भारतीय पुरुष हॉकी टीम ने एशियन हॉकी चैंपियंस ट्रॉफी में अपने शानदार प्रदर्शन का सिलसिला जारी रखते हुए लीग चरण का समापन बड़ी जीत के साथ किया। भारत ने अपने आखिरी लीग मुकाबले में साउथ कोरिया को 8-0 के भारी अंतर से शिकस्त देकर टूर्नामेंट में लगातार पांचवीं जीत दर्ज की। भारतीय खिलाड़ियों ने मैच के शुरुआती मिनटों से ही विपक्षी टीम पर दबाव बनाए रखा और मैदान के लगभग हर हिस्से में अपना दबदबा दिखाया। आक्रामक खेल और मजबूत रक्षापंक्ति के दम पर टीम इंडिया ने कोरियाई खिलाड़ियों को गोल करने का कोई मौका नहीं दिया।
इस मुकाबले में दिलप्रीत सिंह भारतीय टीम के प्रमुख स्कोरर बनकर उभरे। उन्होंने दो बार गेंद को गोलपोस्ट तक पहुंचाया, जबकि जुगराज सिंह, हरमनप्रीत सिंह, शिलानंद लकड़ा, सुखजीत सिंह, संजय और अंगद बीर सिंह ने एक-एक गोल किया। इस तरह भारत के आठ अलग-अलग गोलों में सात खिलाड़ियों का योगदान रहा। टीम की इस जीत ने न केवल खिलाड़ियों का आत्मविश्वास बढ़ाया, बल्कि सेमीफाइनल से पहले दूसरी टीमों को भी अपनी ताकत का संदेश दे दिया है।
लीग चरण के पांचों मुकाबले जीतने के बाद भारत ने कुल 15 अंक हासिल किए और अंक तालिका में शीर्ष स्थान पर कब्जा जमाया। अब भारतीय टीम 4 नवंबर को सेमीफाइनल में एक बार फिर साउथ कोरिया के सामने उतरेगी। दिलचस्प बात यह है कि दोनों टीमें लीग चरण में भी एक-दूसरे से भिड़ चुकी हैं, जहां भारत ने 8-0 से जीत हासिल की थी। ऐसे में सेमीफाइनल में कोरिया के सामने पिछली हार से उबरने की चुनौती होगी, जबकि भारतीय टीम इसी लय को बरकरार रखते हुए फाइनल का टिकट हासिल करना चाहेगी।
आठ गोल के साथ भारत ने दिखाया आक्रामक अंदाज
जालंधर स्थित ओलंपियन सुरजीत सिंह हॉकी स्टेडियम में खेले गए इस मुकाबले में भारतीय खिलाड़ियों ने शुरुआत से ही आक्रामक रणनीति अपनाई। टीम ने गेंद पर नियंत्रण बनाए रखने के साथ-साथ लगातार कोरियाई गोलपोस्ट की ओर हमले किए। भारतीय फॉरवर्ड खिलाड़ियों की तेजी और मिडफील्ड के बेहतर तालमेल के कारण साउथ कोरिया की रक्षापंक्ति पर लगातार दबाव बना रहा।
मैच के आठवें मिनट में भारत को पहली बड़ी सफलता मिली। दिलप्रीत सिंह ने जरमनप्रीत सिंह से मिले शानदार पास का फायदा उठाते हुए रिवर्स हिट के जरिए गेंद को गोलपोस्ट में पहुंचा दिया। इस गोल के साथ भारत ने मुकाबले में 1-0 की बढ़त हासिल कर ली। रिवर्स हिट हॉकी की एक खास तकनीक है, जिसमें खिलाड़ी स्टिक के सामान्य खेलने वाले हिस्से के बजाय उसके उलटे हिस्से से गेंद को मारता है। दिलप्रीत ने इसी तकनीक का इस्तेमाल करते हुए कोरियाई गोलकीपर को छकाया।
पहले गोल के बाद भारतीय टीम ने हमलों की रफ्तार कम नहीं होने दी। 11वें मिनट में जुगराज सिंह ने भारत की बढ़त को दोगुना कर दिया। इससे पहले साउथ कोरिया को लगातार दो पेनल्टी कॉर्नर मिले थे, लेकिन टीम इन मौकों को गोल में बदलने में नाकाम रही। इसके बाद भारत ने तेजी से जवाबी हमला किया। गोलकीपर से टकराकर वापस आई गेंद जुगराज सिंह के पास पहुंची और उन्होंने बिना मौका गंवाए उसे गोलपोस्ट में डाल दिया। इस गोल के बाद भारत 2-0 से आगे हो गया।
पहले क्वार्टर के अंतिम चरण में भी भारतीय टीम ने दबाव बनाए रखा। मुकाबले के 15वें मिनट में कप्तान हरमनप्रीत सिंह ने पेनल्टी कॉर्नर पर सटीक निशाना लगाते हुए तीसरा गोल कर दिया। इसके साथ ही भारत ने शुरुआती 15 मिनट के भीतर 3-0 की मजबूत बढ़त बना ली। पहले क्वार्टर में भारतीय खिलाड़ियों के प्रदर्शन ने साफ कर दिया कि टीम इस मुकाबले को जीतने के इरादे से मैदान पर उतरी है।
दूसरे क्वार्टर में कोरिया को नहीं मिली सफलता
पहले क्वार्टर में तीन गोल खाने के बाद साउथ कोरिया ने दूसरे क्वार्टर में वापसी करने की कोशिश की। कोरियाई खिलाड़ियों ने भारतीय गोलपोस्ट पर हमले बढ़ाए और उन्हें पेनल्टी कॉर्नर हासिल करने के मौके भी मिले। हालांकि, भारत की डिफेंस लाइन ने विपक्षी टीम के सभी प्रयासों को नाकाम कर दिया।
भारतीय रक्षापंक्ति ने इस दौरान बेहतरीन तालमेल दिखाया। कोरियाई खिलाड़ियों को गोल के करीब पहुंचने में मुश्किल हुई और उनके पेनल्टी कॉर्नर भी किसी नतीजे तक नहीं पहुंच सके। भारतीय गोलकीपर और डिफेंडरों ने मिलकर अपनी बढ़त को सुरक्षित रखा। दूसरी ओर, भारत ने भी मौके मिलने पर जवाबी हमले करने जारी रखे।
हॉकी का मुकाबला कुल 60 मिनट का होता है, जिसे चार क्वार्टर में बांटा जाता है। प्रत्येक क्वार्टर 15 मिनट का होता है। इस प्रारूप के अनुसार शुरुआती दो क्वार्टर के बाद हाफ टाइम होता है। पहले हाफ के समाप्त होने तक भारत ने 3-0 की बढ़त बना रखी थी। हालांकि, दूसरे क्वार्टर में कोई अतिरिक्त गोल नहीं हुआ, लेकिन भारतीय टीम ने रक्षात्मक स्तर पर अपनी मजबूती का परिचय दिया।
हाफ टाइम के बाद चार मिनट में तीन गोल
तीसरे क्वार्टर की शुरुआत होते ही भारतीय टीम ने एक बार फिर आक्रामक रुख अपनाया। हाफ टाइम के बाद मैदान पर लौटे भारतीय खिलाड़ियों ने कोरियाई टीम को संभलने का ज्यादा समय नहीं दिया। लगातार हमलों के बीच भारत ने कुछ ही मिनटों में तीन और गोल दागकर मुकाबले को पूरी तरह अपने नियंत्रण में कर लिया।
33वें मिनट में शिलानंद लकड़ा ने भारत के लिए चौथा गोल किया। गोलपोस्ट की ओर बढ़ाए गए हमले के दौरान गोलकीपर से टकराकर गेंद वापस आई और शिलानंद ने इस मौके का फायदा उठाते हुए उसे नेट में पहुंचा दिया। इस गोल के साथ भारत ने 4-0 की बढ़त बना ली।
अभी कोरियाई टीम इस झटके से उबर भी नहीं पाई थी कि अगले ही मिनट सुखजीत सिंह ने एक और गोल कर दिया। 34वें मिनट में सुखजीत ने खुले खेल के दौरान शानदार फिनिशिंग करते हुए गेंद को गोलपोस्ट तक पहुंचाया। लगातार दो गोलों के कारण साउथ कोरिया की मुश्किलें और बढ़ गईं।
भारत का हमला यहीं नहीं रुका। 36वें मिनट में संजय ने बेहतरीन टीम मूव को गोल में बदल दिया। भारतीय खिलाड़ियों के बीच शानदार तालमेल से तैयार हुए इस मौके पर संजय ने गेंद को सही दिशा देते हुए गोलपोस्ट में पहुंचाया। इसके साथ ही भारत का स्कोर 6-0 हो गया। तीसरे क्वार्टर में भारत की लगातार गोल करने की क्षमता ने मुकाबले का रुख पूरी तरह बदल दिया।
दिलप्रीत ने दूसरी बार गेंद को गोलपोस्ट में पहुंचाया
भारतीय टीम ने छह गोल की बढ़त हासिल करने के बाद भी अपने हमले जारी रखे। 40वें मिनट में दिलप्रीत सिंह ने एक बार फिर अपनी शानदार गोल करने की क्षमता दिखाई। संजय की ओर से लगाए गए शॉट पर दिलप्रीत ने गेंद को सही दिशा देते हुए गोलपोस्ट में पहुंचा दिया।
यह दिलप्रीत का मैच में दूसरा गोल था। उन्होंने इससे पहले आठवें मिनट में भारत का खाता खोला था। अब उनके दो गोलों की मदद से भारतीय टीम ने सात गोल की बढ़त हासिल कर ली। दूसरी ओर, साउथ कोरिया के खिलाड़ी पूरे मुकाबले में भारतीय रक्षापंक्ति को भेदने और अपना खाता खोलने के लिए संघर्ष करते रहे।
मैच के अंतिम क्वार्टर में भी भारतीय खिलाड़ियों ने अपने प्रदर्शन में ढील नहीं आने दी। टीम ने गेंद पर नियंत्रण बनाए रखा और कोरियाई खिलाड़ियों को वापसी का कोई अवसर नहीं दिया। मुकाबले के 60वें मिनट में अंगद बीर सिंह ने रिवर्स हिट के जरिए भारत का आठवां गोल दाग दिया। इस गोल के साथ भारतीय टीम ने 8-0 की शानदार जीत सुनिश्चित कर दी।
पूरे मैच में भारत ने आक्रमण और बचाव दोनों विभागों में बेहतरीन तालमेल दिखाया। खास बात यह रही कि टीम के गोल अलग-अलग खिलाड़ियों की ओर से आए। इससे भारतीय टीम की आक्रमण क्षमता और खिलाड़ियों के बीच बेहतर समन्वय का पता चलता है।
पांच मुकाबलों में 34 गोल, विरोधियों को मिले सिर्फ पांच मौके
एशियन हॉकी चैंपियंस ट्रॉफी के लीग चरण में भारतीय टीम का प्रदर्शन बेहद प्रभावशाली रहा। टीम ने अपने पांचों मुकाबले जीतकर 15 अंक हासिल किए। भारत ने इस दौरान विरोधी टीमों के खिलाफ कुल 34 गोल किए, जबकि उसे केवल पांच गोल खाने पड़े। यह आंकड़ा भारतीय टीम की मजबूत आक्रमण क्षमता के साथ-साथ उसकी रक्षात्मक मजबूती को भी दर्शाता है।
भारत ने टूर्नामेंट में अपने अभियान की शुरुआत बांग्लादेश के खिलाफ की थी। इस मुकाबले में भारतीय खिलाड़ियों ने 13-0 से बड़ी जीत हासिल की। इसके बाद चीन के खिलाफ टीम ने 5-2 से मुकाबला अपने नाम किया। तीसरे मैच में भारत ने जापान को 4-1 से हराया। चौथे मुकाबले में मलेशिया के खिलाफ भारतीय टीम ने 4-2 से जीत दर्ज की।
लीग चरण के आखिरी मैच में साउथ कोरिया को 8-0 से हराकर भारत ने अपनी जीत का सिलसिला पांच तक पहुंचा दिया। इन सभी मुकाबलों में टीम ने लगातार आक्रामक हॉकी खेली और विरोधियों पर दबाव बनाए रखा। पांच मैचों में 34 गोल करना इस बात का संकेत है कि भारतीय टीम के पास गोल करने के लिए कई विकल्प मौजूद हैं।
पांच बार खिताब जीत चुका है भारत
एशियन हॉकी चैंपियंस ट्रॉफी में भारतीय टीम का पुराना रिकॉर्ड भी शानदार रहा है। भारत अब तक पांच बार इस प्रतियोगिता का खिताब अपने नाम कर चुका है। टीम ने 2011, 2016, 2018, 2023 और 2024 में चैंपियन बनने का गौरव हासिल किया था। साल 2018 में भारत और पाकिस्तान संयुक्त विजेता रहे थे।
पिछले खिताबों का अनुभव भारतीय खिलाड़ियों के लिए इस बार भी महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। हालांकि, टूर्नामेंट में आगे बढ़ने के लिए टीम को हर मुकाबले में इसी तरह का प्रदर्शन जारी रखना होगा।
4 नवंबर को फिर कोरिया से भिड़ेगा भारत
लीग चरण समाप्त होने के बाद अब टूर्नामेंट नॉकआउट दौर में पहुंच गया है। भारत ने सभी पांच मुकाबले जीतकर 15 अंकों के साथ शीर्ष स्थान हासिल किया है। अब 4 नवंबर को सेमीफाइनल में भारतीय टीम का सामना फिर साउथ कोरिया से होगा।
दोनों टीमों के बीच हालिया मुकाबले में भारत ने 8-0 से जीत दर्ज की है, लेकिन सेमीफाइनल का मुकाबला अलग चुनौती लेकर आएगा। कोरिया के पास पिछली हार से सबक लेकर अपनी रणनीति में बदलाव करने का मौका होगा। वहीं, भारतीय टीम अपनी लय और आत्मविश्वास के साथ मैदान पर उतरना चाहेगी।
भारत के लिए इस मुकाबले में भी मजबूत डिफेंस, पेनल्टी कॉर्नर का बेहतर इस्तेमाल और फॉरवर्ड खिलाड़ियों के बीच तालमेल अहम रहेगा। लीग चरण में पांच लगातार जीत और 34 गोल करने के बाद भारतीय टीम की नजर अब फाइनल में जगह बनाने पर होगी। सेमीफाइनल में जीत हासिल करने के लिए खिलाड़ियों को एक बार फिर सामूहिक प्रदर्शन करना होगा।




