1984 दंगों पर फिर गरमाई सियासत, चन्नी ने दीपेंद्र हुड्डा के बयान पर जताया कड़ा विरोध

1984 दंगों पर फिर गरमाई सियासत, चन्नी ने दीपेंद्र हुड्डा के बयान पर जताया कड़ा विरोध

1984 के सिख विरोधी दंगों को लेकर कांग्रेस के भीतर एक बार फिर तीखी बयानबाजी सामने आई है। हरियाणा से कांग्रेस सांसद दीपेंद्र सिंह हुड्डा द्वारा पूर्व कांग्रेस नेता सज्जन कुमार को लेकर की गई टिप्पणी पर पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने कड़ी आपत्ति जताई है। चन्नी ने हुड्डा के बयान से असहमति जाहिर करते हुए सज्जन कुमार को सिख समुदाय के खिलाफ हुए अत्याचारों के लिए जिम्मेदार ठहराया और कहा कि ऐसे व्यक्ति को आदर्श के रूप में पेश करना स्वीकार नहीं किया जा सकता।

दरअसल, 1984 के सिख विरोधी दंगों के मामलों में दोषी ठहराए गए पूर्व कांग्रेस नेता सज्जन कुमार को लेकर दीपेंद्र सिंह हुड्डा की कथित ‘रोल मॉडल’ वाली टिप्पणी के बाद पंजाब की राजनीति में विवाद खड़ा हो गया है। सज्जन कुमार को लेकर लंबे समय से सिख समुदाय में आक्रोश रहा है और 1984 के दंगों के पीड़ित परिवारों के लिए यह मुद्दा आज भी बेहद संवेदनशील माना जाता है।

चरणजीत सिंह चन्नी ने इस बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि सज्जन कुमार को किसी भी रूप में आदर्श बताना उचित नहीं है। उन्होंने बेहद तीखे शब्दों में कहा कि जिन लोगों पर सिखों की हत्या और हिंसा से जुड़े गंभीर आरोप और मामले रहे हों, उनके नाम को सम्मान के साथ लेना भी पीड़ित परिवारों के जख्मों को फिर से कुरेदने जैसा है।

चन्नी ने कहा कि 1984 की घटनाएं केवल इतिहास का हिस्सा नहीं हैं, बल्कि हजारों परिवारों के लिए आज भी दर्द और न्याय की लड़ाई से जुड़ा अध्याय हैं। उनके मुताबिक, उस दौर में सिख समुदाय के लोगों के साथ जो हिंसा हुई, उसे भुलाया नहीं जा सकता। उन्होंने सज्जन कुमार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि ऐसे व्यक्ति को सिख समाज कभी स्वीकार नहीं कर सकता।

पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि सज्जन कुमार का नाम सिख समुदाय के लिए बेहद पीड़ादायक घटनाओं की याद दिलाता है। उन्होंने आरोप लगाया कि 1984 के दौरान सिखों के खिलाफ हुई हिंसा में उनकी भूमिका को लेकर अदालतों में मामले चले और उन्हें सजा भी हुई। ऐसे में किसी भी राजनीतिक नेता द्वारा उन्हें ‘रोल मॉडल’ के तौर पर पेश करना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।

चन्नी ने यह भी कहा कि राजनीति में मतभेद अपनी जगह हो सकते हैं, लेकिन कुछ मुद्दे ऐसे होते हैं जिनसे जुड़े लोगों की पीड़ा और भावनाओं को समझना जरूरी होता है। 1984 के दंगा पीड़ितों के परिवारों की भावनाओं का सम्मान किया जाना चाहिए और उनके न्याय के सवाल को राजनीतिक बयानबाजी से ऊपर रखा जाना चाहिए।

वहीं, इस विवाद से पंजाब कांग्रेस को अलग रखने की कोशिश करते हुए प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने दीपेंद्र सिंह हुड्डा की टिप्पणी को उनका व्यक्तिगत विचार बताया है। चंडीगढ़ में पत्रकारों से बातचीत के दौरान वड़िंग ने कहा कि 1984 का दर्द पंजाब और देश के हजारों परिवारों के दिल में आज भी मौजूद है। उन्होंने माना कि दंगों का अध्याय पीड़ित परिवारों के लिए बेहद संवेदनशील और दुखद है।

राजा वड़िंग ने स्पष्ट किया कि हुड्डा द्वारा सज्जन कुमार को लेकर दिया गया बयान पंजाब कांग्रेस या स्वयं उनके विचारों का प्रतिनिधित्व नहीं करता। उन्होंने कहा कि पार्टी की ओर से इस मुद्दे को लेकर पहले भी स्पष्ट रुख रखा गया है और 1984 के पीड़ितों को न्याय मिलना चाहिए।

वड़िंग ने यह भी कहा कि 1984 की घटनाओं से जुड़े मामलों को केवल राजनीतिक नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए। जिन परिवारों ने अपने लोगों को खोया, उनके लिए उस दौर की यादें आज भी तकलीफ का कारण हैं। इसलिए नेताओं को सार्वजनिक बयान देते समय पीड़ितों की भावनाओं और इतिहास की संवेदनशीलता को ध्यान में रखना चाहिए।

कांग्रेस नेता ने राहुल गांधी के पुराने रुख का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी यह स्पष्ट कर चुके हैं कि 1984 के समय वह मुख्यधारा की राजनीति में सक्रिय नहीं थे और दंगा पीड़ितों को न्याय मिलना चाहिए। वड़िंग के अनुसार, कांग्रेस के लिए न्याय और जवाबदेही का सवाल महत्वपूर्ण है और पीड़ित परिवारों की पीड़ा को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

हालांकि, वड़िंग ने यह भी कहा कि जो व्यक्ति अब इस दुनिया में नहीं है, उसके बारे में लगातार टिप्पणी करने से बचना चाहिए। लेकिन उन्होंने साथ ही यह स्पष्ट किया कि यदि किसी व्यक्ति पर अत्याचार या अपराध से जुड़े गंभीर आरोप और न्यायिक कार्रवाई हुई है, तो उन घटनाओं को इतिहास से मिटाया नहीं जा सकता।

दीपेंद्र हुड्डा के बयान को लेकर पंजाब कांग्रेस में जिस तरह प्रतिक्रिया सामने आई है, उससे यह भी साफ है कि 1984 का मुद्दा पंजाब की राजनीति में आज भी बेहद संवेदनशील है। इस मामले में नेताओं की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आने के बाद कांग्रेस के भीतर भी बयान को लेकर दूरी दिखाई दे रही है।

पंजाब के राजनीतिक माहौल में सिख विरोधी दंगों का मुद्दा लंबे समय से भावनात्मक और राजनीतिक दोनों स्तरों पर महत्वपूर्ण रहा है। पीड़ित परिवारों के लिए न्याय, दोषियों की जवाबदेही और राजनीतिक दलों के रुख को लेकर समय-समय पर बहस होती रही है। ऐसे में सज्जन कुमार को लेकर दिया गया कोई भी बयान पंजाब में राजनीतिक प्रतिक्रिया पैदा करना स्वाभाविक माना जा रहा है।

चन्नी के बयान ने इस विवाद को और तीखा कर दिया है। उन्होंने साफ संकेत दिया कि 1984 के दंगों से जुड़े व्यक्तियों को लेकर किसी तरह का महिमामंडन या सकारात्मक राजनीतिक उदाहरण पेश करना पंजाब कांग्रेस के एक बड़े वर्ग को स्वीकार नहीं होगा। वहीं, राजा वड़िंग की टिप्पणी से पार्टी ने हुड्डा के बयान से खुद को अलग करने का प्रयास किया है।

इस पूरे विवाद के बीच सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि 1984 के दंगों की पीड़ा आज भी राजनीतिक दलों और नेताओं के लिए संवेदनशील विषय बनी हुई है। एक ओर चन्नी ने हुड्डा की टिप्पणी पर बेहद कड़ा विरोध जताया, वहीं राजा वड़िंग ने इसे व्यक्तिगत बयान बताते हुए पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना और न्याय की आवश्यकता को दोहराया। इससे स्पष्ट है कि सज्जन कुमार को लेकर शुरू हुआ विवाद केवल एक बयान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह 1984 की हिंसा, पीड़ितों के न्याय और राजनीतिक दलों की ऐतिहासिक जिम्मेदारी से भी जुड़ गया है।

फिलहाल, दीपेंद्र हुड्डा की टिप्पणी पर पंजाब कांग्रेस के भीतर सामने आई प्रतिक्रियाओं ने इस पुराने और संवेदनशील मुद्दे को एक बार फिर राजनीतिक चर्चा के केंद्र में ला दिया है। आने वाले दिनों में इस बयान को लेकर कांग्रेस के भीतर और बाहर किस तरह की प्रतिक्रिया सामने आती है, इस पर भी राजनीतिक नजरें टिकी रहेंगी।