अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच लंबे समय से चला आ रहा सीमा विवाद और सुरक्षा तनाव एक बार फिर गंभीर रूप लेता दिखाई दे रहा है। मंगलवार देर रात पाकिस्तान द्वारा अफगानिस्तान के कई सीमावर्ती क्षेत्रों में किए गए मिसाइल हमलों के बाद दोनों देशों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। अफगान तालिबान सरकार का कहना है कि इन हमलों में 13 नागरिकों की जान चली गई, जबकि पाकिस्तान ने दावा किया है कि कार्रवाई आतंकवादी ठिकानों के खिलाफ की गई थी और इसमें 26 भारत समर्थित आतंकवादी मारे गए हैं।
तालिबान प्रशासन के अनुसार पाकिस्तानी सेना ने अफगानिस्तान के पूर्वी और दक्षिण-पूर्वी हिस्सों में स्थित कई इलाकों को निशाना बनाया। अफगान अधिकारियों का आरोप है कि हमले ऐसे क्षेत्रों में किए गए जहां आम नागरिक रहते थे। मृतकों में बड़ी संख्या बच्चों की बताई जा रही है। तालिबान के मुताबिक मारे गए लोगों में 11 बच्चे, एक महिला और एक बुजुर्ग व्यक्ति शामिल हैं, जबकि कई अन्य लोग घायल हुए हैं। घायलों में महिलाओं की संख्या अधिक बताई गई है।
अफगानिस्तान की ओर से कहा गया कि पाकिस्तान के लड़ाकू विमानों और मिसाइलों ने देश के हवाई क्षेत्र का उल्लंघन करते हुए कुनार, खोस्त और पक्तिका प्रांतों में कई स्थानों पर हमले किए। तालिबान सरकार के मुख्य प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने इन हमलों की निंदा करते हुए कहा कि निर्दोष नागरिकों को निशाना बनाना किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने इसे अफगानिस्तान की संप्रभुता का खुला उल्लंघन बताया और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से इस मामले पर ध्यान देने की अपील की।
सोशल मीडिया पर जारी अपने बयान में मुजाहिद ने घायलों और प्रभावित क्षेत्रों की तस्वीरें भी साझा कीं। उनका कहना है कि हमलों से कई घर क्षतिग्रस्त हो गए और स्थानीय लोगों में भय का माहौल पैदा हो गया। तालिबान प्रशासन ने चेतावनी दी कि इस प्रकार की कार्रवाई दोनों देशों के संबंधों को और अधिक नुकसान पहुंचा सकती है।
दूसरी ओर पाकिस्तान ने तालिबान सरकार के आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। इस्लामाबाद का कहना है कि उसकी सेना ने किसी भी नागरिक आबादी को निशाना नहीं बनाया। पाकिस्तानी अधिकारियों के अनुसार यह ऑपरेशन खुफिया एजेंसियों से प्राप्त विशेष जानकारी के आधार पर चलाया गया था और इसका उद्देश्य सीमा पार सक्रिय आतंकवादी नेटवर्क को खत्म करना था।
पाकिस्तान के सूचना मंत्री अताउल्लाह तरार ने दावा किया कि कार्रवाई के दौरान 26 आतंकवादी मारे गए। उनके अनुसार जिन ठिकानों को निशाना बनाया गया, वहां आतंकियों के प्रशिक्षण केंद्र, हथियारों के भंडार और संचालन केंद्र मौजूद थे। पाकिस्तान का कहना है कि इन ठिकानों से उसकी सुरक्षा एजेंसियों और सैन्य प्रतिष्ठानों पर हमलों की योजना बनाई जा रही थी।
पाकिस्तानी सरकार का यह भी दावा है कि ऑपरेशन पूरी तरह सटीक था और केवल उन स्थानों पर हमला किया गया जहां आतंकवादी गतिविधियों की पुष्टि हुई थी। अधिकारियों के मुताबिक चार प्रमुख आतंकी ठिकानों को नष्ट कर दिया गया है, जिससे भविष्य में होने वाली संभावित आतंकी गतिविधियों को बड़ा झटका लगा है।
इस सैन्य कार्रवाई की पृष्ठभूमि में हाल ही में पाकिस्तान में हुआ एक बड़ा हमला भी माना जा रहा है। दरअसल 9 जून को खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में स्थित एक सीमा चौकी पर आतंकियों ने हमला कर दिया था। पाकिस्तानी सुरक्षा अधिकारियों के अनुसार इस हमले में छह सुरक्षाकर्मियों की मौत हो गई थी। जवाबी कार्रवाई में आठ हमलावर भी मारे गए थे।
पाकिस्तान का कहना है कि सीमा चौकी पर हमला करने वाले आतंकियों ने चौकी पर कब्जा करने की कोशिश की थी। इस घटना के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने सीमा पार सक्रिय संगठनों के खिलाफ अभियान तेज कर दिया। विश्लेषकों का मानना है कि ताजा मिसाइल हमले उसी रणनीति का हिस्सा हो सकते हैं।
पिछले कई वर्षों से पाकिस्तान लगातार यह आरोप लगाता रहा है कि तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) और अन्य उग्रवादी समूह अफगानिस्तान की धरती का उपयोग अपने ठिकानों के रूप में कर रहे हैं। पाकिस्तान के अनुसार ये संगठन अफगान सीमा के भीतर सुरक्षित ठिकानों से उसकी सेना और नागरिक इलाकों पर हमलों की योजना बनाते हैं।
हालांकि तालिबान सरकार इन आरोपों को निराधार बताती है। काबुल का कहना है कि अफगानिस्तान किसी भी ऐसे समूह को समर्थन या शरण नहीं देता जो पड़ोसी देशों के खिलाफ हिंसक गतिविधियों में शामिल हो। तालिबान का दावा है कि पाकिस्तान अपनी आंतरिक सुरक्षा चुनौतियों का दोष अफगानिस्तान पर मढ़ने की कोशिश करता है।
दोनों देशों के बीच तनाव केवल हालिया घटनाओं तक सीमित नहीं है। बीते एक वर्ष में सीमा पार सैन्य कार्रवाइयों और हवाई हमलों को लेकर कई बार विवाद सामने आ चुका है। अफगान अधिकारियों का आरोप है कि पाकिस्तान की सैन्य गतिविधियों के कारण बड़ी संख्या में नागरिक प्रभावित हुए हैं।
तालिबान सरकार ने यह भी दावा किया है कि मार्च 2026 में पाकिस्तान द्वारा किए गए एक बड़े हवाई हमले में सैकड़ों लोगों की जान चली गई थी। अफगान अधिकारियों के अनुसार उस समय काबुल में स्थित एक नशा मुक्ति केंद्र को निशाना बनाया गया था। तालिबान ने उस हमले को मानवता के खिलाफ अपराध करार दिया था।
अफगान पक्ष का कहना है कि उस घटना में 400 से अधिक लोगों की मौत हुई थी, हालांकि विभिन्न रिपोर्टों में लगभग 269 लोगों के मारे जाने की पुष्टि की गई थी। उस समय भी पाकिस्तान और अफगानिस्तान के दावों में भारी अंतर देखने को मिला था। काबुल ने आरोप लगाया था कि पाकिस्तानी विमानों ने राजधानी के कई हिस्सों पर बमबारी की, जबकि पाकिस्तान ने कहा था कि उसका निशाना केवल एक गोला-बारूद भंडार था।
मार्च की घटना के बाद दोनों देशों के संबंधों में और अधिक कड़वाहट आ गई थी। सीमा सुरक्षा, आतंकवाद और हवाई हमलों के मुद्दों पर लगातार विवाद बढ़ता गया। अब ताजा मिसाइल हमलों ने एक बार फिर क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि दोनों देशों के बीच संवाद की प्रक्रिया मजबूत नहीं हुई तो सीमा क्षेत्र में तनाव और बढ़ सकता है। पाकिस्तान जहां आतंकवाद के खिलाफ सख्त कार्रवाई की आवश्यकता पर जोर दे रहा है, वहीं अफगानिस्तान अपनी संप्रभुता और नागरिकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता जता रहा है।
फिलहाल दोनों देशों के दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी स्थिति पर नजर रखी जा रही है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि दोनों पड़ोसी देश कूटनीतिक बातचीत का रास्ता अपनाते हैं या सीमा पर टकराव की घटनाएं और बढ़ती हैं। वर्तमान हालात ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखने के लिए विश्वास बहाली और सुरक्षा सहयोग बेहद आवश्यक है।




