पंजाब में तेजी से गिरते भूजल स्तर के बीच आम आदमी पार्टी ने राज्य के लिए राहत देने वाले आंकड़े सामने रखे हैं। पार्टी का दावा है कि प्रदेश में भूजल के अत्यधिक दोहन की रफ्तार अब पहले के मुकाबले कम हुई है और कई भूजल ब्लॉकों की स्थिति में भी सुधार दर्ज किया गया है। आम आदमी पार्टी के राज्य मीडिया प्रभारी बलतेज पन्नू ने सोमवार को केंद्रीय भूजल बोर्ड के ताजा आकलन का हवाला देते हुए कहा कि पंजाब के सामने मौजूद जल संकट की दिशा में बदलाव के शुरुआती संकेत दिखाई देने लगे हैं।
पन्नू के मुताबिक मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार की ओर से किसानों को नहरी पानी उपलब्ध कराने, सिंचाई के लिए नहरों के इस्तेमाल को बढ़ाने और ट्यूबवेल पर निर्भरता कम करने के लिए उठाए गए कदमों का असर अब भूजल के आंकड़ों में दिखाई दे रहा है। उन्होंने कहा कि पंजाब में भूजल का अत्यधिक दोहन अभी भी गंभीर चुनौती बना हुआ है, लेकिन पिछले कुछ वर्षों के आंकड़े यह संकेत दे रहे हैं कि स्थिति लगातार बिगड़ने के बजाय अब सुधार की ओर बढ़ रही है।
भूजल दोहन की दर में आई गिरावट
बलतेज पन्नू ने बताया कि वर्ष 2021-22 में पंजाब में भूजल दोहन की दर 163.80 प्रतिशत दर्ज की गई थी। इसके बाद इसमें लगातार गिरावट आई। वर्ष 2025 में यह दर घटकर 156.36 प्रतिशत रह गई और 2025-26 के आकलन में यह 152.22 प्रतिशत दर्ज की गई।
उनका कहना है कि करीब चार वर्षों की अवधि में भूजल दोहन की दर में 11.58 प्रतिशत अंक की कमी आई है। इसी अवधि में सालाना भूजल दोहन की मात्रा भी लगभग 28.01 अरब घन मीटर से घटकर 26.32 अरब घन मीटर रह गई है।
पन्नू ने इन आंकड़ों को पंजाब के लिए महत्वपूर्ण बताया। उनका कहना था कि राज्य की कृषि लंबे समय से भूजल पर अत्यधिक निर्भर रही है और धान जैसी अधिक पानी मांगने वाली फसलों के कारण ट्यूबवेल से लगातार पानी निकाला जाता रहा है। ऐसे में भूजल दोहन में मामूली कमी भी लंबे समय में महत्वपूर्ण असर डाल सकती है।
153 में से 95 ब्लॉकों में सुधार का दावा
आम आदमी पार्टी नेता के अनुसार पंजाब के कुल 153 भूजल आकलन ब्लॉकों में से 95 ब्लॉकों में पिछले आकलन की तुलना में सुधार दर्ज किया गया है। उन्होंने कहा कि भूजल संकट के लिहाज से गंभीर स्थिति वाले ब्लॉकों की संख्या भी कम हुई है।
पन्नू के मुताबिक पहले राज्य में 10 ब्लॉक गंभीर श्रेणी में आते थे, लेकिन अब ऐसे ब्लॉकों की संख्या घटकर छह रह गई है। इसके साथ ही चार ब्लॉक ऐसे हैं, जो अब सुरक्षित श्रेणी में पहुंच गए हैं।
इनमें फाजिल्का जिले का अरनीवाला, फिरोजपुर का मक्खू, होशियारपुर का हाजीपुर और पठानकोट का नरोट जैमल सिंह शामिल हैं। इसके अलावा 14 अन्य भूजल ब्लॉकों में भी उल्लेखनीय सुधार दर्ज किए जाने का दावा किया गया है।
पार्टी ने इसे सरकार की जल प्रबंधन नीतियों के सकारात्मक परिणाम के तौर पर पेश किया है। हालांकि राज्य के कई हिस्सों में भूजल की स्थिति अभी भी चिंताजनक है और बड़ी संख्या में ब्लॉक अत्यधिक दोहन की श्रेणियों में बने हुए हैं।
बारिश के साथ नहरी पानी भी बन रहा भूजल पुनर्भरण का आधार
बलतेज पन्नू ने भूजल पुनर्भरण के आंकड़ों का भी उल्लेख किया। उनके अनुसार पंजाब में कुल सालाना भूजल पुनर्भरण लगभग 19.14 अरब घन मीटर है। इसमें बारिश से करीब 5.53 अरब घन मीटर और नहरी पानी के माध्यम से लगभग 5.5 अरब घन मीटर पानी के पुनर्भरण का अनुमान है।
सरकार की रणनीति में नहरी नेटवर्क को मजबूत करना इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि नहरों से खेतों तक पानी पहुंचने पर सिंचाई के लिए किसानों की ट्यूबवेल पर निर्भरता कम हो सकती है। इसके अलावा नहरों के माध्यम से पहुंचने वाला पानी कुछ परिस्थितियों में जमीन के भीतर पानी के पुनर्भरण में भी योगदान देता है।
पन्नू ने कहा कि राज्य में जल संरक्षण को केवल भूजल निकालने की मात्रा कम करने तक सीमित नहीं रखा जा रहा, बल्कि पानी की उपलब्धता के वैकल्पिक स्रोतों को मजबूत करने पर भी ध्यान दिया जा रहा है।
नहरी पानी के इस्तेमाल में बड़ा बदलाव
AAP नेता ने दावा किया कि पंजाब में सिंचाई के लिए नहरी पानी के उपयोग में पिछले कुछ वर्षों में बड़ा बदलाव आया है। उनके अनुसार वर्ष 2022 में राज्य में नहरी पानी का इस्तेमाल लगभग 21 प्रतिशत था, जो अब बढ़कर 80 से 82 प्रतिशत के स्तर तक पहुंच गया है।
उन्होंने बताया कि सरकार ने इस दिशा में नहरों की उपलब्धता बढ़ाने और पुराने जल ढांचे को बहाल करने के लिए कई कदम उठाए हैं। सरकार के अनुसार राज्य में 14,100 नहरों को चालू किया गया है। इसके साथ ही 400 किलोमीटर से अधिक लंबाई वाली बंद नहरों को दोबारा बहाल किया गया है, जबकि 1,000 किलोमीटर से अधिक नहरों को पक्का करने का काम किया गया है।
सरकार का तर्क है कि नहरी नेटवर्क के विस्तार और मरम्मत से खेतों तक सीधे नहरी पानी पहुंचाने में मदद मिली है। इससे किसानों को सिंचाई के लिए भूमिगत जल निकालने की जरूरत अपेक्षाकृत कम पड़ रही है।
कृषि क्षेत्र अभी भी भूजल का सबसे बड़ा उपभोक्ता
पंजाब में भूजल संकट की गंभीरता को इस बात से समझा जा सकता है कि राज्य में निकाले जाने वाले भूजल का सबसे बड़ा हिस्सा कृषि क्षेत्र में इस्तेमाल होता है।
बलतेज पन्नू के अनुसार पंजाब में कुल 26.32 अरब घन मीटर भूजल निकाला जा रहा है। इसमें से लगभग 24.95 अरब घन मीटर पानी कृषि गतिविधियों के लिए इस्तेमाल होता है। इसका मतलब है कि भूजल संरक्षण की किसी भी रणनीति की सफलता काफी हद तक खेती में पानी की खपत कम करने और वैकल्पिक सिंचाई व्यवस्था विकसित करने पर निर्भर करेगी।
इसी वजह से नहरी पानी की उपलब्धता बढ़ाने के अलावा फसल विविधीकरण और कम पानी वाली फसलों को बढ़ावा देने की नीति को भी अहम माना जाता है। पंजाब लंबे समय से धान की खेती के कारण बढ़ते जल संकट का सामना कर रहा है। ऐसे में सिंचाई के लिए नहरी पानी का अधिक इस्तेमाल भूजल संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकता है।
सरकार ने विपक्ष को भी घेरा
भूजल से जुड़े आंकड़ों को लेकर बलतेज पन्नू ने पिछली सरकारों पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि अकाली दल, भाजपा और कांग्रेस की सरकारों के दौरान पंजाब में पानी की समस्या लगातार गंभीर होती गई, लेकिन इसे रोकने के लिए प्रभावी स्तर पर पर्याप्त काम नहीं हुआ।
उन्होंने कहा कि पहले जल संरक्षण को लेकर घोषणाएं और राजनीतिक दावे तो किए गए, लेकिन नहरों के ढांचे को मजबूत करने और खेतों तक नहरी पानी पहुंचाने के लिए जिस स्तर पर काम की जरूरत थी, वह नहीं हुआ।
पन्नू ने दावा किया कि मौजूदा सरकार ने जल प्रबंधन को प्राथमिकता देते हुए नहरों को दोबारा सक्रिय करने, बंद नहरों को बहाल करने और सिंचाई व्यवस्था को मजबूत करने पर ध्यान दिया। उनके अनुसार इसका असर अब भूजल दोहन के आंकड़ों में नजर आने लगा है।
संकट खत्म नहीं, लेकिन दिशा बदलने का दावा
आम आदमी पार्टी ने इन आंकड़ों को पंजाब के लिए सकारात्मक संकेत जरूर बताया है, लेकिन पार्टी नेता ने यह भी स्वीकार किया कि राज्य का भूजल संकट अभी खत्म नहीं हुआ है। पंजाब के कई हिस्सों में भूजल का स्तर लगातार चिंता का विषय बना हुआ है और कृषि क्षेत्र में पानी की खपत कम करना अभी भी बड़ी चुनौती है।
विशेषज्ञों और नीति निर्माताओं के लिए भी सबसे बड़ा सवाल यही है कि भूजल दोहन में आई कमी को लंबे समय तक कैसे कायम रखा जाए। यदि नहरी पानी की उपलब्धता बढ़ती है, किसानों को समय पर सिंचाई का पानी मिलता है और अधिक पानी खपत वाली फसलों पर निर्भरता घटती है, तो भूजल संरक्षण की प्रक्रिया को गति मिल सकती है।
पन्नू ने कहा कि ताजा आंकड़े इस बात की उम्मीद जगाते हैं कि पंजाब में जल संकट की स्थिति को बदला जा सकता है। उनके मुताबिक भूजल दोहन में कमी और 95 ब्लॉकों में सुधार यह संकेत देता है कि राज्य सही दिशा में आगे बढ़ रहा है।
फिलहाल पंजाब के लिए यह सुधार शुरुआती चरण में है। राज्य में भूजल को सुरक्षित स्तर तक लाने के लिए नहरी पानी के विस्तार, फसल विविधीकरण, सिंचाई तकनीकों में बदलाव और किसानों की भागीदारी जैसे कदमों को लगातार आगे बढ़ाना होगा। यदि यह रुझान आने वाले वर्षों में भी जारी रहता है, तो पंजाब के लिए लंबे समय से चली आ रही भूजल संकट की चुनौती से निपटने की उम्मीद मजबूत हो सकती है।



