कॉमनवेल्थ गेम्स के आठवें दिन भारतीय खिलाड़ियों के लिए मुकाबले बेहद अहम रहने वाले हैं। आज का दिन एथलेटिक्स, बॉक्सिंग, जूडो, ट्रैक साइक्लिंग और लॉन बॉल्स समेत कई स्पर्धाओं में भारत की पदक उम्मीदों से जुड़ा हुआ है। सबसे ज्यादा नजरें स्टार जैवलिन थ्रोअर नीरज चोपड़ा पर रहेंगी, जो पुरुष जैवलिन थ्रो फाइनल में स्वर्ण पदक जीतने के इरादे से मैदान में उतरेंगे। उनके साथ भारत के रोहित यादव और यशवीर सिंह भी फाइनल में अपनी चुनौती पेश करेंगे।
हालांकि नीरज के लिए गोल्ड का सफर आसान नहीं होगा। पाकिस्तान के ओलिंपिक चैंपियन अरशद नदीम और श्रीलंका के रुमेश पाथिराजे इस मुकाबले में उनके सबसे बड़े प्रतिद्वंद्वी माने जा रहे हैं। क्वालिफिकेशन राउंड में रुमेश ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 82.84 मीटर का थ्रो फेंका और शीर्ष स्थान हासिल किया था। दूसरी ओर अरशद नदीम अपेक्षित प्रदर्शन नहीं कर सके और सातवें स्थान पर रहे, लेकिन बड़े मुकाबलों में वापसी करने की उनकी क्षमता को देखते हुए उन्हें हल्के में नहीं लिया जा सकता।
नीरज चोपड़ा ने क्वालिफिकेशन राउंड में शुरुआत अपेक्षा के अनुरूप नहीं की थी। उनका पहला प्रयास 76.28 मीटर का रहा, लेकिन दूसरे प्रयास में उन्होंने खुद को बेहतर करते हुए 79.61 मीटर का थ्रो किया। यह दूरी उन्हें फाइनल में पहुंचाने के लिए पर्याप्त रही। तीसरे प्रयास की जरूरत नहीं समझते हुए उन्होंने उसे छोड़ दिया। कुल मिलाकर वे क्वालिफिकेशन में पांचवें स्थान पर रहे और अब उनका पूरा ध्यान फाइनल में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने पर होगा।
भारतीय दल के लिए अच्छी बात यह रही कि रोहित यादव और यशवीर सिंह भी फाइनल में जगह बनाने में सफल रहे। रोहित ने 78.37 मीटर का थ्रो कर नौवां स्थान हासिल किया, जबकि यशवीर सिंह ने 78.36 मीटर के साथ दसवें स्थान पर रहते हुए अंतिम दौर के लिए क्वालिफाई किया। अब तीन भारतीय खिलाड़ी एक साथ फाइनल में उतरेंगे, जिससे भारत की पदक संभावनाएं और मजबूत हो गई हैं।
नीरज और अरशद नदीम की प्रतिद्वंद्विता पिछले कई वर्षों से खेल प्रेमियों के बीच चर्चा का विषय रही है। दोनों खिलाड़ियों की पहली सीधी टक्कर 2016 के साउथ एशियन गेम्स में देखने को मिली थी। इसके बाद दोनों कई अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में आमने-सामने आ चुके हैं। आंकड़ों पर नजर डालें तो अब तक हुए 11 मुकाबलों में नीरज ने 10 बार अरशद को पीछे छोड़ा है। हालांकि एक बार अरशद ने बाजी मारी और वह मौका बेहद खास था।
पेरिस ओलिंपिक 2024 में अरशद नदीम ने इतिहास रचते हुए 92.97 मीटर का थ्रो फेंका था। यह ओलिंपिक रिकॉर्ड भी बना और उन्होंने स्वर्ण पदक अपने नाम किया। उसी प्रतियोगिता में नीरज चोपड़ा ने 89.45 मीटर का सर्वश्रेष्ठ प्रयास किया और रजत पदक जीतने में सफल रहे। इसलिए कॉमनवेल्थ गेम्स का यह मुकाबला भी दोनों खिलाड़ियों के बीच एक और रोमांचक संघर्ष माना जा रहा है।
भारतीय एथलेटिक्स के इतिहास में नीरज चोपड़ा का नाम पहले ही स्वर्ण अक्षरों में दर्ज हो चुका है। उन्होंने वर्ष 2025 में दोहा डायमंड लीग के दौरान 90.23 मीटर का थ्रो कर नया राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाया था। इसके साथ ही वे 90 मीटर की दूरी पार करने वाले भारत के पहले और अब तक के इकलौते जैवलिन थ्रोअर बने। यह उपलब्धि भारतीय एथलेटिक्स के लिए एक ऐतिहासिक पल थी।
नीरज की उपलब्धियां केवल राष्ट्रीय रिकॉर्ड तक सीमित नहीं हैं। टोक्यो ओलिंपिक 2020 में उन्होंने 87.58 मीटर का थ्रो कर भारत को एथलेटिक्स में पहला ओलिंपिक स्वर्ण पदक दिलाया था। इसके बाद उन्होंने विश्व एथलेटिक्स चैंपियनशिप 2023 में गोल्ड मेडल जीता। एशियन गेम्स 2023 में भी वे शीर्ष स्थान पर रहे। वहीं पेरिस ओलिंपिक 2024 में उन्होंने रजत पदक जीतकर एक बार फिर देश का गौरव बढ़ाया। यही कारण है कि आज भी करोड़ों भारतीयों की नजरें उनसे एक और स्वर्णिम प्रदर्शन की उम्मीद लगाए बैठी हैं।
कॉमनवेल्थ गेम्स के आठवें दिन केवल एथलेटिक्स ही नहीं, बल्कि बॉक्सिंग में भी भारत के पास कई पदक जीतने का अवसर होगा। भारतीय मुक्केबाजों के कुल 10 सेमीफाइनल मुकाबले आज खेले जाएंगे। यदि इनमें जीत मिलती है तो सभी खिलाड़ी अपने-अपने वर्ग के फाइनल में पहुंच जाएंगे और स्वर्ण पदक की दौड़ में बने रहेंगे।
दिन के पहले सत्र में प्रीति पवार, अंकुश पंघाल, जैस्मिन लांबोरिया, अरुंधति चौधरी और जदुमणि सिंह अपने मुकाबले खेलेंगे। इन सभी खिलाड़ियों ने शुरुआती दौर में शानदार प्रदर्शन करते हुए सेमीफाइनल तक का सफर तय किया है। अब उनका लक्ष्य फाइनल में जगह बनाकर भारत की पदक संख्या बढ़ाना होगा।
रात के सत्र में भारत की अनुभवी मुक्केबाज लवलीना बोरगोहेन भी रिंग में उतरेंगी। उनके साथ साक्षी चौधरी, प्रिया घंघास, सचिन सिवाच और नरेंद्र बरवाल भी अपने-अपने सेमीफाइनल मुकाबले खेलेंगे। लवलीना से खास उम्मीदें हैं क्योंकि उन्होंने टोक्यो ओलिंपिक में कांस्य पदक जीतकर भारतीय मुक्केबाजी को नई पहचान दिलाई थी। इस बार वे 75 किलोग्राम वर्ग में चुनौती पेश करेंगी और उनका लक्ष्य फाइनल में पहुंचकर गोल्ड की ओर कदम बढ़ाना होगा।
जूडो प्रतियोगिताओं में भी भारतीय खिलाड़ी अपने अभियान की शुरुआत करेंगे। हर्ष सिंह, श्रद्धा चोपड़े, रोहित बसीर माजगुल, अस्मिता डे और यामिनी मौर्य अपने शुरुआती मुकाबलों में उतरेंगे। इन खिलाड़ियों के लिए पहला दौर पार करना बेहद महत्वपूर्ण रहेगा क्योंकि जीत के साथ वे अगले चरण में प्रवेश करेंगे और पदक की उम्मीदों को बरकरार रखेंगे।
ट्रैक साइक्लिंग में भी भारत की मौजूदगी देखने को मिलेगी। दिनेश कुमार और रोजित यांगलेम 4000 मीटर इंडिविजुअल पर्स्यूट स्पर्धा में भाग लेंगे। वहीं पुरुष केरिन इवेंट में डेविड बेकहम एल्काचोहतूंगो और जेम्श सिंह कीथेल्लाकराम अपनी चुनौती पेश करेंगे। यदि भारतीय खिलाड़ी क्वालिफाइंग राउंड में सफल रहते हैं तो इन्हीं स्पर्धाओं के फाइनल मुकाबले भी आज ही आयोजित किए जाएंगे, जिससे भारत के पास अतिरिक्त पदक जीतने का मौका रहेगा।
लॉन बॉल्स में भी भारतीय टीम के सामने महत्वपूर्ण मुकाबले हैं। पुरुष पेयर्स सेक्शनल प्ले में दिनेश कुमार और नवनीत सिंह की जोड़ी फॉकलैंड आइलैंड्स के खिलाफ मैदान में उतरेगी। इसके बाद महिला सिंगल्स सेक्शनल प्ले में नयनमोनी सैकिया का मुकाबला जाम्बिया की मिल्ड्रेड म्कंडाविरे से होगा। दोनों मुकाबले अगले दौर की तस्वीर तय करने में अहम साबित हो सकते हैं।
कॉमनवेल्थ गेम्स के आठवें दिन कुल 22 स्वर्ण पदक दांव पर लगे होंगे। इनमें सबसे अधिक 10 गोल्ड मेडल एथलेटिक्स और पैरा एथलेटिक्स स्पर्धाओं में दिए जाएंगे। इसके अलावा ट्रैक साइक्लिंग और पैरा ट्रैक साइक्लिंग में सात स्वर्ण पदकों का फैसला होगा, जबकि जूडो की पांच स्पर्धाओं में भी चैंपियन तय किए जाएंगे। ऐसे में पूरे दिन विभिन्न खेलों में रोमांच देखने को मिलेगा।
भारतीय खेल प्रेमियों के लिए यह दिन बेहद खास माना जा रहा है। एक ओर नीरज चोपड़ा पर देश की सबसे बड़ी उम्मीद टिकी हुई है, तो दूसरी ओर बॉक्सिंग, जूडो, ट्रैक साइक्लिंग और लॉन बॉल्स में भी भारतीय खिलाड़ी शानदार प्रदर्शन कर पदक तालिका में देश की स्थिति मजबूत करने की कोशिश करेंगे। यदि भारतीय खिलाड़ी अपने सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन को दोहराने में सफल रहते हैं, तो कॉमनवेल्थ गेम्स का यह दिन भारत के लिए यादगार साबित हो सकता है।




