अपनी बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘बंटवारा 1947’ की रिलीज से पहले अभिनेता सनी देओल इन दिनों देश के अलग-अलग शहरों में फिल्म के प्रचार में व्यस्त हैं। इसी सिलसिले में वह अपने बेटे करण देओल के साथ बिहार पहुंचे, जहां उन्होंने सिखों के सबसे पवित्र धार्मिक स्थलों में गिने जाने वाले तख्त श्री हरिमंदिर जी पटना साहिब में माथा टेककर गुरु घर का आशीर्वाद लिया। उनके इस दौरे की तस्वीरें और वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गए और प्रशंसकों ने भी अभिनेता के इस आध्यात्मिक सफर की खूब सराहना की।
पटना साहिब पहुंचने के दौरान सनी देओल पूरी श्रद्धा और सादगी के साथ गुरुद्वारा परिसर में नजर आए। वायरल वीडियो में उन्हें गुरु घर में नतमस्तक होकर अरदास करते हुए देखा जा सकता है। कुछ देर तक वह शांत भाव से बैठे रहे और ध्यान लगाकर प्रार्थना करते दिखाई दिए। उनके साथ मौजूद करण देओल ने भी गुरुद्वारे में माथा टेककर आशीर्वाद प्राप्त किया। दोनों पिता-पुत्र ने धार्मिक परंपराओं का पालन करते हुए पूरे सम्मान के साथ दर्शन किए।
सनी देओल का यह दौरा सिर्फ धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उनकी आगामी फिल्म के प्रचार अभियान का भी महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है। अभिनेता इन दिनों लगातार विभिन्न शहरों में जाकर दर्शकों से मुलाकात कर रहे हैं ताकि फिल्म के प्रति उत्साह को और बढ़ाया जा सके। बिहार पहुंचने के बाद उन्होंने स्थानीय लोगों और अपने प्रशंसकों से भी मुलाकात की, जहां लोगों ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया।
दर्शन के बाद अभिनेता ने अपने आधिकारिक इंस्टाग्राम अकाउंट पर भी कुछ तस्वीरें साझा कीं। इन तस्वीरों में वह गुरुद्वारे के अंदर और परिसर में नजर आए। पोस्ट के साथ उन्होंने लिखा कि श्री गुरु गोबिंद सिंह जी के पावन जन्मस्थान तख्त श्री हरिमंदिर जी पटना साहिब में पहुंचकर स्वयं को बेहद सौभाग्यशाली और धन्य महसूस कर रहे हैं। उनकी इस पोस्ट पर लाखों प्रशंसकों ने प्रतिक्रिया दी और अभिनेता के लिए शुभकामनाएं व्यक्त कीं।
तख्त श्री हरिमंदिर जी पटना साहिब का सिख इतिहास में विशेष महत्व है। यह स्थान दसवें सिख गुरु, श्री गुरु गोबिंद सिंह जी का जन्मस्थान है। यही कारण है कि इसे सिख धर्म के पांच प्रमुख तख्तों में शामिल किया गया है। देश ही नहीं, बल्कि विदेशों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु हर वर्ष यहां दर्शन के लिए पहुंचते हैं। धार्मिक दृष्टि से यह स्थल सिख समुदाय की आस्था का प्रमुख केंद्र माना जाता है। यहां होने वाले धार्मिक कार्यक्रमों और गुरबाणी कीर्तन में शामिल होने के लिए हजारों श्रद्धालु नियमित रूप से आते हैं।
सनी देओल के पटना साहिब पहुंचने की खबर मिलते ही वहां मौजूद श्रद्धालुओं और उनके प्रशंसकों में उत्साह देखने को मिला। कई लोगों ने अभिनेता के साथ तस्वीरें लेने की कोशिश की, हालांकि उन्होंने पहले पूरी श्रद्धा के साथ दर्शन किए और उसके बाद लोगों का अभिवादन स्वीकार किया। सुरक्षा व्यवस्था के बीच उनका पूरा कार्यक्रम शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ।
दरअसल, अभिनेता अपनी नई फिल्म ‘बंटवारा 1947’ के प्रमोशन के सिलसिले में बिहार आए हुए हैं। फिल्म स्वतंत्रता और देश के विभाजन की पृष्ठभूमि पर आधारित है। इसकी कहानी 1947 के उस दौर को सामने लाती है, जब भारत और पाकिस्तान के बंटवारे ने लाखों लोगों की जिंदगी बदल दी थी। फिल्म में विभाजन के दौरान लोगों के दर्द, विस्थापन, रिश्तों की मजबूती और इंसानियत के संदेश को प्रमुखता से दिखाया गया है।
यह फिल्म प्रसिद्ध साहित्यकार असगर वजाहत के चर्चित नाटक ‘जिस लाहौर नई वेख्या, ओ जम्या ए नई’ से प्रेरित बताई जा रही है। यह नाटक वर्षों से अपनी संवेदनशील कहानी और मानवीय मूल्यों के कारण दर्शकों और रंगमंच प्रेमियों के बीच लोकप्रिय रहा है। फिल्म निर्माता इसी कहानी को बड़े पर्दे पर नए अंदाज में प्रस्तुत कर रहे हैं ताकि नई पीढ़ी भी इतिहास के उस कठिन दौर को समझ सके।
फिल्म की सबसे बड़ी खासियत इसका मजबूत कलाकारों का समूह भी है। सनी देओल के अलावा इसमें शबाना आजमी, प्रीति जिंटा, अली फजल और अभिमन्यु सिंह जैसे कई अनुभवी कलाकार महत्वपूर्ण भूमिकाओं में नजर आएंगे। अलग-अलग किरदारों के माध्यम से फिल्म विभाजन के समय समाज के विभिन्न पहलुओं को दिखाने की कोशिश करेगी। दर्शकों को भावनात्मक कहानी के साथ दमदार अभिनय भी देखने को मिलने की उम्मीद है।
संगीत की बात करें तो फिल्म का संगीत देश के प्रसिद्ध संगीतकार ए.आर. रहमान ने तैयार किया है। वहीं इसके गीत मशहूर गीतकार जावेद अख्तर ने लिखे हैं। दोनों दिग्गज कलाकारों के साथ आने से फिल्म के संगीत को लेकर भी दर्शकों के बीच काफी उत्सुकता बनी हुई है। निर्माताओं का मानना है कि फिल्म के गाने कहानी की भावनाओं को और प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करेंगे।
सनी देओल लंबे समय से ऐसी फिल्मों के लिए जाने जाते हैं जिनमें देशभक्ति, सामाजिक संदेश और भावनात्मक कहानियों का विशेष स्थान होता है। इस फिल्म में भी उनका किरदार एक ऐसे व्यक्ति का बताया जा रहा है, जो विभाजन की त्रासदी के बीच इंसानियत और आपसी भाईचारे का संदेश देता है। फिल्म का उद्देश्य सिर्फ इतिहास को दोहराना नहीं, बल्कि वर्तमान पीढ़ी को उस दौर की परिस्थितियों से परिचित कराना भी है।
फिल्म के प्रचार के दौरान सनी देओल लगातार मीडिया से भी बातचीत कर रहे हैं। हालांकि वह राजनीतिक मुद्दों पर टिप्पणी करने से बचते नजर आए हैं और उनका पूरा ध्यान फिल्म के विषय तथा उसके संदेश पर केंद्रित है। उनका कहना है कि यह फिल्म केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि इतिहास के एक महत्वपूर्ण अध्याय को संवेदनशीलता के साथ दर्शाने का प्रयास है।
फिल्म की रिलीज डेट भी काफी चर्चा में है। ‘बंटवारा 1947’ को 14 अगस्त को सिनेमाघरों में रिलीज किया जाएगा। यह वही तारीख है, जब भारत और पाकिस्तान के विभाजन का ऐतिहासिक दिन माना जाता है। इसी वजह से निर्माताओं ने फिल्म की रिलीज के लिए इस दिन का चयन किया है, ताकि कहानी का विषय और रिलीज की तारीख एक-दूसरे से जुड़ाव महसूस करा सकें।
हालांकि बॉक्स ऑफिस पर इस फिल्म को कड़ी टक्कर मिलने वाली है। उसी दिन अभिनेता इमरान हाशमी की फिल्म ‘आवारापन 2’ भी सिनेमाघरों में रिलीज होगी। ऐसे में दोनों फिल्मों के बीच दर्शकों को आकर्षित करने की दिलचस्प प्रतिस्पर्धा देखने को मिल सकती है। फिल्म कारोबार से जुड़े जानकारों का मानना है कि दोनों फिल्मों का विषय अलग होने के कारण दर्शकों का अलग-अलग वर्ग इन्हें देखने के लिए सिनेमाघरों तक पहुंच सकता है।
पटना साहिब में माथा टेकने के बाद सनी देओल ने अपने प्रशंसकों का अभिवादन करते हुए सभी के प्यार और समर्थन के लिए धन्यवाद भी दिया। सोशल मीडिया पर सामने आई तस्वीरों और वीडियो में अभिनेता बेहद सरल और श्रद्धालु रूप में दिखाई दिए, जिसे उनके चाहने वालों ने काफी पसंद किया। अब फिल्म की रिलीज नजदीक आने के साथ दर्शकों की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि विभाजन की पृष्ठभूमि पर बनी यह कहानी बड़े पर्दे पर किस तरह का प्रभाव छोड़ती है और बॉक्स ऑफिस पर इसका प्रदर्शन कैसा रहता है।




