भारतीय शेयर बाजार में मंगलवार, 8 जुलाई 2026 को कारोबार की शुरुआत कमजोरी के साथ हुई। शुरुआती सत्र में ही निवेशकों के बीच सतर्कता का माहौल देखने को मिला, जिसका असर प्रमुख सूचकांकों पर साफ दिखाई दिया। शुरुआती कारोबार के दौरान बीएसई सेंसेक्स 500 अंकों से अधिक की गिरावट के साथ लगभग 77,600 के स्तर तक पहुंच गया, जबकि एनएसई निफ्टी करीब 150 अंक टूटकर 24,250 के आसपास कारोबार करता नजर आया। बाजार में आई इस गिरावट के पीछे वैश्विक बाजारों से मिले मिश्रित संकेत, चुनिंदा सेक्टरों में मुनाफावसूली और निवेशकों का सतर्क रुख प्रमुख कारण रहे।
लगातार दूसरे कारोबारी दिन बाजार में कमजोरी देखने से यह संकेत मिल रहा है कि निवेशक फिलहाल बड़े निवेश निर्णय लेने से बच रहे हैं। हालांकि बाजार में पूरी तरह से नकारात्मक माहौल नहीं कहा जा सकता, लेकिन प्रमुख सेक्टरों में बिकवाली का दबाव सूचकांकों पर भारी पड़ता दिखाई दिया।
शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स और निफ्टी पर दबाव
मंगलवार की शुरुआत में ही बाजार लाल निशान में खुला। शुरुआती घंटों के दौरान सेंसेक्स में 500 अंकों से अधिक की गिरावट दर्ज की गई और यह 77,600 के आसपास कारोबार करता दिखाई दिया। वहीं निफ्टी भी करीब 24,250 के स्तर तक फिसल गया। कारोबार के शुरुआती चरण में निवेशकों की ओर से नई खरीदारी सीमित रही, जबकि कई बड़े शेयरों में मुनाफावसूली का दौर देखने को मिला।
विश्लेषकों के अनुसार, पिछले कुछ सप्ताह में बाजार में आई तेजी के बाद कई निवेशकों ने अपने मुनाफे को सुरक्षित करने के लिए बिकवाली की। इसके अलावा वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों को लेकर बनी अनिश्चितता ने भी घरेलू निवेशकों के विश्वास को प्रभावित किया।
किन सेक्टरों में सबसे ज्यादा गिरावट रही
मंगलवार के शुरुआती कारोबार में सबसे अधिक दबाव चार प्रमुख सेक्टरों में देखने को मिला।
एनर्जी सेक्टर में कई बड़ी कंपनियों के शेयर कमजोर रहे, जिससे सेक्टर इंडेक्स में गिरावट दर्ज की गई।
आईटी सेक्टर में भी निवेशकों ने बिकवाली जारी रखी। अमेरिकी बाजारों में तकनीकी कंपनियों पर दबाव का असर भारतीय आईटी कंपनियों के शेयरों पर भी देखने को मिला।
बैंकिंग सेक्टर में मुनाफावसूली के चलते प्रमुख निजी और सरकारी बैंकों के शेयर लाल निशान में कारोबार करते दिखाई दिए। बैंकिंग शेयरों में कमजोरी का असर सीधे सेंसेक्स और निफ्टी दोनों पर पड़ा क्योंकि इन सूचकांकों में बैंकिंग कंपनियों का बड़ा योगदान होता है।
ऑटो सेक्टर भी दबाव में रहा। कई प्रमुख ऑटो कंपनियों के शेयरों में गिरावट दर्ज की गई, जिससे ऑटो इंडेक्स कमजोर बना रहा।
हालांकि कुछ डिफेंसिव सेक्टरों और चुनिंदा मिडकैप शेयरों में खरीदारी देखने को मिली, लेकिन उनका असर व्यापक बाजार को संभालने के लिए पर्याप्त नहीं रहा।
वैश्विक बाजारों के मिले-जुले संकेत
भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत पर वैश्विक बाजारों का भी असर देखने को मिला। एशियाई बाजारों में कारोबार के दौरान अलग-अलग तस्वीर दिखाई दी।
दक्षिण कोरिया का प्रमुख कोस्पी इंडेक्स गिरावट के साथ कारोबार करता दिखाई दिया। जापान का निक्केई इंडेक्स भी कमजोर रहा और उसमें उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई। दूसरी ओर हांगकांग का हैंगसेंग इंडेक्स मजबूती के साथ कारोबार करता नजर आया और उसमें अच्छी तेजी देखने को मिली।
एशियाई बाजारों के इस मिश्रित प्रदर्शन से निवेशकों के बीच स्पष्ट दिशा का अभाव दिखाई दिया। ऐसे माहौल में भारतीय बाजार ने भी सतर्क शुरुआत की।
अमेरिकी बाजारों की कमजोरी का असर
सोमवार को अमेरिकी शेयर बाजार भी दबाव में बंद हुए थे। डाउ जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज में हल्की गिरावट दर्ज की गई, जबकि तकनीकी शेयरों पर आधारित नैस्डैक इंडेक्स में एक प्रतिशत से अधिक की कमजोरी देखने को मिली। एसएंडपी 500 इंडेक्स भी गिरावट के साथ बंद हुआ।
अमेरिकी बाजारों में कमजोरी का सबसे बड़ा असर आईटी सेक्टर पर देखा गया। भारतीय आईटी कंपनियों का बड़ा कारोबार अमेरिका से जुड़ा होने के कारण वहां की बाजार चाल का असर घरेलू टेक शेयरों पर भी पड़ता है।
विदेशी निवेशकों की गतिविधियां क्या संकेत दे रही हैं
विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई/एफपीआई) की गतिविधियां फिलहाल मिश्रित संकेत दे रही हैं।
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार पिछले कारोबारी दिन विदेशी निवेशकों ने लगभग 393 करोड़ रुपये की शुद्ध खरीदारी की। पिछले सात कारोबारी दिनों के दौरान उन्होंने करीब 1,680 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे हैं।
हालांकि यदि पिछले 30 दिनों के आंकड़ों पर नजर डालें तो विदेशी निवेशकों की ओर से अब भी लगभग 11,819 करोड़ रुपये की शुद्ध बिकवाली दर्ज की गई है। इससे यह स्पष्ट होता है कि अल्पकाल में कुछ खरीदारी लौटने के बावजूद विदेशी निवेशक अभी पूरी तरह आक्रामक रुख में नहीं हैं।
बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि वैश्विक ब्याज दरों, डॉलर इंडेक्स और अंतरराष्ट्रीय आर्थिक परिस्थितियों के आधार पर विदेशी निवेशकों की रणनीति में बदलाव देखने को मिल सकता है।
घरेलू निवेशकों ने लंबी अवधि में दिया सहारा
घरेलू संस्थागत निवेशकों (डीआईआई) की भूमिका पिछले कुछ महीनों में भारतीय शेयर बाजार के लिए काफी महत्वपूर्ण रही है।
पिछले कारोबारी दिन डीआईआई ने लगभग 384 करोड़ रुपये की शुद्ध बिकवाली की, लेकिन यदि पिछले सात दिनों के आंकड़ों को देखें तो उन्होंने लगभग 3,239 करोड़ रुपये की खरीदारी की है।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि पिछले 30 दिनों के दौरान घरेलू संस्थागत निवेशकों ने करीब 53,100 करोड़ रुपये की मजबूत शुद्ध खरीदारी दर्ज की है। यही कारण है कि विदेशी निवेशकों की बिकवाली के बावजूद भारतीय बाजार में बड़ी गिरावट देखने को नहीं मिली।
विशेषज्ञों का मानना है कि म्यूचुअल फंडों में लगातार निवेश आने से घरेलू संस्थागत निवेशकों को बाजार में खरीदारी बनाए रखने में मदद मिल रही है।
सोमवार को भी कमजोर रहा था बाजार
मंगलवार की गिरावट से पहले सोमवार, 7 जुलाई को भी भारतीय शेयर बाजार कमजोरी के साथ बंद हुआ था।
उस दिन बीएसई सेंसेक्स लगभग 104 अंक गिरकर 78,181 के स्तर पर बंद हुआ था, जबकि निफ्टी 32 अंक टूटकर 24,399 के स्तर पर बंद हुआ था।
लगातार दो कारोबारी दिनों तक बाजार में दबाव बने रहने से यह संकेत मिलता है कि निवेशक फिलहाल तेजी से नए दांव लगाने के बजाय बाजार की दिशा स्पष्ट होने का इंतजार कर रहे हैं।
किन कारणों से बढ़ी बाजार में सतर्कता
मौजूदा समय में बाजार कई महत्वपूर्ण घरेलू और वैश्विक कारकों पर नजर बनाए हुए है।
इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं—
- वैश्विक आर्थिक संकेत
- प्रमुख केंद्रीय बैंकों की ब्याज दर नीति
- कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव
- डॉलर की मजबूती या कमजोरी
- विदेशी निवेशकों की खरीदारी और बिकवाली
- कंपनियों के पहली तिमाही के वित्तीय नतीजे
- वैश्विक भू-राजनीतिक घटनाक्रम
इनमें से किसी भी मोर्चे पर सकारात्मक या नकारात्मक खबर आने पर बाजार में तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।
निवेशकों के लिए क्या मायने रखती है यह गिरावट
विश्लेषकों का मानना है कि बाजार में समय-समय पर आने वाला करेक्शन सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा होता है। यदि मजबूत कंपनियों के मूलभूत आधार बेहतर बने रहते हैं, तो अल्पकालीन गिरावट लंबी अवधि के निवेशकों के लिए अवसर भी साबित हो सकती है।
हालांकि मौजूदा परिस्थितियों में जल्दबाजी में निवेश निर्णय लेने के बजाय कंपनियों के वित्तीय प्रदर्शन, मूल्यांकन और सेक्टर की स्थिति का विश्लेषण करना अधिक महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि आने वाले दिनों में कॉरपोरेट कंपनियों के तिमाही नतीजे बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। यदि उम्मीद से बेहतर परिणाम सामने आते हैं तो बाजार में फिर से खरीदारी लौट सकती है।
आगे किन संकेतों पर रहेगी बाजार की नजर
मंगलवार के शेष कारोबारी सत्र में निवेशकों की नजर कई महत्वपूर्ण संकेतकों पर बनी रहेगी। इनमें विदेशी निवेशकों की गतिविधियां, वैश्विक बाजारों की चाल, रुपये की स्थिति, कच्चे तेल की कीमतें और घरेलू संस्थागत निवेशकों की खरीदारी-बिकवाली प्रमुख रहेंगी।
यदि दिन के दौरान बैंकिंग और आईटी सेक्टर में खरीदारी लौटती है तो बाजार कुछ हद तक अपनी शुरुआती गिरावट से उबर सकता है। वहीं यदि बिकवाली का दबाव जारी रहता है तो सूचकांकों में और उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।
फिलहाल शुरुआती कारोबार में बाजार दबाव में बना हुआ है और निवेशक आने वाले आर्थिक संकेतों तथा कंपनियों के तिमाही नतीजों का इंतजार कर रहे हैं, जो आने वाले दिनों में भारतीय शेयर बाजार की अगली दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।




