दिल्ली में फिल्म ‘रामायण’ का ट्रेलर लॉन्च इवेंट: रणबीर-साई ने साझा किए राम-सीता बनने के अनुभव, नितेश तिवारी ने बताई कास्टिंग की वजह

दिल्ली में फिल्म ‘रामायण’ का ट्रेलर लॉन्च इवेंट: रणबीर-साई ने साझा किए राम-सीता बनने के अनुभव, नितेश तिवारी ने बताई कास्टिंग की वजह

नई दिल्ली में आयोजित फिल्म ‘रामायण’ के भव्य रेड कारपेट कार्यक्रम में फिल्म की पूरी स्टारकास्ट और मेकर्स ने अपनी मौजूदगी से माहौल को खास बना दिया। इस दौरान कलाकारों ने सिर्फ फिल्म की भव्यता पर ही बात नहीं की, बल्कि उन भावनात्मक अनुभवों को भी साझा किया, जिनसे गुजरकर उन्होंने अपने-अपने किरदारों को पर्दे पर जीवंत बनाने की कोशिश की। निर्देशक नितेश तिवारी, अभिनेता रणबीर कपूर, अभिनेत्री साई पल्लवी, टीवी अभिनेता रवि दुबे, साउथ सुपरस्टार यश और अभिनेता सनी देओल ने फिल्म से जुड़ी कई ऐसी बातें बताईं, जिनके बारे में अब तक दर्शक अनजान थे।

कार्यक्रम की सबसे अधिक चर्चा उस समय हुई, जब निर्देशक नितेश तिवारी ने यह खुलासा किया कि भगवान राम और माता सीता के किरदार के लिए उन्होंने रणबीर कपूर और साई पल्लवी का चयन आखिर किस आधार पर किया। उन्होंने बताया कि यह फैसला केवल अभिनय क्षमता या लोकप्रियता को देखकर नहीं लिया गया था, बल्कि उनके व्यक्तित्व और भावों को देखकर उन्हें विश्वास हुआ कि यही दोनों कलाकार इन दिव्य भूमिकाओं के साथ न्याय कर पाएंगे।

इवेंट की शुरुआत रणबीर कपूर की मौजूदगी से हुई। मंच पर पहुंचते ही उन्होंने सबसे पहले रामानंद सागर की ऐतिहासिक ‘रामायण’ में भगवान राम का किरदार निभाने वाले वरिष्ठ अभिनेता अरुण गोविल को सम्मानपूर्वक याद किया। रणबीर ने कहा कि बचपन से उन्होंने अरुण गोविल को भगवान राम के रूप में देखा और उसी छवि के साथ बड़े हुए। उनके अनुसार, यदि वह अपने अभिनय में उस गरिमा और शालीनता का थोड़ा-सा अंश भी दर्शकों तक पहुंचा सके, तो वह इसे अपनी सबसे बड़ी उपलब्धि मानेंगे।

रणबीर ने आगे कहा कि भगवान राम जैसे आदर्श चरित्र को निभाना किसी भी कलाकार के लिए बड़ी जिम्मेदारी होती है। उन्होंने स्वीकार किया कि इस भूमिका को निभाने के दौरान उन्होंने अभिनय से अधिक अपने व्यवहार, हावभाव, संवाद बोलने के तरीके और भावनाओं पर ध्यान दिया ताकि किरदार में किसी प्रकार की कृत्रिमता न दिखे। उन्होंने फिल्म की पूरी टीम और निर्देशक का भी धन्यवाद करते हुए कहा कि इस परियोजना का हिस्सा बनना उनके करियर के सबसे महत्वपूर्ण अनुभवों में से एक है।

इवेंट के दौरान साई पल्लवी ने भी अपने अनुभव साझा किए। फिल्म में वह माता सीता की भूमिका निभा रही हैं। उन्होंने कहा कि किसी देवी का किरदार निभाना सिर्फ अभिनय नहीं बल्कि आध्यात्मिक अनुभव भी होता है। उनके मुताबिक, इस तरह की भूमिका पाने के लिए केवल मेहनत पर्याप्त नहीं होती, बल्कि इसे ईश्वर का आशीर्वाद भी माना जाना चाहिए।

साई पल्लवी ने बताया कि उन्होंने कभी यह सोचकर तैयारी नहीं की कि उन्हें माता सीता का किरदार किसी विशेष अंदाज में निभाना है। इसके बजाय वह नियमित रूप से ध्यान करती थीं और प्रार्थना करती थीं कि उनके माध्यम से वही भाव और व्यक्तित्व सामने आए, जो माता सीता के चरित्र की गरिमा के अनुरूप हो। उन्होंने कहा कि वह हर दृश्य से पहले मानसिक रूप से खुद को शांत करती थीं और यही प्रयास करती थीं कि उनका अभिनय दर्शकों को कृत्रिम न लगे।

उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय संस्कृति में माता सीता केवल एक पौराणिक पात्र नहीं बल्कि त्याग, धैर्य, करुणा और शक्ति की प्रतीक हैं। ऐसे में उनके जीवन को पर्दे पर प्रस्तुत करना बेहद चुनौतीपूर्ण रहा। उन्होंने स्वीकार किया कि इस भूमिका ने उन्हें एक कलाकार के साथ-साथ एक इंसान के रूप में भी बहुत कुछ सिखाया।

फिल्म में भगवान लक्ष्मण का किरदार निभा रहे अभिनेता रवि दुबे ने भी अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि शूटिंग के दौरान वह रणबीर कपूर को हमेशा “भैया” और साई पल्लवी को “माता” कहकर ही संबोधित करते थे। उनका मानना था कि यदि वह सेट पर भी अपने किरदार की भावनाओं को बनाए रखेंगे, तो अभिनय अधिक सहज और स्वाभाविक हो सकेगा।

रवि दुबे ने कहा कि लक्ष्मण का चरित्र केवल एक वीर योद्धा का नहीं बल्कि अपने बड़े भाई और भाभी के प्रति समर्पित एक आदर्श भाई का भी है। इस भूमिका को निभाने के लिए उन्होंने संवादों के साथ-साथ शारीरिक भाषा और भावनात्मक अभिव्यक्ति पर भी काफी मेहनत की। उन्होंने इसे अपने अभिनय जीवन का सबसे सम्मानजनक अवसर बताया और कहा कि वह स्वयं को भाग्यशाली मानते हैं कि उन्हें इस तरह की भूमिका निभाने का मौका मिला।

कार्यक्रम में फिल्म के रावण बने साउथ सुपरस्टार यश ने भी अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि इस महत्वाकांक्षी परियोजना का हिस्सा बनना उनके लिए बेहद गर्व की बात है। उन्होंने निर्देशक और पूरी टीम का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि फिल्म का हर कलाकार अपने किरदार को पूरी ईमानदारी और समर्पण के साथ निभाने की कोशिश कर रहा है। यश ने कहा कि भारतीय महाकाव्य को बड़े स्तर पर प्रस्तुत करना एक बड़ी जिम्मेदारी है और पूरी टीम इस जिम्मेदारी को समझते हुए काम कर रही है।

यश के मंच पर आते ही दर्शकों ने तालियों से उनका स्वागत किया। उन्होंने कहा कि रावण जैसा जटिल और प्रभावशाली किरदार निभाना किसी भी अभिनेता के लिए चुनौतीपूर्ण होता है, क्योंकि इस चरित्र में शक्ति, विद्वता, अहंकार और महत्वाकांक्षा जैसे कई अलग-अलग पहलू मौजूद हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि दर्शकों को उनका अभिनय पसंद आएगा।

इसी कार्यक्रम में अभिनेता सनी देओल ने भी अपनी मौजूदगी दर्ज कराई। फिल्म में वह भगवान हनुमान की भूमिका निभा रहे हैं। मंच से उन्होंने कहा कि ‘रामायण’ जैसी फिल्म का हिस्सा बनना उनके लिए सम्मान की बात है। उन्होंने विश्वास जताया कि यह फिल्म केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं होगी, बल्कि भारतीय संस्कृति और परंपराओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का भी काम करेगी।

सनी देओल ने कहा कि उन्हें पूरा भरोसा है कि देशभर के लोग इस फिल्म को देखने के लिए सिनेमाघरों का रुख करेंगे। उन्होंने पूरी टीम की मेहनत की सराहना करते हुए कहा कि सभी कलाकार अपने-अपने किरदारों को पूरी निष्ठा के साथ निभा रहे हैं। उनके मंच पर पहुंचते ही दर्शकों ने जोरदार तालियां बजाकर उनका स्वागत किया।

हालांकि कार्यक्रम का सबसे चर्चित बयान निर्देशक नितेश तिवारी का रहा। उन्होंने विस्तार से बताया कि भगवान राम और माता सीता के किरदार के लिए कलाकारों का चयन करते समय उन्होंने कई पहलुओं पर विचार किया था। उनके अनुसार, अभिनय प्रतिभा महत्वपूर्ण थी, लेकिन उससे भी अधिक जरूरी वह भाव थे जो कलाकारों की आंखों और व्यक्तित्व में दिखाई देते हैं।

नितेश तिवारी ने कहा कि जब भी वह रणबीर कपूर को देखते थे, उन्हें उनकी आंखों में भगवान राम जैसी शालीनता, धैर्य और करुणा दिखाई देती थी। वहीं साई पल्लवी के चेहरे और भावों में उन्हें माता सीता की सरलता, पवित्रता और आत्मविश्वास का प्रतिबिंब नजर आता था। यही कारण था कि उनके मन में इन दोनों कलाकारों के अलावा किसी अन्य चेहरे की कल्पना नहीं बन पाई।

निर्देशक ने यह भी बताया कि फिल्म की तैयारी के दौरान रणबीर कपूर और साई पल्लवी ने अपने किरदारों के लिए लंबा समय दिया। दोनों कलाकारों ने सिर्फ संवाद याद करने तक खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि चरित्र की आत्मा को समझने का प्रयास किया। उन्होंने कहा कि दोनों कलाकारों ने अपने अभिनय में छोटे-छोटे भावों पर भी विशेष ध्यान दिया, जिससे उनके किरदार अधिक प्रभावशाली बन सके।

उन्होंने पूरी स्टारकास्ट की तारीफ करते हुए कहा कि फिल्म में शामिल हर कलाकार ने अपनी भूमिका को गंभीरता से लिया है। उनका मानना है कि जब पूरी टीम एक ही लक्ष्य के साथ काम करती है, तभी किसी बड़े विषय पर आधारित फिल्म दर्शकों के दिल तक पहुंच पाती है।

दिल्ली में आयोजित इस कार्यक्रम के दौरान दर्शकों और मीडिया के बीच फिल्म को लेकर जबरदस्त उत्साह देखने को मिला। कलाकारों के बयान और निर्देशक के खुलासों के बाद फिल्म को लेकर लोगों की उत्सुकता और भी बढ़ गई है। खासकर भगवान राम, माता सीता, लक्ष्मण, रावण और हनुमान जैसे प्रतिष्ठित किरदारों को आधुनिक तकनीक और भव्य प्रस्तुति के साथ बड़े पर्दे पर देखने की उत्सुकता अब पहले से कहीं अधिक दिखाई दे रही है।

फिल्म की टीम का कहना है कि उनका उद्देश्य केवल एक भव्य सिनेमाई अनुभव देना नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, आदर्शों और मूल्यों को सम्मानपूर्वक प्रस्तुत करना भी है। यही वजह है कि कलाकारों के चयन से लेकर उनके अभिनय की तैयारी तक हर पहलू पर विशेष ध्यान दिया गया। अब दर्शकों की नजर इस बात पर टिकी है कि बड़े पर्दे पर यह महत्वाकांक्षी फिल्म किस तरह रामायण की अमर कथा को नए अंदाज में प्रस्तुत करती है।