चंडीगढ़ रेलवे स्टेशन का बहुप्रतीक्षित आधुनिकीकरण परियोजना तय समयसीमा से पीछे चल रही है। पहले इस वर्ल्ड क्लास रेलवे स्टेशन को अप्रैल के अंत तक तैयार करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था, लेकिन अब निर्माण कार्य के अगस्त तक पूरा होने की संभावना जताई जा रही है। रेलवे अधिकारियों के अनुसार, परियोजना का अधिकांश काम पूरा हो चुका है, हालांकि कुछ महत्वपूर्ण निर्माण और तकनीकी कार्य अभी भी अंतिम चरण में हैं। ऐसे में यात्रियों को आधुनिक सुविधाओं से लैस नए स्टेशन के लिए कुछ और समय इंतजार करना पड़ सकता है।
करीब 462 करोड़ रुपये की लागत से विकसित किया जा रहा चंडीगढ़ रेलवे स्टेशन भारतीय रेलवे के सबसे महत्वाकांक्षी स्टेशन पुनर्विकास परियोजनाओं में शामिल है। इस परियोजना का उद्देश्य केवल स्टेशन की इमारत को नया स्वरूप देना नहीं है, बल्कि इसे आधुनिक यात्री सुविधाओं, पर्यावरण अनुकूल तकनीकों और बेहतर परिवहन व्यवस्था से जोड़ना भी है। स्टेशन को इस तरह विकसित किया जा रहा है कि यह भविष्य में बढ़ने वाले यात्री भार को भी आसानी से संभाल सके।
चंडीगढ़ रेलवे स्टेशन की सबसे बड़ी विशेषता इसकी अनूठी भौगोलिक स्थिति है। यह देश के उन चुनिंदा रेलवे स्टेशनों में शामिल है, जिनके प्रवेश द्वार दो अलग-अलग प्रशासनिक क्षेत्रों से जुड़े हुए हैं। स्टेशन का एक प्रवेश द्वार केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ की ओर खुलता है, जबकि दूसरा प्रवेश द्वार हरियाणा के पंचकूला से जुड़ा हुआ है। इस दोहरी पहुंच के कारण प्रतिदिन हजारों यात्री दोनों राज्यों से स्टेशन तक आसानी से पहुंच पाते हैं। स्टेशन के पुनर्विकास में इस विशेषता को ध्यान में रखते हुए दोनों ओर आधुनिक सुविधाओं के साथ प्रवेश और निकास व्यवस्था विकसित की जा रही है।
यह परियोजना रेलवे लैंड डेवलपमेंट अथॉरिटी (RLDA) की देखरेख में संचालित की जा रही है। स्टेशन के डिजाइन में यात्रियों की सुविधा, बेहतर यातायात प्रबंधन और आधुनिक वास्तुकला को प्राथमिकता दी गई है। नए स्टेशन परिसर में विशाल प्रतीक्षालय, बेहतर टिकटिंग व्यवस्था, आधुनिक एस्केलेटर और लिफ्ट, चौड़े फुटओवर ब्रिज, दिव्यांगजन के लिए विशेष सुविधाएं, अत्याधुनिक शौचालय, डिजिटल सूचना प्रणाली और बेहतर सुरक्षा व्यवस्था जैसी कई सुविधाएं शामिल की जा रही हैं।
निर्माण कार्य के दौरान सबसे बड़ी चुनौती यह रही कि स्टेशन पर ट्रेनों का नियमित संचालन पूरी तरह जारी रखा गया। चंडीगढ़ रेलवे स्टेशन उत्तर भारत के व्यस्त रेलवे स्टेशनों में से एक है, जहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में एक्सप्रेस, सुपरफास्ट और अन्य यात्री ट्रेनें संचालित होती हैं। रेलवे प्रशासन के सामने यह सुनिश्चित करना जरूरी था कि निर्माण कार्य के कारण यात्रियों को न्यूनतम असुविधा हो और ट्रेन संचालन प्रभावित न हो। इसी वजह से कई निर्माण कार्य चरणबद्ध तरीके से किए गए, जिससे परियोजना की गति अपेक्षाकृत धीमी रही।
रेलवे अधिकारियों का कहना है कि यदि स्टेशन को पूरी तरह बंद करके निर्माण कार्य किया जाता, तो परियोजना समय से पहले पूरी हो सकती थी। लेकिन यात्रियों की सुविधा और रेल सेवाओं को प्राथमिकता देते हुए निर्माण कार्य को संचालन के साथ-साथ जारी रखा गया। इसी कारण निर्धारित समयसीमा में बदलाव करना पड़ा।
स्टेशन को ग्रीन बिल्डिंग अवधारणा के अनुसार विकसित किया जा रहा है। परियोजना का उद्देश्य केवल आधुनिक भवन तैयार करना नहीं, बल्कि ऊर्जा दक्षता और पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा देना है। इसी दिशा में स्टेशन को प्लेटिनम ग्रीन बिल्डिंग रेटिंग के अनुरूप तैयार किया जा रहा है। भवन निर्माण में ऊर्जा बचाने वाली तकनीकों, प्राकृतिक रोशनी के बेहतर उपयोग, वर्षा जल संचयन और जल संरक्षण जैसी व्यवस्थाओं को शामिल किया गया है।
ऊर्जा की जरूरतों को पर्यावरण अनुकूल तरीके से पूरा करने के लिए स्टेशन परिसर में 1,350 किलोवाट क्षमता का सोलर पावर प्लांट स्थापित किया जा रहा है। इससे बिजली की खपत का बड़ा हिस्सा सौर ऊर्जा के माध्यम से पूरा किया जा सकेगा। रेलवे का उद्देश्य ऊर्जा लागत कम करने के साथ-साथ कार्बन उत्सर्जन में भी कमी लाना है। भविष्य में स्टेशन की कई सुविधाएं नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों के माध्यम से संचालित होंगी।
नए स्टेशन भवन का डिजाइन यात्रियों की बढ़ती संख्या को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। वर्तमान में चंडीगढ़ रेलवे स्टेशन से प्रतिदिन हजारों यात्री सफर करते हैं, जबकि आने वाले वर्षों में यह संख्या और अधिक बढ़ने का अनुमान है। इसी कारण स्टेशन की क्षमता को बढ़ाकर प्रतिदिन लगभग 90 हजार यात्रियों की आवाजाही के अनुरूप विकसित किया जा रहा है। इसमें बेहतर प्लेटफॉर्म कनेक्टिविटी, अधिक खुला यात्री क्षेत्र और सुव्यवस्थित यातायात व्यवस्था शामिल होगी।
स्टेशन परिसर में वाहन पार्किंग, टैक्सी और ऑटो स्टैंड, ड्रॉप-ऑफ और पिक-अप जोन को भी नए सिरे से विकसित किया जा रहा है ताकि यात्रियों को स्टेशन पहुंचने और बाहर निकलने में कम समय लगे। इसके अलावा, यातायात जाम को कम करने के लिए अलग-अलग प्रवेश और निकास मार्ग तैयार किए जा रहे हैं। इससे स्टेशन के बाहर वाहनों की भीड़ कम होने की उम्मीद है।
रेलवे स्टेशन के पुनर्विकास के दौरान डिजिटल तकनीकों पर भी विशेष ध्यान दिया गया है। यात्रियों के लिए आधुनिक सूचना डिस्प्ले सिस्टम, सीसीटीवी आधारित निगरानी व्यवस्था, बेहतर सार्वजनिक उद्घोषणा प्रणाली और स्मार्ट लाइटिंग जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। सुरक्षा के लिहाज से स्टेशन परिसर में अत्याधुनिक निगरानी प्रणाली स्थापित की जा रही है, जिससे यात्रियों की सुरक्षा और निगरानी पहले की तुलना में अधिक प्रभावी होगी।
व्यावसायिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए स्टेशन परिसर में नए रिटेल स्पेस, फूड कोर्ट, प्रतीक्षालय और अन्य सार्वजनिक सुविधाओं का भी विकास किया जा रहा है। इससे यात्रियों को यात्रा के दौरान अधिक सुविधाएं मिलेंगी और रेलवे की गैर-किराया आय में भी वृद्धि होने की संभावना है। आधुनिक स्टेशन परिसर स्थानीय व्यापार और पर्यटन गतिविधियों को भी सकारात्मक रूप से प्रभावित कर सकता है।
परियोजना के तहत स्टेशन की वास्तुकला को आधुनिक स्वरूप देने के साथ-साथ यात्रियों की सुविधा के अनुरूप खुला और व्यवस्थित लेआउट तैयार किया गया है। भीड़ प्रबंधन, पैदल यात्रियों की आवाजाही और सार्वजनिक सुविधाओं की उपलब्धता को ध्यान में रखते हुए पूरे स्टेशन परिसर का पुनर्गठन किया गया है। इससे स्टेशन पर यात्रियों का अनुभव पहले की तुलना में अधिक सहज और सुविधाजनक होने की उम्मीद है।
अधिकारियों के अनुसार, निर्माण कार्य अब अंतिम चरण में पहुंच चुका है। कई संरचनात्मक कार्य पूरे हो चुके हैं, जबकि आंतरिक फिनिशिंग, तकनीकी इंस्टॉलेशन, विद्युत प्रणाली, परीक्षण और अंतिम निरीक्षण जैसे कार्य जारी हैं। सभी निर्माण और सुरक्षा मानकों को पूरा करने के बाद ही स्टेशन को पूरी तरह यात्रियों के लिए खोला जाएगा।
रेलवे प्रशासन का प्रयास है कि सभी शेष कार्य गुणवत्ता मानकों के अनुरूप पूरे किए जाएं, ताकि भविष्य में यात्रियों को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े। परियोजना पूरी होने के बाद चंडीगढ़ रेलवे स्टेशन आधुनिक सुविधाओं, बेहतर यात्री अनुभव, पर्यावरण अनुकूल तकनीकों और उन्नत बुनियादी ढांचे के साथ उत्तर भारत के प्रमुख रेलवे स्टेशनों में अपनी अलग पहचान बना सकता है।




