हरियाणा में वाहन रजिस्ट्रेशन के फर्जी पतों की होगी व्यापक जांच, अंबाला के बाद सभी एसडीएम कार्यालय एसीबी के रडार पर

हरियाणा में वाहन रजिस्ट्रेशन के फर्जी पतों की होगी व्यापक जांच, अंबाला के बाद सभी एसडीएम कार्यालय एसीबी के रडार पर

हरियाणा में दूसरे राज्यों से लाई गई क्रेन, जेसीबी, ट्रैक्टर और अन्य भारी व्यावसायिक वाहनों के स्थानीय पते पर किए गए संदिग्ध रजिस्ट्रेशन का मामला अब अंबाला से निकलकर पूरे प्रदेश तक पहुंच गया है। अंबाला कैंट के एसडीएम कार्यालय में फर्जी, अधूरे और सत्यापन में गलत पाए गए पतों पर वाहनों के पंजीकरण का मामला सामने आने के बाद एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) ने अब प्रदेश के सभी एसडीएम कार्यालयों में वाहन रजिस्ट्रेशन की पड़ताल शुरू कर दी है।

इस जांच के दायरे में खास तौर पर उन भारी और व्यावसायिक वाहनों को शामिल किया गया है, जो दूसरे राज्यों से हरियाणा में लाए गए, लेकिन उनका पंजीकरण स्थानीय पते पर कराया गया। अधिकारियों की ओर से यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि इन वाहनों के रजिस्ट्रेशन के समय दिए गए पते वास्तविक थे या केवल दस्तावेजों में दिखाए गए थे।

मामले की शुरुआत अंबाला कैंट एसडीएम कार्यालय से हुई थी। यहां रिकॉर्ड की जांच के दौरान बड़ी संख्या में ऐसे वाहन सामने आए, जिनके रजिस्ट्रेशन में दर्ज पते संदिग्ध पाए गए। इन मामलों में कई पते अधूरे थे, जबकि कुछ का मौके पर सत्यापन नहीं हो पाया। रिकॉर्ड की गहन जांच के बाद ऐसे 231 वाहनों की पहचान की गई, जिनके पंजीकरण में दिए गए पते जांच की कसौटी पर सही नहीं पाए गए।

इन वाहनों में दूसरे राज्यों से हरियाणा में परियोजनाओं या निर्माण कार्यों के लिए लाई गई भारी मशीनरी भी शामिल बताई जा रही है। इनमें क्रेन, जेसीबी, ट्रैक्टर और अन्य व्यावसायिक वाहन शामिल हैं। संबंधित पतों की वास्तविक स्थिति जानने के लिए राजस्व विभाग के कर्मचारियों से मौके पर सत्यापन करवाया गया। सत्यापन रिपोर्ट में खामियां सामने आने के बाद इन वाहनों के रजिस्ट्रेशन को रद्द करने की प्रक्रिया शुरू की गई।

जिन वाहन मालिकों के दस्तावेजों में अनियमितता पाई गई, उन्हें मोटर व्हीकल एक्ट के तहत नोटिस जारी किए गए। संबंधित वाहन मालिकों से रजिस्ट्रेशन के दौरान दिए गए पते और दस्तावेजों के संबंध में जवाब मांगा गया। अधिकारियों की ओर से यह भी जांच की जा रही है कि पंजीकरण की प्रक्रिया में नियमों का पालन किस स्तर तक किया गया और यदि किसी स्तर पर लापरवाही या मिलीभगत हुई तो उसके लिए जिम्मेदार कौन है।

अंबाला कैंट में मामला सामने आने के बाद जिला स्तर पर इसकी जांच करवाई गई। उपायुक्त के निरीक्षण के बाद संबंधित रिकॉर्ड खंगाले गए और जांच कमेटी का गठन किया गया। कमेटी ने अपनी पड़ताल के बाद रिपोर्ट उपायुक्त को सौंपी। रिपोर्ट के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की गई और मामले में एफआईआर दर्ज करवाई गई।

हालांकि, इस कार्रवाई के बाद यह सवाल भी उठने लगा कि यदि अंबाला कैंट एसडीएम कार्यालय में दूसरे राज्यों के वाहनों के स्थानीय पते पर पंजीकरण की जांच जरूरी थी, तो जिले के अन्य एसडीएम कार्यालयों में इसी तरह के रजिस्ट्रेशन की पड़ताल क्यों नहीं की गई। इसी सवाल ने अब जांच का दायरा बढ़ाने का रास्ता तैयार किया है।

एंटी करप्शन ब्यूरो को जांच की जिम्मेदारी मिलने के बाद अब मामला केवल अंबाला कैंट तक सीमित नहीं रहेगा। एसीबी प्रदेशभर के एसडीएम कार्यालयों में वाहन पंजीकरण के रिकॉर्ड की जांच करेगी। विशेष रूप से भारी व्यावसायिक वाहनों के रजिस्ट्रेशन पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि कहीं दूसरे राज्यों से आने वाली मशीनरी को गलत स्थानीय पते के आधार पर हरियाणा में पंजीकृत तो नहीं किया गया।

जांच में अंबाला जिले के बराड़ा और नारायणगढ़ एसडीएम कार्यालयों के रिकॉर्ड भी महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। उपलब्ध रिकॉर्ड की पड़ताल में बराड़ा क्षेत्र में गुजरात, राजस्थान, महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश से जुड़े वाहनों के लिए स्थानीय पते इस्तेमाल किए जाने के मामले सामने आए हैं। इससे यह सवाल खड़ा हुआ कि दूसरे राज्यों से आने वाले इन वाहनों को हरियाणा के पते पर पंजीकृत कराने के पीछे क्या प्रक्रिया अपनाई गई थी।

इसी तरह नारायणगढ़ एसडीएम कार्यालय से जुड़े कुछ मामलों में स्थायी और अस्थायी पते एक जैसे अथवा अधूरे पाए जाने की बात सामने आई है। अब इन मामलों की भी जांच की जा रही है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि पंजीकरण के समय दिए गए पते वास्तविक थे या नहीं और संबंधित दस्तावेजों का विधिवत सत्यापन किया गया था या नहीं।

इस पूरे प्रकरण में मीडिया रिपोर्टों की भूमिका भी महत्वपूर्ण रही। मामले को प्रमुखता से उठाए जाने के बाद परिवहन मंत्री अनिल विज ने संज्ञान लेते हुए अतिरिक्त मुख्य सचिव को पत्र लिखकर मामले की जांच करवाने के निर्देश दिए थे। इसके बाद अंबाला कैंट में रिकॉर्ड की जांच शुरू हुई और संदिग्ध रजिस्ट्रेशन सामने आने पर कार्रवाई आगे बढ़ी।

मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि दूसरे राज्यों की कंपनियां जब हरियाणा में सड़क निर्माण, औद्योगिक परियोजनाओं या अन्य विकास कार्यों के लिए भारी मशीनरी लेकर आती हैं, तो उनके वाहनों का स्थानीय स्तर पर पंजीकरण किस आधार पर किया गया। यदि किसी वाहन का वास्तविक स्वामित्व या संचालन दूसरे राज्य की कंपनी से जुड़ा है, तो स्थानीय पते का इस्तेमाल करने के लिए कौन से दस्तावेज प्रस्तुत किए गए और उन दस्तावेजों का सत्यापन किस अधिकारी या कर्मचारी ने किया, इसकी भी जांच की जाएगी।

जांच एजेंसियां यह भी देख सकती हैं कि क्या ऐसे मामलों में केवल दस्तावेजी खामियां थीं या जानबूझकर गलत पते का इस्तेमाल कर वाहनों का रजिस्ट्रेशन कराया गया। इसके साथ ही यह भी जांच का विषय होगा कि यदि पते संदिग्ध थे तो संबंधित एसडीएम कार्यालयों में पंजीकरण की प्रक्रिया को आगे कैसे बढ़ाया गया।

अंबाला कैंट में सामने आए 231 मामलों ने परिवहन विभाग की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े किए हैं। इतने बड़े स्तर पर संदिग्ध पते सामने आने के बाद अब विभागीय रिकॉर्ड की व्यापक समीक्षा की जरूरत महसूस की जा रही है। एसीबी की प्रदेशव्यापी जांच से यह पता लगाने की कोशिश होगी कि क्या यह समस्या केवल एक-दो कार्यालयों तक सीमित थी या हरियाणा के अन्य हिस्सों में भी इसी तरह के रजिस्ट्रेशन हुए हैं।

भारी व्यावसायिक वाहनों का रजिस्ट्रेशन इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि ऐसे वाहनों का इस्तेमाल बड़े निर्माण कार्यों और व्यावसायिक गतिविधियों में होता है। दूसरे राज्यों की कंपनियों द्वारा लाई गई मशीनरी यदि स्थानीय पते के आधार पर पंजीकृत की गई है तो उसके दस्तावेज, मालिकाना हक, संचालन स्थल और पंजीकरण की पात्रता की जांच जरूरी हो जाती है।

एसीबी की जांच में एसडीएम कार्यालयों के रिकॉर्ड, वाहन पंजीकरण दस्तावेज, आवेदकों की ओर से दिए गए पते, पहचान संबंधी कागजात और सत्यापन प्रक्रिया से जुड़े रिकॉर्ड की समीक्षा की जा सकती है। इसके अलावा जहां जरूरी होगा, वहां राजस्व विभाग से संबंधित पते का भौतिक सत्यापन भी कराया जा सकता है।

अंबाला कैंट के मामले में पहले ही कई पंजीकरण रद्द करने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। अब प्रदेशभर में जांच बढ़ने के बाद यदि अन्य जिलों में भी इसी प्रकार की अनियमितताएं मिलती हैं तो संबंधित वाहनों के खिलाफ भी नियमों के तहत कार्रवाई की जा सकती है। इससे वाहन मालिकों के साथ-साथ उन अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका भी जांच के घेरे में आ सकती है, जिन्होंने पंजीकरण प्रक्रिया को मंजूरी दी।

इस मामले ने परिवहन विभाग में वाहन रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया को लेकर पारदर्शिता और सत्यापन व्यवस्था पर भी चर्चा तेज कर दी है। यदि स्थानीय पता वाहन पंजीकरण की अनिवार्य शर्त है तो उसके वास्तविक होने की पुष्टि करना संबंधित विभाग की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। ऐसे में अब जांच का एक अहम पहलू यह रहेगा कि दस्तावेजों के सत्यापन के लिए निर्धारित प्रक्रिया का पालन किया गया था या नहीं।

प्रदेशव्यापी जांच के बाद यह भी स्पष्ट हो सकेगा कि अंबाला में सामने आया मामला अपवाद था या दूसरे जिलों में भी इसी तरह की व्यवस्था चल रही थी। एसीबी की पड़ताल के परिणाम सामने आने के बाद वाहन रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया में बदलाव, अतिरिक्त सत्यापन या जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई को लेकर भी फैसला हो सकता है।

फिलहाल अंबाला कैंट से शुरू हुआ यह मामला पूरे हरियाणा के एसडीएम कार्यालयों तक पहुंच चुका है। 231 संदिग्ध रजिस्ट्रेशन मिलने के बाद अब दूसरे जिलों के रिकॉर्ड खंगाले जा रहे हैं। खासकर दूसरे राज्यों से आई भारी मशीनरी के स्थानीय पते पर हुए पंजीकरण को जांच के केंद्र में रखा गया है।

प्रदेश में इस जांच के आगे बढ़ने के साथ यह भी उम्मीद की जा रही है कि यदि किसी स्तर पर फर्जी दस्तावेज, गलत पते या नियमों की अनदेखी साबित होती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई होगी। साथ ही भविष्य में दूसरे राज्यों से आने वाले व्यावसायिक वाहनों के रजिस्ट्रेशन में पता सत्यापन की व्यवस्था को और मजबूत किया जा सकता है।

इस पूरे प्रकरण में अब एसीबी की जांच रिपोर्ट पर नजर रहेगी। यदि प्रदेश के अन्य एसडीएम कार्यालयों में भी अंबाला कैंट जैसे मामले सामने आते हैं तो यह मामला केवल कुछ संदिग्ध रजिस्ट्रेशन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वाहन पंजीकरण की पूरी प्रक्रिया में सुधार और जवाबदेही तय करने का बड़ा मुद्दा बन सकता है।