देश की सबसे मूल्यवान कंपनियों में शामिल रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (RIL) के चेयरमैन और प्रबंध निदेशक मुकेश अंबानी ने एक बार फिर अपनी वेतन नीति को लेकर चर्चा बटोरी है। कंपनी की वित्त वर्ष 2025-26 (FY26) की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने लगातार छठे वर्ष भी कंपनी से कोई वेतन, भत्ता, बोनस, स्टॉक इंसेंटिव या अन्य कर्मचारी लाभ स्वीकार नहीं किया। कोविड-19 महामारी के दौरान लिया गया उनका यह निर्णय अब भी जारी है और वह बिना वेतन के कंपनी की कमान संभाल रहे हैं।
हालांकि वेतन नहीं लेने के बावजूद उनकी आय पर कोई खास असर नहीं पड़ा है, क्योंकि रिलायंस इंडस्ट्रीज में उनकी बड़ी हिस्सेदारी के कारण उन्हें लाभांश (डिविडेंड) के रूप में हजारों करोड़ रुपये की आय प्राप्त होती है। कंपनी की ताजा रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि प्रमोटर समूह की हिस्सेदारी और घोषित डिविडेंड के आधार पर मुकेश अंबानी की आय का प्रमुख स्रोत अब वेतन नहीं बल्कि निवेश से होने वाली कमाई है।
रिलायंस इंडस्ट्रीज की वार्षिक रिपोर्ट निवेशकों, शेयरधारकों और बाजार विश्लेषकों के लिए महत्वपूर्ण दस्तावेज होती है, क्योंकि इसमें कंपनी के वित्तीय प्रदर्शन, प्रबंधन की रणनीति, कॉर्पोरेट गवर्नेंस, निदेशकों के पारिश्रमिक और भविष्य की योजनाओं से जुड़ी विस्तृत जानकारी दी जाती है। इसी रिपोर्ट से यह स्पष्ट हुआ कि अंबानी ने वित्त वर्ष 2025-26 में भी कोई वेतन स्वीकार नहीं किया।
कोविड-19 महामारी के दौरान लिया गया फैसला आज भी बरकरार
मुकेश अंबानी ने वर्ष 2020 में कोविड-19 महामारी के दौरान स्वेच्छा से अपना वेतन छोड़ने का फैसला किया था। उस समय महामारी के कारण वैश्विक अर्थव्यवस्था पर गंभीर असर पड़ा था और कई उद्योगों को वित्तीय चुनौतियों का सामना करना पड़ा। ऐसे समय में उन्होंने यह संदेश देने की कोशिश की कि कंपनी के संसाधनों का उपयोग व्यवसाय और कर्मचारियों के हित में प्राथमिकता के आधार पर किया जाना चाहिए।
उस समय उन्होंने कहा था कि जब तक कंपनी के प्रमुख व्यवसाय पूरी तरह सामान्य स्थिति में नहीं लौट आते, तब तक वह वेतन स्वीकार नहीं करेंगे। बाद के वर्षों में भी उन्होंने इस निर्णय को जारी रखा और अब लगातार छह वर्षों से बिना वेतन के कंपनी का नेतृत्व कर रहे हैं।
कॉर्पोरेट जगत में इस तरह का फैसला अपेक्षाकृत कम देखने को मिलता है, क्योंकि अधिकांश बड़ी कंपनियों के शीर्ष अधिकारियों को वेतन के साथ-साथ बोनस, स्टॉक विकल्प और अन्य सुविधाएं भी मिलती हैं। ऐसे में अंबानी का यह निर्णय निवेशकों और उद्योग जगत के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है।
वेतन नहीं, डिविडेंड बना सबसे बड़ा आय स्रोत
रिलायंस इंडस्ट्रीज ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए प्रति शेयर 6 रुपये का डिविडेंड घोषित किया है। चूंकि मुकेश अंबानी कंपनी के सबसे बड़े व्यक्तिगत शेयरधारकों में शामिल हैं, इसलिए उन्हें अपने निजी शेयरों के आधार पर लगभग 9.66 करोड़ रुपये का लाभांश मिलने की जानकारी सामने आई है।
इसके अलावा प्रमोटर समूह की विभिन्न कंपनियों और ट्रस्टों के माध्यम से भी रिलायंस में बड़ी हिस्सेदारी मौजूद है। इन्हीं हिस्सेदारियों के आधार पर प्रमोटर समूह को लगभग 3,987 करोड़ रुपये का डिविडेंड प्राप्त हुआ। निजी हिस्सेदारी और प्रमोटर संस्थाओं से मिलने वाले लाभांश को मिलाकर कुल आय लगभग 3,996 करोड़ रुपये तक पहुंच गई।
डिविडेंड वह राशि होती है जो किसी कंपनी द्वारा अपने मुनाफे का एक हिस्सा शेयरधारकों में वितरित किया जाता है। जिन निवेशकों के पास अधिक शेयर होते हैं, उन्हें उसी अनुपात में अधिक लाभांश प्राप्त होता है। यही कारण है कि बड़ी हिस्सेदारी रखने वाले प्रमोटर परिवारों की आय का महत्वपूर्ण स्रोत डिविडेंड भी होता है।
रिलायंस में प्रमोटर समूह की हिस्सेदारी का महत्व
रिलायंस इंडस्ट्रीज भारत की सबसे बड़ी सूचीबद्ध कंपनियों में शामिल है और इसकी हिस्सेदारी संरचना भी निवेशकों के लिए विशेष महत्व रखती है। कंपनी में प्रमोटर समूह की हिस्सेदारी 50 प्रतिशत से अधिक बनी हुई है। इसी वजह से जब भी कंपनी लाभांश घोषित करती है तो उसका सबसे बड़ा हिस्सा प्रमोटर समूह को प्राप्त होता है।
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, किसी कंपनी में प्रमोटर की मजबूत हिस्सेदारी निवेशकों के लिए स्थिरता का संकेत भी मानी जाती है। इससे यह संदेश जाता है कि कंपनी के संस्थापक और प्रबंधन का व्यवसाय में दीर्घकालिक भरोसा कायम है। हालांकि निवेशक केवल प्रमोटर हिस्सेदारी ही नहीं बल्कि कंपनी की वित्तीय स्थिति, मुनाफा, कर्ज, नकदी प्रवाह और भविष्य की रणनीति जैसे अन्य पहलुओं का भी मूल्यांकन करते हैं।
FY26 रिपोर्ट में परिवार के अन्य सदस्यों का पारिश्रमिक और कंपनी के वित्तीय प्रदर्शन की तस्वीर
रिलायंस इंडस्ट्रीज की वार्षिक रिपोर्ट में निदेशक मंडल के सदस्यों और वरिष्ठ अधिकारियों को दिए गए पारिश्रमिक का भी विस्तृत उल्लेख किया गया है। इसमें यह जानकारी सामने आई कि परिवार के अन्य सदस्यों को बोर्ड बैठकों में भागीदारी और जिम्मेदारियों के अनुसार पारिश्रमिक प्रदान किया गया।
रिपोर्ट के अनुसार, आकाश अंबानी और ईशा अंबानी को वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान बोर्ड मीटिंग में शामिल होने के लिए 5-5 लाख रुपये की सिटिंग फीस दी गई। इसके अतिरिक्त दोनों को 2.5-2.5 करोड़ रुपये का प्रॉफिट कमीशन भी मिला। यह भुगतान कंपनी के निदेशक मंडल से जुड़ी जिम्मेदारियों के अनुरूप किया गया।
वहीं अनंत अंबानी को एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर बनने के बाद लगभग 12.17 करोड़ रुपये का कुल पारिश्रमिक मिला, जिसमें वेतन, भत्ते और कमीशन शामिल हैं। कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया कि यह भुगतान लागू नियमों और शेयरधारकों की मंजूरी के अनुरूप किया गया है।
वरिष्ठ अधिकारियों के वेतन में क्या रहा बदलाव
रिलायंस इंडस्ट्रीज के लंबे समय से जुड़े वरिष्ठ अधिकारी निखिल मेसवानी और हितल मेसवानी का वार्षिक पारिश्रमिक लगभग पहले जैसा ही बना रहा। दोनों को करीब 25-25 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया। वहीं कंपनी के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर पीएमएस प्रसाद का कुल पारिश्रमिक बढ़कर लगभग 20.58 करोड़ रुपये पहुंच गया।
बड़ी कंपनियों में वरिष्ठ अधिकारियों के वेतन का निर्धारण उनकी जिम्मेदारियों, प्रदर्शन, उद्योग के मानकों, कंपनी की वित्तीय स्थिति और बोर्ड की पारिश्रमिक समिति की सिफारिशों के आधार पर किया जाता है। रिलायंस की वार्षिक रिपोर्ट में इन सभी भुगतानों का विवरण पारदर्शिता बनाए रखने के उद्देश्य से प्रकाशित किया गया है।
जनवरी-मार्च 2026 तिमाही में कैसा रहा कंपनी का प्रदर्शन
वार्षिक रिपोर्ट के साथ जारी वित्तीय आंकड़ों के अनुसार, जनवरी से मार्च 2026 की तिमाही में रिलायंस इंडस्ट्रीज का शुद्ध लाभ (नेट प्रॉफिट) पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में लगभग 13 प्रतिशत घटकर 16,971 करोड़ रुपये रहा। विश्लेषकों के अनुसार, विभिन्न कारोबारी क्षेत्रों में लागत, वैश्विक बाजार की परिस्थितियों और अन्य आर्थिक कारकों का असर लाभ पर देखा गया।
हालांकि मुनाफे में कमी के बावजूद कंपनी के कुल राजस्व (रेवेन्यू) में वृद्धि दर्ज की गई। इस अवधि में रिलायंस का कुल रेवेन्यू बढ़कर लगभग 2.98 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया, जो पिछले वर्ष की तुलना में करीब 13 प्रतिशत अधिक रहा। इससे संकेत मिलता है कि कंपनी के विभिन्न व्यवसायों में आय बढ़ी, जबकि लाभ पर अन्य परिचालन और वित्तीय कारकों का प्रभाव पड़ा।
रिलायंस के विविध कारोबार का मिला सहारा
रिलायंस इंडस्ट्रीज का कारोबार केवल पेट्रोकेमिकल्स या रिफाइनिंग तक सीमित नहीं है। कंपनी ऊर्जा, दूरसंचार, डिजिटल सेवाएं, रिटेल, उपभोक्ता उत्पाद, नई ऊर्जा परियोजनाओं और विभिन्न तकनीकी क्षेत्रों में सक्रिय है। यही विविध कारोबार कंपनी को अलग-अलग आर्थिक परिस्थितियों में संतुलन बनाए रखने में मदद करता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अलग-अलग क्षेत्रों में मौजूदगी के कारण किसी एक व्यवसाय में दबाव आने पर दूसरे क्षेत्रों से आय का संतुलन बनाया जा सकता है। इसी कारण रिलायंस देश की सबसे बड़ी और विविध कारोबार वाली कंपनियों में गिनी जाती है।
डिविडेंड नीति निवेशकों के लिए क्यों रहती है महत्वपूर्ण
किसी भी सूचीबद्ध कंपनी की डिविडेंड नीति निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण संकेत मानी जाती है। नियमित लाभांश से यह संदेश मिलता है कि कंपनी के पास पर्याप्त नकदी प्रवाह है और वह अपने शेयरधारकों के साथ मुनाफा साझा करने की स्थिति में है। हालांकि निवेशकों के लिए केवल डिविडेंड ही नहीं, बल्कि कंपनी की विकास योजनाएं, पूंजी निवेश, ऋण स्तर और भविष्य की आय की संभावनाएं भी उतनी ही महत्वपूर्ण होती हैं।
रिलायंस इंडस्ट्रीज पिछले कई वर्षों से अपने व्यवसायों का विस्तार कर रही है। डिजिटल सेवाओं, रिटेल नेटवर्क और नई ऊर्जा परियोजनाओं में किए जा रहे निवेश के साथ कंपनी दीर्घकालिक विकास रणनीति पर भी लगातार काम कर रही है। वार्षिक रिपोर्ट में इन क्षेत्रों से जुड़ी योजनाओं और भविष्य की कारोबारी दिशा का भी उल्लेख किया गया है।




