पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बड़ा उछाल, जियो-बीपी ने एक झटके में बढ़ाए दाम; पंजाब-हरियाणा में जेब पर बढ़ेगा बोझ

पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बड़ा उछाल, जियो-बीपी ने एक झटके में बढ़ाए दाम; पंजाब-हरियाणा में जेब पर बढ़ेगा बोझ

देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है। निजी क्षेत्र की पेट्रोलियम कंपनी जियो-बीपी ने अपने पेट्रोल पंपों पर दोनों ईंधनों के दाम बढ़ा दिए हैं। कंपनी ने पेट्रोल की कीमत में 5 रुपये प्रति लीटर और डीजल के भाव में 3 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की है। नई दरें रविवार से लागू हो चुकी हैं। इस फैसले का असर खास तौर पर पंजाब और हरियाणा में दिखाई दे रहा है, जहां जियो-बीपी के ग्राहकों को अब पहले के मुकाबले अधिक कीमत चुकानी पड़ रही है। पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ने से निजी पंपों पर ईंधन भरवाने वाले वाहन चालकों का खर्च बढ़ना तय है। परिवहन, माल ढुलाई और रोजाना अपने वाहनों से सफर करने वाले लोगों के लिए भी यह बदलाव महत्वपूर्ण है। हालांकि, अलग-अलग शहरों और पेट्रोल पंपों पर स्थानीय करों तथा अन्य कारकों के कारण अंतिम कीमत में अंतर हो सकता है।

पंजाब और हरियाणा में क्या हैं पेट्रोल-डीजल के नए भाव?

जियो-बीपी की ओर से की गई बढ़ोतरी के बाद पंजाब में कंपनी के पेट्रोल पंपों पर पेट्रोल की कीमत लगभग 108.54 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गई है। वहीं, डीजल के लिए ग्राहकों को करीब 99.19 रुपये प्रति लीटर देने पड़ रहे हैं। हरियाणा में स्थिति और महंगी नज़र आ रही है। यहां जियो-बीपी के पंपों पर पेट्रोल का भाव लगभग 109.80 रुपये प्रति लीटर और डीजल की कीमत करीब 97.75 रुपये प्रति लीटर बताई गई है।

इन दरों से साफ है कि निजी कंपनी के पंपों पर ईंधन भरवाने वाले लोगों को अपनी जेब पहले से अधिक ढीली करनी होगी। उदाहरण के तौर पर, अगर कोई ग्राहक 40 लीटर पेट्रोल खरीदता है, तो 5 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी के कारण उसे पहले की तुलना में 200 रुपये अतिरिक्त देने होंगे। इसी तरह 50 लीटर डीजल भरवाने पर 3 रुपये प्रति लीटर की वृद्धि से बिल में 150 रुपये का इजाफा होगा। जिन लोगों के वाहन ज्यादा चलते हैं या जिनका काम रोजाना लंबी दूरी तय करने पर निर्भर है, उनके मासिक ईंधन बजट पर इसका सीधा असर पड़ सकता है।

यह ध्यान रखना जरूरी है कि ऊपर दिए गए भाव जियो-बीपी के पंपों के लिए बताए गए आंकड़े हैं। इन्हें पूरे पंजाब या हरियाणा में सभी कंपनियों के पेट्रोल पंपों की एक समान कीमत नहीं माना जाना चाहिए। सरकारी तेल कंपनियों और अन्य निजी कंपनियों के यहां दरें अलग-अलग हो सकती हैं।

नायरा एनर्जी के बाद जियो-बीपी ने बढ़ाए दाम

पेट्रोलियम बाजार में हालिया बढ़ोतरी के बीच जियो-बीपी का फैसला इसलिए भी अहम है, क्योंकि पिछले करीब 10 दिनों में कीमतें बढ़ाने वाली यह दूसरी प्रमुख तेल कंपनी बताई जा रही है। इससे पहले 3 अक्टूबर को नायरा एनर्जी ने भी पेट्रोल और डीजल के दाम में बढ़ोतरी की थी। कंपनी ने पेट्रोल 5 रुपये और डीजल 3 रुपये प्रति लीटर महंगा किया था। इस बदलाव की जानकारी समाचार एजेंसी पीटीआई के हवाले से सामने आई थी।

नायरा एनर्जी रूस की तेल कंपनी रोसनेफ्ट के समर्थन वाली कंपनी है। उसके बाद जियो-बीपी की ओर से भी समान स्तर पर कीमतें बढ़ाए जाने से निजी ईंधन खुदरा कारोबार में लागत का दबाव सामने आया है। जियो-बीपी रिलायंस इंडस्ट्रीज और बीपी की साझेदारी से जुड़ी कंपनी है। कंपनी के इस कदम को समझने के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों, ईंधन की खरीद लागत और घरेलू बिक्री से होने वाली कमाई के बीच के अंतर को देखना जरूरी है।

जब कंपनियों के लिए ईंधन खरीदने या तैयार करने की लागत बढ़ जाती है, लेकिन खुदरा बिक्री की कीमतों में उसी अनुपात में बदलाव नहीं होता, तो उनके मुनाफे पर दबाव पड़ता है। निजी कंपनियों के सामने ऐसी स्थिति में कीमतें बढ़ाने या बिक्री की मात्रा सीमित करने जैसे विकल्प रह जाते हैं। हालांकि, किसी कंपनी के फैसले के पीछे वास्तविक कारणों की पुष्टि उसके आधिकारिक बयान और संबंधित आंकड़ों से ही की जा सकती है।

डीजल की बिक्री पर पहले भी लगाई गई थी सीमा

जियो-बीपी ने इससे पहले सितंबर में अपने कुछ पेट्रोल पंपों पर डीजल की बिक्री को एक बार में 50 लीटर तक सीमित कर दिया था। इस व्यवस्था के कारण अधिक मात्रा में डीजल खरीदने वाले ग्राहकों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता था। खासकर ट्रक, बस और अन्य भारी वाहनों के संचालकों के लिए ऐसी सीमा महत्वपूर्ण होती है, क्योंकि उनके वाहनों में एक बार में बड़ी मात्रा में ईंधन भरवाने की जरूरत पड़ सकती है।

इस मामले में केंद्र सरकार ने भी चिंता जताई थी। केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के सचिव नीरज मित्तल ने 1 अक्टूबर को कहा था कि सरकार निजी रिफाइनरी कंपनियों के साथ डीजल की बिक्री पर लगाई गई सीमाओं का मुद्दा उठाएगी। उन्होंने संकेत दिया था कि कंपनियों से इन प्रतिबंधों को हटाने के लिए कहा जाएगा।

डीजल की बिक्री पर सीमा लगाने और बाद में कीमतें बढ़ाने के घटनाक्रम से निजी ईंधन कारोबार के सामने मौजूद चुनौतियों पर ध्यान गया है। हालांकि, बिक्री की पाबंदी किन पंपों पर लागू थी और वर्तमान में उसकी क्या स्थिति है, इसकी जानकारी संबंधित कंपनी से पुष्टि करके ही मानी जानी चाहिए।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में महंगे कच्चे तेल ने बढ़ाई मुश्किल

पेट्रोल और डीजल की कीमतों में हो रही बढ़ोतरी के पीछे वैश्विक ऊर्जा बाजार की परिस्थितियां भी अहम मानी जा रही हैं। रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध तथा मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव ने तेल की आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता पैदा की है। जब प्रमुख तेल उत्पादक क्षेत्रों में संघर्ष बढ़ता है या आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका बनती है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आ सकती है। इसका असर उन देशों पर भी पड़ता है, जो अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात के जरिए पूरा करते हैं।

भारत भी कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में होने वाले बदलावों से प्रभावित होता है। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेजी आने के बावजूद देश में पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतें हर बार तुरंत नहीं बदलतीं। कीमतों पर सरकारी नीतियों, करों, कंपनियों की लागत और उनके व्यावसायिक फैसलों का भी असर पड़ता है। ऐसे में जब लंबे समय तक बिक्री मूल्य और वास्तविक लागत के बीच अंतर बना रहता है, तो तेल कंपनियों के लिए कारोबार चलाना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

नायरा एनर्जी और जियो-बीपी की ओर से की गई हालिया बढ़ोतरी इसी व्यापक स्थिति के बीच सामने आई है। फिर भी यह जरूरी है कि वैश्विक बाजार में कच्चे तेल के भाव और भारतीय पेट्रोल पंपों पर मिलने वाले ईंधन की कीमतों को एक ही चीज न समझा जाए। दोनों के बीच कई अन्य लागतें और नीतिगत कारक भी काम करते हैं।

विदेशों में ईंधन बेचना कंपनियों के लिए क्यों हो रहा है आकर्षक?

तेल कारोबार से जुड़ी कंपनियों के सामने एक बड़ी चुनौती घरेलू बाजार में बिक्री से होने वाली कमाई और अंतरराष्ट्रीय बाजार में निर्यात से मिलने वाले संभावित लाभ के बीच अंतर है। यदि विदेशों में पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतें ज्यादा मिल रही हों और देश के भीतर बिक्री मूल्य लागत के मुकाबले कम हो, तो रिफाइनरियों के लिए निर्यात अधिक लाभकारी विकल्प बन सकता है।

रेटिंग एजेंसी आईसीआरए के आकलन के अनुसार, 9 सितंबर तक निजी कंपनियों को पेट्रोल की बिक्री पर करीब 5 रुपये प्रति लीटर और डीजल पर लगभग 23 रुपये प्रति लीटर का नुकसान हो रहा था। उपलब्ध जानकारी में कच्चे तेल की कीमत 107 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर जाने का भी उल्लेख है। ऐसी स्थिति में रिफाइनिंग और ईंधन की बिक्री से जुड़े खर्चों पर दबाव बढ़ सकता है। हालांकि, नुकसान की वास्तविक मात्रा कंपनी, खरीद लागत, उत्पाद की गुणवत्ता और बिक्री के समय के अनुसार अलग-अलग हो सकती है।

निजी कंपनियों के लिए यह केवल कीमत बढ़ाने का मामला नहीं है, बल्कि उन्हें घरेलू ग्राहकों को ईंधन उपलब्ध कराने और अपने कारोबार को आर्थिक रूप से टिकाऊ बनाए रखने के बीच संतुलन भी बनाना पड़ता है। अगर घरेलू बाजार में बिक्री लगातार घाटे में होती है, तो कंपनियां कीमतों में संशोधन, बिक्री प्रबंधन या दूसरे व्यावसायिक उपायों पर विचार कर सकती हैं।

सरकारी तेल कंपनियों पर बढ़ सकता है दबाव

निजी पेट्रोल पंपों पर कीमतें बढ़ने या बिक्री से जुड़ी पाबंदियों के बाद ग्राहक दूसरे विकल्पों की ओर जा सकते हैं। ऐसे में इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (आईओसी), भारत पेट्रोलियम (बीपीसीएल) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम (एचपीसीएल) जैसे सरकारी तेल विपणन उपक्रमों के पंपों पर ग्राहकों की आवाजाही बढ़ने की संभावना रहती है। देश के खुदरा ईंधन बाजार में इन तीनों कंपनियों की संयुक्त हिस्सेदारी लगभग 90 प्रतिशत बताई गई है।

केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी के मुताबिक, सरकारी तेल कंपनियां लागत से कम कीमत पर ईंधन बेचने के कारण प्रतिदिन करीब 530 करोड़ रुपये का नुकसान उठा रही हैं। यह आंकड़ा सरकारी कंपनियों पर पड़ रहे वित्तीय दबाव को दर्शाता है। हालांकि, यह नुकसान केवल जियो-बीपी की कीमत बढ़ाने के कारण हुआ है, ऐसा निष्कर्ष निकालना सही नहीं होगा। इसके पीछे अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतें, घरेलू बिक्री दरें और कंपनियों की समग्र लागत जैसे कई कारण हो सकते हैं।

अगर निजी कंपनियों के पंपों पर ईंधन महंगा होता है, तो कुछ ग्राहक सरकारी पंपों को प्राथमिकता दे सकते हैं। इससे सरकारी कंपनियों की बिक्री बढ़ सकती है, लेकिन अधिक बिक्री अपने आप में अधिक मुनाफे की गारंटी नहीं होती। यदि कंपनियां लागत से कम कीमत पर पेट्रोल-डीजल बेच रही हैं, तो ज्यादा मात्रा में बिक्री के साथ उनका वित्तीय दबाव भी बना रह सकता है।

आम लोगों और परिवहन कारोबार पर क्या होगा असर?

पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बदलाव का असर केवल निजी वाहन चालकों तक सीमित नहीं रहता। डीजल का इस्तेमाल ट्रक, बस, मालवाहक वाहन और कृषि से जुड़े कई कार्यों में होता है। इसलिए इसकी कीमत बढ़ने से परिवहन कंपनियों की परिचालन लागत बढ़ सकती है। यदि यह खर्च आगे चलकर माल ढुलाई की दरों में शामिल होता है, तो कुछ वस्तुओं की कीमतों पर भी अप्रत्यक्ष दबाव पड़ सकता है। हालांकि, ऐसा असर कितना होगा, यह परिवहन लागत, प्रतिस्पर्धा और कारोबार की परिस्थितियों पर निर्भर करेगा।

पेट्रोल महंगा होने से रोजाना कार या दोपहिया वाहन का इस्तेमाल करने वाले लोगों का बजट भी प्रभावित हो सकता है। वहीं, पंजाब और हरियाणा में जियो-बीपी के पंपों पर ईंधन खरीदने वाले ग्राहकों के लिए नई दरों की जानकारी रखना जरूरी है। वाहन में पेट्रोल या डीजल भरवाने से पहले अलग-अलग कंपनियों के पंपों की कीमतों की तुलना करना उपयोगी हो सकता है।

फिलहाल जियो-बीपी ने पेट्रोल के दाम में 5 रुपये और डीजल के दाम में 3 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की है। नायरा एनर्जी भी इससे पहले समान स्तर पर कीमतें बढ़ा चुकी है। आगे कीमतों में क्या बदलाव होगा, यह अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार, कंपनियों की लागत और घरेलू बाजार की परिस्थितियों पर निर्भर करेगा। ग्राहकों के लिए सबसे जरूरी है कि वे अपने क्षेत्र के पेट्रोल पंपों पर लागू ताजा दरों की पुष्टि करें और उसी के अनुसार ईंधन खर्च की योजना बनाएं।