पंजाब में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले पंजाब यूनिवर्सिटी छात्र संघ (PUCSC) के चुनाव नतीजों ने राज्य की सियासत में नई चर्चा छेड़ दी है। छात्र संघ चुनाव में भारतीय जनता पार्टी की छात्र इकाई अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने लगातार दूसरी बार अध्यक्ष पद पर जीत दर्ज कर अपनी स्थिति मजबूत की है। हालांकि यह चुनाव विश्वविद्यालय परिसर तक सीमित था, लेकिन इसके परिणाम को पंजाब के युवा मतदाताओं के रुझान से जोड़कर देखा जा रहा है।
ABVP के उम्मीदवार अंकित बिढान ने अध्यक्ष पद पर अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी आम आदमी पार्टी समर्थित छात्र संगठन ASA Punjab के आदिल बराड़ को 506 मतों के अंतर से पराजित किया। अंकित बिढान को कुल 3,149 वोट मिले, जबकि आदिल बराड़ 2,637 मतों के साथ दूसरे स्थान पर रहे। कांग्रेस की छात्र इकाई NSUI के उम्मीदवार गुरमन सिद्धू को 2,263 वोट मिले और वह तीसरे स्थान पर रहे।
इस परिणाम ने पंजाब की राजनीति में खासतौर पर आम आदमी पार्टी और कांग्रेस के लिए नई चिंता पैदा कर दी है। इसका कारण यह है कि पंजाब यूनिवर्सिटी में पढ़ने वाले छात्रों का एक बड़ा हिस्सा पंजाब के अलग-अलग जिलों और सामाजिक वर्गों से आता है। ऐसे में विश्वविद्यालय परिसर में बनने वाले राजनीतिक रुझानों को राज्य के युवा वर्ग की संभावित सोच का संकेत माना जाता है।
लगातार दूसरी जीत से ABVP का बढ़ा प्रभाव
ABVP की यह लगातार दूसरी जीत संगठन के लिए इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि विश्वविद्यालय के छात्र संघ चुनाव में अलग-अलग राजनीतिक विचारधाराओं से जुड़े छात्र संगठन सक्रिय रूप से हिस्सा लेते हैं। अध्यक्ष पद पर दोबारा जीत हासिल करने से ABVP ने परिसर में अपनी पकड़ को मजबूत होने का संदेश दिया है।
अंकित बिढान की जीत का अंतर भी राजनीतिक रूप से चर्चा का विषय बना हुआ है। उन्हें 3,149 वोट मिले, जबकि दूसरे नंबर पर रहे आदिल बराड़ उनसे 506 वोट पीछे रहे। वहीं NSUI के गुरमन सिद्धू को 2,263 वोट मिले। इस तरह तीन प्रमुख संगठनों के बीच मुकाबला काफी प्रतिस्पर्धी रहा, लेकिन अंतिम परिणाम ABVP के पक्ष में गया।
पंजाब यूनिवर्सिटी में पढ़ने वाले छात्रों में करीब 65 प्रतिशत पंजाब के विभिन्न जिलों से आते हैं। यही वजह है कि छात्र संघ चुनाव को केवल कैंपस की राजनीति तक सीमित नहीं माना जाता। राजनीतिक दल भी इन चुनावों पर नजर रखते हैं, क्योंकि यहां सक्रिय युवा आगे चलकर पंजाब की राजनीति और सामाजिक गतिविधियों में भूमिका निभा सकते हैं।
AAP-कांग्रेस के लिए क्यों अहम है नतीजा?
पंजाब में विधानसभा चुनाव की तैयारी के बीच युवा मतदाताओं को अपने पक्ष में करना सभी राजनीतिक दलों के लिए महत्वपूर्ण है। राज्य में आम आदमी पार्टी सत्ता में है, जबकि कांग्रेस और शिरोमणि अकाली दल सहित अन्य दल भी अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं।
ऐसे में पंजाब यूनिवर्सिटी के चुनाव में ABVP की जीत को भाजपा के लिए उत्साह बढ़ाने वाला परिणाम माना जा रहा है। खासतौर पर इसलिए क्योंकि मुकाबले में आम आदमी पार्टी से जुड़े छात्र संगठन का उम्मीदवार दूसरे स्थान पर रहा, जबकि NSUI तीसरे स्थान पर रही।
हालांकि छात्र संघ चुनाव के नतीजों को सीधे विधानसभा चुनाव का परिणाम मानना उचित नहीं होगा। विश्वविद्यालय में मतदान करने वाले छात्र एक सीमित मतदाता समूह हैं और उनके मुद्दे राज्य के आम मतदाताओं से अलग हो सकते हैं। इसके बावजूद यह चुनाव राजनीतिक दलों को युवाओं के बीच अपनी स्वीकार्यता और संगठनात्मक सक्रियता का आकलन करने का अवसर जरूर देता है।
SAD की छात्र इकाई से गठबंधन ने बढ़ाई चर्चा
इस चुनाव का एक और महत्वपूर्ण पहलू मतदान से ठीक पहले ABVP और शिरोमणि अकाली दल की छात्र इकाई Students Organisation of India (SOI) के बीच हुआ गठबंधन रहा।
31 अगस्त को मतदान से एक दिन पहले दोनों संगठनों के बीच समझौते की घोषणा हुई। इस गठबंधन ने चुनावी मुकाबले को और दिलचस्प बना दिया। पंजाब की राजनीति में भाजपा और अकाली दल लंबे समय तक सहयोगी रहे हैं। दोनों दलों के बीच गठबंधन टूटने के बावजूद चुनावों से पहले दोबारा साथ आने की संभावनाओं को लेकर राजनीतिक चर्चाएं समय-समय पर उठती रही हैं।
भाजपा की ओर से पंजाब में अपने दम पर सभी 117 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ने का दावा किया जा रहा है। पार्टी लगातार संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने और राज्य में अपना स्वतंत्र राजनीतिक आधार तैयार करने पर जोर दे रही है। इसके बावजूद पंजाब की विपक्षी पार्टियों के बीच यह चर्चा बनी रहती है कि विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा और अकाली दल के बीच किसी तरह का राजनीतिक समझौता हो सकता है।
ऐसे में छात्र संघ चुनाव में ABVP और SOI का साथ आना भी राजनीतिक विश्लेषकों के लिए दिलचस्प घटनाक्रम रहा। हालांकि छात्र संगठनों का चुनावी गठबंधन सीधे तौर पर विधानसभा चुनाव में दोनों दलों के बीच गठबंधन की पुष्टि नहीं करता।
Gen-Z के रुख को लेकर लगाए जा रहे थे कयास
इस बार छात्र संघ चुनाव को लेकर एक और धारणा काफी चर्चा में रही। माना जा रहा था कि हालिया घटनाक्रमों के कारण Gen-Z छात्रों के बीच सरकार और पारंपरिक राजनीतिक दलों को लेकर नाराजगी देखने को मिल सकती है।
नीट परीक्षा से जुड़े विवाद के बाद दिल्ली में युवाओं की ओर से हुए प्रदर्शनों ने भी इस चर्चा को हवा दी थी। इसके बाद कयास लगाए जा रहे थे कि पंजाब यूनिवर्सिटी छात्र संघ चुनाव में युवा मतदाता पारंपरिक राजनीतिक संगठनों के खिलाफ अपना अलग रुख दिखा सकते हैं।
लेकिन चुनाव परिणाम ने इन अनुमानों को पूरी तरह सही साबित नहीं किया। ABVP उम्मीदवार अंकित बिढान को सबसे अधिक वोट मिले और उन्होंने अध्यक्ष पद पर जीत हासिल की। इससे यह संकेत जरूर मिला कि कैंपस में Gen-Z मतदाताओं का रुख एकतरफा तरीके से किसी एक राजनीतिक धड़े के विरोध में नहीं रहा।
हालांकि इसका अर्थ यह भी नहीं निकाला जा सकता कि पंजाब का पूरा युवा वर्ग भाजपा के साथ खड़ा है। छात्र संघ चुनाव के परिणाम को राज्य के व्यापक युवा मतदाताओं की राजनीतिक पसंद का अंतिम संकेत मानना जल्दबाजी होगी।
जीत के बाद अंकित बिढान ने Gen-Z को दिया श्रेय
चुनाव में जीत हासिल करने के बाद अंकित बिढान ने इसे व्यक्तिगत उपलब्धि के बजाय Gen-Z की जीत बताया। उन्होंने कहा कि यह केवल उनकी जीत नहीं है, बल्कि Gen-Z की जीत है। उन्होंने युवाओं के बीच ABVP और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी का भी उल्लेख किया।
बिढान के बयान को भाजपा की छात्र राजनीति और युवा मतदाताओं के बीच पार्टी की पहुंच के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। ABVP लंबे समय से विश्वविद्यालयों में छात्र राजनीति के जरिए युवाओं के बीच अपना संगठन मजबूत करती रही है। पंजाब यूनिवर्सिटी में लगातार दूसरी बार अध्यक्ष पद जीतना इसी संगठनात्मक विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।
विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक दलों की बढ़ी सक्रियता
पंजाब में विधानसभा चुनाव जैसे-जैसे नजदीक आएंगे, युवा मतदाताओं पर राजनीतिक दलों का फोकस और बढ़ने की संभावना है। राज्य की राजनीति में युवाओं से जुड़े मुद्दे—रोजगार, शिक्षा, नशे की समस्या, प्रतियोगी परीक्षाएं, विदेश जाने की प्रवृत्ति और उद्यमिता—पहले से ही प्रमुख विषय बने हुए हैं।
ऐसे माहौल में पंजाब यूनिवर्सिटी छात्र संघ चुनाव का परिणाम भाजपा के लिए मनोवैज्ञानिक बढ़त के रूप में देखा जा सकता है। दूसरी ओर, आम आदमी पार्टी और कांग्रेस के लिए यह संकेत है कि विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में अपने छात्र संगठनों को अधिक सक्रिय करने तथा युवा वर्ग के साथ सीधा संवाद बढ़ाने की जरूरत है।
फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगी कि पीयू छात्र संघ चुनाव का असर आगामी विधानसभा चुनाव के मतदान पर कितना पड़ेगा। लेकिन इतना जरूर है कि चुनाव परिणाम ने पंजाब की सियासत में युवा मतदाताओं को लेकर नई बहस शुरू कर दी है। ABVP की लगातार दूसरी जीत ने भाजपा को उत्साहित किया है, जबकि AAP और कांग्रेस के सामने कैंपस से लेकर राज्य स्तर तक युवाओं के बीच अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत करने की चुनौती बढ़ गई है।



