बोर्ड की बैठक के बाद आया फैसला, हरमनप्रीत ने कप्तानी छोड़ी; स्मृति को मिली तीनों फॉर्मेट की कमान

बोर्ड की बैठक के बाद आया फैसला, हरमनप्रीत ने कप्तानी छोड़ी; स्मृति को मिली तीनों फॉर्मेट की कमान

भारतीय महिला क्रिकेट टीम के नेतृत्व में बड़ा बदलाव हुआ है। लंबे समय तक टीम की कप्तान रहीं हरमनप्रीत कौर ने सभी फॉर्मेट की कप्तानी छोड़ने का फैसला किया है। 37 वर्षीय हरमनप्रीत ने मंगलवार को सोशल मीडिया के जरिए अपने इस फैसले की जानकारी दी। उनका यह ऐलान उस बैठक के ठीक एक दिन बाद सामने आया, जिसमें भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) के साथ टीम के भविष्य, नेतृत्व और आगे की रणनीति पर अहम चर्चा हुई थी। अब भारतीय महिला टीम की कमान स्मृति मंधाना को सौंपी गई है। इस बदलाव के साथ भारतीय क्रिकेट में हरमनप्रीत के एक लंबे कप्तानी युग का अंत होगा और स्मृति के नेतृत्व में टीम एक नए दौर में प्रवेश करेगी।

BCCI की बैठक के बाद सामने आया बड़ा फैसला

कप्तानी में बदलाव का फैसला अचानक सामने जरूर आया, लेकिन इसके पीछे टीम प्रबंधन और बोर्ड के स्तर पर चर्चा हो चुकी थी। गुवाहाटी में एक दिन पहले हुई BCCI की बैठक में हरमनप्रीत कौर, उपकप्तान स्मृति मंधाना और मुख्य कोच अमोल मजूमदार मौजूद रहे थे। इस बैठक में भारतीय महिला क्रिकेट टीम के भविष्य और नेतृत्व से जुड़े मुद्दों पर विचार-विमर्श किया गया। इसके बाद हरमनप्रीत ने कप्तानी छोड़ने की घोषणा कर दी। वहीं, टीम की अगली कप्तान के तौर पर स्मृति मंधाना का नाम सामने आया। अब तीनों फॉर्मेट में टीम की अगुवाई की जिम्मेदारी स्मृति के कंधों पर होगी। यह बदलाव ऐसे समय में हुआ है जब भारतीय महिला क्रिकेट टीम पिछले कुछ वर्षों में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार अपनी स्थिति मजबूत करती रही है।

वर्ल्ड कप जीतने वाली पहली भारतीय महिला कप्तान बनी थीं हरमनप्रीत

हरमनप्रीत कौर के कप्तानी करियर की सबसे बड़ी उपलब्धियों में भारतीय टीम को पहली बार महिला वनडे वर्ल्ड कप जिताना शामिल है। 2025 में भारत ने महिला वनडे वर्ल्ड कप का खिताब अपने नाम किया और हरमनप्रीत उस ऐतिहासिक टीम की कप्तान थीं। इस जीत ने भारतीय महिला क्रिकेट के इतिहास में उनका नाम हमेशा के लिए दर्ज कर दिया। इससे पहले भारतीय महिला टीम कई बड़े टूर्नामेंट में खिताब के करीब पहुंची थी, लेकिन विश्व कप जीतने का सपना पूरा नहीं हो पाया था। हरमनप्रीत की कप्तानी में टीम ने वह उपलब्धि हासिल की, जिसका भारतीय महिला क्रिकेट लंबे समय से इंतजार कर रहा था। इस कारण कप्तानी छोड़ने के बाद भी भारतीय क्रिकेट में उनका नेतृत्व हमेशा एक खास अध्याय के रूप में याद किया जाएगा।

एशिया कप से लेकर एशियन गेम्स तक टीम को दिलाए बड़े खिताब

हरमनप्रीत के नेतृत्व में भारतीय महिला टीम ने सिर्फ वर्ल्ड कप में ही सफलता हासिल नहीं की। उनकी कप्तानी के दौरान टीम ने 2012, 2016, 2022 और 2026 में एशिया कप का खिताब भी जीता। हालांकि 2012 के एशिया कप में उनकी भूमिका अलग रही थी। उस टूर्नामेंट के अधिकांश मुकाबलों में मिताली राज ने भारतीय टीम की कप्तानी की थी, जबकि हरमनप्रीत ने फाइनल मुकाबले में टीम की कमान संभाली थी। इसके बाद वह भारतीय महिला क्रिकेट के नेतृत्व का महत्वपूर्ण चेहरा बनती गईं।

एशियन गेम्स में भी हरमनप्रीत की कप्तानी में भारत ने शानदार प्रदर्शन किया। भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने लगातार दो बार एशियन गेम्स में स्वर्ण पदक हासिल किया। 2022 के हांगझोउ एशियन गेम्स में भारत ने श्रीलंका को हराकर गोल्ड मेडल जीता था। इसके बाद 2026 के नागोया एशियन गेम्स में भी भारतीय टीम ने श्रीलंका को मात देकर स्वर्ण पदक अपने नाम किया। लगातार दो एशियन गेम्स में गोल्ड जीतना भारतीय महिला क्रिकेट की बढ़ती ताकत का संकेत रहा और इन अभियानों में हरमनप्रीत का नेतृत्व महत्वपूर्ण रहा।

इंस्टाग्राम पोस्ट में भावुक नजर आईं हरमनप्रीत

कप्तानी छोड़ने की घोषणा करते हुए हरमनप्रीत ने इसे अपने करियर के सबसे आसान फैसलों में से एक नहीं बताया। उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि भारतीय टीम की कप्तानी उनके लिए केवल एक जिम्मेदारी नहीं रही, बल्कि इसके साथ कई वर्षों की यादें, भावनाएं, त्याग और महत्वपूर्ण पल जुड़े हुए हैं। उन्होंने संकेत दिया कि कप्तानी के दौरान हासिल किए गए अनुभव और यादें उनके साथ लंबे समय तक रहेंगी। हरमनप्रीत के इस संदेश के बाद भारतीय क्रिकेट प्रशंसकों के बीच उनके कप्तानी कार्यकाल को लेकर भावुक प्रतिक्रियाएं भी देखने को मिलीं। टीम की कप्तानी छोड़ने के बावजूद वह भारतीय महिला क्रिकेट के लिए एक अनुभवी और प्रभावशाली खिलाड़ी के रूप में उपलब्ध रहेंगी।

2017 में खेली थी 171 रन की ऐतिहासिक पारी

हरमनप्रीत कौर की पहचान सिर्फ एक कप्तान के तौर पर नहीं रही है। उन्होंने अपने बल्ले से भी भारतीय क्रिकेट में कई यादगार अध्याय लिखे हैं। 2017 महिला वनडे वर्ल्ड कप के सेमीफाइनल में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ उनकी 171 रन की नाबाद पारी आज भी महिला क्रिकेट की सबसे चर्चित पारियों में गिनी जाती है। उस मुकाबले में हरमनप्रीत ने आक्रामक बल्लेबाजी करते हुए ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाजों पर दबाव बनाया था। उनकी इस पारी ने भारत को फाइनल तक पहुंचाने में बड़ी भूमिका निभाई और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में हरमनप्रीत की पहचान एक विस्फोटक बल्लेबाज के रूप में और मजबूत हुई।

इसके अलावा 2018 में न्यूजीलैंड के खिलाफ उन्होंने टी-20 इंटरनेशनल क्रिकेट में शतक लगाया था। वह भारत की पहली महिला क्रिकेटर बनी थीं, जिन्होंने T20I में शतक बनाने की उपलब्धि हासिल की। इस रिकॉर्ड ने भी उनके करियर को खास बनाया और यह साबित किया कि वह बड़े मंच पर मैच का रुख बदलने की क्षमता रखती थीं।

इंटरनेशनल क्रिकेट में कई बड़े रिकॉर्ड उनके नाम

हरमनप्रीत कौर ने अपने लंबे अंतरराष्ट्रीय करियर के दौरान कई ऐसे रिकॉर्ड बनाए हैं, जिनके कारण उनका नाम विश्व क्रिकेट की प्रमुख महिला खिलाड़ियों में शामिल हुआ। वह 200 अंतरराष्ट्रीय टी-20 मुकाबले खेलने वाली दुनिया की पहली क्रिकेटर बनी थीं। फरवरी 2026 में उन्होंने महिला क्रिकेट में सबसे ज्यादा अंतरराष्ट्रीय मैच खेलने का रिकॉर्ड भी अपने नाम किया। उस समय तक उनके नाम 382 अंतरराष्ट्रीय मुकाबले दर्ज हो चुके थे।

इसके बाद सितंबर 2026 में उन्होंने एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की। हरमनप्रीत दुनिया की पहली क्रिकेटर बनीं, जिन्होंने 150 टी-20 इंटरनेशनल मुकाबलों में कप्तानी की। लगातार लंबे समय तक टीम की कमान संभालना उनके करियर की निरंतरता और भारतीय महिला क्रिकेट में उनकी अहम भूमिका को दर्शाता है। कप्तानी से हटने के बाद भी इन रिकॉर्ड्स के कारण उनका नाम महिला क्रिकेट के इतिहास में लंबे समय तक चर्चा में रहेगा।

सम्मान भी कम नहीं रहे

क्रिकेट के मैदान पर उपलब्धियों के साथ हरमनप्रीत कौर को देश में कई प्रतिष्ठित सम्मानों से भी नवाजा गया। 2017 में उन्हें क्रिकेट के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए अर्जुन अवॉर्ड से सम्मानित किया गया था। इसके बाद 2026 में उन्हें देश के चौथे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म श्री से सम्मानित किया गया। यह सम्मान उनके लंबे अंतरराष्ट्रीय करियर और भारतीय क्रिकेट में योगदान को देखते हुए महत्वपूर्ण माना गया।

2009 में शुरू हुआ था अंतरराष्ट्रीय सफर

हरमनप्रीत कौर का अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट सफर 2009 में शुरू हुआ था। उन्होंने पाकिस्तान के खिलाफ वनडे मुकाबले से भारत के लिए अंतरराष्ट्रीय डेब्यू किया था। इसके बाद उन्होंने तीनों फॉर्मेट में भारतीय टीम का प्रतिनिधित्व किया और धीरे-धीरे टीम की प्रमुख खिलाड़ियों में अपनी जगह बनाई। अपने करियर में उन्होंने 8 टेस्ट, 164 वनडे और 210 टी-20 इंटरनेशनल मैच खेले हैं। बल्लेबाजी के अलावा जरूरत पड़ने पर गेंदबाजी और मैदान पर आक्रामक नेतृत्व के कारण भी वह टीम की महत्वपूर्ण सदस्य बनी रहीं।

अब स्मृति मंधाना के सामने नई चुनौती

हरमनप्रीत के कप्तानी से हटने के बाद अब स्मृति मंधाना के सामने भारतीय महिला क्रिकेट को आगे ले जाने की बड़ी जिम्मेदारी होगी। वह पहले से ही टीम की प्रमुख बल्लेबाज और उपकप्तान के तौर पर महत्वपूर्ण भूमिका निभाती रही हैं। अब उन्हें तीनों फॉर्मेट में नेतृत्व करना होगा। स्मृति के सामने सबसे बड़ी चुनौती हरमनप्रीत के दौर में मिली सफलताओं की निरंतरता बनाए रखना होगी। भारतीय टीम से अब उम्मीद की जाएगी कि वह बड़े अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट में अपने प्रदर्शन को और मजबूत करे।

हरमनप्रीत का कप्तानी कार्यकाल भारतीय महिला क्रिकेट के बदलाव के दौर का अहम हिस्सा रहा है। उनकी अगुवाई में टीम ने बड़े टूर्नामेंट जीते, ऐतिहासिक रिकॉर्ड बनाए और विश्व क्रिकेट में अपनी मजबूत पहचान कायम की। अब कप्तानी की जिम्मेदारी स्मृति मंधाना को सौंपे जाने के साथ टीम के नेतृत्व का नया अध्याय शुरू होगा। हरमनप्रीत मैदान पर कप्तान की भूमिका से जरूर बाहर हो रही हैं, लेकिन उनका अनुभव और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में लंबा सफर भारतीय टीम के लिए आगे भी बेहद महत्वपूर्ण रहने वाला है।