मोदी के दौरे से पहले न्यूजीलैंड में भारतीयों पर कड़े इमिग्रेशन नियमों की चर्चा, विदेश मंत्री ने सरकार को दी चेतावनी

मोदी के दौरे से पहले न्यूजीलैंड में भारतीयों पर कड़े इमिग्रेशन नियमों की चर्चा, विदेश मंत्री ने सरकार को दी चेतावनी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रस्तावित न्यूजीलैंड यात्रा से ठीक पहले वहां की राजनीति में भारतीय नागरिकों और इमिग्रेशन नीति को लेकर नई बहस छिड़ गई है। न्यूजीलैंड सरकार भारतीय नागरिकों के लिए इमिग्रेशन नियमों को और सख्त करने की संभावना पर विचार कर रही है। हालांकि इस मुद्दे पर सरकार के भीतर भी मतभेद सामने आने लगे हैं। देश के विदेश मंत्री विंस्टन पीटर्स ने साफ कहा है कि यदि भारत को विशेष रूप से निशाना बनाकर नियम बनाए गए तो इससे दोनों देशों के रिश्तों पर नकारात्मक असर पड़ सकता है।

इसी बीच न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन ने पुष्टि की है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अगले सप्ताह अपनी पहली आधिकारिक न्यूजीलैंड यात्रा पर पहुंचेंगे। माना जा रहा है कि इस दौरे के दौरान व्यापार, निवेश, शिक्षा, कृषि और रणनीतिक सहयोग जैसे कई अहम विषयों पर बातचीत होगी। ऐसे समय में इमिग्रेशन नियमों को लेकर उठी बहस दोनों देशों के संबंधों के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार न्यूजीलैंड का इमिग्रेशन विभाग कई बदलावों पर काम कर रहा है। प्रस्तावित संशोधनों का मसौदा सरकार के वरिष्ठ मंत्रियों को भेजा जा चुका है। हालांकि इमिग्रेशन मंत्री एरिका स्टैनफोर्ड ने स्पष्ट किया है कि अभी इन प्रस्तावों पर अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है और सरकार सभी पहलुओं पर विचार कर रही है। उन्होंने कहा कि फिलहाल यह प्रक्रिया शुरुआती चरण में है और किसी भी बदलाव की आधिकारिक घोषणा बाद में की जाएगी।

पिछले कुछ महीनों से न्यूजीलैंड में भारतीय प्रवासियों की बढ़ती संख्या को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिली हैं। कुछ विपक्षी दलों और स्थानीय समूहों ने सरकार पर आरोप लगाया है कि वह भारत के साथ संबंध मजबूत करने के लिए घरेलू चिंताओं को नजरअंदाज कर रही है। खास तौर पर भारत के साथ हुए मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) को लेकर विपक्ष लगातार सवाल उठा रहा है।

सरकार का तर्क है कि भारत के साथ आर्थिक साझेदारी न्यूजीलैंड के लिए लंबे समय में बेहद लाभकारी साबित होगी। उसका कहना है कि भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है और उसके साथ व्यापार बढ़ने से निर्यात, निवेश और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। इसी वजह से सरकार एफटीए को अपनी प्रमुख आर्थिक उपलब्धियों में गिन रही है।

हालांकि यह समझौता अभी पूरी तरह लागू नहीं हुआ है क्योंकि इसे संसद की अंतिम मंजूरी मिलना बाकी है। इस बीच गठबंधन सरकार में शामिल न्यूजीलैंड फर्स्ट पार्टी ने इस समझौते और उससे जुड़े इमिग्रेशन पहलुओं पर खुलकर आपत्ति जताई है। पार्टी के नेता और विदेश मंत्री विंस्टन पीटर्स का कहना है कि किसी भी नीति को लागू करने से पहले उसके राष्ट्रीय हितों पर प्रभाव का गंभीरता से आकलन किया जाना चाहिए।

संसद में अपने संबोधन के दौरान पीटर्स ने कहा कि उन्हें सरकारी अधिकारियों की ओर से जो जानकारी दी गई है, उससे संकेत मिलता है कि इमिग्रेशन नियमों को इस तरह बदला जा रहा है जिससे भारतीय नागरिक सबसे अधिक प्रभावित होंगे। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि न्यूजीलैंड के कई देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौते हैं तो केवल भारत के संदर्भ में अलग और कठोर नियम बनाने की आवश्यकता क्यों महसूस की जा रही है।

विदेश मंत्री ने यह भी कहा कि अधिकारियों ने सरकार को पहले ही आगाह किया है कि यदि भारत को विशेष रूप से निशाना बनाकर नीतियां बनाई गईं तो इससे द्विपक्षीय संबंधों में तनाव पैदा हो सकता है। उन्होंने चेतावनी दी कि ऐसा कदम न्यूजीलैंड की अंतरराष्ट्रीय छवि को भी नुकसान पहुंचा सकता है। उनके मुताबिक दुनिया में एक भरोसेमंद और पारदर्शी व्यापारिक साझेदार के रूप में न्यूजीलैंड की पहचान प्रभावित होना देश के हित में नहीं होगा।

पीटर्स ने यह आशंका भी जताई कि यदि नियम किसी विशेष देश के नागरिकों के खिलाफ भेदभावपूर्ण माने गए तो उन्हें अदालत में कानूनी चुनौती दी जा सकती है। इतना ही नहीं, भारत की ओर से जवाबी कदम उठाए जाने की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता। उनका कहना था कि विदेश नीति और व्यापारिक हितों को ध्यान में रखते हुए सरकार को बेहद संतुलित निर्णय लेना चाहिए।

दूसरी ओर सत्तारूढ़ नेशनल पार्टी का कहना है कि एफटीए न्यूजीलैंड की अर्थव्यवस्था को नई गति देगा। पार्टी का दावा है कि संसद में इस समझौते को पारित कराने के लिए उसे विपक्षी लेबर पार्टी का भी समर्थन मिल गया है। सरकार का मानना है कि भारत के विशाल बाजार तक बेहतर पहुंच मिलने से न्यूजीलैंड के कृषि, डेयरी, शिक्षा और अन्य क्षेत्रों को बड़ा लाभ होगा।

प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन ने सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा की घोषणा करते हुए कहा कि उन्हें भारत के प्रधानमंत्री का स्वागत करने का इंतजार है। उन्होंने लिखा कि भारत वैश्विक अर्थव्यवस्था में तेजी से उभरती हुई शक्ति है और न्यूजीलैंड के लिए बेहद महत्वपूर्ण साझेदार है। उन्होंने यह भी कहा कि दोनों देशों के बीच हुआ मुक्त व्यापार समझौता आर्थिक सहयोग को नई ऊंचाई पर ले जाएगा।

लक्सन के अनुसार इस साझेदारी से न्यूजीलैंड में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे, निर्यात को बढ़ावा मिलेगा और आर्थिक विकास को मजबूती मिलेगी। सरकार का मानना है कि भारत के साथ मजबूत संबंध केवल व्यापार तक सीमित नहीं रहेंगे बल्कि शिक्षा, पर्यटन, तकनीक और निवेश जैसे क्षेत्रों में भी नए अवसर खुलेंगे।

उधर राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि मोदी की यात्रा से पहले इमिग्रेशन नीति पर छिड़ी बहस सरकार के लिए चुनौती बन सकती है। एक ओर सरकार भारत के साथ रणनीतिक और आर्थिक रिश्ते मजबूत करना चाहती है, वहीं दूसरी ओर घरेलू राजनीति में कुछ दल इमिग्रेशन को बड़ा चुनावी मुद्दा बना रहे हैं। ऐसे में सरकार को दोनों पक्षों के बीच संतुलन बनाकर चलना होगा।

भारतीय समुदाय भी इस पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है। न्यूजीलैंड में बड़ी संख्या में भारतीय मूल के लोग शिक्षा, स्वास्थ्य, आईटी, व्यापार और अन्य क्षेत्रों में योगदान दे रहे हैं। यदि इमिग्रेशन नियमों में बड़े बदलाव किए जाते हैं तो उसका असर छात्रों, कुशल पेशेवरों और काम के लिए आवेदन करने वाले लोगों पर पड़ सकता है। हालांकि अभी तक सरकार ने किसी अंतिम नीति की घोषणा नहीं की है।

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत और न्यूजीलैंड के बीच बढ़ते आर्थिक सहयोग को देखते हुए दोनों देशों के लिए सकारात्मक माहौल बनाए रखना जरूरी होगा। व्यापारिक समझौते के साथ-साथ लोगों के बीच संपर्क भी रिश्तों की मजबूती का अहम आधार माना जाता है। इसलिए इमिग्रेशन नीति में किसी भी बदलाव को बेहद सावधानी और पारदर्शिता के साथ लागू करने की आवश्यकता होगी।

फिलहाल सभी की नजर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रस्तावित न्यूजीलैंड यात्रा और उससे पहले सरकार द्वारा लिए जाने वाले फैसलों पर टिकी हुई है। यदि दोनों देशों के बीच चल रही बातचीत सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ती है तो व्यापार, निवेश और द्विपक्षीय सहयोग को नई गति मिल सकती है। वहीं इमिग्रेशन नियमों को लेकर उठे विवाद का समाधान किस तरह किया जाता है, यह आने वाले दिनों में भारत-न्यूजीलैंड संबंधों की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।