बारिश और उमस के मौसम में मच्छरों से फैलने वाली बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। इनमें डेंगू भी शामिल है। डेंगू होने पर अचानक तेज बुखार, सिरदर्द, शरीर और जोड़ों में दर्द जैसी परेशानियां हो सकती हैं। कुछ मरीजों की त्वचा पर लाल दाने या रैश भी नजर आने लगते हैं। यही वजह है कि बुखार के साथ शरीर पर लाल चकत्ते दिखने पर लोगों को अक्सर डेंगू की आशंका होने लगती है।
हालांकि, त्वचा पर रैश और बुखार को केवल डेंगू का संकेत मान लेना सही नहीं है। कई अन्य वायरल इंफेक्शन और बीमारियों में भी बुखार के साथ त्वचा पर लाल निशान दिखाई दे सकते हैं। इसलिए बीमारी की पुष्टि केवल लक्षणों के आधार पर नहीं की जा सकती। जरूरत पड़ने पर डॉक्टर जांच और ब्लड टेस्ट के जरिए स्थिति का पता लगाते हैं।
बुखार उतर जाए तो भी लापरवाही न करें
डेंगू को लेकर सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि मरीज की हालत केवल बुखार देखकर नहीं आंकी जानी चाहिए। कई बार बीमारी के दौरान तेज बुखार कुछ दिनों बाद कम होने लगता है और मरीज को लगता है कि अब खतरा टल गया है। लेकिन विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, गंभीर डेंगू के warning signs अक्सर बुखार कम होने के आसपास सामने आ सकते हैं।
इस दौरान अगर पेट में तेज दर्द होने लगे, बार-बार उल्टी हो, नाक या मसूड़ों से खून आए, सांस लेने में परेशानी हो या मरीज को असामान्य कमजोरी महसूस हो, तो तुरंत चिकित्सकीय सहायता लेना जरूरी है। उल्टी या मल में खून आना, त्वचा का ठंडा या पीला पड़ना और तेजी से हालत बिगड़ना भी गंभीर स्थिति के संकेत हो सकते हैं।
इसलिए बुखार कम होने के बाद भी अगले कुछ दिनों तक मरीज की स्थिति पर नजर रखना जरूरी है।
डेंगू में लाल चकत्ते कैसे दिखाई दे सकते हैं?
डेंगू के दौरान शरीर पर रैश या लाल चकत्ते आना संभावित लक्षणों में शामिल है। ये त्वचा के अलग-अलग हिस्सों पर दिखाई दे सकते हैं। कुछ लोगों में रैश हल्के हो सकते हैं, जबकि कुछ मामलों में त्वचा पर लालिमा अधिक स्पष्ट नजर आ सकती है।
लेकिन यहां यह समझना जरूरी है कि हर लाल चकत्ता डेंगू का संकेत नहीं होता। वायरल बुखार और कई दूसरे संक्रमणों में भी त्वचा पर रैश हो सकते हैं। इसलिए यदि किसी व्यक्ति को बुखार के साथ त्वचा पर लाल निशान नजर आते हैं, तो केवल इंटरनेट या आसपास के लोगों की जानकारी के आधार पर खुद से डेंगू की पुष्टि नहीं करनी चाहिए।
अगर बुखार लगातार बना हुआ है और इसके साथ सिरदर्द, बदन दर्द, उल्टी या त्वचा पर रैश जैसे लक्षण भी मौजूद हैं, तो डॉक्टर से संपर्क करना बेहतर है।
डेंगू के साथ कौन-कौन से लक्षण हो सकते हैं?
WHO के अनुसार डेंगू में सबसे आम लक्षणों में तेज बुखार के अलावा सिरदर्द, आंखों के पीछे दर्द, मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द शामिल हैं। कुछ मरीजों को मतली और उल्टी की समस्या भी हो सकती है। त्वचा पर रैश भी बीमारी के दौरान दिखाई दे सकता है।
डेंगू के लक्षण संक्रमित मच्छर के काटने के तुरंत बाद शुरू नहीं होते। आमतौर पर संक्रमित मच्छर के काटने के करीब 4 से 10 दिन बाद लक्षण सामने आ सकते हैं।
हर मरीज में बीमारी का असर एक जैसा नहीं होता। ज्यादातर मामलों में डेंगू हल्का रहता है और मरीज करीब एक से दो सप्ताह में ठीक हो सकता है। लेकिन कुछ लोगों में बीमारी गंभीर रूप ले सकती है और ऐसी स्थिति में अस्पताल में चिकित्सा देखभाल की जरूरत पड़ सकती है।
सिर्फ लक्षणों से डेंगू की पुष्टि क्यों नहीं की जा सकती?
बुखार, शरीर में दर्द और त्वचा पर लाल निशान कई अलग-अलग बीमारियों में दिखाई दे सकते हैं। यही कारण है कि केवल इन संकेतों को देखकर किसी व्यक्ति को डेंगू का मरीज मान लेना उचित नहीं है।
डॉक्टर मरीज के लक्षणों, बीमारी की अवधि और स्वास्थ्य की स्थिति को ध्यान में रखते हैं। जरूरत पड़ने पर ब्लड टेस्ट भी कराया जा सकता है। टेस्ट का चुनाव बीमारी के समय और डॉक्टर की सलाह पर निर्भर कर सकता है।
इसलिए अगर बुखार के साथ रैश दिखाई दे रहे हैं, तो खुद से दवा शुरू करने के बजाय चिकित्सकीय सलाह लेना ज्यादा सुरक्षित तरीका है। खासकर तब, जब बुखार लगातार बना रहे या मरीज की हालत में सुधार न हो रहा हो।
डेंगू का शक होने पर घर पर क्या सावधानी रखें?
डेंगू के इलाज में मरीज को पर्याप्त आराम और शरीर में पानी की कमी न होने देना महत्वपूर्ण माना जाता है। बुखार और दर्द को नियंत्रित करने के लिए डॉक्टर की सलाह के अनुसार दवाएं दी जा सकती हैं। WHO के अनुसार बुखार और दर्द के लिए paracetamol का इस्तेमाल किया जा सकता है।
वहीं aspirin और ibuprofen जैसी दवाओं से बचने की सलाह दी जाती है, क्योंकि डेंगू में bleeding का खतरा हो सकता है और ऐसी दवाएं इस जोखिम को बढ़ा सकती हैं। इसलिए बुखार होने पर कोई भी painkiller अपनी मर्जी से लेने के बजाय डॉक्टर या स्वास्थ्यकर्मी से सलाह लेना बेहतर है।
मरीज को पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थ देने पर भी ध्यान देना चाहिए। पानी, चिकित्सकीय सलाह के अनुसार अन्य तरल पदार्थ और पर्याप्त आराम शरीर को संभलने में मदद कर सकते हैं। यदि मरीज लगातार उल्टी कर रहा है, पानी नहीं पी पा रहा है या कमजोरी तेजी से बढ़ रही है, तो चिकित्सा सहायता लेने में देरी नहीं करनी चाहिए।
कब तुरंत अस्पताल या डॉक्टर के पास जाएं?
डेंगू में कुछ लक्षण ऐसे होते हैं जिन्हें सामान्य बुखार समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। अगर मरीज को तेज पेट दर्द हो, लगातार उल्टियां हों, नाक या मसूड़ों से खून आने लगे या उल्टी और मल में खून दिखाई दे, तो तुरंत चिकित्सा सहायता जरूरी है।
इसी तरह बहुत ज्यादा कमजोरी, बेचैनी, तेजी से सांस चलना, त्वचा का ठंडा पड़ना या उसका रंग पीला पड़ना भी गंभीर स्थिति का संकेत हो सकता है। ऐसे मामलों में घर पर इलाज करते रहने के बजाय तुरंत डॉक्टर या अस्पताल से संपर्क करना चाहिए।
बच्चों, बुजुर्गों और पहले से किसी स्वास्थ्य समस्या से जूझ रहे लोगों में विशेष सावधानी रखना जरूरी है। मरीज की हालत बिगड़ने का इंतजार करने के बजाय warning signs दिखाई देते ही चिकित्सा मदद लेना सुरक्षित रहता है।
मच्छरों से बचाव ही डेंगू से बचने का अहम तरीका
डेंगू से बचने के लिए केवल बीमारी के लक्षणों पर ध्यान देना पर्याप्त नहीं है। मच्छरों के काटने से बचाव करना भी जरूरी है। डेंगू फैलाने वाला Aedes मच्छर केवल रात में ही सक्रिय नहीं रहता, बल्कि दिन के समय भी काट सकता है। इसलिए दिन में भी मच्छरों से सुरक्षा के उपाय अपनाने चाहिए।
घर के आसपास पानी जमा न होने दें। गमले, पुराने टायर, बाल्टी, कूलर, टूटे हुए कंटेनर और ऐसी दूसरी जगहों की नियमित जांच करें जहां पानी जमा हो सकता है। पानी की टंकियों और दूसरे कंटेनरों को ढककर रखना भी जरूरी है।
पूरी आस्तीन वाले कपड़े पहनना और जरूरत के अनुसार मच्छर भगाने वाले उपायों का इस्तेमाल करना भी मददगार हो सकता है। घर की खिड़कियों और दरवाजों पर मच्छररोधी जाली का इस्तेमाल किया जा सकता है।
डेंगू मरीज को भी मच्छरों से बचाना जरूरी
अगर किसी व्यक्ति को डेंगू हो गया है, तो सिर्फ उस मरीज को मच्छरों से बचाना ही उसकी व्यक्तिगत सुरक्षा का हिस्सा नहीं है, बल्कि इससे आसपास के लोगों को भी संक्रमण के जोखिम को कम करने में मदद मिल सकती है।
डेंगू संक्रमित व्यक्ति को काटने के बाद मच्छर वायरस को दूसरे व्यक्ति तक पहुंचा सकता है। इसलिए बीमारी के दौरान मरीज को मच्छरों के संपर्क से दूर रखने की कोशिश करनी चाहिए। कमरे में मच्छररोधी उपायों का इस्तेमाल और शरीर को ढककर रखना उपयोगी हो सकता है।
कुल मिलाकर, बुखार के साथ शरीर पर लाल चकत्ते दिखना डेंगू का एक संभावित संकेत हो सकता है, लेकिन यह अकेला ऐसा लक्षण नहीं है जिसके आधार पर बीमारी की पुष्टि की जा सके। तेज बुखार, सिरदर्द, आंखों के पीछे दर्द, बदन या जोड़ों में दर्द, उल्टी और रैश जैसे लक्षणों को ध्यान में रखते हुए डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है। खासकर बुखार कम होने के बाद अगर गंभीर warning signs दिखाई दें, तो तुरंत चिकित्सा सहायता लेनी चाहिए।




