चंडीगढ़: दिल्ली में इमारत ढहने की घटना के बाद चंडीगढ़ प्रशासन ने शहर में भवनों की सुरक्षा को लेकर निगरानी बढ़ा दी है। एस्टेट ऑफिस की ओर से तैयार की गई रिपोर्ट में शहर की 134 व्यावसायिक और औद्योगिक इमारतों को असुरक्षित श्रेणी में रखा गया है। इन भवनों को लेकर अब प्रशासन की ओर से संबंधित मालिकों को नोटिस जारी करने की तैयारी है। नोटिस के जरिए भवनों की आवश्यक मरम्मत कराने अथवा अधिकृत विशेषज्ञ से उनकी संरचनात्मक मजबूती की जांच यानी स्ट्रक्चरल ऑडिट करवाने के निर्देश दिए जाएंगे।
प्रशासन की यह कार्रवाई पिछले वर्ष सेक्टर-17 में तीन मंजिला महफिल होटल की इमारत गिरने की घटना के बाद शुरू की गई प्रक्रिया का हिस्सा है। हादसे के बाद डीसी निशांत यादव के निर्देश पर एक कमेटी का गठन किया गया था। कमेटी ने शहर में अलग-अलग स्थानों पर स्थित व्यावसायिक और औद्योगिक भवनों की स्थिति का आकलन किया और अपनी रिपोर्ट प्रशासन को सौंप दी है।
रिपोर्ट सामने आने के बाद अब प्रशासन का ध्यान उन इमारतों पर केंद्रित है, जिनमें संरचनात्मक स्तर पर सुरक्षा संबंधी कमियां पाई गई हैं। अधिकारियों की ओर से संबंधित भवन मालिकों को आवश्यक कार्रवाई के लिए कहा जाएगा। जरूरत पड़ने पर भवनों की मरम्मत, मजबूती और स्ट्रक्चरल ऑडिट की प्रक्रिया पूरी कराई जाएगी, ताकि किसी संभावित हादसे को समय रहते रोका जा सके।
सेक्टर-22 में सबसे अधिक 15 भवन असुरक्षित
एस्टेट ऑफिस की सूची में सेक्टर-22 सबसे ऊपर है। यहां कुल 15 इमारतों को असुरक्षित चिह्नित किया गया है। सेक्टर-22 चंडीगढ़ के प्रमुख बाजारों और व्यावसायिक इलाकों में शामिल है और यहां दिनभर बड़ी संख्या में लोग खरीदारी तथा अन्य कामों के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में इस क्षेत्र में असुरक्षित भवनों की संख्या अधिक सामने आने के बाद प्रशासन के लिए इनकी सुरक्षा जांच और आवश्यक सुधार प्राथमिकता का विषय बन गया है।
अधिकारियों के अनुसार, सूची में शामिल भवनों के मालिकों को अपनी इमारत की वास्तविक संरचनात्मक स्थिति की जांच करवानी होगी। यदि विशेषज्ञों की रिपोर्ट में मरम्मत या मजबूती की जरूरत सामने आती है तो संबंधित भवन में आवश्यक काम करवाना होगा।
सेक्टर-22 के बाद औद्योगिक क्षेत्र फेज-1 में 13 तथा फेज-2 में 10 भवन असुरक्षित पाए गए हैं। औद्योगिक क्षेत्रों में बड़ी संख्या में व्यावसायिक गतिविधियां संचालित होती हैं, इसलिए इन भवनों की सुरक्षा को लेकर भी प्रशासन विशेष ध्यान दे रहा है।
कई प्रमुख सेक्टरों में भी सामने आई समस्या
रिपोर्ट के मुताबिक सेक्टर-20 में आठ भवन असुरक्षित पाए गए हैं। सेक्टर-8 और सेक्टर-18 में सात-सात इमारतें सूची में शामिल हैं, जबकि सेक्टर-21 में भी सात भवनों को असुरक्षित चिह्नित किया गया है। सेक्टर-19 में छह भवनों की स्थिति को लेकर चिंता सामने आई है।
इसके अलावा शहर के कई महत्वपूर्ण सेक्टरों में पांच-पांच असुरक्षित भवन मिले हैं। इनमें सेक्टर-17, सेक्टर-26, सेक्टर-32 और सेक्टर-37 शामिल हैं। सेक्टर-17 को चंडीगढ़ का प्रमुख व्यावसायिक केंद्र माना जाता है और यहां रोजाना बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं। ऐसे में इस क्षेत्र में पांच इमारतों का असुरक्षित सूची में शामिल होना प्रशासन के लिए खास तौर पर महत्वपूर्ण है।
सेक्टर-11, सेक्टर-24, सेक्टर-27 और सेक्टर-51 में चार-चार भवन असुरक्षित चिह्नित किए गए हैं। वहीं सेक्टर-15 और सेक्टर-23 में तीन-तीन इमारतें सूची में हैं। मनीमाजरा में भी तीन भवन असुरक्षित पाए गए हैं, जबकि सेक्टर-16 और सेक्टर-28 में दो-दो भवनों को सूची में शामिल किया गया है।
शहर के अन्य हिस्सों में भी अलग-अलग स्थानों पर एक-एक असुरक्षित भवन की पहचान हुई है। इनमें सेक्टर-2, 5, 9, 29, 30, 31, 35, 38, 40, 46, 47, 50 और 52 शामिल हैं। इससे स्पष्ट है कि भवन सुरक्षा से जुड़ी समस्या केवल किसी एक बाजार या औद्योगिक क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि शहर के विभिन्न हिस्सों में ऐसे भवन मौजूद हैं जिनकी संरचनात्मक स्थिति की जांच जरूरी मानी गई है।
डीसी ने अधिकारियों के साथ की बैठक
असुरक्षित भवनों को लेकर मंगलवार को डीसी निशांत यादव ने संबंधित अधिकारियों के साथ बैठक भी की। बैठक में सूचीबद्ध इमारतों की स्थिति और आगे की कार्रवाई को लेकर चर्चा की गई। प्रशासन की कोशिश है कि भवन मालिकों को समय रहते आवश्यक निर्देश दिए जाएं और संभावित जोखिम वाले ढांचों की स्थिति में सुधार कराया जाए।
प्रशासन की ओर से जिन भवनों को असुरक्षित श्रेणी में रखा गया है, उनके मालिकों को अब नोटिस भेजे जाने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। भवन मालिकों को या तो आवश्यक मरम्मत करवानी होगी या फिर अधिकृत विशेषज्ञ से स्ट्रक्चरल ऑडिट करवाकर इमारत की मजबूती का आकलन कराना होगा।
स्ट्रक्चरल ऑडिट के जरिए भवन के ढांचे की मजबूती, उसकी मौजूदा स्थिति और संभावित कमजोरियों का तकनीकी मूल्यांकन किया जाता है। इसके आधार पर यह तय किया जा सकता है कि भवन में तत्काल मरम्मत की जरूरत है, अतिरिक्त मजबूतीकरण की आवश्यकता है या किसी अन्य सुरक्षा उपाय की जरूरत है।
सेक्टर-17 की घटना ने बढ़ाई चिंता
शहर में भवन सुरक्षा को लेकर प्रशासन की सक्रियता के पीछे पिछले वर्ष सेक्टर-17 में हुआ हादसा भी अहम कारण रहा है। यहां तीन मंजिला महफिल होटल की इमारत गिर गई थी। इस घटना के बाद प्रशासन ने शहर में अन्य पुराने और संभावित रूप से कमजोर भवनों की स्थिति की समीक्षा करने के लिए कमेटी गठित की थी।
कमेटी ने अलग-अलग इलाकों में भवनों की स्थिति का जायजा लेने के बाद असुरक्षित इमारतों की सूची तैयार की। अब इसी रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जा रही है। प्रशासन का उद्देश्य यह है कि किसी भवन में कमजोरी होने की स्थिति में हादसा होने का इंतजार न किया जाए, बल्कि पहले ही आवश्यक कदम उठाए जाएं।
सोमवार को सेक्टर-17 में फिर सामने आया मामला
भवन सुरक्षा को लेकर प्रशासन की चिंता उस समय और बढ़ गई जब सोमवार को सेक्टर-17 में एक इमारत की बेसमेंट की दीवार गिर गई। घटना के बाद एहतियाती कदम उठाते हुए आसपास के हिस्से को खाली कराया गया और सुरक्षा से जुड़े पहलुओं की जांच की गई।
यह घटना उस समय सामने आई है जब सेक्टर-17 की पांच इमारतें पहले ही प्रशासन द्वारा तैयार असुरक्षित भवनों की सूची में शामिल हैं। इससे इस क्षेत्र में पुराने और व्यावसायिक भवनों की नियमित संरचनात्मक जांच की आवश्यकता पर फिर ध्यान गया है।
सेक्टर-17 शहर का प्रमुख कारोबारी और व्यावसायिक केंद्र है। यहां कार्यालयों, दुकानों और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के कारण लोगों की आवाजाही काफी रहती है। इसलिए किसी भी भवन में संरचनात्मक कमजोरी सामने आने पर उसका प्रभाव केवल भवन तक सीमित नहीं रहता, बल्कि आसपास मौजूद लोगों और अन्य प्रतिष्ठानों की सुरक्षा पर भी पड़ सकता है।
नोटिस के बाद मालिकों को उठाने होंगे कदम
अब प्रशासन की अगली कार्रवाई का केंद्र सूची में शामिल 134 भवनों के मालिक होंगे। संबंधित भवन मालिकों को उनकी इमारत की स्थिति के संबंध में नोटिस दिया जाएगा। प्रशासन की ओर से उन्हें मरम्मत कराने या अधिकृत विशेषज्ञ से स्ट्रक्चरल ऑडिट करवाने के निर्देश दिए जाएंगे।
विशेषज्ञों की रिपोर्ट के आधार पर भवन की वास्तविक स्थिति का पता चल सकेगा और जरूरत के अनुसार आगे की कार्रवाई की जा सकेगी। प्रशासन का प्रयास रहेगा कि असुरक्षित घोषित भवनों में आवश्यक सुधार समय पर हो और वहां रहने वाले लोगों, कर्मचारियों, दुकानदारों तथा ग्राहकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
दिल्ली की इमारत गिरने की घटना के बाद देशभर में पुराने और कमजोर भवनों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ी है। चंडीगढ़ में 134 व्यावसायिक और औद्योगिक इमारतों की पहचान इसी संदर्भ में प्रशासन के लिए एक महत्वपूर्ण चेतावनी के तौर पर सामने आई है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सूची में शामिल भवनों के मालिक प्रशासन के निर्देशों का कितनी तेजी से पालन करते हैं और असुरक्षित ढांचों को सुरक्षित बनाने की प्रक्रिया किस गति से आगे बढ़ती है।




