रिलायंस इंडस्ट्रीज की डिजिटल कंपनी जियो प्लेटफॉर्म्स अब शेयर बाजार में उतरने की तैयारी में है। कंपनी अपने बहुप्रतीक्षित आईपीओ (Initial Public Offering) के लिए आज यानी 19 जून को मार्केट रेगुलेटर भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) के पास ड्राफ्ट दस्तावेज जमा करने जा रही है। रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी ने कंपनी की 49वीं एनुअल जनरल मीटिंग के दौरान इस बड़े कदम की जानकारी दी।
जियो का आईपीओ भारतीय शेयर बाजार के सबसे बड़े और चर्चित पब्लिक इश्यू में शामिल हो सकता है। कंपनी ने इसके जरिए करीब 27 करोड़ नए शेयर जारी करने की योजना बनाई है। इन शेयरों की फेस वैल्यू ₹10 होगी। हालांकि शेयरों की अंतिम कीमत अभी तय नहीं की गई है और इसका फैसला बुक बिल्डिंग प्रक्रिया के जरिए होगा। यह पूरी प्रक्रिया सेबी के नियमों के अनुसार पूरी की जाएगी।
ड्राफ्ट पेपर में क्या होती है जानकारी?
किसी भी कंपनी के आईपीओ से पहले ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) जमा किया जाता है। यह एक शुरुआती दस्तावेज होता है जिसमें कंपनी अपने कारोबार, वित्तीय स्थिति, प्रमोटर्स, जोखिमों और भविष्य की योजनाओं से जुड़ी जानकारी देती है। सेबी इस दस्तावेज की जांच करता है। मंजूरी मिलने के बाद ही कंपनी बाजार में आईपीओ लाने की प्रक्रिया आगे बढ़ा सकती है। जियो प्लेटफॉर्म्स के बोर्ड ने भी आईपीओ से जुड़े इस ड्राफ्ट दस्तावेज को मंजूरी दे दी है और अब इसे नियामक के पास भेजा जाएगा।
आकाश, ईशा और अनंत संभालेंगे आईपीओ की जिम्मेदारी
मुकेश अंबानी ने बताया कि जियो के आईपीओ की पूरी प्रक्रिया की जिम्मेदारी परिवार की नई पीढ़ी को दी गई है। आकाश अंबानी, ईशा अंबानी और अनंत अंबानी इस बड़े प्रोजेक्ट को लीड करेंगे। उन्होंने कहा कि जियो ने पिछले 10 वर्षों में भारत के डिजिटल बदलाव में अहम भूमिका निभाई है। कंपनी ने इंटरनेट और डिजिटल सेवाओं को देश के करोड़ों लोगों तक पहुंचाया है। वहीं रिलायंस रिटेल ने भी अपने 20 साल पूरे कर लिए हैं और भारत के संगठित रिटेल सेक्टर में बड़ा बदलाव लाने वाली कंपनियों में शामिल हो गई है।
जियो के बढ़ते कारोबार पर अंबानी का फोकस
मुकेश अंबानी ने कहा कि जियो और रिलायंस रिटेल दोनों अपने-अपने क्षेत्रों में अग्रणी स्थिति बनाए हुए हैं। जियो ने टेलीकॉम सेक्टर में बड़ा बदलाव लाते हुए डेटा और डिजिटल सेवाओं को आम लोगों तक पहुंचाया है। कंपनी का यूजर बेस अब 52.4 करोड़ से ज्यादा ग्राहकों तक पहुंच चुका है। इसके साथ ही जियो देश का सबसे बड़ा टेलीकॉम ऑपरेटर बना हुआ है। जियो एयरफाइबर के जरिए 1.3 करोड़ से ज्यादा घरों तक ब्रॉडबैंड सेवा पहुंच चुकी है। जियो चीन के बाहर किसी एक देश में सबसे बड़े 5G यूजर बेस वाले टेलीकॉम ऑपरेटरों में शामिल हो गया है।
सैटेलाइट इंटरनेट नेटवर्क पर भी काम कर रहा जियो
आकाश अंबानी ने कंपनी की भविष्य की योजनाओं पर जानकारी देते हुए बताया कि जियो दुनिया की प्रमुख सैटेलाइट कंपनियों के साथ साझेदारी कर रहा है। कंपनी भारत में लो अर्थ ऑर्बिट (LEO) सैटेलाइट नेटवर्क विकसित करने की संभावनाओं पर काम कर रही है। इसके लिए जरूरी ग्राउंड स्टेशन और अन्य तकनीकी ढांचे को तैयार किया जा रहा है। इस पहल का उद्देश्य देश के दूरदराज इलाकों तक बेहतर कनेक्टिविटी पहुंचाना है।
AI के क्षेत्र में बड़ा निवेश करेगी रिलायंस
रिलायंस अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में भी अपनी पकड़ मजबूत करने की तैयारी कर रही है। कंपनी जामनगर में अपना AI इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार कर रही है। बताया गया कि इस AI बैकबोन का पहला चरण 2026 के अंत तक शुरू होने की उम्मीद है। इसकी क्षमता करीब 120 मेगावाट होगी। कंपनी अपने AI सिस्टम को मजबूत बनाने के लिए Nvidia GB300 GPU जैसी अत्याधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करेगी। आकाश अंबानी ने कहा कि जियो भारतीय भाषाओं पर आधारित AI तैयार कर रहा है, ताकि देश के हर हिस्से के लोग आसानी से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल कर सकें। कंपनी का लक्ष्य है कि आने वाले वर्षों में AI तकनीक आम लोगों के बजट में उपलब्ध हो सके।
जियो कॉल एजेंट: AI से बदलेगा कॉलिंग का अनुभव
जियो जल्द ही “जियो कॉल एजेंट” नाम से एक नया AI आधारित वॉइस असिस्टेंट लॉन्च करने की तैयारी में है। यह सेवा सीधे जियो नेटवर्क से जुड़ी होगी और इसके लिए यूजर्स को अलग से कोई ऐप डाउनलोड करने की जरूरत नहीं होगी। यूजर सिर्फ “हे जियो” बोलकर इस AI असिस्टेंट को एक्टिव कर सकेंगे। इसके बाद यह लाइव कॉल में शामिल होकर कई तरह की मदद कर पाएगा। यह बातचीत को टेक्स्ट में बदल सकेगा, कॉल की जानकारी का सार तैयार कर सकेगा और जरूरी कामों की सूची या रिमाइंडर भी बना सकेगा। इसके अलावा यह AI एजेंट कॉल के दौरान कई काम करने में मदद करेगा, जैसे खाना ऑर्डर करना, कैब बुक करना, रेस्टोरेंट में टेबल रिजर्व करना या मीटिंग शेड्यूल करना।
कंपनी के मुताबिक, यह एक पर्सनल AI असिस्टेंट की तरह काम करेगा और इसे इस साल के अंत तक 50 करोड़ से ज्यादा जियो यूजर्स के लिए उपलब्ध कराने की योजना है।
जियो टेलीफ्रेम और जियो होम्स भी लॉन्च की तैयारी
रिलायंस ने AI एजेंट्स के लिए “जियो टेलीफ्रेम” नाम का प्लेटफॉर्म भी पेश किया है। यह प्लेटफॉर्म खासतौर पर AI आधारित सेवाओं को सपोर्ट करने के लिए तैयार किया गया है। वहीं जियो होम्स के जरिए कंपनी अगली पीढ़ी की ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी देने की योजना बना रही है। इसमें यूजर्स को 5 Gbps तक डाउनलोड और 1 Gbps तक अपलोड स्पीड मिलने का दावा किया गया है।
चौथी तिमाही में मुनाफे में गिरावट
रिलायंस इंडस्ट्रीज के वित्तीय प्रदर्शन की बात करें तो वित्त वर्ष 2025-26 की चौथी तिमाही में कंपनी का नेट प्रॉफिट घटा है। जनवरी से मार्च तिमाही में कंपनी का मुनाफा सालाना आधार पर करीब 13% कम होकर ₹16,971 करोड़ रहा। पिछले साल इसी अवधि में कंपनी का लाभ ₹19,407 करोड़ था। हालांकि कंपनी की कमाई में बढ़ोतरी दर्ज की गई। इस दौरान रिलायंस का रेवेन्यू करीब 13% बढ़कर ₹2.98 लाख करोड़ पहुंच गया। एक साल पहले इसी अवधि में यह आंकड़ा ₹2.64 लाख करोड़ था।
जियो के आईपीओ के जरिए रिलायंस डिजिटल कारोबार को एक नई पहचान देने की तैयारी में है। अब बाजार की नजर सेबी की मंजूरी और आईपीओ लॉन्च की अगली प्रक्रिया पर रहेगी।




