर निगम की व्यावसायिक संपत्तियों से जुड़े फैसलों में राजस्व, नीलामी की शर्तों और संभावित वित्तीय प्रभाव की पूरी जानकारी पार्षदों को पहले मिलनी चाहिए।
प्रतिनिधिमंडल ने आयुक्त से मांग की कि एजेंडा आइटम 10, 13 और सप्लीमेंट्री एजेंडा आइटम 19 को मौजूदा सप्लीमेंट्री स्वरूप में आगे न बढ़ाया जाए। पार्टी चाहती है कि इन सभी प्रस्तावों को अगली जनरल हाउस बैठक के नियमित मुख्य एजेंडे में शामिल किया जाए, ताकि पार्षदों को निर्धारित समय के भीतर सभी संबंधित दस्तावेज उपलब्ध करवाए जा सकें।
आप ने यह भी मांग रखी कि संबंधित परियोजनाओं की तकनीकी रिपोर्ट, वित्तीय अनुमान, टेंडर दस्तावेज, शर्तें और अन्य आवश्यक रिकॉर्ड पार्षदों को बैठक से कम से कम 72 घंटे पहले उपलब्ध करवाए जाएं। पार्टी ने कहा कि दस्तावेजों की समय पर उपलब्धता के बिना पार्षदों से किसी बड़े प्रस्ताव पर सार्थक चर्चा या जिम्मेदारी के साथ मतदान की उम्मीद नहीं की जा सकती।
पार्टी ने निगम प्रशासन से यह भी स्पष्ट करने को कहा कि जब तक जनरल हाउस को निर्धारित समय के अनुसार सूचना और सभी जरूरी दस्तावेज उपलब्ध नहीं करवाए जाते, तब तक इन मामलों में अंतिम प्रशासनिक मंजूरी, वित्तीय स्वीकृति अथवा टेंडर प्रक्रिया से संबंधित कोई अपरिवर्तनीय निर्णय नहीं लिया जाना चाहिए।
आप नेताओं ने कहा कि उनका विरोध किसी भी विकास परियोजना के खिलाफ नहीं है। पार्टी का कहना है कि शहर में पानी, कचरा प्रबंधन, बुनियादी ढांचे और व्यावसायिक संपत्तियों से जुड़े विकास कार्य आवश्यक हैं और वह चंडीगढ़ के विकास के पक्ष में है। हालांकि, विकास कार्यों को निर्धारित नियमों और पारदर्शी प्रक्रिया के तहत ही आगे बढ़ाया जाना चाहिए।
विजयपाल सिंह के नेतृत्व वाले प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि सार्वजनिक धन से जुड़े फैसलों में जल्दबाजी से बचना जरूरी है। खासकर जब किसी परियोजना की लागत सैकड़ों करोड़ रुपये हो, तब चुने हुए पार्षदों को प्रस्ताव की पूरी जानकारी देकर उनकी समीक्षा और चर्चा का अवसर मिलना चाहिए। इससे न केवल सदन की कार्यप्रणाली मजबूत होगी, बल्कि भविष्य में वित्तीय और प्रशासनिक विवादों की संभावना भी कम होगी।
आप ने कहा कि जनरल हाउस शहर के लोकतांत्रिक निर्णय लेने का महत्वपूर्ण मंच है। यदि महत्वपूर्ण प्रस्ताव बिना पर्याप्त पूर्व सूचना के सदन में रखे जाएंगे तो पार्षदों की प्रभावी भूमिका सीमित हो सकती है। पार्टी ने मांग की कि निगम प्रशासन आगे से एजेंडा तैयार करने और वितरित करने में निर्धारित समयसीमा का सख्ती से पालन करे।
ज्ञापन की प्रतियां केवल नगर निगम आयुक्त तक सीमित नहीं रखी गईं। आप की ओर से इसे चंडीगढ़ के मेयर, सीनियर डिप्टी मेयर, डिप्टी मेयर और नगर निगम सचिव को भी भेजा गया है। पार्टी ने कहा कि इससे संबंधित सभी पदाधिकारियों को अपनी आपत्तियों और मांगों से अवगत कराया गया है, ताकि भविष्य में इस तरह की प्रक्रिया को लेकर विवाद की स्थिति न बने।
आप नेताओं ने दोहराया कि शहर के विकास के लिए बड़े प्रोजेक्ट जरूरी हैं, लेकिन उनका क्रियान्वयन नियमों के मुताबिक होना चाहिए। पार्टी के अनुसार पारदर्शिता, जवाबदेही और पर्याप्त विचार-विमर्श किसी भी विकास परियोजना में बाधा नहीं बल्कि बेहतर प्रशासन की बुनियाद हैं।
अब निगाहें इस बात पर हैं कि नगर निगम प्रशासन 227 करोड़ रुपये की पाइपलाइन परियोजना, सेक्टर-25 वेस्ट प्रोसेसिंग प्लांट के आरएफपी और तीन कमर्शियल मैदानों की ई-नीलामी से जुड़े प्रस्तावों पर क्या रुख अपनाता है और क्या इन्हें अगली जनरल हाउस बैठक के मुख्य एजेंडे में शामिल किया जाता है।



