जातीय जनगणना में हर जाति को मिले अलग वैज्ञानिक पहचान: हरियाणा कांग्रेस ने राज्यपाल को सौंपा ज्ञापन

जातीय जनगणना में हर जाति को मिले अलग वैज्ञानिक पहचान: हरियाणा कांग्रेस ने राज्यपाल को सौंपा ज्ञापन

आगामी जनगणना में जातियों की सही और व्यवस्थित गणना सुनिश्चित करने की मांग को लेकर हरियाणा कांग्रेस ने बुधवार को राज्यपाल प्रो. असीम कुमार घोष से मुलाकात की। चंडीगढ़ स्थित लोक भवन में कांग्रेस के उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल को राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपते हुए जातीय गणना की प्रक्रिया में स्पष्ट व्यवस्था, वैज्ञानिक वर्गीकरण और कोडिंग प्रणाली लागू करने की मांग उठाई।

प्रतिनिधिमंडल में हरियाणा कांग्रेस प्रभारी संजय दत्त, प्रदेश अध्यक्ष राव नरेंद्र सिंह, पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा, ओबीसी विभाग के प्रदेश अध्यक्ष चंद्र प्रकाश जांगड़ा सहित कई विधायक और वरिष्ठ नेता शामिल रहे। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि जातीय जनगणना का उद्देश्य केवल विभिन्न जातियों की संख्या दर्ज करना नहीं होना चाहिए, बल्कि ऐसा प्रमाणिक और व्यवस्थित आंकड़ा तैयार करना होना चाहिए, जिसके आधार पर सामाजिक न्याय, प्रतिनिधित्व और सरकारी नीतियों को प्रभावी ढंग से लागू किया जा सके।

केवल जाति पूछना पर्याप्त नहीं

राज्यपाल को सौंपे गए ज्ञापन में कांग्रेस ने कहा कि जनगणना के दौरान किसी व्यक्ति से उसकी जाति का नाम पूछकर उसे उसी रूप में दर्ज कर देना पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। देश के अलग-अलग राज्यों और क्षेत्रों में एक ही जाति या समुदाय को अलग-अलग नामों, उपनामों, स्थानीय नामों, पारंपरिक व्यवसाय से जुड़े संबोधनों, उच्चारण और वर्तनी के अलग-अलग रूपों से जाना जाता है।

कांग्रेस का तर्क है कि यदि जनगणना में इन सभी नामों को अलग-अलग प्रविष्टियों के रूप में दर्ज कर दिया गया और उनके बीच संबंध स्थापित करने के लिए कोई मानकीकृत प्रणाली नहीं बनाई गई, तो एक ही समुदाय की वास्तविक आबादी कई हिस्सों में बंट सकती है। इससे तैयार होने वाला आंकड़ा वास्तविक सामाजिक स्थिति की सही तस्वीर देने में सक्षम नहीं होगा।

ज्ञापन में इस समस्या के समाधान के लिए प्रत्येक मान्य जाति और समुदाय के लिए एक विशिष्ट वैज्ञानिक कोड निर्धारित करने का सुझाव दिया गया है। कांग्रेस के अनुसार अलग-अलग क्षेत्रों में प्रचलित नाम, समानार्थी नाम, वर्तनी के अंतर और स्थानीय पहचान को विशेषज्ञ सत्यापन के बाद एक ही मानक पहचान से जोड़ा जाना चाहिए।

ओबीसी के लिए स्पष्ट और अलग व्यवस्था की मांग

कांग्रेस ने जातीय जनगणना में अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए स्पष्ट और अलग श्रेणी या कॉलम रखने की मांग भी उठाई है। पार्टी नेताओं का कहना है कि यदि ओबीसी समुदायों की संख्या का प्रमाणिक आंकड़ा सामने नहीं आता है तो इस वर्ग से जुड़ी सरकारी नीतियों और कल्याणकारी योजनाओं की प्रभावशीलता का सही आकलन करना कठिन होगा।

प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़े वर्गों की वास्तविक स्थिति को समझने के लिए केवल सामान्य जनसंख्या का आंकड़ा पर्याप्त नहीं है। विभिन्न जातियों की आबादी, उनकी शिक्षा, रोजगार, आर्थिक स्थिति और सार्वजनिक संस्थानों में भागीदारी से संबंधित आंकड़ों की जरूरत होती है। ऐसे आंकड़े उपलब्ध होने पर सरकार सामाजिक जरूरतों के अनुरूप नीतियों को अधिक प्रभावी ढंग से तैयार कर सकती है।

कांग्रेस का कहना है कि जनगणना में ओबीसी से संबंधित जानकारी स्पष्ट तरीके से दर्ज किए जाने की आवश्यकता है, ताकि बाद में आंकड़ों की व्याख्या करते समय भ्रम की स्थिति न बने। पार्टी ने इस संबंध में मौजूदा व्यवस्था की समीक्षा कर आवश्यक बदलाव करने की मांग रखी है।

एक ही जाति के कई नाम बनने से आंकड़े प्रभावित होने की आशंका

ज्ञापन में जातियों के नामों के मानकीकरण को विशेष महत्व दिया गया है। कांग्रेस ने कहा कि भारत जैसे विविधतापूर्ण देश में भाषाई और क्षेत्रीय विविधता के कारण किसी समुदाय के नाम में मामूली बदलाव सामान्य बात है। किसी स्थान पर जाति का नाम अलग तरीके से बोला जा सकता है, तो दूसरे क्षेत्र में उसी समुदाय के लिए अलग नाम या उपनाम इस्तेमाल हो सकता है।

इसी तरह हिंदी, पंजाबी, हरियाणवी, मराठी, बंगाली, तमिल, तेलुगु या अन्य भाषाओं में एक ही नाम की वर्तनी अलग हो सकती है। यदि जनगणना प्रणाली इन सभी प्रविष्टियों को स्वत: अलग-अलग मान लेती है तो एक समुदाय की संख्या कई श्रेणियों में विभाजित हो सकती है।

कांग्रेस ने सुझाव दिया कि जनगणना के लिए पहले से एक मानक जाति सूची तैयार की जाए। इसमें केंद्र और राज्यों की आधिकारिक सूचियों के साथ-साथ क्षेत्रीय नामों और प्रचलित वैकल्पिक नामों को भी शामिल किया जाए। किसी जाति के अलग नाम को उसी समुदाय से जोड़ने का निर्णय बिना सत्यापन के नहीं, बल्कि विशेषज्ञ प्रक्रिया के तहत किया जाए।

डिजिटल व्यवस्था में कोडिंग सिस्टम लागू करने का सुझाव

कांग्रेस ने जनगणना की प्रक्रिया में आधुनिक डिजिटल व्यवस्था का इस्तेमाल करने की जरूरत पर भी जोर दिया। पार्टी के मुताबिक यदि जातियों के लिए पहले से वैज्ञानिक कोड निर्धारित हों और जनगणना के दौरान नाम दर्ज करने के लिए खोज आधारित व्यवस्था उपलब्ध हो, तो अलग-अलग नामों की वजह से पैदा होने वाली गड़बड़ियों को काफी हद तक रोका जा सकता है।

इस व्यवस्था में किसी व्यक्ति द्वारा दर्ज किए गए जाति नाम को संबंधित मानक जाति या समुदाय के कोड से जोड़ा जा सके। साथ ही व्यक्ति द्वारा बताया गया मूल नाम भी रिकॉर्ड में सुरक्षित रखा जाए, ताकि उसकी स्व-पहचान और आधिकारिक वर्गीकरण दोनों के बीच संतुलन बना रहे।

कांग्रेस ने यह भी सुझाव दिया कि यदि किसी व्यक्ति द्वारा दर्ज किया गया नाम उपलब्ध मानक सूची में नहीं मिलता है तो उसे तुरंत किसी दूसरी जाति में शामिल करने के बजाय अलग से दर्ज किया जाए और बाद में विशेषज्ञों की मदद से उसका सत्यापन किया जाए। इससे गलत तरीके से किसी समुदाय की संख्या बढ़ने या घटने की आशंका कम हो सकती है।

विशेषज्ञों की समिति बनाने की मांग

ज्ञापन में जातियों के वर्गीकरण और कोडिंग के लिए विशेषज्ञ समिति गठित करने का सुझाव भी दिया गया है। कांग्रेस के अनुसार इस समिति में समाजशास्त्रियों, मानवशास्त्रियों, जनसांख्यिकी विशेषज्ञों, सांख्यिकीविदों, जनगणना और आंकड़ा प्रबंधन के विशेषज्ञों तथा सामाजिक न्याय से जुड़े जानकारों को शामिल किया जाना चाहिए।

पार्टी का कहना है कि जातियों की पहचान केवल प्रशासनिक विषय नहीं है। इसका संबंध सामाजिक संरचना, ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, क्षेत्रीय विविधता और सरकारी वर्गीकरण से भी जुड़ा है। इसलिए इसके लिए बहु-विषयक विशेषज्ञता की जरूरत होगी।

इसके साथ ही विभिन्न सामाजिक और जातीय संगठनों से राज्यवार परामर्श लेने का सुझाव भी दिया गया है, ताकि स्थानीय स्तर पर इस्तेमाल होने वाले नामों और पहचान की जानकारी को मानक सूची तैयार करते समय शामिल किया जा सके।

सही आंकड़ों को सामाजिक न्याय से जोड़ा

हरियाणा कांग्रेस ने ज्ञापन में कहा कि सही आंकड़ों के बिना सामाजिक न्याय से संबंधित नीतियों का आधार कमजोर रह सकता है। पार्टी के मुताबिक यदि किसी समुदाय की वास्तविक आबादी का आंकड़ा ही सही नहीं होगा तो उसकी शिक्षा, रोजगार, आर्थिक स्थिति और सरकारी योजनाओं में भागीदारी का आकलन भी प्रभावित होगा।

कांग्रेस नेताओं ने कहा कि जातीय आंकड़ों के आधार पर विभिन्न सामाजिक समूहों की वास्तविक स्थिति को समझने में मदद मिल सकती है। इससे शिक्षा, रोजगार, सरकारी योजनाओं, प्रतिनिधित्व और अन्य क्षेत्रों में मौजूद असमानताओं की पहचान करने में भी सहायता मिल सकती है।

पार्टी ने यह भी कहा कि जातीय आंकड़ों का इस्तेमाल किसी समुदाय को दूसरे के खिलाफ खड़ा करने के लिए नहीं, बल्कि नीतियों को वास्तविक सामाजिक परिस्थितियों के अनुरूप तैयार करने के लिए होना चाहिए। इसके लिए आंकड़ों का संग्रह पारदर्शी, वैज्ञानिक और एक समान पद्धति से होना आवश्यक है।

राज्यपाल के माध्यम से राष्ट्रपति तक पहुंचाई मांग

कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल से आग्रह किया कि ज्ञापन में उठाए गए मुद्दों और सुझावों को केंद्र सरकार तथा राष्ट्रपति तक पहुंचाया जाए। पार्टी ने कहा कि जनगणना का प्रारूप तैयार करते समय जातीय पहचान की प्रक्रिया को स्पष्ट किया जाना चाहिए, ताकि बाद में आंकड़ों को लेकर किसी प्रकार की विसंगति न रहे।

कांग्रेस नेताओं के मुताबिक जातीय जनगणना तभी अपने उद्देश्य को पूरा कर सकती है जब प्रत्येक जाति और समुदाय की पहचान स्पष्ट हो तथा एक ही समुदाय के अलग-अलग नामों के कारण उसकी आबादी अलग-अलग श्रेणियों में विभाजित न हो।

प्रतिनिधिमंडल ने इस बात पर भी जोर दिया कि जातीय गणना की पूरी प्रक्रिया में वैज्ञानिक पद्धति अपनाई जाए। इसके लिए मानक सूची, विशिष्ट कोड, विशेषज्ञ सत्यापन और डिजिटल रिकॉर्डिंग जैसी व्यवस्थाओं को जनगणना प्रक्रिया का हिस्सा बनाने की मांग की गई।

हरियाणा कांग्रेस का कहना है कि यह मुद्दा केवल किसी एक राज्य या किसी एक वर्ग तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे देश में सामाजिक और आर्थिक नीतियों के लिए प्रमाणिक आंकड़े तैयार करने से जुड़ा है। पार्टी ने उम्मीद जताई कि जनगणना की अंतिम व्यवस्था तैयार करते समय इन सुझावों पर गंभीरता से विचार किया जाएगा।