माता शीतला को रोगों से रक्षा करने वाली देवी के रूप में पूजा जाता है। मान्यता है कि शीतला सप्तमी के दिन श्रद्धा और नियमपूर्वक व्रत-पूजन करने से चेचक, त्वचा रोग और अन्य संक्रामक बीमारियों से बचाव होता है। यह पर्व मुख्य रूप से महिलाओं द्वारा परिवार की सुख-शांति और स्वास्थ्य की कामना के लिए किया जाता है। हर साल इस व्रत की तारीख को लेकर लोगों में असमंजस बना रहता है कि शीतला सप्तमी 10 मार्च को है या 11 मार्च को।
हिंदू पंचांग के अनुसार वर्ष 2026 में सप्तमी तिथि की शुरुआत 9 मार्च को रात 11:27 बजे से होगी और इसका समापन 11 मार्च को तड़के 1:54 बजे होगा। उदयातिथि को मानते हुए शीतला सप्तमी का व्रत मंगलवार, 10 मार्च 2026 को रखा जाएगा। इसी दिन माता शीतला की पूजा का विधान है।
पूजा के लिए शुभ समय सुबह 6:04 बजे से लेकर शाम 5:56 बजे तक रहेगा। इस दौरान भक्तजन माता की आराधना, व्रत और दान-पुण्य कर सकते हैं। शीतला सप्तमी की खास परंपरा यह है कि इस दिन ताजा भोजन नहीं बनाया जाता। व्रत से एक दिन पहले ही भोजन तैयार कर लिया जाता है, जिसमें रोटी, पूरी, मीठे चावल, दही, गुड़ और बाजरे की रोटी शामिल होती है। अगले दिन इसी बासी भोजन को ग्रहण किया जाता है।
शीतला सप्तमी की सुबह स्नान के बाद माता शीतला की विधि-विधान से पूजा की जाती है। नीम की पत्तियों से माता का अभिषेक करने की परंपरा है, जिसे शीतलता और रोगनाशक गुणों का प्रतीक माना जाता है। पूजा के बाद शीतला माता की कथा सुनी जाती है और अंत में आरती की जाती है। इस दिन जरूरतमंदों को दान देना भी विशेष फलदायी माना गया है।
शीतला सप्तमी के ठीक अगले दिन शीतला अष्टमी मनाई जाती है, जिसे कई जगहों पर बासोड़ा पूजा के नाम से जाना जाता है। यह पर्व खास तौर पर उत्तर प्रदेश, राजस्थान और गुजरात जैसे राज्यों में अधिक लोकप्रिय है, जहां इसे पारंपरिक श्रद्धा और विश्वास के साथ मनाया जाता है।



