रोज फेस्टिवल-2027 पर 1.32 करोड़ खर्च करेगा निगम, हेलीकॉप्टर राइड से शहर देखने का भी मिल सकता है मौका

रोज फेस्टिवल-2027 पर 1.32 करोड़ खर्च करेगा निगम, हेलीकॉप्टर राइड से शहर देखने का भी मिल सकता है मौका

प्रायोजक नहीं मिलने पर नगर निगम उठाएगा आयोजन का पूरा खर्च, सदन ने बजट और टेंडर दस्तावेजों को दी मंजूरी; फ्लोरवाइज प्रॉपर्टी आईडी के नियम भी बदले

चंडीगढ़। शहर के प्रमुख वार्षिक आयोजनों में शामिल रोज फेस्टिवल के 55वें संस्करण में इस बार पर्यटकों को एक नया अनुभव मिल सकता है। रोज फेस्टिवल-2027 के दौरान लोगों को हेलीकॉप्टर राइड के जरिए चंडीगढ़ की हवाई सैर कराने की योजना प्रस्तावित की गई है। इसके साथ ही तीन दिवसीय आयोजन में फूलों की प्रदर्शनी, सांस्कृतिक कार्यक्रमों, विभिन्न प्रतियोगिताओं और मनोरंजक गतिविधियों के जरिए लोगों को आकर्षित करने की तैयारी है। नगर निगम सदन ने बुधवार को फेस्टिवल के आयोजन के लिए 1.32 करोड़ रुपये के बजट को मंजूरी दे दी। अब निगम की प्राथमिकता आयोजन के लिए प्रायोजक तलाशने की रहेगी। यदि कंपनियां या अन्य संस्थान प्रायोजन के लिए आगे आते हैं तो उनके सहयोग से फेस्टिवल आयोजित किया जाएगा। प्रायोजक नहीं मिलने की स्थिति में नगर निगम अपने बजट से आयोजन पर होने वाला खर्च वहन करेगा।

नगर निगम सदन की मंजूरी के बाद फेस्टिवल की तैयारियों को आगे बढ़ाने का रास्ता साफ हो गया है। निगम प्रशासन ने आयोजन से संबंधित टेंडर दस्तावेजों को भी मंजूरी देने का प्रस्ताव रखा था, ताकि आवश्यक प्रक्रिया शुरू की जा सके। अधिकारियों के अनुसार, प्रायोजकों की उपलब्धता के आधार पर आयोजन की वित्तीय व्यवस्था तय की जाएगी। हालांकि, प्रायोजक मिलने की उम्मीद के साथ ही निगम ने अपने स्तर पर भी बजट का प्रावधान कर लिया है, जिससे आयोजन की तैयारियां प्रभावित न हों।

पहले प्रायोजक जुटाने की कोशिश, फिर निगम करेगा खर्च

रोज फेस्टिवल का आयोजन आम तौर पर कंपनियों और प्रायोजकों के सहयोग से किया जाता रहा है। इससे नगर निगम को आयोजन के लिए अपने खजाने से बड़ी राशि खर्च नहीं करनी पड़ती थी। कुछ अवसरों पर आयोजन के बाद निगम को आर्थिक बचत भी हुई। एक बार फेस्टिवल के आयोजन के बाद निगम को 11 लाख रुपये की बचत हुई थी। ऐसे में इस बार भी निगम प्रशासन की कोशिश है कि आयोजन का अधिकतम खर्च प्रायोजकों के माध्यम से पूरा किया जाए।

हालांकि, इस बार प्रायोजकों को आकर्षित करने के लिए एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट जारी किए जाने के बावजूद किसी कंपनी ने रुचि नहीं दिखाई। इससे आयोजन की वित्तीय व्यवस्था को लेकर निगम के सामने चुनौती खड़ी हो गई। प्रायोजक नहीं मिलने के कारण निगम को अपने स्तर पर आयोजन कराने की तैयारी करनी पड़ रही है। इसी के तहत 132.65 लाख रुपये खर्च करने का प्रस्ताव सदन में रखा गया, जिसे पार्षदों ने मंजूरी दे दी।

नगर निगम आयुक्त अमित कुमार ने सदन में स्पष्ट किया कि आयोजन से संबंधित टेंडर दस्तावेजों को मंजूरी देने का उद्देश्य प्रक्रिया को समय पर शुरू करना है। यदि कोई प्रायोजक मिल जाता है तो फेस्टिवल उसके सहयोग से आयोजित किया जाएगा। यदि प्रायोजन की व्यवस्था नहीं बनती तो टेंडर में तय प्रावधानों के अनुसार निगम अपने खर्च पर आयोजन करेगा। इस व्यवस्था के जरिए निगम प्रशासन फेस्टिवल की तैयारियों को समयबद्ध तरीके से आगे बढ़ाना चाहता है।

फूलों की प्रदर्शनी से लेकर रोज प्रिंस-प्रिंसेस प्रतियोगिता तक

तीन दिवसीय रोज फेस्टिवल में हर आयु वर्ग के लोगों के लिए अलग-अलग गतिविधियां आयोजित करने की योजना है। फूलों की प्रदर्शनी आयोजन का प्रमुख आकर्षण रहेगी। इसके अलावा रंगोली प्रतियोगिता, फ्लोरल हैट प्रतियोगिता और रोज प्रिंस-प्रिंसेस जैसे कार्यक्रमों के जरिए प्रतिभागियों को अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिलेगा।

फेस्टिवल के दौरान मिस्टर एंड मिस रोज प्रतियोगिता भी आयोजित की जाएगी। वरिष्ठ नागरिकों के लिए रोज किंग और रोज क्वीन प्रतियोगिताएं रखी जाएंगी। इन गतिविधियों का उद्देश्य आयोजन में अधिक से अधिक लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करना और इसे केवल फूलों की प्रदर्शनी तक सीमित न रखकर एक व्यापक सांस्कृतिक उत्सव का स्वरूप देना है।

सांस्कृतिक कार्यक्रमों में लोकनृत्य विशेष आकर्षण होंगे। इसके साथ ही फोटोग्राफी और पेंटिंग प्रतियोगिताओं के माध्यम से कला में रुचि रखने वाले लोगों को अपनी रचनात्मकता प्रदर्शित करने का मौका मिलेगा। अंताक्षरी और रोज क्विज जैसी गतिविधियां भी प्रस्तावित हैं। इन कार्यक्रमों के जरिए परिवारों, युवाओं, बच्चों और वरिष्ठ नागरिकों को फेस्टिवल से जोड़ने की योजना है।

हेलीकॉप्टर राइड से आसमान से दिख सकता है चंडीगढ़

रोज फेस्टिवल-2027 के संभावित आकर्षणों में हेलीकॉप्टर राइड को भी शामिल किया गया है। इस सुविधा के माध्यम से पर्यटकों को शहर की हवाई सैर कराने की योजना है। यदि प्रस्ताव को अंतिम रूप दिया जाता है तो लोगों को चंडीगढ़ की शहरी बनावट, हरियाली और प्रमुख क्षेत्रों को ऊपर से देखने का अवसर मिल सकता है।

हेलीकॉप्टर राइड की योजना को लेकर अभी इसे प्रस्तावित गतिविधि के रूप में ही देखा जा रहा है। इसके संचालन, उपलब्धता, शुल्क और अन्य व्यवस्थाओं के बारे में अंतिम जानकारी आयोजन की तैयारियों के दौरान सामने आएगी। इसके लिए आवश्यक प्रबंध और संबंधित प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा कि पर्यटक किस तरह इस सुविधा का लाभ उठा सकेंगे।

रोज फेस्टिवल चंडीगढ़ की पहचान से जुड़ा आयोजन है। हर साल बड़ी संख्या में लोग फूलों की विभिन्न प्रजातियों, सजावट और सांस्कृतिक गतिविधियों का आनंद लेने पहुंचते हैं। ऐसे में हेलीकॉप्टर राइड जैसी नई गतिविधि शामिल होने से आयोजन को अतिरिक्त आकर्षण मिलने की उम्मीद है। हालांकि, इस बार प्रायोजकों की अनुपलब्धता के कारण निगम को आयोजन की लागत और उपलब्ध संसाधनों के बीच संतुलन बनाना होगा।

फ्लोरवाइज प्रॉपर्टी आईडी बनवाना होगा आसान

नगर निगम सदन की बैठक में रोज फेस्टिवल के बजट के अलावा रिहायशी भवनों के अलग-अलग फ्लोर की स्वतंत्र प्रॉपर्टी आईडी बनाने के नियमों में संशोधन को भी मंजूरी दी गई। इस फैसले से उन लोगों को राहत मिलने की उम्मीद है, जो एक ही इमारत में अलग-अलग मंजिलों के मालिक हैं और अपनी संपत्ति की अलग पहचान बनवाना चाहते हैं।

संशोधित व्यवस्था के तहत यदि किसी रिहायशी इमारत में तीन अलग-अलग मालिकों के पास अलग-अलग फ्लोर हैं तो उनमें से किसी एक मालिक को अपनी स्वतंत्र प्रॉपर्टी आईडी बनवाने के लिए पूरी इमारत का बकाया प्रॉपर्टी टैक्स जमा कराने की आवश्यकता नहीं होगी। संबंधित मालिक अपने हिस्से के बकाया टैक्स का भुगतान करके अलग प्रॉपर्टी आईडी बनवाने के लिए आवेदन कर सकेगा।

अब तक ऐसी प्रक्रिया में कई तरह की व्यावहारिक दिक्कतें सामने आती रही हैं। यदि किसी इमारत के एक या अधिक फ्लोर के मालिकों के बीच विवाद हो तो संपत्ति के विभाजन से संबंधित दस्तावेज तैयार करना मुश्किल हो जाता है। दूसरे मालिकों की सहमति या हस्ताक्षर नहीं मिलने के कारण स्वतंत्र प्रॉपर्टी आईडी बनवाने की प्रक्रिया भी अटक जाती है। संशोधन के बाद रिहायशी संपत्तियों के मामलों में इन अड़चनों को कम करने का प्रयास किया गया है।

दूसरे फ्लोर के मालिकों की सहमति जरूरी नहीं

प्रॉपर्टी टैक्स बायलॉज-2003 के क्लॉज-18 के तहत अब तक संपत्ति के विभाजन का नक्शा सभी संबंधित मालिकों के हस्ताक्षरों के साथ जमा कराना पड़ता था। इसके कारण किसी एक फ्लोर के मालिक को अपनी संपत्ति की अलग पहचान बनवाने के लिए दूसरे मालिकों के सहयोग पर निर्भर रहना पड़ता था। आपसी मतभेद होने पर पूरी प्रक्रिया लंबी खिंच जाती थी।

सदन से मंजूर संशोधन के अनुसार, रिहायशी भवनों में अलग प्रॉपर्टी आईडी बनवाने के लिए दूसरे फ्लोर के मालिकों की सहमति और हस्ताक्षर की शर्त हटाई जाएगी। इससे संबंधित मालिक अपने हिस्से का बकाया जमा कराकर स्वतंत्र आईडी के लिए आवेदन कर सकेंगे। इस बदलाव का उद्देश्य संपत्ति से जुड़े प्रशासनिक काम को सरल बनाना और मालिकों को अनावश्यक विवादों से बचाना है।

बैठक में कांग्रेस पार्षद गुरप्रीत सिंह गाबी ने इस मुद्दे पर अपनी बात रखते हुए कहा कि यदि किसी पूरी इमारत पर प्रॉपर्टी टैक्स बकाया है तो उसे संबंधित फ्लोर के हिस्से के अनुसार बांटकर वसूला जाना चाहिए। किसी एक मालिक से पूरी इमारत का बकाया जमा कराने की अपेक्षा करना उचित नहीं है, खासकर तब जब इमारत के अलग-अलग हिस्सों पर अलग-अलग लोगों का स्वामित्व हो।

गाबी की दलील थी कि टैक्स वसूली की व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए, जिसमें प्रत्येक मालिक अपने हिस्से की जिम्मेदारी निभा सके। इससे किसी एक व्यक्ति पर दूसरे मालिकों की देनदारी का बोझ नहीं पड़ेगा और संपत्ति की स्वतंत्र पहचान बनवाने में भी आसानी होगी।

व्यावसायिक और औद्योगिक संपत्तियों के नियम अलग रहेंगे

नगर निगम आयुक्त अमित कुमार ने सदन को बताया कि संशोधन का मुख्य उद्देश्य रिहायशी भवनों में फ्लोर के आधार पर मालिकाना हक रखने वाले लोगों को उनके हिस्से का बकाया जमा कराकर अलग प्रॉपर्टी आईडी बनवाने की सुविधा देना है। इससे उन मामलों में राहत मिलेगी, जहां दूसरे मालिकों के साथ सहमति नहीं बनने के कारण आवेदन लंबित रहते हैं।

हालांकि, संशोधन के तहत व्यावसायिक और औद्योगिक संपत्तियों के लिए सभी मालिकों के हस्ताक्षर की शर्त बरकरार रखी जाएगी। यानी यह राहत केवल रिहायशी भवनों में फ्लोरवाइज स्वतंत्र प्रॉपर्टी आईडी बनवाने की प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए दी गई है। व्यावसायिक और औद्योगिक संपत्तियों के मामलों में पहले से लागू संबंधित शर्तों का पालन करना होगा।

सदन ने चर्चा के बाद नियमों में संशोधन को मंजूरी दे दी। इस फैसले से रिहायशी संपत्तियों के उन मालिकों को राहत मिलने की संभावना है, जिन्हें अब तक पूरी इमारत के टैक्स बकाये या दूसरे फ्लोर के मालिकों के हस्ताक्षर नहीं मिलने के कारण परेशानी का सामना करना पड़ता था।

इस तरह नगर निगम सदन की बैठक में एक ओर रोज फेस्टिवल-2027 के आयोजन के लिए बजट और टेंडर प्रक्रिया को मंजूरी देकर तैयारियों का रास्ता साफ किया गया, वहीं दूसरी ओर प्रॉपर्टी आईडी से जुड़े नियमों में बदलाव कर रिहायशी संपत्ति मालिकों की व्यावहारिक समस्याओं को दूर करने का प्रयास किया गया। रोज फेस्टिवल के लिए अब प्रायोजक जुटाना निगम की प्राथमिकता होगी, जबकि प्रस्तावित हेलीकॉप्टर राइड और अन्य गतिविधियों को अंतिम रूप देने के लिए आगे की तैयारियां की जाएंगी।