पीयू में शोध और नवाचार को नई उड़ान देने पर जोर, उपराष्ट्रपति बोले- असफलताओं से सीखकर आगे बढ़ें युवा शोधकर्ता

पीयू में शोध और नवाचार को नई उड़ान देने पर जोर, उपराष्ट्रपति बोले- असफलताओं से सीखकर आगे बढ़ें युवा शोधकर्ता

पंजाब यूनिवर्सिटी के चांसलर एवं भारत के उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने शुक्रवार को पंजाब यूनिवर्सिटी का दौरा कर विश्वविद्यालय में शोध, नवाचार और तकनीकी विकास को बढ़ावा देने के लिए नई सुविधाओं का उद्घाटन किया। उपराष्ट्रपति बनने के बाद पंजाब यूनिवर्सिटी में उनका यह पहला दौरा था। उन्होंने विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों और शोधकर्ताओं को संबोधित करते हुए शिक्षा एवं अनुसंधान को देश के विकास से जोड़ने पर जोर दिया। साथ ही युवाओं से नशे से दूर रहने और अपने भविष्य को सकारात्मक दिशा में ले जाने का आह्वान किया।

उपराष्ट्रपति ने कार्यक्रम की शुरुआत सोफिस्टिकेटेड एनालिटिकल इंस्ट्रूमेंट फैसिलिटी एवं सेंट्रल इंस्ट्रूमेंटेशन लैबोरेटरीज (एसएआईएफ-सीआईएल) में स्थापित एडवांस्ड इंस्ट्रूमेंटेशन फैसिलिटी के उद्घाटन से की। इसके साथ ही उन्होंने पंजाब यूनिवर्सिटी टेक इनोवेशन फोरम (पीयू-टीआईएफ) का भी शुभारंभ किया। इन दोनों पहलों को विश्वविद्यालय में आधुनिक शोध सुविधाओं के विस्तार और शोध से जुड़े विचारों को तकनीकी एवं व्यावसायिक अवसरों में बदलने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।

अत्याधुनिक उपकरणों से मजबूत होगा शोध का आधार

सीपी राधाकृष्णन ने कहा कि किसी भी उच्च शिक्षण संस्थान को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने में आधुनिक प्रयोगशालाओं और अत्याधुनिक वैज्ञानिक उपकरणों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। पीयू में स्थापित की गई नई एडवांस्ड इंस्ट्रूमेंटेशन फैसिलिटी के माध्यम से शोधकर्ताओं को कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में अत्याधुनिक तकनीक उपलब्ध हो सकेगी।

उन्होंने बताया कि इस सुविधा में एटॉमिक फोर्स माइक्रोस्कोप, रमन स्पेक्ट्रोमीटर, डीएनए सीक्वेंसर, फ्लो साइटोमीटर और एफटीआईआर स्पेक्ट्रोमीटर जैसे आधुनिक उपकरण शामिल किए गए हैं। इन उपकरणों की मदद से नैनो टेक्नोलॉजी, मैटेरियल साइंस, पर्यावरण विज्ञान, जीनोमिक्स और इससे जुड़े अन्य वैज्ञानिक क्षेत्रों में शोध को नई गति मिल सकती है।

उन्होंने कहा कि आधुनिक वैज्ञानिक सुविधाओं को विश्वविद्यालय तक पहुंचाने और शोध का बेहतर वातावरण तैयार करने के लिए वह अपनी ओर से हरसंभव सहयोग का प्रयास करेंगे। उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन, शिक्षकों, विद्यार्थियों और शोधकर्ताओं से भी अपील की कि वे उपलब्ध संसाधनों का अधिकतम उपयोग करते हुए पीयू को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए सामूहिक प्रयास करें।

बायो-नेस्ट से पीयू-टीआईएफ तक पहुंचा नवाचार का सफर

उपराष्ट्रपति ने पंजाब यूनिवर्सिटी में नवाचार के क्षेत्र में हुए बदलावों का उल्लेख करते हुए बायो-नेस्ट से पीयू-टीआईएफ तक के सफर को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि बायो-नेस्ट को सेक्शन-8 की गैर-लाभकारी कंपनी के रूप में पंजाब यूनिवर्सिटी टेक इनोवेशन फोरम में बदलना केवल संस्थागत बदलाव नहीं है, बल्कि शोध और तकनीक को उद्यमिता से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।

उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों में पैदा होने वाले नए विचार तभी व्यापक प्रभाव पैदा कर सकते हैं, जब उन्हें उद्योग, निवेशकों, इनक्यूबेटरों और अन्य तकनीकी संस्थानों का सहयोग मिले। अकादमिक संस्थानों और उद्योग के बीच मजबूत तालमेल स्थापित कर शोध आधारित तकनीकों को बाजार और समाज तक पहुंचाया जा सकता है।

राधाकृष्णन ने कहा कि विश्वविद्यालयों में होने वाला शोध केवल प्रयोगशालाओं और शोध पत्रों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। शोध से ऐसे उत्पाद, सेवाएं और समाधान विकसित होने चाहिए, जो समाज की वास्तविक समस्याओं को दूर करने में मदद करें और युवाओं के लिए रोजगार एवं स्वरोजगार के नए रास्ते खोलें।

युवाओं से कहा- नाकामी को सीख में बदलें

विद्यार्थियों और युवा शोधकर्ताओं को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि विज्ञान और अनुसंधान का रास्ता चुनौतियों से भरा होता है। ऐसे में किसी प्रयोग या शोध में असफलता मिलने पर निराश होने के बजाय उससे सीख लेकर आगे बढ़ना चाहिए।

उन्होंने युवा वैज्ञानिकों से आग्रह किया कि वे विज्ञान को स्पष्ट उद्देश्य के साथ आगे बढ़ाएं। उनका शोध केवल अकादमिक उपलब्धि तक सीमित न हो, बल्कि उसका लाभ समाज के व्यापक वर्ग तक पहुंचना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रयोगशालाओं और कक्षाओं में विकसित होने वाले विचारों को रोजगार, नवाचार और नए अवसरों में बदलने की आवश्यकता है।

उन्होंने विद्यार्थियों को अपनी ऊर्जा और प्रतिभा को रचनात्मक दिशा में लगाने की सलाह देते हुए नशे से दूर रहने का संदेश भी दिया। उन्होंने कहा कि युवा देश की सबसे बड़ी ताकत हैं और उनकी प्रतिभा का इस्तेमाल राष्ट्र निर्माण के लिए होना चाहिए।

पीयू को विश्वस्तरीय संस्थान बनाने के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी

उपराष्ट्रपति ने कहा कि पंजाब यूनिवर्सिटी की पहचान केवल एक शिक्षण संस्थान के रूप में नहीं, बल्कि लंबे समय से चली आ रही अकादमिक और शोध परंपरा के केंद्र के रूप में रही है। उन्होंने विश्वविद्यालय की वर्ष 1882 से चली आ रही विरासत का उल्लेख करते हुए कहा कि पीयू ने देश को अनेक प्रतिष्ठित नेता, न्यायविद, वैज्ञानिक, खिलाड़ी और लोकसेवक दिए हैं।

उन्होंने कहा कि इस गौरवशाली विरासत को आगे बढ़ाते हुए विश्वविद्यालय को 21वीं सदी की जरूरतों के अनुरूप विश्वस्तरीय उच्च शिक्षा और शोध केंद्र बनाने की दिशा में काम करना होगा। इसके लिए केवल विश्वविद्यालय प्रशासन के प्रयास पर्याप्त नहीं होंगे। शिक्षक, विद्यार्थी, शोधकर्ता, पूर्व विद्यार्थी और उद्योग जगत सभी को इसमें भागीदार बनना होगा।

उन्होंने विश्वविद्यालय समुदाय से पीयू को विश्वस्तरीय संस्थान बनाने के लिए नए सुझाव देने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि जमीनी स्तर से आने वाले व्यावहारिक सुझाव विश्वविद्यालय की नीतियों और भविष्य की योजनाओं को अधिक प्रभावी बना सकते हैं।

सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी दिए निर्देश

कार्यक्रम के दौरान उपराष्ट्रपति ने विश्वविद्यालय परिसर में पीएचडी छात्र की दुर्भाग्यपूर्ण मौत का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि घटना के बाद उन्होंने तत्काल पूरे कैंपस की सुरक्षा व्यवस्था का व्यापक ऑडिट कराने के निर्देश दिए थे।

उन्होंने बताया कि इस संबंध में एक आंतरिक समिति का गठन किया गया है, जो विश्वविद्यालय परिसर में मौजूदा सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा करेगी और अपनी विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि विद्यार्थियों और कर्मचारियों की सुरक्षा तथा उनका कल्याण विश्वविद्यालय की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में होना चाहिए।

उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षा संस्थान तभी बेहतर तरीके से आगे बढ़ सकते हैं, जब वहां विद्यार्थियों और कर्मचारियों के लिए सुरक्षित एवं सकारात्मक वातावरण उपलब्ध हो।

भारत में उच्च शिक्षा और शोध के विस्तार का जिक्र

सीपी राधाकृष्णन ने देश में उच्च शिक्षा और वैज्ञानिक अनुसंधान के क्षेत्र में हो रहे बदलावों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारत तेजी से गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, वैज्ञानिक शोध और नवाचार के वैश्विक केंद्र के रूप में अपनी स्थिति मजबूत कर रहा है।

उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में उच्च शिक्षा और वैज्ञानिक अनुसंधान के क्षेत्र में किए जा रहे प्रयासों का उल्लेख करते हुए कहा कि देश की युवा प्रतिभा को आधुनिक संसाधन और बेहतर अवसर उपलब्ध कराने पर जोर दिया जा रहा है। उन्होंने विश्वविद्यालयों से भी अपील की कि वे वैश्विक स्तर पर हो रहे बदलावों के अनुरूप अपनी शिक्षा और शोध प्रणाली को विकसित करें।

विकसित भारत के लक्ष्य से जोड़ने का आह्वान

उपराष्ट्रपति ने पीयू में शुरू की गई नई वैज्ञानिक सुविधाओं और पीयू-टीआईएफ को विकसित भारत और आत्मनिर्भर भारत के व्यापक लक्ष्य से जोड़ते हुए कहा कि विश्वविद्यालयों की प्रयोगशालाओं में होने वाला शोध देश की आर्थिक और सामाजिक प्रगति में योगदान दे सकता है।

उन्होंने कहा कि भारत को आत्मनिर्भर बनाने के लिए केवल बड़े उद्योगों की आवश्यकता नहीं है, बल्कि विश्वविद्यालयों और शोध संस्थानों में विकसित होने वाली तकनीकों, स्टार्टअप और नवाचारों को भी प्रोत्साहन देना जरूरी है। पीयू-टीआईएफ जैसी पहल शोधकर्ताओं को अपने विचारों को आगे ले जाने और उन्हें व्यावहारिक रूप देने के लिए बेहतर मंच उपलब्ध करा सकती है।

उन्होंने विश्वास जताया कि नई एडवांस्ड इंस्ट्रूमेंटेशन फैसिलिटी और पीयू-टीआईएफ आने वाले समय में पंजाब यूनिवर्सिटी के शोध एवं नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करेंगे। इससे विद्यार्थियों और शोधकर्ताओं को नई तकनीकों पर काम करने का अवसर मिलेगा और विश्वविद्यालय से निकलने वाले विचारों को उद्योग एवं समाज तक पहुंचाने की संभावनाएं बढ़ेंगी।

पुस्तक का भी किया विमोचन

कार्यक्रम के दौरान उपराष्ट्रपति ने एक पुस्तक का विमोचन भी किया। इस अवसर पर पंजाब के राज्यपाल एवं चंडीगढ़ के प्रशासक गुलाब चंद कटारिया, हरियाणा के राज्यपाल प्रो. असीम कुमार घोष, लोकसभा सांसद मनीष तिवारी, पंजाब यूनिवर्सिटी की कुलपति प्रो. मीनाक्षी गोयल सहित विश्वविद्यालय प्रशासन के अधिकारी, शिक्षक, शोधकर्ता और अन्य गणमान्य लोग मौजूद रहे।

कार्यक्रम में विश्वविद्यालय की अकादमिक उपलब्धियों, शोध गतिविधियों और भविष्य की योजनाओं को लेकर भी चर्चा हुई। उपराष्ट्रपति के दौरे को पीयू में वैज्ञानिक शोध, नवाचार और उद्यमिता को नई दिशा देने की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।