दिल्ली से दुबई जाना पड़ा भारी! 2 फ्लाइट घंटों लेट, एयरपोर्ट पर यात्रियों का प्रदर्शन

दिल्ली से दुबई जाना पड़ा भारी! 2 फ्लाइट घंटों लेट, एयरपोर्ट पर यात्रियों का प्रदर्शन

दिल्ली से दुबई जाने वाले यात्रियों के लिए स्पाइसजेट की दो उड़ानों में हुई लंबी देरी परेशानी का कारण बन गई। दोनों फ्लाइट अपने तय समय से 24 घंटे से भी ज्यादा पीछे चलती रहीं। इंतजार से परेशान करीब 200 यात्रियों ने मंगलवार को दिल्ली एयरपोर्ट के टर्मिनल-3 के भीतर जमीन पर बैठकर विरोध जताया। यात्रियों का आरोप था कि उन्हें लंबे समय तक उड़ान को लेकर स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई और शेड्यूल लगातार बदला जाता रहा।

मामला उस समय और गंभीर हो गया जब सोमवार से एयरपोर्ट पर मौजूद यात्रियों को मंगलवार दोपहर तक भी अपनी फ्लाइट के उड़ान भरने का इंतजार करना पड़ा। यात्रियों के मुताबिक, बार-बार समय बदलने के बावजूद उन्हें यह साफ नहीं बताया गया कि आखिर उड़ान में इतनी देरी क्यों हो रही है। लंबे इंतजार, अनिश्चितता और जानकारी की कमी के चलते यात्रियों में नाराजगी बढ़ती चली गई।

सोमवार से एयरपोर्ट पर इंतजार कर रहे थे यात्री

स्पाइसजेट की जिन दो उड़ानों को लेकर विवाद सामने आया, उनमें पहली फ्लाइट SG 5111 थी। इसका दिल्ली से दुबई के लिए रवाना होने का निर्धारित समय सोमवार सुबह 8:30 बजे था। तय कार्यक्रम के मुताबिक इसे दोपहर 11:15 बजे तक दुबई पहुंचना था।

दूसरी उड़ान SG 5105 थी, जिसे सोमवार रात 10:10 बजे दिल्ली से उड़ान भरनी थी। इस फ्लाइट का दुबई पहुंचने का निर्धारित समय रात 12:55 बजे था। लेकिन दोनों उड़ानें अपने तय कार्यक्रम के अनुसार रवाना नहीं हो सकीं।

यात्रियों के लिए मुश्किल सिर्फ इतनी नहीं थी कि फ्लाइट लेट हो गई। समस्या यह भी रही कि उड़ान का समय लगातार आगे बढ़ता रहा। ऐसे में कई यात्री एयरपोर्ट पर ही फंसे रहे। जब लंबे समय तक कोई स्पष्ट स्थिति सामने नहीं आई तो यात्रियों का गुस्सा बढ़ गया।

टर्मिनल-3 में यात्रियों ने किया प्रदर्शन

मंगलवार को करीब 200 यात्रियों ने दिल्ली एयरपोर्ट के टर्मिनल-3 में विरोध जताया। यात्रियों ने जमीन पर बैठकर प्रदर्शन किया और एयरलाइन से जल्द स्थिति स्पष्ट करने की मांग की। उनका कहना था कि इतनी लंबी देरी के बावजूद उन्हें पर्याप्त और स्पष्ट जानकारी नहीं मिल रही थी।

लंबी दूरी की अंतरराष्ट्रीय उड़ान में इस तरह की देरी यात्रियों के लिए कई दूसरी परेशानियां भी खड़ी कर सकती है। जिन लोगों की दुबई में आगे की यात्रा, होटल बुकिंग, कामकाजी कार्यक्रम या अन्य जरूरी योजनाएं थीं, उनके कार्यक्रम प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई। ऐसे में यात्रियों की नाराजगी सिर्फ फ्लाइट लेट होने तक सीमित नहीं रही, बल्कि समय पर जानकारी नहीं मिलने को लेकर भी रही।

आखिर क्यों फंसी स्पाइसजेट की दोनों फ्लाइट?

स्पाइसजेट ने इस मामले पर सफाई देते हुए बताया कि एक विमान के ग्राउंडेड होने के कारण ऑपरेशनल दिक्कत पैदा हुई। इसी वजह से दोनों उड़ानों के संचालन पर असर पड़ा और उन्हें समय पर रवाना नहीं किया जा सका।

एयरलाइन के मुताबिक, प्रभावित यात्रियों को वैकल्पिक व्यवस्था के जरिए दुबई भेजने की कोशिश की गई। स्पाइसजेट ने यात्रियों को हुई असुविधा के लिए माफी भी मांगी।

एयरलाइन के प्रवक्ता ने कहा कि यात्रियों को जल्द से जल्द दूसरी उपलब्ध फ्लाइट के जरिए उनके गंतव्य तक पहुंचाने के प्रयास किए जा रहे हैं। यानी कंपनी की ओर से देरी को ऑपरेशनल समस्या से जोड़कर देखा गया और यात्रियों के लिए वैकल्पिक यात्रा की व्यवस्था करने की बात कही गई।

विमान ग्राउंडेड होने का क्या मतलब है?

जब किसी विमान को ग्राउंडेड किया जाता है तो इसका अर्थ होता है कि उसे फिलहाल उड़ान भरने की अनुमति नहीं होती। इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं। तकनीकी खराबी, विमान की सुरक्षा से जुड़ी जांच, रखरखाव से संबंधित समस्या या किसी अन्य नियामकीय वजह से भी विमान को जमीन पर रखा जा सकता है।

ऐसी स्थिति में एयरलाइन को उस विमान की जगह दूसरे विमान या अन्य परिचालन व्यवस्था का इस्तेमाल करना पड़ सकता है। यदि उपलब्ध विमानों की संख्या सीमित हो, तो एक विमान के संचालन से बाहर होने का असर दूसरी उड़ानों के शेड्यूल पर भी पड़ सकता है।

स्पाइसजेट के मामले में भी एयरलाइन ने बताया कि एक विमान के ग्राउंडेड होने से ऑपरेशनल स्थिति बिगड़ी और इसका असर दिल्ली-दुबई की इन दोनों उड़ानों पर पड़ा।

समय की पाबंदी के मामले में भी स्पाइसजेट पीछे

यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब स्पाइसजेट की समय पर उड़ान भरने की क्षमता को लेकर पहले से सवाल उठते रहे हैं। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, जुलाई में एयरलाइन की केवल 34.5 प्रतिशत उड़ानें ही निर्धारित समय के आसपास संचालित हुईं।

इस आंकड़े की तुलना दूसरी प्रमुख एयरलाइंस से करने पर स्पाइसजेट का प्रदर्शन कमजोर दिखाई देता है। यानी जुलाई के दौरान स्पाइसजेट की बड़ी संख्या में उड़ानें तय समय से प्रभावित हुईं। यात्रियों के लिए यह स्थिति खास तौर पर चिंता की बात हो सकती है, क्योंकि उड़ान में देरी होने पर आगे की यात्रा और दूसरी बुकिंग भी प्रभावित हो सकती हैं।

समय पर उड़ान भरना किसी भी एयरलाइन के संचालन का अहम हिस्सा माना जाता है। खासकर अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में यात्रियों की आगे की कनेक्टिंग फ्लाइट, होटल चेक-इन और अन्य कार्यक्रम निर्धारित समय के अनुसार होते हैं। ऐसे में कई घंटे की देरी भी यात्रियों की पूरी यात्रा योजना को बदल सकती है।

एयरलाइन की बाजार हिस्सेदारी भी सीमित

स्पाइसजेट की मौजूदा स्थिति को समझने के लिए उसके घरेलू विमानन बाजार में प्रदर्शन पर भी नजर डालना जरूरी है। जुलाई में एयरलाइन की बाजार हिस्सेदारी 1.6 प्रतिशत बताई गई। इस दौरान स्पाइसजेट ने करीब 1.87 लाख यात्रियों को यात्रा कराई।

इसके मुकाबले इंडिगो का बाजार में दबदबा बना रहा। जुलाई में इंडिगो की हिस्सेदारी 67.4 प्रतिशत रही। एयर इंडिया ग्रुप की हिस्सेदारी करीब 24 प्रतिशत और अकासा एयर की 5.5 प्रतिशत बताई गई।

इन आंकड़ों से पता चलता है कि भारतीय एविएशन बाजार में स्पाइसजेट का हिस्सा प्रमुख प्रतिस्पर्धियों की तुलना में काफी छोटा हो चुका है। यात्रियों की संख्या और बाजार हिस्सेदारी के लिहाज से भी एयरलाइन को बड़ी कंपनियों से कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ रहा है।

वित्तीय स्थिति और ऑपरेशन पर भी नजर

स्पाइसजेट के लिए सिर्फ फ्लाइट में देरी ही चुनौती नहीं है। एयरलाइन की वित्तीय स्थिति और उसके संचालन को लेकर भी निगरानी बनी हुई है। पिछले सप्ताह नागरिक उड्डयन मंत्री के. राममोहन नायडू ने कहा था कि नागरिक उड्डयन मंत्रालय और विमानन नियामक DGCA एयरलाइन की वित्तीय स्थिति तथा परिचालन गतिविधियों पर नजर रख रहे हैं।

किसी एयरलाइन की वित्तीय स्थिति का सीधा असर उसके रोजमर्रा के संचालन पर भी पड़ सकता है। विमान की उपलब्धता, रखरखाव, कर्मचारियों की व्यवस्था और उड़ानों के शेड्यूल को बनाए रखने के लिए पर्याप्त परिचालन क्षमता जरूरी होती है। ऐसे में किसी भी तरह की बाधा का असर यात्रियों की यात्रा पर पड़ सकता है।

यात्रियों के लिए बढ़ी परेशानी

दिल्ली से दुबई जाने वाली इन दो उड़ानों में देरी ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा किया है कि लंबी देरी की स्थिति में यात्रियों को कितनी जल्दी और कितनी स्पष्ट जानकारी दी जाती है। एयरलाइन ने वैकल्पिक उड़ानों की व्यवस्था करने की बात कही है, लेकिन यात्रियों के लिए लंबे समय तक एयरपोर्ट पर इंतजार करना अपने आप में बड़ी परेशानी रहा।

सोमवार से लेकर मंगलवार तक इंतजार करने के बाद यात्रियों का विरोध करना इसी नाराजगी को दर्शाता है। खासतौर पर तब, जब उड़ान का समय कई बार बदला जाए और यात्रियों को अगला निश्चित समय पता न हो।

अंतरराष्ट्रीय यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए समय की अहमियत और भी अधिक होती है। इसलिए एयरलाइन के लिए ऐसी स्थिति में केवल फ्लाइट संचालित करना ही नहीं, बल्कि यात्रियों को समय पर सही जानकारी देना भी महत्वपूर्ण होता है।

फिलहाल स्पाइसजेट की ओर से प्रभावित यात्रियों को वैकल्पिक फ्लाइट से दुबई भेजने की कोशिश की जा रही है। एयरलाइन ने असुविधा के लिए माफी मांगी है। वहीं, DGCA और नागरिक उड्डयन मंत्रालय की निगरानी के बीच यह घटना स्पाइसजेट के परिचालन प्रदर्शन और यात्रियों को दी जाने वाली सेवा को लेकर एक और महत्वपूर्ण मामला बन गई है।