जापान के साथ मिलकर चिप सेक्टर में नई छलांग लगाएगा भारत, पीयूष गोयल की यात्रा में होंगे कई बड़े समझौते

जापान के साथ मिलकर चिप सेक्टर में नई छलांग लगाएगा भारत, पीयूष गोयल की यात्रा में होंगे कई बड़े समझौते

भारत सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स के क्षेत्र में अपनी स्थिति मजबूत करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। इसी कड़ी में केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल की जापान यात्रा को काफी अहम माना जा रहा है। गोयल 24 अगस्त से 27 अगस्त तक जापान के दौरे पर रहेंगे। इस दौरान वह टोक्यो के साथ-साथ नागोया और ओसाका का भी दौरा करेंगे। यात्रा का मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के बीच हाईटेक मैन्युफैक्चरिंग, सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स और दूसरे उभरते क्षेत्रों में कारोबारी साझेदारी को नई ऊंचाई देना है।

इस दौरे की सबसे खास बात यह है कि पीयूष गोयल के साथ भारत का अब तक का सबसे बड़ा कारोबारी प्रतिनिधिमंडल जापान पहुंच रहा है। इसमें 200 से ज्यादा प्रतिनिधि शामिल होंगे। अलग-अलग उद्योगों से जुड़े ये प्रतिनिधि जापानी कंपनियों के साथ संभावित निवेश, तकनीकी सहयोग और कारोबार के नए अवसरों पर बातचीत करेंगे। प्रतिनिधिमंडल में सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स के अलावा क्लीन एनर्जी, मैन्युफैक्चरिंग, स्टील, ऑटोमोबाइल, वित्तीय सेवाओं, हेल्थकेयर और स्टार्टअप क्षेत्र से जुड़े कारोबारी भी शामिल हैं।

क्यों अहम है भारत-जापान की यह साझेदारी?

दुनिया में सेमीकंडक्टर की मांग लगातार बढ़ रही है। मोबाइल फोन, कार, कंप्यूटर, डेटा सेंटर, रक्षा उपकरण से लेकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित सिस्टम तक लगभग हर आधुनिक तकनीक के लिए चिप जरूरी है। यही वजह है कि दुनिया के कई देश सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन में अपनी निर्भरता कम करने और घरेलू उत्पादन बढ़ाने पर जोर दे रहे हैं।

भारत भी इसी रणनीति के तहत अपने यहां चिप निर्माण का मजबूत ढांचा तैयार करने की कोशिश कर रहा है। जापान इस क्षेत्र में भारत के लिए महत्वपूर्ण साझेदार साबित हो सकता है, क्योंकि उसके पास सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स, मशीनरी, मटीरियल और हाई-टेक उत्पादन से जुड़ी लंबी विशेषज्ञता है।

ऐसे में गोयल की यात्रा सिर्फ व्यापार बढ़ाने तक सीमित नहीं मानी जा रही है। इसके जरिए भारत जापान की तकनीकी क्षमता, निवेश और मैन्युफैक्चरिंग अनुभव को अपने सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम के साथ जोड़ने की कोशिश कर सकता है।

200 से ज्यादा कारोबारी प्रतिनिधि होंगे शामिल

इस यात्रा की तैयारियों के बारे में 23 अगस्त को टोक्यो में फेडरेशन ऑफ इंडियन चेंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री यानी FICCI की डायरेक्टर जनरल ज्योति विज ने जानकारी दी। उन्होंने कहा कि भारत और जापान दोनों ही अपने व्यापारिक रिश्तों को और मजबूत करना चाहते हैं। इसी उद्देश्य से इतने बड़े भारतीय कारोबारी प्रतिनिधिमंडल को जापान ले जाया जा रहा है।

प्रतिनिधिमंडल में शामिल कंपनियों के लिए जापानी कारोबारियों और कंपनियों के साथ सीधे संवाद का अवसर भी होगा। इससे निवेश और संयुक्त परियोजनाओं के लिए नए रास्ते खुल सकते हैं। दोनों देशों के कारोबारी ऐसे क्षेत्रों की पहचान कर सकते हैं, जहां मिलकर उत्पादन, तकनीक और निर्यात को बढ़ाया जा सके।

खास बात यह है कि प्रतिनिधिमंडल में केवल पारंपरिक उद्योग ही नहीं, बल्कि नई तकनीक और भविष्य के सेक्टर से जुड़े उद्यम भी शामिल हैं। इससे भारत की बदलती औद्योगिक प्राथमिकताओं की तस्वीर भी सामने आती है।

भारत ने सेमीकंडक्टर के लिए बढ़ाया बजट और दायरा

भारत सरकार पहले ही सेमीकंडक्टर सेक्टर को रणनीतिक महत्व दे चुकी है। हाल में सरकार ने 13 अरब डॉलर से ज्यादा के सेमीकंडक्टर कार्यक्रम को मंजूरी दी है, जिसे Semicon 2.0 के नाम से आगे बढ़ाया जा रहा है। इससे पहले साल 2021 में करीब 9 अरब डॉलर के निवेश के साथ भारत सेमीकंडक्टर मिशन की शुरुआत कर चुका है।

सरकार का लक्ष्य केवल चिप असेंबल करने तक सीमित नहीं है। भारत सेमीकंडक्टर की पूरी वैल्यू चेन विकसित करना चाहता है। इसमें चिप डिजाइन, फैब्रिकेशन, एडवांस पैकेजिंग, विशेष प्रकार के मटीरियल और सेमीकंडक्टर निर्माण में इस्तेमाल होने वाले उपकरणों का उत्पादन शामिल है।

अगर यह पूरा इकोसिस्टम देश में विकसित होता है तो भारत को चिप के लिए दूसरे देशों पर अपनी निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है। साथ ही घरेलू कंपनियों के लिए नए कारोबार और रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे।

चिप डिजाइन में भारत पहले से मजबूत

सेमीकंडक्टर निर्माण की दिशा में भारत अभी भले ही शुरुआती दौर में हो, लेकिन चिप डिजाइन के मामले में देश की स्थिति काफी मजबूत मानी जाती है। भारत में बड़ी संख्या में इंजीनियर दुनिया की प्रमुख टेक्नोलॉजी कंपनियों के लिए चिप डिजाइन और इंजीनियरिंग से जुड़े काम कर रहे हैं।

Nvidia, AMD, Qualcomm और Texas Instruments जैसी वैश्विक कंपनियों के लिए भारत में बड़ी तकनीकी टीमें काम करती हैं। इसका फायदा देश को भविष्य में चिप मैन्युफैक्चरिंग और डिजाइन दोनों क्षेत्रों में मिल सकता है।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के तेजी से विस्तार ने सेमीकंडक्टर की अहमियत और बढ़ा दी है। AI मॉडल और डेटा सेंटर के लिए बेहद शक्तिशाली चिप्स की जरूरत होती है। दुनिया भर में AI के बढ़ते इस्तेमाल के साथ इन चिप्स की मांग भी बढ़ रही है। भारत में भी डेटा सेंटर और AI इंफ्रास्ट्रक्चर में बड़े निवेश की घोषणाएं हुई हैं।

इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग को भी मिल रहा बढ़ावा

भारत की सेमीकंडक्टर रणनीति को इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग के विस्तार से अलग करके नहीं देखा जा सकता। सरकार पिछले कई वर्षों से प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव यानी PLI जैसी योजनाओं के माध्यम से इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन को बढ़ावा दे रही है।

इसका उद्देश्य भारत को सिर्फ एक बड़े बाजार के रूप में नहीं, बल्कि वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में स्थापित करना है। यदि देश में चिप, कंपोनेंट और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का उत्पादन एक साथ बढ़ता है तो पूरी सप्लाई चेन को मजबूती मिल सकती है।

जापान के साथ सहयोग इस प्रक्रिया को और गति दे सकता है। जापानी कंपनियों की तकनीकी विशेषज्ञता और भारत की बड़ी मैन्युफैक्चरिंग क्षमता तथा बाजार एक-दूसरे के लिए उपयोगी साबित हो सकते हैं।

कंपनियों के बीच हो सकते हैं कई MoU

पीयूष गोयल की यात्रा के दौरान भारत और जापान की कंपनियों के बीच कई महत्वपूर्ण समझौते होने की उम्मीद है। FICCI की ओर से भी संकेत दिया गया है कि विभिन्न क्षेत्रों में कंपनियों के बीच मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग यानी MoU की घोषणाएं हो सकती हैं।

इन समझौतों का असर सिर्फ दो कंपनियों के बीच कारोबार तक सीमित नहीं रहेगा। यदि संयुक्त निवेश और तकनीकी सहयोग बढ़ता है तो भारत में बेहतर गुणवत्ता वाले उत्पाद तैयार करने की क्षमता विकसित हो सकती है। इससे घरेलू बाजार के साथ-साथ विदेशी बाजारों में भी भारतीय उत्पादों की पहुंच बढ़ाने में मदद मिलेगी।

विशेष रूप से सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल और क्लीन एनर्जी जैसे क्षेत्रों में सहयोग भारत की निर्यात क्षमता को मजबूत कर सकता है।

जापान से भारत को क्या फायदा हो सकता है?

जापान के साथ बढ़ती साझेदारी भारत के लिए कई स्तरों पर महत्वपूर्ण हो सकती है। सबसे बड़ा लाभ तकनीक और विशेषज्ञता के क्षेत्र में मिल सकता है। जापान के पास अत्याधुनिक मैन्युफैक्चरिंग, सटीक इंजीनियरिंग और हाई-टेक उद्योगों का लंबा अनुभव है।

भारत के लिए जापानी निवेश का एक और फायदा यह होगा कि देश में अत्याधुनिक उत्पादन इकाइयां स्थापित करने में मदद मिल सकती है। इससे रोजगार बढ़ने के साथ स्थानीय कंपनियों को वैश्विक सप्लाई चेन से जुड़ने का मौका मिलेगा।

इसके अलावा सेमीकंडक्टर जैसे रणनीतिक क्षेत्र में भरोसेमंद साझेदारों की मौजूदगी भारत की सप्लाई चेन सुरक्षा के लिए भी अहम है। वैश्विक स्तर पर चिप की कमी और भू-राजनीतिक तनाव ने इस क्षेत्र को आर्थिक के साथ-साथ रणनीतिक मुद्दा भी बना दिया है।

सिर्फ चिप नहीं, कई सेक्टरों पर रहेगा फोकस

गोयल की जापान यात्रा का एजेंडा केवल सेमीकंडक्टर तक सीमित नहीं है। दोनों देशों के बीच स्टील, ऑटोमोबाइल, क्लीन एनर्जी, हेल्थकेयर, वित्तीय सेवाओं और स्टार्टअप जैसे क्षेत्रों में भी सहयोग बढ़ाने की संभावनाएं तलाशी जाएंगी।

इसका मतलब है कि भारत-जापान के कारोबारी रिश्तों को व्यापक आधार देने की कोशिश की जा रही है। एक ओर जहां जापान भारत में निवेश के नए अवसर तलाश सकता है, वहीं भारतीय कंपनियों को जापानी बाजार और तकनीक तक बेहतर पहुंच मिल सकती है।

कुल मिलाकर, पीयूष गोयल का चार दिवसीय जापान दौरा भारत की हाईटेक इंडस्ट्री के लिए काफी महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। सेमीकंडक्टर को लेकर भारत की महत्वाकांक्षी योजनाओं और जापान की तकनीकी विशेषज्ञता के बीच तालमेल बनता है तो देश में चिप डिजाइन से लेकर निर्माण और एडवांस पैकेजिंग तक एक मजबूत इकोसिस्टम तैयार करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया जा सकता है। 200 से अधिक कारोबारी प्रतिनिधियों की मौजूदगी और संभावित MoU इस यात्रा को केवल कूटनीतिक दौरे के बजाय एक बड़े औद्योगिक और कारोबारी अवसर में बदल सकती है।