हिमाचल प्रदेश सरकार ने सरकारी कर्मचारियों और पेंशनरों के लंबित चिकित्सा प्रतिपूर्ति (मेडिकल रीइम्बर्समेंट) दावों के निपटारे की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए 212 करोड़ रुपये जारी किए हैं। इस वित्तीय सहायता का उद्देश्य कर्मचारियों और सेवानिवृत्त पेंशनभोगियों को समय पर चिकित्सा खर्च की प्रतिपूर्ति उपलब्ध कराना है, ताकि इलाज पर हुए आर्थिक बोझ को कम किया जा सके।
राज्य सरकार की ओर से सोमवार को जारी आधिकारिक विज्ञप्ति में बताया गया कि वित्त वर्ष 2026-27 के तहत 27 जून तक प्राप्त और स्वीकृत चिकित्सा प्रतिपूर्ति दावों के भुगतान के लिए यह राशि जारी की गई है। सरकार ने संबंधित विभागों को निर्देश दिए हैं कि निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार पात्र लाभार्थियों तक भुगतान जल्द से जल्द पहुंचाया जाए।
जारी राशि में सबसे बड़ा हिस्सा पेंशनभोगियों के लिए निर्धारित किया गया है। सरकार ने सेवानिवृत्त कर्मचारियों के चिकित्सा प्रतिपूर्ति दावों के निपटान के लिए 131.03 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं। वहीं, वर्तमान में विभिन्न विभागों में कार्यरत सरकारी कर्मचारियों के मेडिकल बिलों के भुगतान के लिए 80.97 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं।
सरकार का कहना है कि चिकित्सा प्रतिपूर्ति योजना कर्मचारियों और पेंशनरों के लिए एक महत्वपूर्ण सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था है। गंभीर बीमारियों, ऑपरेशन, लंबी अवधि के उपचार और अन्य स्वास्थ्य सेवाओं पर होने वाले खर्च की भरपाई इस योजना के माध्यम से की जाती है। समय पर भुगतान होने से लाभार्थियों को आर्थिक राहत मिलने के साथ-साथ सरकारी स्वास्थ्य सुविधाओं पर उनका भरोसा भी मजबूत होता है।
राज्य सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि जिन कर्मचारियों और पेंशनरों के चिकित्सा प्रतिपूर्ति दावे स्वीकृत हो चुके हैं, वे अपने भुगतान की स्थिति की जानकारी संबंधित कार्यालयों से प्राप्त कर सकते हैं। इसके लिए उन्हें अपने-अपने आहरण एवं संवितरण अधिकारी (डीडीओ) से संपर्क करने की सलाह दी गई है। संबंधित अधिकारी भुगतान प्रक्रिया, बिल की स्थिति और राशि जारी होने से जुड़ी जानकारी उपलब्ध कराएंगे।
वित्त विभाग के अनुसार, चिकित्सा प्रतिपूर्ति से जुड़े मामलों के त्वरित निपटारे के लिए विभागीय स्तर पर प्रक्रिया को लगातार सरल और प्रभावी बनाया जा रहा है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कर्मचारियों और पेंशनरों को लंबे समय तक भुगतान का इंतजार न करना पड़े।
सरकारी सूत्रों का कहना है कि प्रदेश सरकार कर्मचारियों और पेंशनरों से जुड़े वित्तीय दायित्वों को चरणबद्ध तरीके से पूरा करने की नीति पर काम कर रही है। चिकित्सा प्रतिपूर्ति के लिए 212 करोड़ रुपये जारी किया जाना इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इससे हजारों लंबित दावों का निपटारा होने की संभावना है और बड़ी संख्या में लाभार्थियों को राहत मिलेगी।
प्रदेश में बड़ी संख्या में सरकारी कर्मचारी और पेंशनभोगी चिकित्सा प्रतिपूर्ति योजना के तहत लाभ प्राप्त करते हैं। कई मामलों में गंभीर बीमारियों के उपचार पर लाखों रुपये तक का खर्च आता है, जिसकी प्रतिपूर्ति समय पर मिलने से परिवारों पर पड़ने वाला आर्थिक दबाव काफी कम हो जाता है। ऐसे में इस राशि के जारी होने को कर्मचारियों और पेंशनरों के लिए राहत भरा फैसला माना जा रहा है।
सरकार ने यह भी संकेत दिया है कि भविष्य में भी चिकित्सा प्रतिपूर्ति दावों के भुगतान की प्रक्रिया को नियमित बनाए रखने के प्रयास जारी रहेंगे। इसके लिए आवश्यक बजटीय प्रावधानों और विभागीय समन्वय पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, ताकि पात्र लाभार्थियों को बिना अनावश्यक देरी के उनकी देय राशि मिल सके।
राज्य सरकार का कहना है कि कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के कल्याण से जुड़े मामलों को प्राथमिकता दी जा रही है। चिकित्सा प्रतिपूर्ति के लिए 212 करोड़ रुपये जारी करने का निर्णय इसी प्रतिबद्धता का हिस्सा है, जिससे इलाज पर होने वाले खर्च का बोझ कम होगा और पात्र लाभार्थियों को समय पर वित्तीय सहायता उपलब्ध हो सकेगी।


