जिम में ये गलतियां पड़ सकती हैं भारी: अचानक तेज वर्कआउट से बढ़ सकता है दिल पर दबाव, जानें किन बातों का रखें ध्यान

जिम में ये गलतियां पड़ सकती हैं भारी: अचानक तेज वर्कआउट से बढ़ सकता है दिल पर दबाव, जानें किन बातों का रखें ध्यान

आज के समय में फिट रहने के लिए बड़ी संख्या में लोग जिम, रनिंग, साइकिलिंग और अलग-अलग तरह की एक्सरसाइज का सहारा लेते हैं। नियमित शारीरिक गतिविधि को सामान्य तौर पर सेहत के लिए फायदेमंद माना जाता है, लेकिन एक्सरसाइज करने का तरीका भी उतना ही महत्वपूर्ण है। खासकर ऐसे लोगों के लिए सावधानी जरूरी है जो लंबे समय से शारीरिक गतिविधि से दूर रहे हैं और अचानक कठिन या हाई इंटेंसिटी वर्कआउट शुरू कर देते हैं।

कई बार लोग जल्दी वजन घटाने, मसल्स बनाने या फिटनेस हासिल करने के चक्कर में अपनी मौजूदा क्षमता से कहीं अधिक मेहनत करने लगते हैं। अचानक तेज दौड़ना, बहुत भारी वजन उठाना या बिना तैयारी के हाई इंटेंसिटी ट्रेनिंग करना शरीर पर अतिरिक्त दबाव डाल सकता है। कुछ परिस्थितियों में दिल पर भी अचानक ज्यादा भार पड़ सकता है। हालांकि, यह समझना जरूरी है कि हार्ट अटैक किसी एक एक्सरसाइज से सीधे तय नहीं होता। व्यक्ति की उम्र, हृदय की स्थिति, ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, फिटनेस लेवल और अन्य जोखिम कारक भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

वर्कआउट के दौरान शरीर के संकेतों को समझना जरूरी

एक्सरसाइज करते समय दिल की धड़कन बढ़ना, सांस कुछ तेज चलना और पसीना आना सामान्य शारीरिक प्रतिक्रिया हो सकती है। समस्या तब हो सकती है जब व्यक्ति अपने शरीर की सीमाओं को नजरअंदाज करके लगातार क्षमता से ज्यादा मेहनत करता रहे।

अगर वर्कआउट के दौरान सीने में दर्द, भारीपन या दबाव महसूस हो, सांस लेने में असामान्य परेशानी हो, चक्कर आएं, अचानक कमजोरी महसूस हो या दिल की धड़कन असामान्य लगे, तो इसे सामान्य थकान मानकर एक्सरसाइज जारी नहीं रखनी चाहिए। ऐसी स्थिति में तुरंत व्यायाम रोकना और जरूरत पड़ने पर चिकित्सकीय सहायता लेना जरूरी है।

विशेष रूप से सीने में दबाव या दर्द के साथ सांस फूलना, ठंडा पसीना, बेहोशी जैसा महसूस होना या अचानक अत्यधिक कमजोरी जैसे लक्षण गंभीर हो सकते हैं। ऐसी स्थिति में खुद से दोबारा एक्सरसाइज शुरू करने के बजाय डॉक्टर की सलाह लेना बेहतर है।

लंबे ब्रेक के बाद सीधे कठिन एक्सरसाइज न करें

मान लीजिए कोई व्यक्ति कई महीनों या वर्षों से नियमित रूप से एक्सरसाइज नहीं कर रहा है और अचानक जिम जाकर भारी वजन उठाना या तेज दौड़ लगाना शुरू कर देता है। ऐसी स्थिति में शरीर उस स्तर की मेहनत के लिए तैयार नहीं हो सकता।

इसलिए लंबे अंतराल के बाद दोबारा फिटनेस रूटीन शुरू करते समय पहला लक्ष्य ज्यादा मेहनत करना नहीं, बल्कि शरीर को गतिविधि की आदत डालना होना चाहिए। शुरुआत में हल्की वॉक, सामान्य गति से साइकिलिंग, हल्की मोबिलिटी एक्सरसाइज या अपनी क्षमता के अनुसार आसान एरोबिक गतिविधियों से शुरुआत की जा सकती है।

कुछ समय बाद जब शरीर उस गतिविधि का अभ्यस्त हो जाए, तब धीरे-धीरे समय और तीव्रता बढ़ाई जा सकती है। एकदम से कठिन स्तर पर पहुंचने की बजाय चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ना ज्यादा व्यावहारिक तरीका है।

भारी वजन उठाते समय खास सावधानी

वेट ट्रेनिंग अपने आप में खराब एक्सरसाइज नहीं है। सही तकनीक, उचित वजन और प्रशिक्षित व्यक्ति की निगरानी में की गई स्ट्रेंथ ट्रेनिंग फिटनेस रूटीन का हिस्सा हो सकती है। परेशानी तब बढ़ सकती है जब कोई व्यक्ति अपनी क्षमता से कहीं ज्यादा वजन उठाने की कोशिश करता है।

भारी वजन उठाते समय कई लोग अनजाने में सांस रोक लेते हैं। इससे शरीर के भीतर दबाव और ब्लड प्रेशर में अचानक बदलाव हो सकता है। इसलिए वेट ट्रेनिंग करते समय सही ब्रीदिंग तकनीक पर ध्यान देना चाहिए।

शुरुआत में ऐसा वजन चुनना बेहतर है जिसे सही पोस्चर और तकनीक के साथ नियंत्रित तरीके से उठाया जा सके। सिर्फ ज्यादा वजन उठाने को अपनी फिटनेस का पैमाना मानना सही नहीं है। गलत तकनीक के साथ किया गया भारी वर्कआउट मांसपेशियों और जोड़ों पर भी अतिरिक्त दबाव डाल सकता है।

हाई इंटेंसिटी वर्कआउट हर किसी के लिए नहीं

आजकल हाई इंटेंसिटी इंटरवल ट्रेनिंग और दूसरे कठिन वर्कआउट काफी लोकप्रिय हैं। इनमें कम समय में शरीर से अधिक मेहनत कराई जाती है। लेकिन हर व्यक्ति का फिटनेस लेवल एक जैसा नहीं होता।

जो व्यक्ति पहले से नियमित रूप से ट्रेनिंग करता है, उसकी क्षमता किसी ऐसे व्यक्ति से अलग होगी जिसने लंबे समय से एक्सरसाइज नहीं की है। इसलिए किसी दूसरे व्यक्ति का वर्कआउट देखकर उसी स्तर की मेहनत करना उचित नहीं है।

अगर शरीर कठिन गतिविधि के लिए तैयार नहीं है तो शुरुआत हल्के स्तर से की जानी चाहिए। समय के साथ फिटनेस और सहनशक्ति बढ़ने पर वर्कआउट को अधिक चुनौतीपूर्ण बनाया जा सकता है।

किन लोगों को एक्सरसाइज शुरू करने से पहले डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए?

हर व्यक्ति के लिए एक्सरसाइज की जरूरत और क्षमता अलग हो सकती है। जिन लोगों को पहले से हृदय संबंधी बीमारी है, उन्हें खासतौर पर वर्कआउट की तीव्रता तय करने से पहले चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए।

इसी तरह हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज या अन्य स्वास्थ्य समस्याओं वाले लोगों को भी अपनी स्थिति के अनुसार एक्सरसाइज का चुनाव करना चाहिए। अधिक उम्र के लोग और लंबे समय से निष्क्रिय रहने वाले व्यक्ति भी अचानक कठिन वर्कआउट शुरू करने से बचें।

इसका मतलब यह नहीं है कि इन लोगों को एक्सरसाइज नहीं करनी चाहिए। बल्कि उन्हें अपनी स्वास्थ्य स्थिति और फिटनेस के अनुसार सुरक्षित तरीके से शारीरिक गतिविधि शुरू करनी चाहिए।

वार्म-अप को बनाएं वर्कआउट का हिस्सा

कई लोग जिम पहुंचते ही सीधे ट्रेडमिल पर तेज दौड़ना या भारी वजन उठाना शुरू कर देते हैं। यह आदत बदलने की जरूरत है। वर्कआउट से पहले कुछ समय शरीर को धीरे-धीरे सक्रिय करने में लगाया जा सकता है।

वार्म-अप का उद्देश्य शरीर को आने वाली गतिविधि के लिए तैयार करना होता है। हल्की चाल से चलना, शरीर की मोबिलिटी बढ़ाने वाली आसान गतिविधियां और कम तीव्रता वाले मूवमेंट शुरुआत में किए जा सकते हैं।

वार्म-अप के बाद मुख्य वर्कआउट शुरू करने से व्यक्ति धीरे-धीरे अपनी गतिविधि के स्तर तक पहुंच सकता है। हालांकि, वार्म-अप को किसी भी गंभीर स्वास्थ्य जोखिम से बचने की गारंटी नहीं माना जाना चाहिए।

एक्सरसाइज खत्म करते समय भी जल्दबाजी न करें

जिस तरह वर्कआउट शुरू करने से पहले शरीर को धीरे-धीरे एक्टिव करना उपयोगी हो सकता है, उसी तरह एक्सरसाइज खत्म करने के बाद भी अचानक पूरी तरह रुकने की बजाय कुछ समय हल्की गतिविधि करना बेहतर हो सकता है।

उदाहरण के तौर पर अगर कोई व्यक्ति तेज गति से चल रहा है या दौड़ रहा है, तो अंत में गति को धीरे-धीरे कम किया जा सकता है। इसके बाद हल्की स्ट्रेचिंग या सामान्य गतिविधि की जा सकती है।

कूल-डाउन को नजरअंदाज करने की बजाय इसे अपनी पूरी फिटनेस रूटीन का हिस्सा बनाना बेहतर है। इससे शरीर को धीरे-धीरे सामान्य गतिविधि की स्थिति में लौटने का समय मिलता है।

फिटनेस बढ़ाने के लिए धीरे-धीरे बढ़ाएं लक्ष्य

कई लोग कुछ ही दिनों में तेजी से परिणाम पाने की कोशिश करते हैं। कोई वजन कम करना चाहता है तो कोई मसल्स बनाना चाहता है। इसी वजह से कुछ लोग जरूरत से ज्यादा देर तक एक्सरसाइज करते हैं या बहुत कठिन ट्रेनिंग करने लगते हैं।

फिटनेस एक प्रक्रिया है और इसमें लगातार मेहनत के साथ समय भी लगता है। इसलिए लक्ष्य को छोटे चरणों में बांटना बेहतर तरीका हो सकता है। शुरुआत में नियमितता पर ध्यान दें, फिर धीरे-धीरे वर्कआउट की अवधि और कठिनाई बढ़ाएं।

अगर किसी दिन शरीर अत्यधिक थका हुआ महसूस कर रहा है, तो आराम और रिकवरी को भी महत्व देना चाहिए। हर दिन अधिक मेहनत करना ही बेहतर फिटनेस की निशानी नहीं है।

दिल की सेहत के लिए नियमित गतिविधि जरूरी

यह भी समझना जरूरी है कि एक्सरसाइज से डरने की जरूरत नहीं है। नियमित और अपनी क्षमता के अनुरूप की गई शारीरिक गतिविधि स्वस्थ जीवनशैली का महत्वपूर्ण हिस्सा हो सकती है। समस्या मुख्य रूप से तब पैदा हो सकती है जब कोई व्यक्ति बिना तैयारी के अचानक बहुत ज्यादा मेहनत करने लगे या एक्सरसाइज के दौरान दिखाई देने वाले गंभीर संकेतों को नजरअंदाज करे।

तेज चलना, हल्की साइकिलिंग, सामान्य एरोबिक गतिविधियां और उचित स्तर की स्ट्रेंथ ट्रेनिंग जैसी गतिविधियों को व्यक्ति अपनी क्षमता और स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार अपनी दिनचर्या में शामिल कर सकता है।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि वर्कआउट की तीव्रता व्यक्ति की वर्तमान फिटनेस के अनुरूप होनी चाहिए। समय के साथ शरीर मजबूत और अधिक सक्रिय होता है तो व्यायाम का स्तर भी धीरे-धीरे बढ़ाया जा सकता है।

इन लक्षणों को बिल्कुल नजरअंदाज न करें

वर्कआउट के दौरान निम्न में से कोई गंभीर लक्षण दिखाई दे तो एक्सरसाइज जारी रखने के बजाय तुरंत रुकना चाहिए:

  • सीने में दर्द, दबाव या भारीपन
  • सामान्य से ज्यादा सांस फूलना
  • अचानक चक्कर आना या बेहोशी जैसा महसूस होना
  • असामान्य या बहुत तेज धड़कन महसूस होना
  • अचानक अत्यधिक कमजोरी
  • असामान्य थकान या शरीर का साथ न देना

इनमें से किसी लक्षण की स्थिति में व्यक्ति को अपनी स्थिति के अनुसार तत्काल चिकित्सकीय सहायता लेनी चाहिए। खासकर सीने से जुड़े लक्षणों को नजरअंदाज करना उचित नहीं है।

एक्सरसाइज का सही तरीका ही है सबसे अहम

कुल मिलाकर एक्सरसाइज से बचना समाधान नहीं है। जरूरत इस बात की है कि वर्कआउट सही तरीके और अपनी क्षमता के अनुसार किया जाए। लंबे समय से एक्सरसाइज नहीं करने वाले व्यक्ति को सीधे कठिन ट्रेनिंग शुरू करने की बजाय आसान गतिविधियों से शुरुआत करनी चाहिए।

वार्म-अप, सही तकनीक, उचित वजन, पर्याप्त आराम और शरीर के संकेतों पर ध्यान देना जरूरी है। वहीं, हृदय रोग, हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज या अन्य स्वास्थ्य समस्या वाले लोगों को अपनी एक्सरसाइज रूटीन तय करने से पहले डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए।

हार्ट अटैक का जोखिम केवल इस बात से तय नहीं होता कि कोई व्यक्ति कौन-सी एक्सरसाइज कर रहा है। उम्र, पहले से मौजूद स्वास्थ्य समस्याएं, फिटनेस लेवल और अन्य जोखिम कारक भी महत्वपूर्ण हैं। इसलिए लक्ष्य सिर्फ कठिन वर्कआउट करना नहीं, बल्कि नियमित, संतुलित और सुरक्षित तरीके से सक्रिय रहना होना चाहिए।