जंतर-मंतर विवाद में स्वतंत्र भारद्वाज पर बढ़ी कानूनी कार्रवाई: निशु आजाद केस में POCSO की नई FIR, पुराने मामले में SC/ST एक्ट भी जोड़ा

जंतर-मंतर विवाद में स्वतंत्र भारद्वाज पर बढ़ी कानूनी कार्रवाई: निशु आजाद केस में POCSO की नई FIR, पुराने मामले में SC/ST एक्ट भी जोड़ा

दिल्ली के जंतर-मंतर पर CJP के विरोध प्रदर्शन के दौरान हुए विवाद को लेकर स्वतंत्र भारद्वाज की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। निशु आजाद के पिता पर कथित हमले से जुड़े मामले में दिल्ली पुलिस ने अब POCSO एक्ट के तहत एक नई FIR दर्ज की है। पुलिस के अनुसार, शिकायत में पीड़ित को नाबालिग बताया गया है। इसके अलावा, घटना को लेकर पहले से दर्ज FIR में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (SC/ST) अधिनियम की धाराएं भी जोड़ी गई हैं।

मामले में अभी जांच जारी है और पुलिस ने स्पष्ट किया है कि स्वतंत्र भारद्वाज को अब तक गिरफ्तार नहीं किया गया है। दूसरी तरफ भारद्वाज लगातार यह कहते रहे हैं कि जंतर-मंतर पर जो कुछ हुआ, उसे एकतरफा तरीके से हमला बताना सही नहीं है। उनका दावा है कि उस समय उन्होंने अपनी सुरक्षा के लिए कदम उठाया था और उन्हें कई लोगों ने घेर लिया था।

नई FIR और SC/ST एक्ट की धाराएं जुड़ने के बाद अब यह मामला पहले की तुलना में ज्यादा गंभीर कानूनी दायरे में आ गया है। पुलिस की जांच के दौरान घटना से जुड़े वीडियो, मेडिकल दस्तावेज और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है।

घटना के बाद पुलिस कार्रवाई का दायरा बढ़ा

जंतर-मंतर पर हुई घटना के बाद पुलिस के पास शिकायत दर्ज कराई गई थी। आरोप था कि निशु आजाद के पिता के साथ मारपीट की गई। इसी मामले में अब पुलिस ने एक और FIR दर्ज की है, जिसमें POCSO एक्ट लगाया गया है। पुलिस के मुताबिक, इस शिकायत में नाबालिग पीड़ित का जिक्र है।

POCSO यानी Protection of Children from Sexual Offences Act बच्चों को यौन अपराधों से सुरक्षा देने वाला विशेष कानून है। हालांकि इस मामले में नई FIR में दर्ज आरोपों और घटनाक्रम की अंतिम कानूनी स्थिति जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी। FIR दर्ज होना अपने आप में किसी व्यक्ति को दोषी साबित नहीं करता।

इसी बीच, पहले से दर्ज मामले में SC/ST एक्ट की धाराएं जोड़े जाने की जानकारी भी सामने आई है। इससे जांच का कानूनी दायरा बढ़ गया है। अब पुलिस को घटना के दौरान कथित चोट, शिकायत में लगाए गए आरोप, संबंधित लोगों के बयान और उपलब्ध डिजिटल साक्ष्यों के साथ-साथ जाति आधारित अपराध से जुड़े आरोपों की भी जांच करनी होगी।

गिरफ्तारी को लेकर स्थिति साफ

इस पूरे विवाद में एक अहम सवाल स्वतंत्र भारद्वाज की गिरफ्तारी को लेकर भी बना हुआ है। दिल्ली पुलिस की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, फिलहाल उनकी गिरफ्तारी नहीं हुई है। पुलिस मामले की जांच कर रही है।

भारद्वाज का कहना है कि वह जांच एजेंसियों के साथ सहयोग कर रहे हैं। उनका पक्ष है कि घटना को जिस तरीके से सोशल मीडिया और सार्वजनिक बहस में पेश किया जा रहा है, वह पूरी तस्वीर नहीं दिखाता।

ऐसे मामलों में पुलिस की जांच के दौरान दोनों पक्षों के बयान, मौके पर मौजूद लोगों की जानकारी, वीडियो फुटेज और मेडिकल रिकॉर्ड जैसे साक्ष्यों की जांच की जाती है। इसलिए मामले में आगे क्या कार्रवाई होगी, यह जांच के दौरान सामने आने वाले तथ्यों पर निर्भर करेगा।

भारद्वाज ने बताया अपना पक्ष

स्वतंत्र भारद्वाज ने जंतर-मंतर की घटना पर अपनी सफाई देते हुए कहा है कि उन्होंने किसी व्यक्ति पर जानबूझकर हमला नहीं किया था। उनके अनुसार, उस समय परिस्थितियां ऐसी बन गई थीं कि उन्हें अपनी सुरक्षा के लिए प्रतिक्रिया करनी पड़ी।

भारद्वाज का दावा है कि उन्हें करीब 10 से 15 लोगों ने घेर लिया था। उनका कहना है कि यदि उन्होंने खुद को बचाने के लिए कदम नहीं उठाया होता तो भीड़ उनके साथ गंभीर मारपीट कर सकती थी।

इसी दौरान निशु आजाद के पिता के सिर पर चोट लगने की बात सामने आई। भारद्वाज का कहना है कि यह घटना जानबूझकर हमला करने के इरादे से नहीं हुई, बल्कि कथित तौर पर खुद को बचाने की कोशिश के दौरान हुई।

उनकी ओर से इस घटना को आत्मरक्षा का मामला बताया जा रहा है। हालांकि पुलिस जांच में यह तय किया जाना बाकी है कि घटनास्थल पर वास्तव में क्या हुआ था और दोनों पक्षों के दावों में कितनी सच्चाई है।

पॉडकास्ट के बयान को लेकर भी विवाद

जंतर-मंतर की घटना के बाद स्वतंत्र भारद्वाज के एक पॉडकास्ट में दिए गए कथित बयानों को लेकर भी विवाद खड़ा हुआ। सोशल मीडिया पर उनके बयान के कुछ हिस्से शेयर किए गए, जिसके बाद उन पर सवाल उठने लगे।

भारद्वाज ने बाद में अपने बयान को लेकर सफाई दी। उन्होंने आरोप लगाया कि सोशल मीडिया पर उनके पॉडकास्ट की जो क्लिप वायरल की जा रही है, उसमें छेड़छाड़ की गई है और उसे संदर्भ से अलग करके पेश किया गया है।

उनका कहना है कि पॉडकास्ट में कही गई कुछ बातें व्यंग्य के तौर पर थीं, लेकिन सोशल मीडिया पर उन्हें गंभीर बयान की तरह प्रस्तुत किया गया। उन्होंने राहुल गांधी समेत कुछ अन्य लोगों की ओर से शेयर की गई क्लिप को भी कथित तौर पर फर्जी या एडिटेड बताया।

इस विवाद के बीच भारद्वाज का कहना है कि वास्तविक स्थिति सामने लाने के लिए पूरे वीडियो और उपलब्ध रिकॉर्ड को देखा जाना चाहिए, न कि केवल सोशल मीडिया पर प्रसारित छोटे हिस्सों के आधार पर निष्कर्ष निकाला जाना चाहिए।

मेडिकल रिपोर्ट को लेकर भी दावा

भारद्वाज ने निशु आजाद के पिता की चोटों को लेकर भी अपना पक्ष रखा है। उनका दावा है कि दिल्ली पुलिस की मेडिकल रिपोर्ट में कोई गंभीर चोट दर्ज नहीं थी।

हालांकि इस दावे और मेडिकल रिकॉर्ड की वास्तविक कानूनी व्याख्या जांच के दस्तावेजों के आधार पर ही की जा सकेगी। किसी चोट की गंभीरता और उससे जुड़े आरोपों का निर्धारण केवल किसी एक पक्ष के बयान से नहीं किया जाता।

भारद्वाज ने यह भी कहा है कि उनके पास जंतर-मंतर की घटना से जुड़े वीडियो मौजूद हैं। उनका दावा है कि इन वीडियो से उस समय की परिस्थितियों को समझने में मदद मिल सकती है।

अगर जांच के दौरान इन वीडियो को पुलिस के सामने पेश किया जाता है, तो उनकी प्रामाणिकता और घटनाक्रम से उनकी प्रासंगिकता भी जांच का हिस्सा हो सकती है। इसी तरह दूसरे पक्ष के पास उपलब्ध वीडियो या अन्य सबूत भी मामले में महत्वपूर्ण हो सकते हैं।

कपिल मिश्रा और चिराग पासवान के नाम पर भी सफाई

विवाद के दौरान यह सवाल भी उठाया गया कि स्वतंत्र भारद्वाज को राजनीतिक प्रभाव के कारण राहत मिली। इस संदर्भ में कपिल मिश्रा का नाम सामने आया था। भारद्वाज ने इस तरह के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि कपिल मिश्रा और चिराग पासवान उनके लिए भाइयों जैसे हैं।

उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि उनके कुछ बयानों को शाब्दिक रूप से नहीं लिया जाना चाहिए। उनके अनुसार, बातचीत में कही गई कुछ बातें व्यंग्य या मजाक के संदर्भ में थीं और बाद में उन्हें अलग अर्थ में प्रस्तुत किया गया।

इस सफाई के बावजूद जंतर-मंतर की घटना को लेकर विवाद समाप्त नहीं हुआ है। पुलिस के पास अब पहले मामले के साथ-साथ POCSO से जुड़ी नई शिकायत भी है। SC/ST एक्ट की धाराएं जुड़ने से जांच के कानूनी पहलू और विस्तृत हो गए हैं।

अब जांच के नतीजे पर नजर

इस पूरे मामले में फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण पहलू पुलिस की जांच है। नई FIR दर्ज होने और पुराने केस में अतिरिक्त धाराएं जुड़ने के बाद पुलिस को शिकायतों में लगाए गए आरोपों की अलग-अलग कोण से जांच करनी होगी।

घटना के समय मौजूद लोगों के बयान, उपलब्ध वीडियो फुटेज, मेडिकल दस्तावेज और अन्य डिजिटल साक्ष्य जांच में अहम भूमिका निभा सकते हैं। पुलिस यह भी देखेगी कि घटना के दौरान किस पक्ष की ओर से क्या कार्रवाई हुई और उसके पीछे परिस्थितियां क्या थीं।

वहीं, स्वतंत्र भारद्वाज की ओर से आत्मरक्षा का दावा किया गया है। उन्होंने जांच में सहयोग करने की बात कही है और घटना के वीडियो को अपने पक्ष में महत्वपूर्ण बताया है।

फिलहाल उनकी गिरफ्तारी नहीं हुई है। ऐसे में आने वाले दिनों में पुलिस की जांच और उसके आधार पर होने वाली कानूनी कार्रवाई पर सभी की नजर रहेगी। POCSO के तहत दर्ज नई FIR और SC/ST एक्ट की जोड़ी गई धाराओं के बाद मामला अब पहले से अधिक संवेदनशील हो गया है। हालांकि अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने और उपलब्ध साक्ष्यों के मूल्यांकन के बाद ही सामने आएगा।

इस मामले में यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि FIR में दर्ज आरोप जांच का प्रारंभिक हिस्सा होते हैं। किसी व्यक्ति की कानूनी जिम्मेदारी या दोष का अंतिम निर्धारण अदालत में साक्ष्यों और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर होता है। इसलिए फिलहाल दोनों पक्षों के दावों और पुलिस की जांच को सामने रखकर ही मामले को देखा जा रहा है।