हरियाणा सरकार राज्य की राजस्व सेवाओं को पूरी तरह डिजिटल और नागरिक-केंद्रित बनाने की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाने जा रही है। जमीन की रजिस्ट्री, दस्तावेज सत्यापन और राजस्व संबंधी अन्य प्रक्रियाओं को सरल, पारदर्शी और तेज बनाने के उद्देश्य से सरकार जल्द ही पेपरलेस रजिस्ट्रेशन 2.0 प्रणाली लागू करने की तैयारी में है। इसके साथ ही लंबित सीमांकन मामलों के निपटारे के लिए विशेष अभियान भी शुरू किया गया है, ताकि लोगों को वर्षों तक सरकारी कार्यालयों के चक्कर न काटने पड़ें।
राज्य सरकार का मानना है कि नई डिजिटल व्यवस्था लागू होने के बाद भूमि और संपत्ति से जुड़े अधिकांश कार्य ऑनलाइन माध्यम से पूरे किए जा सकेंगे। इससे न केवल समय की बचत होगी, बल्कि सरकारी प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही भी बढ़ेगी।
डिजिटल राजस्व व्यवस्था की ओर बढ़ता हरियाणा
पिछले कुछ वर्षों में हरियाणा सरकार ने प्रशासनिक सेवाओं को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लाने के लिए कई कदम उठाए हैं। अब राजस्व विभाग भी इसी दिशा में व्यापक बदलाव करने जा रहा है।
राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, पेपरलेस रजिस्ट्रेशन 2.0 को आधुनिक तकनीक पर आधारित एकीकृत प्रणाली के रूप में विकसित किया गया है। इसका उद्देश्य नागरिकों को घर बैठे सुरक्षित और सुविधाजनक सेवाएं उपलब्ध कराना है।
नई व्यवस्था लागू होने के बाद संपत्ति पंजीकरण से जुड़ी अधिकांश प्रक्रियाएं ऑनलाइन संचालित होंगी। इससे दस्तावेजों की भौतिक जांच, बार-बार कार्यालयों में उपस्थित होने और लंबी प्रशासनिक प्रक्रियाओं की आवश्यकता काफी हद तक कम हो जाएगी।
जिला-दर-जिला लागू होगी नई प्रणाली
सरकार ने स्पष्ट किया है कि नई व्यवस्था को एक साथ पूरे राज्य में लागू करने के बजाय चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा।
पेपरलेस रजिस्ट्रेशन 1.0 से 2.0 में परिवर्तन जिला-वार किया जाएगा ताकि किसी भी प्रकार की तकनीकी या प्रशासनिक बाधा से बचा जा सके। इससे यह सुनिश्चित होगा कि नई प्रणाली लागू होने के दौरान नागरिकों को सेवाएं प्राप्त करने में कोई कठिनाई न हो।
विशेषज्ञों का मानना है कि चरणबद्ध क्रियान्वयन से अधिकारियों को नई तकनीक को समझने और संभावित समस्याओं का समाधान करने का पर्याप्त समय मिलेगा।
नई प्रणाली में क्या-क्या सुविधाएं मिलेंगी?
पेपरलेस रजिस्ट्रेशन 2.0 को कई आधुनिक डिजिटल सुविधाओं से लैस किया गया है।
नई प्रणाली के माध्यम से नागरिक ऑनलाइन आवेदन जमा कर सकेंगे और आवश्यक दस्तावेज डिजिटल रूप में अपलोड कर पाएंगे। आधार आधारित पहचान सत्यापन की सुविधा भी इसमें शामिल की गई है, जिससे आवेदक की पहचान का प्रमाणन तेज और सुरक्षित तरीके से किया जा सकेगा।
इसके अलावा ई-सिग्नेचर यानी इलेक्ट्रॉनिक हस्ताक्षर की सुविधा उपलब्ध होगी, जिससे कई मामलों में भौतिक दस्तावेजों की आवश्यकता समाप्त हो जाएगी।
ऑनलाइन भुगतान प्रणाली के जरिए पंजीकरण शुल्क और अन्य निर्धारित शुल्क डिजिटल माध्यम से जमा किए जा सकेंगे। इससे नकद लेनदेन और भुगतान से जुड़ी जटिलताएं कम होंगी।
रियल टाइम सत्यापन से बढ़ेगी पारदर्शिता
नई व्यवस्था की एक प्रमुख विशेषता रियल टाइम वेरिफिकेशन सिस्टम होगी।
इस प्रणाली के माध्यम से दस्तावेजों और आवेदनों की तत्काल जांच की जा सकेगी। अधिकारियों को अलग-अलग कार्यालयों से रिकॉर्ड मंगवाने या मैनुअल सत्यापन पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।
इससे प्रक्रिया की गति बढ़ेगी और फर्जी दस्तावेजों या गलत सूचनाओं के आधार पर होने वाली अनियमितताओं पर भी अंकुश लगाया जा सकेगा।
सरकार का मानना है कि यह व्यवस्था नागरिकों और प्रशासन के बीच विश्वास को मजबूत करेगी।
सुरक्षित डेटा भंडारण पर विशेष ध्यान
भूमि और संपत्ति से जुड़े रिकॉर्ड अत्यंत महत्वपूर्ण माने जाते हैं। इसलिए नई प्रणाली में डेटा सुरक्षा को प्राथमिकता दी गई है।
सभी रिकॉर्ड सुरक्षित डिजिटल सर्वर पर संग्रहीत किए जाएंगे। इससे दस्तावेजों के खोने, क्षतिग्रस्त होने या रिकॉर्ड में छेड़छाड़ की आशंका काफी कम हो जाएगी।
डिजिटल रिकॉर्ड प्रबंधन के कारण भविष्य में किसी भी संपत्ति से संबंधित जानकारी प्राप्त करना भी अधिक आसान होगा।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह कदम भूमि रिकॉर्ड आधुनिकीकरण की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।
सरकारी कार्यालयों पर निर्भरता होगी कम
वर्तमान व्यवस्था में भूमि पंजीकरण और राजस्व संबंधी कार्यों के लिए नागरिकों को कई बार संबंधित कार्यालयों में जाना पड़ता है।
दस्तावेज जमा करने, सत्यापन कराने, शुल्क जमा करने और अंतिम स्वीकृति प्राप्त करने जैसी प्रक्रियाओं में काफी समय लगता है। कई मामलों में लोगों को अलग-अलग विभागों के कई चक्कर लगाने पड़ते हैं।
नई प्रणाली का उद्देश्य इस समस्या को समाप्त करना है। अधिकांश सेवाएं ऑनलाइन उपलब्ध होने से लोगों को केवल विशेष परिस्थितियों में ही कार्यालय जाना पड़ेगा।
इससे नागरिकों के समय और संसाधनों की बचत होगी तथा सरकारी सेवाओं तक पहुंच आसान बनेगी।
अधिकारियों और कर्मचारियों को दिया जा रहा विशेष प्रशिक्षण
नई तकनीक को सफलतापूर्वक लागू करने के लिए सरकार केवल सॉफ्टवेयर विकसित करने तक सीमित नहीं है, बल्कि मानव संसाधन को भी तैयार किया जा रहा है।
राज्य के सभी जिलों में मास्टर ट्रेनर्स की पहचान कर उन्हें विशेष प्रशिक्षण दिया गया है। ये प्रशिक्षित अधिकारी और कर्मचारी आगे अन्य कर्मचारियों को नई प्रणाली की कार्यप्रणाली समझाने का काम करेंगे।
प्रशिक्षण कार्यक्रम में ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया, डिजिटल सत्यापन, डेटा प्रबंधन, शिकायत निवारण और तकनीकी सहायता जैसे विषय शामिल किए गए हैं।
अधिकारियों के अनुसार यह प्रशिक्षण अभियान शीघ्र पूरा कर लिया जाएगा ताकि नई व्यवस्था लागू होते ही कर्मचारी पूरी दक्षता के साथ कार्य कर सकें।
विस्तृत एसओपी और यूजर मैनुअल तैयार
नई प्रणाली के प्रभावी संचालन के लिए विभाग ने विस्तृत मानक संचालन प्रक्रियाएं (एसओपी) तैयार की हैं।
इन एसओपी में प्रत्येक चरण की जिम्मेदारी, कार्यप्रवाह, सत्यापन प्रक्रिया और तकनीकी मानकों को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया गया है।
इसके साथ ही उपयोगकर्ता पुस्तिकाएं भी तैयार की गई हैं ताकि अधिकारी और कर्मचारी नई प्रणाली को आसानी से समझ सकें।
सरकार का मानना है कि स्पष्ट दिशानिर्देशों के कारण कार्यान्वयन के दौरान भ्रम और त्रुटियों की संभावना कम होगी।
सीमांकन मामलों के निपटारे के लिए विशेष अभियान
पेपरलेस रजिस्ट्रेशन 2.0 की तैयारी के साथ-साथ सरकार ने भूमि सीमांकन से जुड़े लंबित मामलों के समाधान पर भी विशेष ध्यान दिया है।
राज्यभर में 10 दिवसीय विशेष अभियान शुरू किया गया है, जिसका उद्देश्य वर्षों से लंबित पड़े सीमांकन मामलों का तेजी से निपटारा करना है।
भूमि सीमांकन से जुड़े विवाद अक्सर किसानों, भू-स्वामियों और संपत्ति खरीदारों के लिए बड़ी समस्या बन जाते हैं। कई मामलों में विवादों के कारण न्यायालयों और प्रशासनिक कार्यालयों पर भी अतिरिक्त दबाव पड़ता है।
सरकार का मानना है कि समयबद्ध कार्रवाई से इन मामलों को कम किया जा सकता है।
जिलों को दिए गए विशेष निर्देश
विशेष अभियान के तहत सभी जिला प्रशासनों को लंबित मामलों की समीक्षा करने और उनका प्राथमिकता के आधार पर निस्तारण करने के निर्देश दिए गए हैं।
अधिकारियों को नियमित रूप से प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करने और निर्धारित समयसीमा के भीतर अधिकतम मामलों का समाधान सुनिश्चित करने को कहा गया है।
इसके अलावा वरिष्ठ स्तर पर भी अभियान की निगरानी की जा रही है ताकि किसी प्रकार की ढिलाई न बरती जाए।
भूमि विवादों में आ सकती है कमी
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सीमांकन मामलों का समय पर समाधान किया गया तो भूमि विवादों में उल्लेखनीय कमी आ सकती है।
स्पष्ट सीमांकन होने से संपत्ति के स्वामित्व को लेकर विवाद कम होंगे और खरीदारों तथा किसानों को अधिक कानूनी सुरक्षा मिलेगी।
इसके साथ ही भूमि रिकॉर्ड का डिजिटलीकरण और ऑनलाइन सत्यापन प्रक्रिया भी विवादों को कम करने में सहायक सिद्ध हो सकती है।
नागरिक सेवाओं में सुधार पर सरकार का फोकस
हरियाणा सरकार का उद्देश्य केवल तकनीकी बदलाव करना नहीं है, बल्कि नागरिक सेवाओं को अधिक प्रभावी और पारदर्शी बनाना भी है।
पेपरलेस रजिस्ट्रेशन 2.0, डिजिटल सत्यापन, ऑनलाइन भुगतान, सुरक्षित डेटा प्रबंधन और सीमांकन मामलों के विशेष अभियान जैसे कदम इसी व्यापक रणनीति का हिस्सा हैं।
सरकार का दावा है कि इन सुधारों से न केवल प्रशासनिक दक्षता बढ़ेगी, बल्कि आम लोगों को भी राजस्व सेवाओं का लाभ पहले की तुलना में अधिक तेजी और सुविधा के साथ मिलेगा।
यदि नई प्रणाली निर्धारित योजना के अनुसार सफलतापूर्वक लागू होती है, तो हरियाणा देश के उन राज्यों में शामिल हो सकता है जहां भूमि और संपत्ति से जुड़ी अधिकांश सेवाएं पूरी तरह डिजिटल, पारदर्शी और नागरिक-अनुकूल तरीके से संचालित की जाती हैं। आने वाले महीनों में यह स्पष्ट होगा कि यह पहल राज्य की राजस्व व्यवस्था में कितना बड़ा परिवर्तन लेकर आती है।




