रूस-यूक्रेन युद्ध को लेकर संयुक्त राष्ट्र महासभा के मंच से यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान रूस की ओर से विदेशी नागरिकों की कथित भर्ती की तरफ खींचा है। 23 सितंबर को 81वें संयुक्त राष्ट्र महासभा अधिवेशन में बोलते हुए जेलेंस्की ने दावा किया कि रूस की सैन्य गतिविधियों में 47 देशों के नागरिक शामिल हैं। उन्होंने इन देशों की सरकारों से अपने नागरिकों की सुरक्षा के लिए कदम उठाने और उन्हें रूस-यूक्रेन संघर्ष का हिस्सा बनने से रोकने की अपील की।
जेलेंस्की के संबोधन में भारत का नाम भी आया। उन्होंने भारत के अलावा नेपाल, घाना, ताजिकिस्तान, यमन, केन्या, जिम्बाब्वे, क्यूबा, बेलारूस, सूडान और दक्षिण अफ्रीका सहित कई देशों का उल्लेख किया। उनका कहना था कि संबंधित देशों को इस मामले को गंभीरता से लेना चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उनके नागरिक रूस की ओर से चल रहे युद्ध में आगे न भेजे जाएं।
‘पुतिन को आपको युद्ध में न खींचने दें’
जेलेंस्की ने अपने भाषण में संबंधित देशों के प्रतिनिधियों को सीधे संबोधित करते हुए कहा कि वे अपने नागरिकों को इस संघर्ष से दूर रखें। उन्होंने कहा कि रूस के युद्ध में शामिल होने वाले लोग उन्हीं देशों के नागरिक हैं और उनकी सरकारों को उनकी सुरक्षा के लिए जिम्मेदारी से कदम उठाने चाहिए।
यूक्रेनी राष्ट्रपति ने अपील करते हुए कहा कि देशों को रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को अपने नागरिकों को इस युद्ध में खींचने की अनुमति नहीं देनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि रूस को अपने युद्ध की कीमत दूसरे देशों के लोगों की जान से नहीं चुकानी चाहिए। जेलेंस्की का यह संदेश ऐसे समय आया है जब रूस और यूक्रेन के बीच संघर्ष जारी है और दोनों पक्ष एक-दूसरे के खिलाफ सैन्य कार्रवाई कर रहे हैं।
जेलेंस्की ने अपने भाषण में विदेशी नागरिकों की भागीदारी को केवल यूक्रेन और रूस के बीच का मुद्दा नहीं बताया, बल्कि इसे उन देशों के लिए भी चिंता का विषय बताया जिनके नागरिक इस संघर्ष में पहुंच रहे हैं। उनके मुताबिक, यदि दूसरे देशों के लोगों को रूस की ओर से युद्ध में इस्तेमाल किया जाता है तो इसका असर संघर्ष की अंतरराष्ट्रीय प्रकृति पर भी पड़ता है।
रूस की कमाई पर दबाव बढ़ाने की मांग
UNGA में जेलेंस्की ने केवल विदेशी नागरिकों की भर्ती का मुद्दा ही नहीं उठाया। उन्होंने रूस की अर्थव्यवस्था और युद्ध के लिए मिलने वाले राजस्व पर भी दबाव बनाए रखने की अपील की। यूक्रेन का लंबे समय से यह रुख रहा है कि रूस की युद्ध क्षमता को सीमित करने के लिए उसकी आय के स्रोतों पर अंतरराष्ट्रीय दबाव जरूरी है।
जेलेंस्की ने महासभा में कहा कि रूस को मिलने वाले राजस्व के स्रोतों को निशाना बनाना जारी रखा जाना चाहिए। उनके मुताबिक, जो देश रूस के साथ व्यापार के जरिए उसे अधिक आर्थिक संसाधन उपलब्ध कराते हैं, वे अप्रत्यक्ष रूप से युद्ध को लंबे समय तक चलने में मदद कर सकते हैं।
उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से रूस के साथ व्यापार को सीमित करने के प्रयास जारी रखने की अपील की। जेलेंस्की के मुताबिक, रूस की वित्तीय क्षमता पर दबाव डालना यूक्रेन के खिलाफ उसकी सैन्य कार्रवाई को कमजोर करने की कोशिशों का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
चार साल से ज्यादा समय से जारी है रूस-यूक्रेन संघर्ष
रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध को चार साल से ज्यादा समय हो चुका है। संघर्ष के दौरान दोनों देशों की सेनाओं की ओर से लगातार सैन्य अभियान चलाए गए हैं। रूस की तरफ से यूक्रेन के अलग-अलग इलाकों में मिसाइल और ड्रोन हमलों की खबरें आती रही हैं, जबकि यूक्रेन भी रूस के सैन्य और ऊर्जा ढांचे से जुड़े ठिकानों पर हमले करता रहा है।
युद्ध लंबा खिंचने के साथ इसका प्रभाव दोनों देशों की सीमाओं से बाहर भी दिखाई देता है। ऊर्जा, व्यापार, सुरक्षा, खाद्य आपूर्ति और वैश्विक कूटनीति पर इस संघर्ष का असर पड़ा है। यही वजह है कि संयुक्त राष्ट्र के उच्चस्तरीय मंचों पर रूस-यूक्रेन युद्ध लगातार प्रमुख मुद्दों में शामिल रहा है।
81वें UNGA का उच्चस्तरीय सामान्य विमर्श 22 से 26 सितंबर और फिर 28 सितंबर को निर्धारित है। इस दौरान दुनिया के विभिन्न देशों के राष्ट्राध्यक्ष और वरिष्ठ प्रतिनिधि वैश्विक सुरक्षा, संघर्ष, अर्थव्यवस्था और अन्य अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर अपनी बात रख रहे हैं।
भारत का नाम आने से चर्चा तेज
जेलेंस्की के भाषण में भारत का नाम शामिल होना इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत रूस और यूक्रेन दोनों के साथ अपने संबंध बनाए रखते हुए लगातार संवाद और कूटनीति के जरिए समाधान की बात करता रहा है। सितंबर की शुरुआत में भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर और जेलेंस्की के बीच भी मुलाकात हुई थी। उस दौरान शांति प्रयासों, सुरक्षा और द्विपक्षीय सहयोग पर चर्चा हुई थी। यूक्रेनी राष्ट्रपति की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, उस बातचीत में युद्ध समाप्त करने के प्रयासों का मुद्दा भी उठा था।
हालांकि UNGA में जेलेंस्की ने भारत सहित 47 देशों का नाम लेते हुए अपनी अपील उन देशों के नागरिकों की रूस की ओर से युद्ध में कथित भागीदारी के संदर्भ में रखी। उन्होंने इन देशों की सरकारों से कहा कि वे अपने नागरिकों को इस संघर्ष का हिस्सा बनने से रोकने के लिए कार्रवाई करें।
इस बयान को भारत-रूस संबंधों के व्यापक संदर्भ में भी देखा जा रहा है, लेकिन जेलेंस्की के भाषण का मुख्य बिंदु विदेशी नागरिकों की युद्ध में भागीदारी और उन्हें इससे दूर रखने की अपील थी।
रूस की ओर से UN में अलग संदेश
जहां जेलेंस्की ने रूस पर विदेशी नागरिकों को युद्ध में इस्तेमाल करने और उसके आर्थिक संसाधनों पर दबाव बढ़ाने की बात कही, वहीं रूस की तरफ से भी संयुक्त राष्ट्र में बातचीत को लेकर अपना रुख रखा गया।
रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में कहा कि रूस स्थायी शांति की दिशा में बातचीत के लिए तैयार है। हालांकि रूस का रुख यह है कि संघर्ष को केवल कुछ समय के लिए रोक देना पर्याप्त नहीं होगा। रूस युद्ध के समाधान के लिए व्यापक बातचीत की आवश्यकता पर जोर देता रहा है।
रूस के प्रतिनिधित्व को लेकर भी इस महासभा में ध्यान बना हुआ है। रूस की ओर से संयुक्त राष्ट्र के मंच पर अक्सर विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव देश का प्रतिनिधित्व करते हैं। राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन पिछले कई वर्षों से महासभा की बैठकों में व्यक्तिगत रूप से शामिल नहीं हुए हैं।
जेलेंस्की ने युद्ध को वैश्विक चिंता से जोड़ा
जेलेंस्की के इस संबोधन का एक बड़ा हिस्सा इस बात पर केंद्रित रहा कि रूस-यूक्रेन युद्ध का प्रभाव केवल दोनों देशों तक सीमित नहीं है। उनका दावा है कि अलग-अलग देशों के नागरिकों की भागीदारी से संघर्ष का दायरा और व्यापक हो रहा है।
उन्होंने जिन 47 देशों का जिक्र किया, उनमें एशिया, अफ्रीका और अन्य क्षेत्रों के देश शामिल हैं। भारत, नेपाल और ताजिकिस्तान जैसे एशियाई देशों के साथ-साथ घाना, केन्या, जिम्बाब्वे, दक्षिण अफ्रीका और सूडान जैसे अफ्रीकी देशों का भी उन्होंने उल्लेख किया। क्यूबा और बेलारूस का नाम भी उनके भाषण में आया।
यूक्रेनी राष्ट्रपति ने संबंधित सरकारों से कहा कि वे अपने नागरिकों के बारे में जानकारी रखें और उन्हें रूस की ओर से युद्ध में भेजे जाने से रोकें। उनका संदेश था कि किसी देश को अपने नागरिकों को रूस-यूक्रेन युद्ध में शामिल होने देने के बजाय उनकी सुरक्षा और वापसी के लिए कदम उठाने चाहिए।
सर्दियों से पहले संघर्ष कम करने पर भी जोर
UNGA के दौरान जेलेंस्की ने युद्ध को समाप्त करने और कूटनीतिक रास्ते तलाशने की आवश्यकता पर भी बात की। 22 सितंबर को उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से न्यूयॉर्क में मुलाकात की थी। यूक्रेन के राष्ट्रपति कार्यालय के मुताबिक, दोनों नेताओं ने ऐसे कदमों पर चर्चा की जो कूटनीति का रास्ता खोल सकते हैं और सर्दियों से पहले युद्ध को कम करने में मदद कर सकते हैं।
इससे साफ है कि संयुक्त राष्ट्र महासभा के मौजूदा सत्र में रूस-यूक्रेन युद्ध को लेकर सैन्य कार्रवाई के साथ-साथ आर्थिक दबाव और संभावित कूटनीतिक रास्ते भी चर्चा के प्रमुख विषय हैं।
जेलेंस्की का 23 सितंबर का भाषण इसी व्यापक बहस का हिस्सा रहा। उन्होंने एक ओर रूस पर विदेशी नागरिकों के इस्तेमाल का आरोप लगाते हुए 47 देशों से अपने नागरिकों को बचाने की अपील की, वहीं दूसरी ओर रूस के राजस्व स्रोतों को सीमित करने और व्यापारिक दबाव बनाए रखने की मांग दोहराई।
अब इस मुद्दे पर संबंधित देशों की सरकारों का रुख महत्वपूर्ण होगा। खासकर उन देशों के लिए, जिनके नागरिकों का नाम जेलेंस्की ने अपने भाषण में लिया है। दूसरी तरफ रूस की ओर से बातचीत के लिए तैयार होने की बात कही जा रही है, लेकिन युद्ध को केवल अस्थायी रूप से रोकने के बजाय स्थायी समाधान पर जोर दिया जा रहा है। ऐसे में संयुक्त राष्ट्र महासभा का मौजूदा सत्र रूस-यूक्रेन संघर्ष को लेकर कूटनीतिक गतिविधियों के लिहाज से महत्वपूर्ण बना हुआ है।




