माता-पिता बनने का फैसला किसी भी दंपति के जीवन का महत्वपूर्ण पड़ाव होता है। हालांकि कई लोग यह मान लेते हैं कि गर्भधारण केवल महिला की सेहत पर निर्भर करता है, जबकि वास्तविकता इससे अलग है। सफल गर्भधारण के लिए महिला और पुरुष दोनों की प्रजनन क्षमता (फर्टिलिटी) समान रूप से महत्वपूर्ण होती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार दुनिया भर में बड़ी संख्या में ऐसे दंपति हैं जिन्हें फर्टिलिटी से जुड़ी समस्याओं का सामना करना पड़ता है और इनमें पुरुष तथा महिला दोनों ही बराबर जिम्मेदार हो सकते हैं।
यही कारण है कि यदि आप प्रेग्नेंसी की योजना बना रहे हैं, तो पहले अपनी फर्टिलिटी को समझना, फर्टाइल विंडो की सही जानकारी रखना और जरूरत पड़ने पर आवश्यक मेडिकल जांच करवाना काफी लाभदायक साबित हो सकता है। इससे गर्भधारण में आने वाली संभावित परेशानियों की पहचान समय रहते हो जाती है और उचित इलाज शुरू किया जा सकता है।
महिलाओं की फर्टिलिटी किन बातों पर निर्भर करती है?
महिलाओं में फर्टिलिटी मासिक धर्म चक्र, हार्मोनल संतुलन और प्रजनन अंगों की कार्यक्षमता पर आधारित होती है। NCBI में प्रकाशित रिसर्च के मुताबिक, नियमित ओव्यूलेशन, स्वस्थ अंडाणु, सही हार्मोनल गतिविधि और सामान्य गर्भाशय गर्भधारण की संभावना को बढ़ाते हैं।
अंडों की संख्या और उनकी गुणवत्ता
महिलाएं जन्म से ही निश्चित संख्या में अंडाणुओं के साथ पैदा होती हैं। जन्म के समय ओवरी में लगभग 10 से 20 लाख अंडे मौजूद होते हैं, लेकिन जीवनभर इनमें से केवल कुछ सौ अंडे ही परिपक्व होकर ओव्यूलेशन के दौरान बाहर निकलते हैं।
उम्र बढ़ने के साथ इन अंडों की संख्या और गुणवत्ता दोनों में कमी आने लगती है। खासतौर पर 35 वर्ष की उम्र के बाद यह गिरावट अधिक तेज हो सकती है। यही वजह है कि इस आयु के बाद गर्भधारण की संभावना पहले की तुलना में कम होने लगती है।
हार्मोन का महत्वपूर्ण योगदान
महिलाओं में FSH, LH, एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन जैसे हार्मोन पूरे मासिक धर्म चक्र को नियंत्रित करते हैं। यही हार्मोन तय करते हैं कि अंडा कब परिपक्व होगा, कब रिलीज होगा और गर्भाशय की अंदरूनी परत भ्रूण के प्रत्यारोपण (इम्प्लांटेशन) के लिए कब तैयार होगी।
यदि इन हार्मोन का संतुलन बिगड़ जाए तो ओव्यूलेशन प्रभावित हो सकता है, जिससे गर्भधारण में दिक्कत आ सकती है।
गर्भाशय और फैलोपियन ट्यूब की भूमिका
फर्टिलिटी केवल अंडाणुओं तक सीमित नहीं है। गर्भाशय और फैलोपियन ट्यूब भी उतने ही महत्वपूर्ण होते हैं। यदि फैलोपियन ट्यूब बंद हो, गर्भाशय में फाइब्रॉएड हों या एंडोमेट्रियोसिस जैसी बीमारी मौजूद हो, तो निषेचित अंडे के सही स्थान तक पहुंचने और इम्प्लांट होने में बाधा आ सकती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि समय-समय पर फर्टिलिटी स्क्रीनिंग कराने से ऐसी समस्याओं का जल्दी पता लगाया जा सकता है, जिससे इलाज में आसानी होती है।
पुरुषों की फर्टिलिटी किन चीजों से प्रभावित होती है?
आमतौर पर लोगों का ध्यान केवल महिला की जांच पर जाता है, जबकि पुरुषों की प्रजनन क्षमता भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। NCBI की रिपोर्ट बताती है कि पुरुषों में फर्टिलिटी मुख्य रूप से स्पर्म के निर्माण, उनकी गुणवत्ता और उनकी सक्रियता पर निर्भर करती है।
हालांकि पुरुषों में जीवनभर नए स्पर्म बनते रहते हैं, लेकिन बढ़ती उम्र, कुछ बीमारियां और खराब जीवनशैली स्पर्म की गुणवत्ता को प्रभावित कर सकती हैं।
स्पर्म काउंट और मोटिलिटी
गर्भधारण के लिए केवल स्पर्म का मौजूद होना पर्याप्त नहीं है। उनकी संख्या उचित होनी चाहिए, उनका आकार सामान्य होना चाहिए और वे पर्याप्त गति से आगे बढ़ने में सक्षम होने चाहिए।
यदि स्पर्म की संख्या कम हो या उनकी मोटिलिटी कमजोर हो, तो अंडाणु तक पहुंचने और उसे निषेचित करने की संभावना कम हो सकती है। इसी वजह से सीमेन एनालिसिस को पुरुषों की फर्टिलिटी जांच का सबसे अहम टेस्ट माना जाता है।
हार्मोन भी निभाते हैं अहम भूमिका
पुरुषों में FSH, LH और टेस्टोस्टेरोन जैसे हार्मोन स्पर्म उत्पादन और प्रजनन क्षमता को नियंत्रित करते हैं। यदि इन हार्मोन में असंतुलन हो जाए तो स्पर्म बनने की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है और उनकी गुणवत्ता भी कम हो सकती है।
जीवनशैली का सीधा असर
विशेषज्ञों के अनुसार धूम्रपान, अत्यधिक शराब का सेवन, मोटापा, लगातार तनाव, अत्यधिक गर्म वातावरण में काम करना तथा जहरीले रसायनों के संपर्क में रहना स्पर्म की गुणवत्ता को नुकसान पहुंचा सकता है।
नियमित व्यायाम, संतुलित आहार, पर्याप्त नींद और नशे से दूरी जैसी आदतें पुरुषों की फर्टिलिटी को बेहतर बनाए रखने में मदद कर सकती हैं।
आखिर क्या होती है फर्टाइल विंडो?
गर्भधारण की योजना बनाने वाले दंपतियों के लिए फर्टाइल विंडो को समझना बेहद जरूरी माना जाता है। NHS के अनुसार ओव्यूलेशन से पहले के पांच दिन और ओव्यूलेशन वाला दिन मिलाकर कुल छह दिनों की अवधि को फर्टाइल विंडो कहा जाता है।
यही वह समय होता है जब महिला के गर्भधारण की संभावना सबसे अधिक रहती है। यदि इस अवधि के दौरान असुरक्षित संबंध बनाए जाएं तो कंसीव करने की संभावना सामान्य दिनों की तुलना में काफी अधिक हो सकती है।
अनियमित पीरियड्स और PCOS में क्यों होती है मुश्किल?
जिन महिलाओं के पीरियड्स नियमित नहीं होते या जिन्हें पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (PCOS) की समस्या होती है, उनमें हर महीने एक ही समय पर ओव्यूलेशन नहीं होता। ऐसे में केवल कैलेंडर देखकर फर्टाइल विंडो का अनुमान लगाना सही नहीं माना जाता।
WHO और NHS के अनुसार ऐसी महिलाओं को ओव्यूलेशन प्रेडिक्टर किट का उपयोग करने, बेसल बॉडी टेम्प्रेचर की निगरानी करने और सर्वाइकल म्यूकस में होने वाले बदलावों पर ध्यान देने की सलाह दी जाती है।
कुछ मामलों में डॉक्टर समय-समय पर अल्ट्रासाउंड कराने की भी सलाह देते हैं, ताकि यह पता चल सके कि ओव्यूलेशन कब हो रहा है और गर्भधारण की संभावना किस समय सबसे अधिक है।
प्रेग्नेंसी प्लान करने से पहले कौन-कौन से टेस्ट जरूरी हैं?
यदि कोई दंपति परिवार बढ़ाने की योजना बना रहा है, तो डॉक्टर कुछ जरूरी जांच कराने की सलाह दे सकते हैं। इन जांचों से फर्टिलिटी से जुड़ी संभावित समस्याओं की पहचान पहले ही हो जाती है।
महिलाओं के लिए जरूरी जांच
AMH टेस्ट: यह ब्लड टेस्ट ओवरी में मौजूद अंडाणुओं के रिजर्व का अनुमान लगाने में मदद करता है। इससे यह समझा जा सकता है कि ओवरी में कितने अंडे शेष हैं।
FSH, LH और Estradiol टेस्ट: इन जांचों से हार्मोन के स्तर और ओव्यूलेशन की स्थिति का आकलन किया जाता है।
TSH और Prolactin टेस्ट: थायरॉयड और अन्य हार्मोनल असंतुलन की पहचान के लिए ये जांच महत्वपूर्ण मानी जाती हैं, क्योंकि इनका असर सीधे फर्टिलिटी पर पड़ सकता है।
पेल्विक अल्ट्रासाउंड: इस जांच से गर्भाशय और ओवरी की संरचना देखी जाती है तथा फाइब्रॉएड, सिस्ट या अन्य समस्याओं का पता लगाया जा सकता है।
HSG टेस्ट: इस जांच के जरिए यह देखा जाता है कि फैलोपियन ट्यूब खुली हैं या उनमें किसी प्रकार की रुकावट मौजूद है।
पुरुषों के लिए सबसे जरूरी जांच
पुरुषों के लिए सीमेन एनालिसिस सबसे महत्वपूर्ण टेस्ट माना जाता है। इसमें स्पर्म काउंट, उनकी गति (मोटिलिटी), आकार (मॉर्फोलॉजी) और कुल गुणवत्ता की जांच की जाती है। यदि रिपोर्ट में कोई असामान्यता मिलती है तो डॉक्टर आगे की जांच और उपचार की सलाह देते हैं।
कब लेनी चाहिए फर्टिलिटी विशेषज्ञ की सलाह?
यदि महिला की उम्र 35 वर्ष से कम है और एक वर्ष तक नियमित असुरक्षित संबंध बनाने के बावजूद गर्भधारण नहीं हो रहा है, तो फर्टिलिटी विशेषज्ञ से परामर्श लेना चाहिए।
वहीं यदि महिला की उम्र 35 वर्ष या उससे अधिक है, तो छह महीने तक प्रयास करने के बाद भी सफलता नहीं मिलने पर डॉक्टर से मिलना बेहतर माना जाता है। समय रहते जांच कराने से समस्या का कारण जल्दी पता चल सकता है और इलाज शुरू होने से गर्भधारण की संभावना बढ़ सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि फर्टिलिटी से जुड़ी जानकारी, सही समय पर जांच और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने से कई दंपतियों के लिए परिवार बढ़ाने का सपना आसान हो सकता है। इसलिए प्रेग्नेंसी की योजना बनाने से पहले महिला और पुरुष दोनों को अपनी प्रजनन क्षमता पर समान रूप से ध्यान देना चाहिए और आवश्यकता पड़ने पर विशेषज्ञ से सलाह लेने में देरी नहीं करनी चाहिए।




