बाजार में दबाव बढ़ा, सेंसेक्स 77,600 के करीब फिसला, निफ्टी भी लाल निशान में; एनर्जी और IT शेयरों में बिकवाली हावी

बाजार में दबाव बढ़ा, सेंसेक्स 77,600 के करीब फिसला, निफ्टी भी लाल निशान में; एनर्जी और IT शेयरों में बिकवाली हावी

शेयर बाजार में मंगलवार, 8 जुलाई को कारोबार की शुरुआत कमजोरी के साथ हुई और शुरुआती घंटों में ही प्रमुख सूचकांक लाल निशान में कारोबार करते दिखाई दिए। निवेशकों की सतर्कता और चुनिंदा सेक्टरों में बिकवाली के दबाव के कारण बीएसई सेंसेक्स 500 अंकों से अधिक टूटकर 77,600 के आसपास पहुंच गया, जबकि एनएसई निफ्टी भी करीब 150 अंक की गिरावट के साथ 24,250 के स्तर पर कारोबार करता नजर आया। बाजार में सबसे ज्यादा दबाव एनर्जी, आईटी, ऑटो और बैंकिंग सेक्टर के शेयरों पर देखने को मिला, जिससे व्यापक बाजार की धारणा भी कमजोर बनी रही।

सुबह के कारोबार के दौरान कई दिग्गज कंपनियों के शेयरों में बिकवाली बढ़ने से निवेशकों का रुझान सतर्क नजर आया। विशेषज्ञों का कहना है कि वैश्विक बाजारों से मिले मिश्रित संकेत, विदेशी निवेशकों की गतिविधियां और मुनाफावसूली जैसी वजहों ने घरेलू बाजार पर दबाव बनाया है। हालांकि कुछ सेक्टरों में खरीदारी भी देखने को मिली, लेकिन उसका असर प्रमुख सूचकांकों को संभालने के लिए पर्याप्त नहीं रहा।

वैश्विक बाजारों की बात करें तो एशियाई शेयर बाजारों में अलग-अलग तस्वीर देखने को मिली। दक्षिण कोरिया का कोस्पी इंडेक्स लगभग 133 अंक यानी 1.10 प्रतिशत की गिरावट के साथ 7,523 के स्तर पर कारोबार करता दिखाई दिया। वहीं जापान का निक्केई इंडेक्स भी करीब 498 अंक यानी 0.73 प्रतिशत फिसलकर 67,759 के स्तर पर पहुंच गया। दूसरी ओर हॉन्गकॉन्ग का हैंगसेंग इंडेक्स मजबूती के साथ कारोबार करता नजर आया और लगभग 600 अंकों यानी 2.19 प्रतिशत की तेजी के साथ 24,097 के स्तर पर पहुंच गया। एशियाई बाजारों के इस मिले-जुले प्रदर्शन का असर भारतीय बाजार की शुरुआत पर भी देखने को मिला।

अमेरिकी शेयर बाजारों का पिछला कारोबारी सत्र भी कमजोर रहा था। डाउ जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज करीब 131 अंक यानी 0.25 प्रतिशत गिरकर 52,925 पर बंद हुआ। वहीं तकनीकी कंपनियों पर आधारित नैस्डैक इंडेक्स में 302 अंकों यानी 1.16 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई और यह 25,819 के स्तर पर बंद हुआ। इसके अलावा एसएंडपी 500 इंडेक्स भी लगभग 34 अंक यानी 0.45 प्रतिशत टूटकर 7,504 के स्तर पर बंद हुआ। अमेरिकी बाजारों की इस कमजोरी का असर एशियाई बाजारों के साथ-साथ भारतीय निवेशकों के सेंटिमेंट पर भी पड़ा।

घरेलू बाजार में सेक्टरवार प्रदर्शन पर नजर डालें तो एनर्जी कंपनियों के शेयरों में सबसे ज्यादा दबाव देखा गया। इसके अलावा आईटी कंपनियों में भी बिकवाली बढ़ी, जिससे टेक्नोलॉजी इंडेक्स कमजोर रहा। बैंकिंग शेयरों में भी निवेशकों ने मुनाफावसूली की, जबकि ऑटो सेक्टर के कई प्रमुख शेयरों में गिरावट दर्ज की गई। इन चार प्रमुख सेक्टरों में आई कमजोरी ने सेंसेक्स और निफ्टी दोनों पर नकारात्मक असर डाला।

विदेशी और घरेलू संस्थागत निवेशकों के आंकड़े भी बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाते हैं। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII/FPI) ने पिछले कारोबारी दिन 393 करोड़ रुपये की शुद्ध खरीदारी की। वहीं पिछले सात दिनों में विदेशी निवेशकों ने कुल 1,680 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे हैं, लेकिन पिछले 30 दिनों का आंकड़ा अभी भी 11,819 करोड़ रुपये की शुद्ध बिकवाली दर्शाता है। इससे स्पष्ट है कि लंबी अवधि के नजरिए से विदेशी निवेशकों की रणनीति अभी पूरी तरह सकारात्मक नहीं हुई है।

दूसरी ओर घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) ने पिछले कारोबारी सत्र में 384 करोड़ रुपये की शुद्ध बिकवाली की। हालांकि यदि पिछले सात दिनों के आंकड़ों पर नजर डालें तो उन्होंने 3,239 करोड़ रुपये की शुद्ध खरीदारी की है। वहीं पिछले 30 दिनों में डीआईआई की ओर से 53,100 करोड़ रुपये की मजबूत खरीदारी दर्ज की गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि घरेलू संस्थागत निवेशकों की लगातार खरीदारी ने पिछले कुछ समय में बाजार को बड़ी गिरावट से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

बाजार विश्लेषकों का कहना है कि मौजूदा समय में निवेशक वैश्विक आर्थिक संकेतों, ब्याज दरों से जुड़े घटनाक्रम, कच्चे तेल की कीमतों और विदेशी निवेशकों की गतिविधियों पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। ऐसे माहौल में किसी भी सकारात्मक या नकारात्मक खबर का असर शेयर बाजार पर तेजी से देखने को मिल सकता है। फिलहाल निवेशकों का ध्यान कॉरपोरेट कंपनियों के तिमाही नतीजों और वैश्विक आर्थिक संकेतकों पर भी टिका हुआ है।

इससे पहले सोमवार, 7 जुलाई को भी भारतीय शेयर बाजार कमजोरी के साथ बंद हुआ था। उस दिन बीएसई सेंसेक्स 104 अंक गिरकर 78,181 के स्तर पर बंद हुआ था, जबकि निफ्टी 32 अंक टूटकर 24,399 पर बंद हुआ था। लगातार दूसरे कारोबारी दिन बाजार में दबाव देखने से यह संकेत मिल रहा है कि निवेशक फिलहाल बड़े दांव लगाने से बच रहे हैं और मुनाफावसूली का दौर जारी है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वैश्विक बाजारों से सकारात्मक संकेत मिलते हैं और विदेशी निवेशकों की खरीदारी बनी रहती है, तो बाजार में फिर से रिकवरी देखने को मिल सकती है। हालांकि निकट भविष्य में उतार-चढ़ाव जारी रहने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। ऐसे में निवेशकों को जल्दबाजी में फैसले लेने के बजाय मजबूत कंपनियों और लंबी अवधि के निवेश पर ध्यान देने की सलाह दी जा रही है।

फिलहाल शुरुआती कारोबार में बाजार पर दबाव साफ दिखाई दे रहा है। सेंसेक्स 77,600 के आसपास और निफ्टी 24,250 के करीब कारोबार कर रहा है। आने वाले कारोबारी घंटों में वैश्विक संकेतों, सेक्टरवार खरीदारी-बिकवाली और संस्थागत निवेशकों की गतिविधियों के आधार पर बाजार की आगे की दिशा तय होने की संभावना है।