भारतीय जनता पार्टी ने लंबे इंतजार के बाद अपनी नई राष्ट्रीय टीम का ऐलान कर दिया है। पार्टी अध्यक्ष नितिन नवीन ने संगठन में अनुभव और नई पीढ़ी के नेताओं के बीच संतुलन बनाने की कोशिश की है। नई टीम में अलग-अलग राज्यों, सामाजिक वर्गों और उम्र के नेताओं को प्रतिनिधित्व दिया गया है। कुल 65 सदस्यीय टीम में 12 महिलाओं को भी जगह मिली है।
नई नियुक्तियों में सबसे ज्यादा चर्चा स्मृति ईरानी और राम माधव की वापसी को लेकर है। अमेठी लोकसभा चुनाव में हार के बाद राष्ट्रीय स्तर पर अपेक्षाकृत कम सक्रिय नजर आ रहीं स्मृति ईरानी को अब पार्टी ने राष्ट्रीय महासचिव की अहम जिम्मेदारी दी है। वहीं, भाजपा के पूर्व राष्ट्रीय महासचिव राम माधव को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया गया है। दूसरी ओर, पार्टी के इंटरनेट मीडिया से जुड़े प्रमुख चेहरों में शामिल अमित मालवीय को नई टीम में जगह नहीं मिली है।
संगठन के बाद अब सरकार पर नजर
भाजपा की नई टीम सामने आने के साथ ही केंद्र की मोदी सरकार में संभावित मंत्रिमंडल फेरबदल को लेकर भी चर्चाएं तेज हो गई हैं। पार्टी संगठन में जिन नेताओं को जिम्मेदारी नहीं मिली है, उनके लिए सरकार में भूमिका की संभावना जताई जा रही है। इनमें पूर्व केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर जैसे नाम भी चर्चा में हैं।
सूत्रों के मुताबिक, मंत्रिमंडल में बदलाव बहुत जल्द हो सकता है और करीब एक पखवाड़े के भीतर फेरबदल की संभावना पर चर्चा चल रही है। इसमें भाजपा के अलावा सहयोगी दलों के कुछ नेताओं को भी केंद्र सरकार में जगह दिए जाने की अटकलें हैं। हालांकि, अंतिम फैसला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पार्टी नेतृत्व के स्तर पर होगा।
2029 की तैयारी का साफ संकेत
नई राष्ट्रीय टीम में उम्र और सामाजिक प्रतिनिधित्व को भी खास महत्व दिया गया है। संगठन में 40 साल से कम उम्र के छह सदस्यों को जिम्मेदारी मिली है। 40 से 49 वर्ष की उम्र वाले 15 सदस्य हैं, जबकि 50 से 59 वर्ष के 21 नेताओं को टीम में स्थान मिला है। पार्टी के अनुसार, टीम में 40 प्रतिशत से ज्यादा प्रतिनिधित्व वंचित सामाजिक वर्गों से आने वाले नेताओं का है।
भाजपा के एक वरिष्ठ नेता के मुताबिक, संगठन का यह नया ढांचा आने वाले वर्षों की राजनीतिक चुनौतियों और खासतौर पर 2029 के लोकसभा चुनाव को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। पार्टी ने ऐसे नेताओं को भी आगे बढ़ाया है, जिन्हें संगठनात्मक काम का लंबा अनुभव है, लेकिन वे वर्तमान में सांसद या विधायक नहीं हैं।
पीयूष गोयल को फिर मिली पार्टी के खजाने की जिम्मेदारी
नई टीम में सबसे महत्वपूर्ण नियुक्तियों में से एक पीयूष गोयल की है। केंद्रीय वाणिज्य मंत्री गोयल को एक बार फिर भाजपा का राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष बनाया गया है। वह पहले भी लंबे समय तक इस पद पर रह चुके हैं। अब तक यह जिम्मेदारी राजेश अग्रवाल संभाल रहे थे।
राजेश मंगल को नया सह कोषाध्यक्ष नियुक्त किया गया है। इस बदलाव को पार्टी के वित्तीय और संगठनात्मक प्रबंधन के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
इसी तरह पंजाब के तरुण चुघ को केंद्रीय भाजपा कार्यालय का प्रभारी बनाया गया है। महेंद्र पांडे को कार्यालय मंत्री की जिम्मेदारी दी गई है। संगठन के कामकाज को मजबूत करने के लिए कई राज्यों से जुड़े नेताओं को महत्वपूर्ण भूमिकाएं दी गई हैं।
स्मृति ईरानी और राम माधव की नई भूमिका
स्मृति ईरानी को राष्ट्रीय महासचिव बनाए जाने से भाजपा की राष्ट्रीय राजनीति में उनकी सक्रियता फिर बढ़ने के संकेत मिले हैं। उनके साथ हरीश द्विवेदी, बिप्लव देव, सतीश पूनिया, गजेंद्र पटेल और संजय भाटिया को भी महासचिव बनाया गया है।
पुरानी टीम से सुनील बंसल और विनोद तावड़े अपनी जिम्मेदारी बचाने में कामयाब रहे हैं। हरीश द्विवेदी को सचिव से पदोन्नत कर महासचिव बनाया गया है। वह असम के प्रभारी भी हैं और वहां भाजपा की लगातार तीसरी विधानसभा जीत के दौरान संगठनात्मक भूमिका में रहे हैं।
त्रिपुरा के पूर्व मुख्यमंत्री बिप्लव देव को भी महासचिव की जिम्मेदारी दी गई है। उन्होंने हरियाणा, छत्तीसगढ़ और पश्चिम बंगाल में चुनावी संगठन के काम में अहम भूमिका निभाई थी।
राष्ट्रीय उपाध्यक्षों की सूची में राम माधव के अलावा वसुंधरा राजे, तीरथ सिंह रावत, वैजयंत जय पांडा, डी. पुरंदेश्वरी, रेखा वर्मा, वर्षाबेन नरेंद्र भाई दोशी, भारती प्रवीण पवार, मनप्रीत सिंह बादल, लाल सिंह आर्य, एम. नागराज, तारिक मंसूर और मधु चंद्रकर को जगह मिली है।
इंटरनेट मीडिया टीम में भी बड़ा बदलाव
भाजपा की नई टीम में इंटरनेट मीडिया से जुड़े संगठन में भी बदलाव किया गया है। लंबे समय से पार्टी के आईटी और सोशल मीडिया तंत्र का प्रमुख चेहरा रहे अमित मालवीय को इस बार जिम्मेदारी नहीं मिली।
उनकी जगह छत्तीसगढ़ के दीपक म्हस्के को आईटी सेल का प्रमुख बनाया गया है। पार्टी नेतृत्व में रहते हुए नितिन नवीन के छत्तीसगढ़ प्रभारी रहने के दौरान म्हस्के के काम को करीब से देखा गया था। सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर पार्टी के नैरेटिव को मजबूत करना उनकी प्रमुख जिम्मेदारियों में शामिल रहेगा।
मीडिया की जिम्मेदारी अनिल बलूनी को दी गई है। उनके साथ आशीष उषा अग्रवाल, प्रदीप भंडारी और सिद्धार्थ यादव को भी संबंधित भूमिका में शामिल किया गया है।
नए चेहरों को भी मिली अहम जिम्मेदारियां
आम आदमी पार्टी छोड़कर राज्यसभा के सात सांसदों के साथ भाजपा में शामिल हुए संदीप पाठक को राष्ट्रीय सचिव बनाया गया है। वहीं कविता पाटीदार, के. सुरेंद्रन, भोला सिंह, प्रदीप वर्मा, जगदीश ईश्वरभाई पटेल, फांग्नोन कोन्यक, संगीता यादव, अनिल एंटनी, एम. वेंकटेशन, मनोज टिग्गा, सिद्धार्थ शंभु, स्वदेश सिंह, मृगांका देव बर्मन, रोहन गुप्ता और जय प्रकाश को भी राष्ट्रीय सचिव की टीम में शामिल किया गया है।
पार्टी के विभिन्न मोर्चों में भी बदलाव देखने को मिला है। युवा मोर्चा की कमान गुजरात के हेमांग जोशी को दी गई है। महिला मोर्चा का नेतृत्व रूप कुमारी चौधरी करेंगी। ओबीसी मोर्चे की जिम्मेदारी अमरपाल मौर्य को मिली है।
किसान मोर्चे के अध्यक्ष बंसीलाल गुर्जर बनाए गए हैं, जबकि एससी मोर्चे की कमान शिवेश कुमार राम और एसटी मोर्चे की जिम्मेदारी मन्नालाल रावत को दी गई है। अल्पसंख्यक मोर्चे का नेतृत्व कुंवर बासित अली करेंगे।
संगठन में राज्यों का भी संतुलन
भाजपा ने राष्ट्रीय टीम बनाते समय राज्यों के बीच संतुलन साधने की कोशिश की है। नई टीम में दिल्ली से सबसे ज्यादा 10 प्रतिनिधि हैं। उत्तर प्रदेश के आठ, मध्य प्रदेश के छह और महाराष्ट्र के पांच नेताओं को जगह मिली है।
राजस्थान, उत्तराखंड और गुजरात से चार-चार प्रतिनिधि हैं। बिहार से तीन और ओडिशा, आंध्र प्रदेश, पश्चिम बंगाल, हरियाणा, केरल तथा छत्तीसगढ़ से दो-दो नेता टीम का हिस्सा हैं।
पंजाब को भी दो प्रतिनिधित्व मिले हैं। कर्नाटक, चंडीगढ़, त्रिपुरा, झारखंड, नगालैंड, तमिलनाडु और असम से एक-एक नेता नई टीम में शामिल हैं। संगठन में बीएल संतोष राष्ट्रीय महामंत्री संगठन के पद पर बने हुए हैं। शिवप्रकाश और सौदान सिंह को राष्ट्रीय सह महामंत्री संगठन की जिम्मेदारी दी गई है।
कुल मिलाकर भाजपा की नई राष्ट्रीय टीम में अनुभवी नेताओं की वापसी, नए चेहरों को अवसर और सामाजिक-क्षेत्रीय संतुलन का मिश्रण दिखाई देता है। स्मृति ईरानी और राम माधव की वापसी से जहां पार्टी के पुराने प्रभावशाली चेहरों को फिर सक्रिय भूमिका मिली है, वहीं अमित मालवीय की विदाई और आईटी-मीडिया टीम में बदलाव संगठन के संचार तंत्र में नई रणनीति का संकेत दे रहे हैं। अब सबकी नजर इस बात पर है कि नई टीम आने वाले विधानसभा चुनावों और 2029 के लोकसभा चुनाव की तैयारियों को किस तरह आगे बढ़ाती है।




