डड्डूमाजरा डंपिंग ग्राउंड पर खर्च का पूरा हिसाब आज सदन में, बायोरेमेडिएशन पर 101 करोड़ रुपये से अधिक व्यय का ब्योरा होगा पेश

डड्डूमाजरा डंपिंग ग्राउंड पर खर्च का पूरा हिसाब आज सदन में, बायोरेमेडिएशन पर 101 करोड़ रुपये से अधिक व्यय का ब्योरा होगा पेश

चंडीगढ़ के डड्डूमाजरा डंपिंग ग्राउंड पर वर्षों से जमा पुराने कचरे के निस्तारण को लेकर एक बार फिर नगर निगम की जनरल हाउस बैठक में व्यापक चर्चा होने की संभावना है। शहर की सबसे बड़ी पर्यावरणीय चुनौतियों में शामिल इस डंपिंग ग्राउंड पर बायोरेमेडिएशन परियोजना के तहत किए गए खर्च और कार्य की प्रगति को लेकर लंबे समय से सवाल उठते रहे हैं। इन्हीं सवालों के बीच नगर निगम प्रशासन सोमवार को होने वाली जनरल हाउस बैठक में पिछले पांच वर्षों के दौरान परियोजना पर हुए खर्च का विस्तृत विवरण सदन के समक्ष प्रस्तुत करेगा।

नगर निगम का कहना है कि इस प्रस्तुति का उद्देश्य पार्षदों द्वारा पहले उठाए गए प्रश्नों का तथ्यात्मक उत्तर देना और परियोजना से संबंधित वित्तीय जानकारी को स्पष्ट करना है। बैठक में विभिन्न एजेंसियों को किए गए भुगतान, कुल व्यय, परियोजना की प्रगति और बायोरेमेडिएशन प्रक्रिया से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं की जानकारी साझा किए जाने की संभावना है।

डड्डूमाजरा डंपिंग ग्राउंड क्यों बना बड़ा मुद्दा

डड्डूमाजरा डंपिंग ग्राउंड पिछले कई वर्षों से चंडीगढ़ की सबसे गंभीर पर्यावरणीय समस्याओं में गिना जाता है। शहर से प्रतिदिन निकलने वाला ठोस कचरा लंबे समय तक इसी स्थान पर जमा होता रहा, जिसके कारण यहां लाखों टन पुराना कचरा एकत्र हो गया।

समय के साथ कचरे का विशाल पहाड़ तैयार हो गया, जिससे आसपास रहने वाले लोगों को दुर्गंध, वायु प्रदूषण, भूजल प्रदूषण, मच्छरों की समस्या और स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों का सामना करना पड़ा। स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों द्वारा भी समय-समय पर इस समस्या के समाधान की मांग उठाई जाती रही है।

इसी चुनौती से निपटने के लिए नगर निगम ने पुराने कचरे के वैज्ञानिक निस्तारण हेतु बायोरेमेडिएशन तकनीक को अपनाया।

बायोरेमेडिएशन परियोजना पर 101 करोड़ रुपये से अधिक खर्च

नगर निगम द्वारा तैयार किए गए रिकॉर्ड के अनुसार डड्डूमाजरा डंपिंग ग्राउंड पर पुराने कचरे के वैज्ञानिक निस्तारण और बायोरेमेडिएशन कार्य के लिए अब तक 101 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए जा चुके हैं।

यह आंकड़ा पिछले पांच वर्षों के दौरान परियोजना के लिए विभिन्न एजेंसियों को किए गए भुगतानों के आधार पर तैयार किया गया है। नगर निगम का कहना है कि यही आधिकारिक वित्तीय विवरण अब जनरल हाउस बैठक में प्रस्तुत किया जाएगा।

नगर निगम के अनुसार विभिन्न एजेंसियों को निम्नलिखित भुगतान किए गए हैं—

  • एम/एस एसएमबी लिमिटेड – 33.98 करोड़ रुपये
  • एम/एस आकांक्षा एंटरप्राइजेज – 64 करोड़ रुपये
  • एम/एस ब्रेथवेट बर्न एंड जेसप कंस्ट्रक्शन लिमिटेड – 2.11 करोड़ रुपये
  • एम/एस हिंदुस्तान स्टील वर्क्स कंस्ट्रक्शन लिमिटेड – 1.44 करोड़ रुपये

इन सभी भुगतानों को मिलाकर परियोजना पर कुल व्यय 101 करोड़ रुपये से अधिक बताया गया है।

अप्रैल की बैठक में उठा था खर्च का मुद्दा

डंपिंग ग्राउंड पर हुए खर्च को लेकर सबसे पहले विस्तृत चर्चा 30 अप्रैल को आयोजित नगर निगम की जनरल हाउस बैठक में हुई थी।

उस बैठक के दौरान कई पार्षदों ने परियोजना की प्रगति और खर्च दोनों पर सवाल उठाए थे। विशेष रूप से आम आदमी पार्टी के पार्षदों ने यह जानना चाहा था कि पुराने कचरे के निस्तारण पर अब तक कुल कितना पैसा खर्च किया गया है और उसके बदले कितनी वास्तविक प्रगति हुई है।

पार्षदों की मांग पर निगम प्रशासन को विस्तृत वित्तीय रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिए गए थे। अब वही रिपोर्ट सोमवार की बैठक में सदन के समक्ष प्रस्तुत की जाएगी।

विपक्ष ने उठाए थे कई सवाल

अप्रैल की बैठक में विपक्षी पार्षदों ने दावा किया था कि डंपिंग ग्राउंड पर कचरा हटाने की प्रक्रिया में बड़ी राशि खर्च होने के बावजूद जमीनी स्तर पर अपेक्षित परिणाम दिखाई नहीं दे रहे हैं।

उनका कहना था कि यदि परियोजना पर इतना बड़ा खर्च किया जा चुका है तो डंपिंग ग्राउंड में पुराने कचरे की मात्रा में स्पष्ट कमी दिखाई देनी चाहिए।

कुछ पार्षदों ने परियोजना की कार्यप्रणाली, कार्य की गुणवत्ता और खर्च की पारदर्शिता को लेकर भी सवाल उठाए थे। उनका कहना था कि सार्वजनिक धन का उपयोग पूरी जवाबदेही और पारदर्शिता के साथ होना चाहिए।

स्वतंत्र जांच और ऑडिट की भी उठी थी मांग

बैठक के दौरान पूर्व मेयर कुलदीप कुमार सहित कई पार्षदों ने पूरे प्रोजेक्ट का स्वतंत्र ऑडिट कराने की मांग भी रखी थी।

उनका कहना था कि परियोजना से जुड़े वित्तीय और तकनीकी पहलुओं का निष्पक्ष मूल्यांकन होना चाहिए ताकि यह स्पष्ट हो सके कि खर्च की गई राशि के अनुरूप कार्य हुआ है या नहीं।

साथ ही यह भी मांग की गई थी कि परियोजना की वर्तमान स्थिति, हटाए गए कचरे की मात्रा और भविष्य की कार्ययोजना को सार्वजनिक किया जाए।

क्या है बायोरेमेडिएशन तकनीक

बायोरेमेडिएशन एक वैज्ञानिक प्रक्रिया है जिसके माध्यम से वर्षों पुराने मिश्रित कचरे को अलग-अलग श्रेणियों में विभाजित किया जाता है।

इस प्रक्रिया के दौरान कचरे की छंटाई की जाती है, पुनर्चक्रण योग्य सामग्री को अलग किया जाता है और जैविक तथा अन्य अवशेषों का वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण किया जाता है।

इस तकनीक का उद्देश्य केवल कचरे को हटाना नहीं, बल्कि पर्यावरणीय प्रभाव को कम करना भी होता है। कई शहरों में पुराने डंपिंग स्थलों को समाप्त करने के लिए इसी प्रकार की तकनीकों का उपयोग किया गया है।

नगर निगम का कहना है कि डड्डूमाजरा परियोजना भी इसी वैज्ञानिक प्रक्रिया के तहत संचालित की जा रही है।

निगम प्रशासन क्या रखेगा अपना पक्ष

नगर निगम अधिकारियों के अनुसार सोमवार को प्रस्तुत की जाने वाली रिपोर्ट में परियोजना से संबंधित सभी प्रमुख वित्तीय विवरण शामिल होंगे।

रिपोर्ट में यह जानकारी दी जाएगी कि किन एजेंसियों को कितना भुगतान किया गया, भुगतान किस कार्य के लिए किया गया तथा परियोजना के विभिन्न चरणों में कितनी राशि खर्च हुई।

इसके अलावा यदि पार्षद परियोजना की प्रगति, कार्य की स्थिति या अन्य तकनीकी पहलुओं से जुड़े प्रश्न पूछते हैं तो संबंधित अधिकारी उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर उत्तर देंगे।

बैठक में फिर गरमा सकता है मुद्दा

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि सोमवार की जनरल हाउस बैठक में यह विषय एक बार फिर प्रमुख मुद्दा बन सकता है।

विपक्षी पार्षद केवल खर्च का विवरण ही नहीं बल्कि निम्नलिखित प्रश्न भी उठा सकते हैं—

  • अब तक वास्तव में कितना कचरा हटाया गया?
  • परियोजना की वर्तमान प्रगति क्या है?
  • कार्य निर्धारित समयसीमा के अनुसार चल रहा है या नहीं?
  • डंपिंग ग्राउंड पूरी तरह साफ होने में अभी कितना समय लगेगा?
  • भविष्य की कार्ययोजना क्या है?

दूसरी ओर नगर निगम प्रशासन परियोजना की उपलब्धियों और अब तक किए गए कार्यों का पक्ष रखने की तैयारी कर चुका है।

पर्यावरण और सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय

डड्डूमाजरा डंपिंग ग्राउंड केवल वित्तीय विषय नहीं बल्कि पर्यावरण, सार्वजनिक स्वास्थ्य और शहरी विकास से जुड़ा अत्यंत महत्वपूर्ण मुद्दा भी है।

विशेषज्ञों का मानना है कि पुराने कचरे के पहाड़ से निकलने वाली गैसें, दुर्गंध और लीचेट आसपास के पर्यावरण पर दीर्घकालिक प्रभाव डाल सकते हैं। इसलिए ऐसे डंपिंग स्थलों का वैज्ञानिक निस्तारण किसी भी आधुनिक शहर के लिए आवश्यक माना जाता है।

इसी कारण परियोजना की गुणवत्ता, समयबद्ध क्रियान्वयन और वित्तीय पारदर्शिता तीनों समान रूप से महत्वपूर्ण माने जाते हैं।

पारदर्शिता पर रहेगा विशेष ध्यान

नगर निगम का कहना है कि परियोजना से जुड़े सभी वित्तीय रिकॉर्ड उपलब्ध हैं और आवश्यकतानुसार सदन के समक्ष प्रस्तुत किए जाएंगे।

नगर प्रशासन का उद्देश्य यह स्पष्ट करना है कि परियोजना के लिए स्वीकृत धनराशि का उपयोग निर्धारित कार्यों के लिए किया गया है और प्रत्येक भुगतान संबंधित एजेंसियों को अनुबंध की शर्तों के अनुसार किया गया।

सदन में होने वाली चर्चा के दौरान यदि अतिरिक्त जानकारी मांगी जाती है तो संबंधित विभागों द्वारा वह भी उपलब्ध कराई जा सकती है।

शहर के भविष्य से जुड़ी परियोजना

डड्डूमाजरा डंपिंग ग्राउंड का वैज्ञानिक निस्तारण चंडीगढ़ की स्वच्छता व्यवस्था, पर्यावरण संरक्षण और शहरी विकास की दृष्टि से महत्वपूर्ण परियोजनाओं में शामिल है।

यदि परियोजना निर्धारित लक्ष्यों के अनुसार आगे बढ़ती है तो भविष्य में पुराने कचरे के पहाड़ को समाप्त करने, भूमि के बेहतर उपयोग तथा आसपास के क्षेत्रों में पर्यावरणीय स्थिति सुधारने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति हो सकती है।

अब सभी की निगाहें नगर निगम की सोमवार को होने वाली जनरल हाउस बैठक पर टिकी हैं। इस बैठक में बायोरेमेडिएशन परियोजना पर हुए 101 करोड़ रुपये से अधिक के व्यय का आधिकारिक विवरण सदन के समक्ष रखा जाएगा। साथ ही पार्षदों द्वारा उठाए जाने वाले प्रश्नों के माध्यम से परियोजना की प्रगति, कार्य की गुणवत्ता, वित्तीय पारदर्शिता और भविष्य की कार्ययोजना पर भी विस्तृत चर्चा होने की संभावना है।