पहली बार टूर डी फ्रांस फेम्स के मंच पर पहुंची भारतीय साइकिलिस्ट, हर्षिता जाखड़ ने बढ़ाया देश का मान

पहली बार टूर डी फ्रांस फेम्स के मंच पर पहुंची भारतीय साइकिलिस्ट, हर्षिता जाखड़ ने बढ़ाया देश का मान

भारतीय साइक्लिंग के इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ गया है। राजस्थान की 19 वर्षीय साइकिलिस्ट हर्षिता जाखड़ ने ऐसी उपलब्धि हासिल की है, जो अब तक किसी भी भारतीय महिला खिलाड़ी के नाम नहीं थी। हर्षिता टूर डी फ्रांस फेम्स 2026 से जुड़ने वाली पहली भारतीय महिला बनी हैं। दुनिया की सबसे प्रतिष्ठित महिला रोड साइक्लिंग प्रतियोगिताओं में शामिल इस आयोजन में उनकी मौजूदगी भारतीय खेलों के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है।

हर्षिता का यह सफर कई वर्षों की मेहनत, अनुशासन और लगातार बेहतर प्रदर्शन का नतीजा है। राष्ट्रीय स्तर से अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचने वाली इस युवा खिलाड़ी ने अपने प्रदर्शन से यह साबित कर दिया है कि भारतीय साइकिलिस्ट भी अब दुनिया के सबसे बड़े आयोजनों में अपनी जगह बनाने लगे हैं।

दरअसल, हर्षिता का चयन यूनियन साइक्लिस्ट इंटरनेशनल (UCI) के वर्ल्ड साइक्लिंग टैलेंट प्रोग्राम के लिए किया गया था। यह कार्यक्रम दुनिया भर के उभरते हुए खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं का अनुभव देने के उद्देश्य से चलाया जाता है। इस पहल के तहत ऐसे खिलाड़ियों को चुना जाता है, जिनमें भविष्य में विश्व स्तरीय प्रतियोगिताओं में भाग लेने की क्षमता दिखाई देती है।

इस वर्ष आयोजित टैलेंट प्रोग्राम में दुनिया के केवल आठ साइकिलिस्टों को शामिल किया गया था। भारत की ओर से हर्षिता को इसमें जगह मिली। उनके साथ अफगानिस्तान, अल्जीरिया, चिली, इथियोपिया, नामीबिया और युगांडा जैसे देशों के खिलाड़ी भी इस विशेष कार्यक्रम का हिस्सा बने। सभी खिलाड़ियों को पेशेवर साइक्लिंग का माहौल समझने और विश्व स्तरीय आयोजन का अनुभव लेने का अवसर मिला।

स्विट्जरलैंड के एग्ल में आयोजित दूसरे चरण की शुरुआत के दौरान हर्षिता ने चयनित साइकिलिस्टों के समूह का नेतृत्व किया। मुख्य प्रतियोगिता शुरू होने से पहले सभी प्रतिभागियों ने लगभग 4.5 किलोमीटर की न्यूट्रलाइज्ड राइड पूरी की। इस दौरान खिलाड़ियों को रेस की प्रक्रियाओं, सुरक्षा व्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता के संचालन को करीब से समझने का मौका मिला।

टूर डी फ्रांस फेम्स को महिला रोड साइक्लिंग की सबसे प्रतिष्ठित प्रतियोगिता माना जाता है। यह UCI विमेंस वर्ल्ड टूर का सबसे बड़ा और सबसे लंबा आयोजन है। दुनिया की शीर्ष महिला साइकिलिस्ट हर साल इस प्रतियोगिता में हिस्सा लेती हैं और इसे महिला साइक्लिंग का सबसे बड़ा मंच माना जाता है।

इस बार का आयोजन 1 अगस्त को लुसाने से शुरू हुआ है और 9 अगस्त को नीस में समाप्त होगा। प्रतियोगिता के दौरान कई चरणों में अलग-अलग मार्गों पर रेस आयोजित की जा रही है। दुनिया की प्रमुख पेशेवर टीमें इसमें हिस्सा ले रही हैं और हर चरण खिलाड़ियों के लिए नई चुनौती लेकर आता है।

हर्षिता के प्रदर्शन और उनके चयन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सराहना हुई है। यूनियन साइक्लिस्ट इंटरनेशनल के अध्यक्ष डेविड लैपार्टिएंट ने उनकी प्रतिभा की प्रशंसा करते हुए विश्वास जताया कि आने वाले वर्षों में वह टूर डी फ्रांस फेम्स की मुख्य रेस में भी अपनी जगह बनाएंगी। उन्होंने कहा कि इस तरह के कार्यक्रम युवा खिलाड़ियों को भविष्य की बड़ी प्रतियोगिताओं के लिए तैयार करते हैं और हर्षिता निश्चित रूप से इस अनुभव का पूरा लाभ उठाएंगी।

उन्होंने यह भी कहा कि भारत जैसे बड़े देश से प्रतिभाशाली खिलाड़ियों का इस मंच तक पहुंचना महिला साइक्लिंग के विस्तार के लिए सकारात्मक संकेत है। उनके अनुसार, हर्षिता भविष्य में दुनिया की शीर्ष महिला साइकिलिस्टों के साथ प्रतिस्पर्धा करने की क्षमता रखती हैं।

हर्षिता फिलहाल पटियाला स्थित स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया के नेशनल सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में प्रशिक्षण ले रही हैं। यहां उन्हें आधुनिक सुविधाओं और अनुभवी प्रशिक्षकों का मार्गदर्शन मिल रहा है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा के लिए आवश्यक फिटनेस, तकनीक और रणनीति पर लगातार काम किया जा रहा है।

उनकी सफलता के पीछे उनके पिता राकेश जाखड़ का भी बड़ा योगदान है। राकेश स्वयं पूर्व साइकिलिस्ट रहे हैं और 2010 नई दिल्ली कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। खेल का अनुभव होने के कारण उन्होंने बचपन से ही हर्षिता को साइक्लिंग की बारीकियां सिखाईं और लगातार उनका मार्गदर्शन किया।

राकेश ने केवल पिता की भूमिका ही नहीं निभाई, बल्कि कोच के रूप में भी हर्षिता को तैयार किया। नियमित अभ्यास, कठिन ट्रेनिंग और अनुशासित जीवनशैली के जरिए उन्होंने बेटी को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर की चुनौतियों के लिए तैयार किया। यही मेहनत आज ऐतिहासिक उपलब्धि के रूप में सामने आई है।

हर्षिता ने पिछले कुछ वर्षों में कई बड़ी प्रतियोगिताओं में शानदार प्रदर्शन किया है। वर्ष 2025 के खेलो इंडिया यूथ गेम्स में उन्होंने तीन स्वर्ण पदक जीतकर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया। इस प्रदर्शन के बाद वह देश की सबसे होनहार युवा साइकिलिस्टों में शामिल हो गईं।

इसके अलावा 2024 एशियन जूनियर साइक्लिंग चैंपियनशिप में भी उन्होंने भारत के लिए एक रजत और दो कांस्य पदक जीते थे। इन उपलब्धियों ने उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई और आगे चलकर UCI टैलेंट प्रोग्राम में चयन का रास्ता भी मजबूत किया।

भारतीय साइक्लिंग अभी विकास के दौर में है, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में खिलाड़ियों का प्रदर्शन लगातार बेहतर हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि युवा खिलाड़ियों को इसी तरह अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं का अनुभव मिलता रहा तो भारत भविष्य में महिला रोड साइक्लिंग में भी मजबूत दावेदार बन सकता है।

टूर डी फ्रांस फेम्स जैसे आयोजन में शामिल होना किसी भी युवा खिलाड़ी के लिए सीखने का सबसे बड़ा अवसर माना जाता है। यहां खिलाड़ियों को दुनिया की सर्वश्रेष्ठ टीमों, कोचों और तकनीकी विशेषज्ञों के साथ समय बिताने का मौका मिलता है। इससे उन्हें खेल की नई तकनीकों, रणनीतियों और पेशेवर माहौल को समझने में मदद मिलती है।

भारत में साइक्लिंग को अभी उतनी लोकप्रियता नहीं मिली है जितनी अन्य खेलों को हासिल है, लेकिन हर्षिता जैसी खिलाड़ियों की सफलता से इस खेल के प्रति युवाओं का रुझान बढ़ने की उम्मीद है। खासतौर पर महिला खिलाड़ियों के लिए यह उपलब्धि प्रेरणा का स्रोत बन सकती है कि मेहनत और समर्पण के दम पर दुनिया के सबसे बड़े मंच तक पहुंचना संभव है।

हर्षिता जाखड़ की यह उपलब्धि केवल एक व्यक्तिगत रिकॉर्ड नहीं है, बल्कि भारतीय महिला साइक्लिंग के लिए नई संभावनाओं का संकेत भी है। यदि उनका प्रदर्शन इसी तरह जारी रहा तो आने वाले वर्षों में वह टूर डी फ्रांस फेम्स की मुख्य प्रतियोगिता में भारत का प्रतिनिधित्व करती नजर आ सकती हैं। उनकी यह ऐतिहासिक उपलब्धि आने वाली पीढ़ी के खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा बनेगी और भारतीय साइक्लिंग को वैश्विक स्तर पर नई पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।